महाराष्ट्र में कानून या सिर्फ धनबल और बाहुबल का बोलबाला? जानें बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुंबई पुलिस से ऐसा क्यों कहा

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बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक स्कूल को होर्डिंग लगाने के विरोध पर धमकाने के मामले में सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने पुलिस से पूछा है कि क्या राज्य में कानून से ऊपर धनबल का बोलबाला है। अदालत ने संबंधित पुलिस कमिश्नर से हलफनामे में स्पष्टीकरण मांगा है और धमकाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी मांगी...

मुंबई : बॉम्बे हाईकोर्ट ने शहर के एक स्कूल द्वारा अपने परिसर में होर्डिंग लगाने का विरोध करने पर उसे धमकाने के मामले में तल्ख़ टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि क्या हम ऐसे राज्य में रहते हैं, जहां कानून के शासन की जगह सिर्फ धनबल और बाहुबल का बोलबाला है। कोर्ट ने संबंधित क्षेत्र के ऑडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस से इस संबंध में हलफनामे में स्पष्टीकरण मांगा है। यह स्कूल बांद्रा में स्थित है और IB से संबद्ध है। यहां तीन से नौ वर्ष की उम्र के 300 से अधिक बच्चे पढ़ते हैं।स्कूल की ओर से बॉम्बे एजुकेशन ट्रस्ट ने याचिका दायर की है। याचिका में दावा किया गया है कि एक मंडल ने बीएमसी की अनुमति के बिना स्कूल की दीवार पर होर्डिंग लगा दी और इस पर लाइसेंस नंबर का भी उल्लेख नहीं था।बच्चों की सुरक्षा को लेकर जतार्ई चिंतायाचिका के अनुसार, यह होर्डिंग स्कूल के बच्चों की सुरक्षा के लिए खतरा साबित हो सकती है। दरअसल स्कूल के जिस हिस्से में होर्डिंग लगाई गई, वहीं पर बच्चे बस में चढ़ने के लिए इकठ्ठा होते हैं। ट्रस्ट ने अदालत से स्कूल की बाउंड्री वॉल और आसपास के फुटपाथ पर लगे सभी अवैध होर्डिंग्स, बैनर और पोस्टर हटाने का निर्देश देने की मांग की है।'धमकाने की प्रवृत्ति ठीक नही'याचिका में यह भी कहा गया है कि मंडल की ओर से राजनीतिक प्रभाव का प्रयोग करते हुए स्कूल प्रशासन को धमकाया गया। सुनवाई के दौरान बेंच को बताया गया कि दीवार पर लगाए गए बैनर को मुंबई पुलिस और बीएमसी अधिकारियों ने हटा दिया है, लेकिन स्कूल को अप्रत्यक्ष रूप से एक संदेश भेजा गया है कि सभी उत्सवों और दूसरे मौकों पर स्कूल की कंपाउंड वॉल और परिसर में होर्डिंग लगाई जाएगी। इस पर बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता के वकील द्वारा दी गई जानकारी पर अविश्वास करने का कोई कारण नहीं दिखता है।'धमकाने वालों पर कार्रवाई के संबंध में मांगा जवाब'बॉम्बे हाई कोर्ट बेंच ने अडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस से पूछा है कि वे जहां कानून का राज कायम है, यदि वहां कोई जबरन बल प्रयोग कर कानून का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ क्या कार्रवाई प्रस्तवित की जाएगी? 28 अप्रैल को याचिका पर अगली सुनवाई होगी।.

मुंबई : बॉम्बे हाईकोर्ट ने शहर के एक स्कूल द्वारा अपने परिसर में होर्डिंग लगाने का विरोध करने पर उसे धमकाने के मामले में तल्ख़ टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि क्या हम ऐसे राज्य में रहते हैं, जहां कानून के शासन की जगह सिर्फ धनबल और बाहुबल का बोलबाला है। कोर्ट ने संबंधित क्षेत्र के ऑडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस से इस संबंध में हलफनामे में स्पष्टीकरण मांगा है। यह स्कूल बांद्रा में स्थित है और IB से संबद्ध है। यहां तीन से नौ वर्ष की उम्र के 300 से अधिक बच्चे पढ़ते हैं।स्कूल की ओर से बॉम्बे एजुकेशन ट्रस्ट ने याचिका दायर की है। याचिका में दावा किया गया है कि एक मंडल ने बीएमसी की अनुमति के बिना स्कूल की दीवार पर होर्डिंग लगा दी और इस पर लाइसेंस नंबर का भी उल्लेख नहीं था।बच्चों की सुरक्षा को लेकर जतार्ई चिंतायाचिका के अनुसार, यह होर्डिंग स्कूल के बच्चों की सुरक्षा के लिए खतरा साबित हो सकती है। दरअसल स्कूल के जिस हिस्से में होर्डिंग लगाई गई, वहीं पर बच्चे बस में चढ़ने के लिए इकठ्ठा होते हैं। ट्रस्ट ने अदालत से स्कूल की बाउंड्री वॉल और आसपास के फुटपाथ पर लगे सभी अवैध होर्डिंग्स, बैनर और पोस्टर हटाने का निर्देश देने की मांग की है।'धमकाने की प्रवृत्ति ठीक नही'याचिका में यह भी कहा गया है कि मंडल की ओर से राजनीतिक प्रभाव का प्रयोग करते हुए स्कूल प्रशासन को धमकाया गया। सुनवाई के दौरान बेंच को बताया गया कि दीवार पर लगाए गए बैनर को मुंबई पुलिस और बीएमसी अधिकारियों ने हटा दिया है, लेकिन स्कूल को अप्रत्यक्ष रूप से एक संदेश भेजा गया है कि सभी उत्सवों और दूसरे मौकों पर स्कूल की कंपाउंड वॉल और परिसर में होर्डिंग लगाई जाएगी। इस पर बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता के वकील द्वारा दी गई जानकारी पर अविश्वास करने का कोई कारण नहीं दिखता है।'धमकाने वालों पर कार्रवाई के संबंध में मांगा जवाब'बॉम्बे हाई कोर्ट बेंच ने अडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस से पूछा है कि वे जहां कानून का राज कायम है, यदि वहां कोई जबरन बल प्रयोग कर कानून का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ क्या कार्रवाई प्रस्तवित की जाएगी? 28 अप्रैल को याचिका पर अगली सुनवाई होगी।

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