महाराष्ट्र के मीरा-भाईंदर में बीजेपी भले जीत गई हो, लेकिन महापौर की कुर्सी का रास्ता कांटों भरा है. मनसे नेता अविनाश जाधव ने भड़काऊ बयान देते हुए कहा कि 'खून मराठी का नहीं होगा'.
मुंबई. महाराष्ट्र की राजनीति में चुनाव नतीजों के बाद अक्सर असली खेल शुरू होता है. मीरा-भाईंदर महानगरपालिका चुनाव में बीजेपी ने प्रचंड जीत हासिल की है. लेकिन जीत के जश्न के बीच अब महापौर की कुर्सी को लेकर एक ऐसा विवाद खड़ा हो गया है, जिसने प्रशासन और सियासी गलियारों में हड़कंप मचा दिया है.
यह विवाद केवल कुर्सी का नहीं, बल्कि ‘मराठी अस्मिता’ और ‘भूमिपुत्र’ के मुद्दे पर आ टिक गया है. मीरा-भाईंदर में महापौर की नियुक्ति को लेकर मराठी एकीकरण समिति और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने एक स्वर में बीजेपी को खुला अल्टीमेटम दे दिया है. रक्तपात की धमकी दी है. मनसे नेता अविनाश जाधव ने तो यहां तक कह दिया कि मराठी को मेयर नहीं बनाया तो खून बहेगा. अगर खून बहेगा, तो वह किसी मराठी मानुस का नहीं होगा. मीरा-भाईंदर महानगरपालिका चुनावों में बीजेपी अपने दम पर सत्ता में आई है. अब सवाल यह है कि शहर का प्रथम नागरिक यानी महापौर कौन बनेगा? मीरा-भाईंदर क्षेत्र मुंबई से सटा हुआ है. यहां मराठी भाषियों के साथ-साथ बड़ी संख्या में हिंदी भाषी, गुजराती और अन्य समुदायों के लोग रहते हैं. कयास लगाए जा रहे हैं कि भाजपा किसी गैर-मराठी चेहरे को महापौर बना सकती है. इसी संभावना ने मराठी संगठनों और राजनेताओं के कान खड़े कर दिए हैं. “खून बहेगा”: मराठी एकीकरण समिति की चेतावनी विवाद की शुरुआत तब हुई जब मराठी एकीकरण समिति ने भाजपा को चेतावनी दी. समिति ने स्पष्ट शब्दों में कहा, अगर मीरा-भाईंदर में मराठी महापौर नहीं बैठाया गया, तो खून बहेगा. समिति ने कहा, यह महाराष्ट्र है और यहां के स्थानीय निकायों में शीर्ष पद पर केवल स्थानीय व्यक्ति यानी मराठी मानुस का ही अधिकार होना चाहिए. मनसे की एंट्री: “खून बहेगा, पर मराठी का नहीं” इस आग में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने घी डालने का काम किया. मनसे के ठाणे शहर अध्यक्ष अविनाश जाधव ने कह दिया, मराठी महापौर नहीं बनाया गया तो खून तो बहेगा, लेकिन वह खून मराठी आदमी का नहीं होगा. विकास को समर्थन, पर अस्मिता से समझौता नहीं अविनाश जाधव ने अपनी पार्टी का पक्ष रखते हुए कहा कि लोकतंत्र में जो भी चुनकर आया है, उसे शुभकामनाएं हैं. उन्होंने कहा, हम सभी दलों से चुने गए नगरसेवकों को बधाई देते हैं. विकास कार्यों के मुद्दे पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना का आपको पूरा समर्थन रहेगा. लेकिन जब बात महापौर पद की आती है, तो भूमिपुत्र को ही न्याय मिलना चाहिए. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में महापौर मराठी ही होना चाहिए, यह उनकी पार्टी की स्पष्ट भूमिका है और इसे मानना ही पड़ेगा. जाधव के अनुसार, यह केवल एक राजनीतिक मांग नहीं, बल्कि महाराष्ट्र के मूल निवासियों के हक की बात है.
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