भारतीय सेना ने म्यांमार के साथ उग्रवादियों के खिलाफ की बड़ी कार्रवाई, कई कैंप तबाह- Amarujala

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भारतीय सेना ने म्यांमार के साथ उग्रवादियों के खिलाफ की बड़ी कार्रवाई, कई कैंप तबाह- Amarujala
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पुलवामा आतंकी हमले के बाद जब वायुसेना पाकिस्तान के बालाकोट में एयर स्ट्राइक कर जैश के ठिकाने को निशाना बना रही थी, ठीक उसी दौरान थल सेना पूर्वोत्तर में दुश्मनों के खिलाफ मोर्चा खोले हुए थी। adgpi Myanmar militants myanmarmilitantscamps SurgicalStrike3

कर रखा है। अराकान आर्मी मेगा कालादान प्रोजेक्ट पर हमले की साजिश रच रहा था। ये एक ट्रांजिट प्रोजेक्ट है जो कोलकाता के हल्दिया पोर्ट को म्यांमार के सित्वे पोर्ट से जोड़ेगा। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद मिजोरम म्यांमार से से जुड़ जाएगा। ये प्रोजेक्ट कितना अहम इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इससे म्यांमार से मिजोरम की दूरी 1000 किलोमीटर कम हो जाएगी। इसके अलावा दोनों स्थानों के बीच ट्रैवल टाइम में भी कम से कम चार दिनों की कमी आएगी। सूत्रों ने बताया कि दोनों देशों की सेना का यह संयुक्त अभियान 17 फरवरी से दो मार्च तक जारी रहा। म्यांमार के एक उग्रवादी संगठन ने पूर्वोत्तर की एक प्रमुख आधारभूत परियजोना को नष्ट करने की धमकी दी थी। उसकी इस धमकी के जवाब में ही दोनों देशों के बीच कई दौर की बैठकों के बाद सेना का संयुक्त अभियान चलाने का फैसला लिया गया। देश व पूरी दुनिया का ध्यान जब पश्चिमी सीमा पर केंद्रित था तब पूर्वी सीमा पर सेना ने म्यांमार सेना के साथ मिल कर उग्रवादी संगठन अराकान आर्मी के खिलाफ बड़े पैमाने पर अभियान चलाया। इसका गठन म्यांमार के उग्रवादी संगठन कचिन इंडीपेंडेस आर्मी ने किया है। सैन्य सूत्रों ने बताया कि अराकान आर्मी ने मेगा कलादान परियोजना को उड़ाने की धमकी दी थी। यह परियजोना कोलकाता को म्यांमार के सितवे बंदरगाह से जोड़ेगी। यह पूर्वोत्तर का नया प्रवेशद्वार खोल सकती है। इससे कोलकाता व मिजोरम के बीच की दूरी लगभग एक हजार किमी कम हो जाएगी और उनके बीच सफऱ में लगने वाला समय चार दिन कम हो जाएगा। कलादन परियजोना पर मंडराते खतरे को देखते हुए भारतीय सेना ने मिजोरम से लगी दक्षिणी म्यांमार की सीमा के भीतर स्थित उग्रवादी शिविरों को खत्म करने का फैसला किया। रक्षा सूत्रों ने बताया कि भारतीय सेना ने म्यांमार की सेना को खुफिया सूचनाएं मुहैया कराईं। सेना के पास यह भी सूचना थी कि अराकान आर्मी के कुछ सदस्य भारतीय सीमा में दाखिल होने की योजना बना रहे थे। सूत्रों ने बताया कि इस उग्रवादी संगठन की ओर से म्यांमार में शिविर स्थापित करने को दोनों देश एक गंभीर समस्या मान रहे थे। भारतीय सेना ने कालादान परिवहन परियोजना में काम करने वाले भारतीय कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भी अभियान को अंजाम दिया। सूत्रों के मुताबिक, दोनों देशों की बीच कई दौर की बातचीत के बाद संयुक्त अभियान चलाने का फैसला किया गया। इसके लिए अतिरिक्त सुरक्षा बलों को अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास भेजा गया और असम राइफल्स के जवानों को भी तैनात किया गया। म्यांमार से सटे अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी असम राइफल्स पर है। दोनों देशों के बीच वर्ष 2008 में कालादान परियोजना पर सहयोग की सहमति बनी थी। इसके पूरा होने पर मिजोरम म्यांमार के रखाइन राज्य के सितवे बंदरगाह से जुड़ जाएगा। पुलवामा आतंकी हमले के बाद जब वायुसेना पाकिस्तान के बालाकोट में एयर स्ट्राइक कर जैश-ए-मोहम्मद के ठिकाने को निशाना बना रही थी, ठीक उसी दौरान थल सेना पूर्वोत्तर में दुश्मनों के खिलाफ मोर्चा खोले हुए थी। सेना ने म्यांमार की सेना के साथ मिलकर भारत-म्यांमार सीमा पर स्थित उग्रवादियों के कई कैंपों को तबाह कर दिया। यह कार्रवाई एक मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर हमले की साजिश को नाकाम करने के लिए की गई।सेना के सूत्रों के अनुसार, तैनाती और कवर किए गए एरिया के मामले में यह अपनी तरह का पहला ऑपरेशन था। यह संयुक्त अभियान 17 फरवरी से 2 मार्च तक चला। म्यांमार की सेना के साथ संयुक्त कार्रवाई में म्यांमार की अराकाम आर्मी पर हमला बोला गया। यह रोहिंग्याओं का गुट है और इसे चीन के साथ ही काचिन इंडिपेंडेंस आर्मी का भी समर्थन हासिल है। कर रखा है। अराकान आर्मी मेगा कालादान प्रोजेक्ट पर हमले की साजिश रच रहा था। ये एक ट्रांजिट प्रोजेक्ट है जो कोलकाता के हल्दिया पोर्ट को म्यांमार के सित्वे पोर्ट से जोड़ेगा। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद मिजोरम म्यांमार से से जुड़ जाएगा। ये प्रोजेक्ट कितना अहम इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इससे म्यांमार से मिजोरम की दूरी 1000 किलोमीटर कम हो जाएगी। इसके अलावा दोनों स्थानों के बीच ट्रैवल टाइम में भी कम से कम चार दिनों की कमी आएगी। सूत्रों ने बताया कि दोनों देशों की सेना का यह संयुक्त अभियान 17 फरवरी से दो मार्च तक जारी रहा। म्यांमार के एक उग्रवादी संगठन ने पूर्वोत्तर की एक प्रमुख आधारभूत परियजोना को नष्ट करने की धमकी दी थी। उसकी इस धमकी के जवाब में ही दोनों देशों के बीच कई दौर की बैठकों के बाद सेना का संयुक्त अभियान चलाने का फैसला लिया गया। देश व पूरी दुनिया का ध्यान जब पश्चिमी सीमा पर केंद्रित था तब पूर्वी सीमा पर सेना ने म्यांमार सेना के साथ मिल कर उग्रवादी संगठन अराकान आर्मी के खिलाफ बड़े पैमाने पर अभियान चलाया। इसका गठन म्यांमार के उग्रवादी संगठन कचिन इंडीपेंडेस आर्मी ने किया है। सैन्य सूत्रों ने बताया कि अराकान आर्मी ने मेगा कलादान परियोजना को उड़ाने की धमकी दी थी। यह परियजोना कोलकाता को म्यांमार के सितवे बंदरगाह से जोड़ेगी। यह पूर्वोत्तर का नया प्रवेशद्वार खोल सकती है। इससे कोलकाता व मिजोरम के बीच की दूरी लगभग एक हजार किमी कम हो जाएगी और उनके बीच सफऱ में लगने वाला समय चार दिन कम हो जाएगा। कलादन परियजोना पर मंडराते खतरे को देखते हुए भारतीय सेना ने मिजोरम से लगी दक्षिणी म्यांमार की सीमा के भीतर स्थित उग्रवादी शिविरों को खत्म करने का फैसला किया। रक्षा सूत्रों ने बताया कि भारतीय सेना ने म्यांमार की सेना को खुफिया सूचनाएं मुहैया कराईं। सेना के पास यह भी सूचना थी कि अराकान आर्मी के कुछ सदस्य भारतीय सीमा में दाखिल होने की योजना बना रहे थे। सूत्रों ने बताया कि इस उग्रवादी संगठन की ओर से म्यांमार में शिविर स्थापित करने को दोनों देश एक गंभीर समस्या मान रहे थे। भारतीय सेना ने कालादान परिवहन परियोजना में काम करने वाले भारतीय कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भी अभियान को अंजाम दिया। सूत्रों के मुताबिक, दोनों देशों की बीच कई दौर की बातचीत के बाद संयुक्त अभियान चलाने का फैसला किया गया। इसके लिए अतिरिक्त सुरक्षा बलों को अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास भेजा गया और असम राइफल्स के जवानों को भी तैनात किया गया। म्यांमार से सटे अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी असम राइफल्स पर है। दोनों देशों के बीच वर्ष 2008 में कालादान परियोजना पर सहयोग की सहमति बनी थी। इसके पूरा होने पर मिजोरम म्यांमार के रखाइन राज्य के सितवे बंदरगाह से जुड़ जाएगा।.

कर रखा है। अराकान आर्मी मेगा कालादान प्रोजेक्ट पर हमले की साजिश रच रहा था। ये एक ट्रांजिट प्रोजेक्ट है जो कोलकाता के हल्दिया पोर्ट को म्यांमार के सित्वे पोर्ट से जोड़ेगा। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद मिजोरम म्यांमार से से जुड़ जाएगा। ये प्रोजेक्ट कितना अहम इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इससे म्यांमार से मिजोरम की दूरी 1000 किलोमीटर कम हो जाएगी। इसके अलावा दोनों स्थानों के बीच ट्रैवल टाइम में भी कम से कम चार दिनों की कमी आएगी। सूत्रों ने बताया कि दोनों देशों की सेना का यह संयुक्त अभियान 17 फरवरी से दो मार्च तक जारी रहा। म्यांमार के एक उग्रवादी संगठन ने पूर्वोत्तर की एक प्रमुख आधारभूत परियजोना को नष्ट करने की धमकी दी थी। उसकी इस धमकी के जवाब में ही दोनों देशों के बीच कई दौर की बैठकों के बाद सेना का संयुक्त अभियान चलाने का फैसला लिया गया। देश व पूरी दुनिया का ध्यान जब पश्चिमी सीमा पर केंद्रित था तब पूर्वी सीमा पर सेना ने म्यांमार सेना के साथ मिल कर उग्रवादी संगठन अराकान आर्मी के खिलाफ बड़े पैमाने पर अभियान चलाया। इसका गठन म्यांमार के उग्रवादी संगठन कचिन इंडीपेंडेस आर्मी ने किया है। सैन्य सूत्रों ने बताया कि अराकान आर्मी ने मेगा कलादान परियोजना को उड़ाने की धमकी दी थी। यह परियजोना कोलकाता को म्यांमार के सितवे बंदरगाह से जोड़ेगी। यह पूर्वोत्तर का नया प्रवेशद्वार खोल सकती है। इससे कोलकाता व मिजोरम के बीच की दूरी लगभग एक हजार किमी कम हो जाएगी और उनके बीच सफऱ में लगने वाला समय चार दिन कम हो जाएगा। कलादन परियजोना पर मंडराते खतरे को देखते हुए भारतीय सेना ने मिजोरम से लगी दक्षिणी म्यांमार की सीमा के भीतर स्थित उग्रवादी शिविरों को खत्म करने का फैसला किया। रक्षा सूत्रों ने बताया कि भारतीय सेना ने म्यांमार की सेना को खुफिया सूचनाएं मुहैया कराईं। सेना के पास यह भी सूचना थी कि अराकान आर्मी के कुछ सदस्य भारतीय सीमा में दाखिल होने की योजना बना रहे थे। सूत्रों ने बताया कि इस उग्रवादी संगठन की ओर से म्यांमार में शिविर स्थापित करने को दोनों देश एक गंभीर समस्या मान रहे थे। भारतीय सेना ने कालादान परिवहन परियोजना में काम करने वाले भारतीय कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भी अभियान को अंजाम दिया। सूत्रों के मुताबिक, दोनों देशों की बीच कई दौर की बातचीत के बाद संयुक्त अभियान चलाने का फैसला किया गया। इसके लिए अतिरिक्त सुरक्षा बलों को अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास भेजा गया और असम राइफल्स के जवानों को भी तैनात किया गया। म्यांमार से सटे अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी असम राइफल्स पर है। दोनों देशों के बीच वर्ष 2008 में कालादान परियोजना पर सहयोग की सहमति बनी थी। इसके पूरा होने पर मिजोरम म्यांमार के रखाइन राज्य के सितवे बंदरगाह से जुड़ जाएगा। पुलवामा आतंकी हमले के बाद जब वायुसेना पाकिस्तान के बालाकोट में एयर स्ट्राइक कर जैश-ए-मोहम्मद के ठिकाने को निशाना बना रही थी, ठीक उसी दौरान थल सेना पूर्वोत्तर में दुश्मनों के खिलाफ मोर्चा खोले हुए थी। सेना ने म्यांमार की सेना के साथ मिलकर भारत-म्यांमार सीमा पर स्थित उग्रवादियों के कई कैंपों को तबाह कर दिया। यह कार्रवाई एक मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर हमले की साजिश को नाकाम करने के लिए की गई।सेना के सूत्रों के अनुसार, तैनाती और कवर किए गए एरिया के मामले में यह अपनी तरह का पहला ऑपरेशन था। यह संयुक्त अभियान 17 फरवरी से 2 मार्च तक चला। म्यांमार की सेना के साथ संयुक्त कार्रवाई में म्यांमार की अराकाम 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संगठन अराकान आर्मी के खिलाफ बड़े पैमाने पर अभियान चलाया। इसका गठन म्यांमार के उग्रवादी संगठन कचिन इंडीपेंडेस आर्मी ने किया है। सैन्य सूत्रों ने बताया कि अराकान आर्मी ने मेगा कलादान परियोजना को उड़ाने की धमकी दी थी। यह परियजोना कोलकाता को म्यांमार के सितवे बंदरगाह से जोड़ेगी। यह पूर्वोत्तर का नया प्रवेशद्वार खोल सकती है। इससे कोलकाता व मिजोरम के बीच की दूरी लगभग एक हजार किमी कम हो जाएगी और उनके बीच सफऱ में लगने वाला समय चार दिन कम हो जाएगा। कलादन परियजोना पर मंडराते खतरे को देखते हुए भारतीय सेना ने मिजोरम से लगी दक्षिणी म्यांमार की सीमा के भीतर स्थित उग्रवादी शिविरों को खत्म करने का फैसला किया। रक्षा सूत्रों ने बताया कि भारतीय सेना ने म्यांमार की सेना को खुफिया सूचनाएं मुहैया कराईं। सेना के पास यह भी सूचना थी कि अराकान आर्मी के कुछ सदस्य भारतीय सीमा में दाखिल होने की योजना बना रहे थे। सूत्रों ने बताया कि इस उग्रवादी संगठन की ओर से म्यांमार में शिविर स्थापित करने को दोनों देश एक गंभीर समस्या मान रहे थे। भारतीय सेना ने कालादान परिवहन परियोजना में काम करने वाले भारतीय कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भी अभियान को अंजाम दिया। सूत्रों के मुताबिक, दोनों देशों की बीच कई दौर की बातचीत के बाद संयुक्त अभियान चलाने का फैसला किया गया। इसके लिए अतिरिक्त सुरक्षा बलों को अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास भेजा गया और असम राइफल्स के जवानों को भी तैनात किया गया। म्यांमार से सटे अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी असम राइफल्स पर है। दोनों देशों के बीच वर्ष 2008 में कालादान परियोजना पर सहयोग की सहमति बनी थी। इसके पूरा होने पर मिजोरम म्यांमार के रखाइन राज्य के सितवे बंदरगाह से जुड़ जाएगा।

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