CV Ananda Bose News: पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंंद बोस ने खुद के ऊपर लगाए छेड़खानी के मामले में बड़ा फैसला लिया है। राजभवन की तरफ से जारी किए गए बयान में कहा गया है कि सीसीटीवी 100 लोग देख सकते हैं लेकिन राज्य की मुख्यमंत्री और उनकी पुलिस को सीसीटीवी नहीं दिखाई...
कोलकाता: पश्चिम बंगाल के राज्यपाल डॉ. सी.वी. आनंद बोस छेड़खानी के मामले में बड़ा बयान दिया है। राज्यपाल ने कहा है कि वे राजभवन की सीसीटीवी फुटेज ममता बनर्जी और पुलिस को छोड़कर अन्य 100 लोगों को दिखाएंगे। राज्यपाल सीवी आनंद बोस पर एक कांट्रैक्ट कर्मचारी ने छेड़खानी का आरोप लगाया था। इस मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस ने सीवी आनंद बोस को निशाने पर लिया था। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी टिप्पणी की थी। इसके बाद राज्यपाल ने काफी नाराजगी व्यक्त की थी। अब राजभवन ने कहा कि वह राजनीतिक नेता ममता बनर्जी और उनकी पुलिस को छोड़कर 100 लोगों को संबंधित सीसीटीवी फुटेज दिखाएगा। पुलिस ने मांगी थी सीसीटीवी फुटेज राज्यपाल पर आरोप के बाद पुलिस ने राजभवन से संबंधित सीसीटीवी फुटेज साझा करने का अनुरोध किया था। राज्यपाल ने अपने कर्मचारियों को इस संबंध में पुलिस के साथ सहयोग नहीं करने का निर्देश दिया। राजभवन ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि पुलिस के मनगढ़ंत आरोपों की पृष्ठभूमि में, राज्यपाल बोस ने ‘सच के सामने’ कार्यक्रम शुरू किया है। उसने लोगों से राजभवन में कार्यक्रम में शामिल होने के लिए ईमेल या फोन पर अनुरोध भेजने को कहा और पहले 100 लोगों को बृहस्पतिवार सुबह राजभवन के अंदर फुटेज देखने की अनुमति दी जाएगी। पोस्ट में कहा गया है कि राज्यपाल ने फैसला किया है कि सीसीटीवी फुटेज को पश्चिम बंगाल का कोई भी नागरिक देख सकता है। सिवाय राजनीतिक नेता ममता बनर्जी और उनकी पुलिस के, क्योंकि उन्होंने जो रुख अपनाया है वह सबके सामने है।नहीं हो सकती है कार्रवाई राजभवन की एक संविदा महिला कर्मचारी ने शुक्रवार को राज्यपाल पर गवर्नर हाउस में छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए कोलकाता पुलिस में लिखित शिकायत दायर की है। बोस ने आरोप को बेतुका नाटक बताया था और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की राजनीति को गंदी करार दिया था। कोलकाता पुलिस ने महिला कर्मचारी द्वारा बोस पर लगाए गए छेड़छाड़ के आरोप की जांच के लिए एक जांच दल का गठन किया है। पुलिस ने आरोप की जांच के सिलसिले में राजभवन के कुछ अधिकारियों और वहां तैनात पुलिसकर्मियों को तलब किया है। हालांकि, संविधान के अनुच्छेद 361 के तहत किसी राज्यपाल के खिलाफ उसके कार्यकाल के दौरान कोई आपराधिक कार्यवाही शुरू नहीं की जा सकती है।.
कोलकाता: पश्चिम बंगाल के राज्यपाल डॉ. सी.वी. आनंद बोस छेड़खानी के मामले में बड़ा बयान दिया है। राज्यपाल ने कहा है कि वे राजभवन की सीसीटीवी फुटेज ममता बनर्जी और पुलिस को छोड़कर अन्य 100 लोगों को दिखाएंगे। राज्यपाल सीवी आनंद बोस पर एक कांट्रैक्ट कर्मचारी ने छेड़खानी का आरोप लगाया था। इस मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस ने सीवी आनंद बोस को निशाने पर लिया था। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी टिप्पणी की थी। इसके बाद राज्यपाल ने काफी नाराजगी व्यक्त की थी। अब राजभवन ने कहा कि वह राजनीतिक नेता ममता बनर्जी और उनकी पुलिस को छोड़कर 100 लोगों को संबंधित सीसीटीवी फुटेज दिखाएगा। पुलिस ने मांगी थी सीसीटीवी फुटेज राज्यपाल पर आरोप के बाद पुलिस ने राजभवन से संबंधित सीसीटीवी फुटेज साझा करने का अनुरोध किया था। राज्यपाल ने अपने कर्मचारियों को इस संबंध में पुलिस के साथ सहयोग नहीं करने का निर्देश दिया। राजभवन ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि पुलिस के मनगढ़ंत आरोपों की पृष्ठभूमि में, राज्यपाल बोस ने ‘सच के सामने’ कार्यक्रम शुरू किया है। उसने लोगों से राजभवन में कार्यक्रम में शामिल होने के लिए ईमेल या फोन पर अनुरोध भेजने को कहा और पहले 100 लोगों को बृहस्पतिवार सुबह राजभवन के अंदर फुटेज देखने की अनुमति दी जाएगी। पोस्ट में कहा गया है कि राज्यपाल ने फैसला किया है कि सीसीटीवी फुटेज को पश्चिम बंगाल का कोई भी नागरिक देख सकता है। सिवाय राजनीतिक नेता ममता बनर्जी और उनकी पुलिस के, क्योंकि उन्होंने जो रुख अपनाया है वह सबके सामने है।नहीं हो सकती है कार्रवाई राजभवन की एक संविदा महिला कर्मचारी ने शुक्रवार को राज्यपाल पर गवर्नर हाउस में छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए कोलकाता पुलिस में लिखित शिकायत दायर की है। बोस ने आरोप को बेतुका नाटक बताया था और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की राजनीति को गंदी करार दिया था। कोलकाता पुलिस ने महिला कर्मचारी द्वारा बोस पर लगाए गए छेड़छाड़ के आरोप की जांच के लिए एक जांच दल का गठन किया है। पुलिस ने आरोप की जांच के सिलसिले में राजभवन के कुछ अधिकारियों और वहां तैनात पुलिसकर्मियों को तलब किया है। हालांकि, संविधान के अनुच्छेद 361 के तहत किसी राज्यपाल के खिलाफ उसके कार्यकाल के दौरान कोई आपराधिक कार्यवाही शुरू नहीं की जा सकती है।
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