महाकुंभ से अर्थव्यवस्था में लगभग दो लाख करोड़ रुपये का योगदान होने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह मेला आस्था के साथ अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ कर रहा है।
जागरण संवाददाता, महाकुंभ नगर। दुनिया के सबसे बड़े आध्यात्मिक जनसमागम महाकुंभ से अर्थव्यवस्था में लगभग दो लाख करोड़ रुपये का योग बन रहा है। यह महाकुंभ आस्था के साथ अर्थव्यवस्था को भी सुदृढ़ कर रहा है। ये बातें गुरुवार शाम महाकुंभ नगर में मीडिया सेंटर का उद्घाटन कर मीडिया को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहीं। उन्होंने कहा कि आस्था के साथ अर्थव्यवस्था को डबल इंजन की सरकार ने बढ़ावा दिया है। इसके पहले की सरकारें इस ओर ध्यान तक नहीं देती थीं। वैसे भी महाकुंभ आध्यात्मिक चेतना का
केंद्र ही नहीं, खजाना भी है। इससे लगभग दो लाख करोड़ रुपये के राजस्व प्राप्त करने का अनुमान है। महाकुंभ मेला से जुड़ी व्यावसायिक गतिविधियों से यह आय होगी। इसमें रोडवेज, रेलवे, उड्डयन, संचार, पर्यटन प्रमुख विभाग हैं, जिन्हें खासी आमदनी होने जा रही है। इसके अलावा, प्राइवेट सेक्टर से होने वाली आय से टैक्स भी भारी मात्रा मिलने जा रहा है। केंद्र और प्रदेश सरकार के 34 हजार करोड़ रुपये निवेश मुख्यमंत्री ने ऐसे ही आस्था के साथ अर्थव्यवस्था का समागम का जिक्र नहीं किया, यह मेला अर्थव्यवस्था बढ़ाने का बड़ा केंद्र साबित होने जा रहा है। महाकुंभ 13 जनवरी से 26 फरवरी तक चलेगा। दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक जनसमागम के आयोजन के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार की ओर से लगभग 34 हजार करोड़ रुपये निवेश किए गए हैं। प्रयागराज मेला प्राधिकरण में आबद्ध एजेंसी के अनुमान के अनुसार, 10 से 12 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु रेलवे से तो चार से पांच करोड़ के करीब श्रद्धालु रोडवेज बसों से आएंगे। इससे रेलवे में तथा स्टेशनों, रोडवेज बसों से लेकर बस अड्डों तथा एयरलाइनों और हवाई अड्डों से लगभग दो लाख लोगों को रोजगार मिलने जा रहा है। टूर व ट्रैवेल सेक्टर में रोजगार टूर ऑपरेटरों को 45,000 के आसपास रोजगार मिल रहा है। अनुमानित रिपोर्ट के अनुसार, टूर व ट्रैवेल सेक्टर में रोजगार की संख्या 85,000 हो सकती है। असंगठित क्षेत्र में लगभग एक लाख नई नौकरियां मिल चुकी हैं, जिनमें टूर गाइड, टैक्सी ड्राइवर, दुभाषिये, स्वयंसेवक, नाविक आदि शामिल हैं। महाकुंभ से प्रयागराज मेला प्राधिकरण की भी तिजोरी भरेगी। प्राधिकरण को लगभग 2,000 करोड़ रुपये की आय होगी। विज्ञापन से 30 करोड़, पार्किंग स्थलों से 55 करोड़, यात्री निवासों से 30 करोड़, कामर्शियल प्लाटों की बिक्री से लगभग 100, दुकानों से 60 करोड़ रुपये की आय हो रही है। इसके अलावा विभिन्न होटल कंपनियों, रेस्टोरेंट, वेंडिंग जोन, प्रदर्शनियों में होने वाले उत्पादों की बिक्री से भी 250 करोड़ रुपये आय की उम्मीद है। निजी सेक्टर में छोटे से लेकर बड़े स्तर पर कारोबार चढ़ा है। टेंट कंपनियां लगभग तीन हजार करोड़ रुपये का व्यवसाय करने जा रही हैं। सब्जी, खाद्यान्न से लेकर कपड़ा तक का व्यवसाय चढ़ गया है। वाहनों की भी काफी बिक्री हुई है। लग्जरी कारें भी खूब खरीदी गई हैं
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