चौपाल: बड़ी चुनौती
चौपाल: गले पांच सालों में वायु प्रदूषण को तीस फीसद तक कम करना एक है। इसकी वजह यह है कि पहले ही इस काम में काफी देर हो चुकी है और प्रदूषण बढ़ने की रफ्तार उठाए जाने वाले कदमों की तुलना में कई गुना ज्यादा है। जनसत्ता March 7, 2019 3:32 AM दिल्ली में प्रदूषण के चलते छाई धुंध फोटो सोर्स- पीटीआई पर्यावरण मंत्रालय ने गंभीर वायु प्रदूषण से निपटने के लिए देशव्यापी योजना बनाई है। इसके तहत अगले पांच साल में एक सौ दो प्रदूषित शहरों की हवा को 20 से 30 फीसद तक साफ करने का लक्ष्य रखा गया है। यह योजना कई चरणों में लागू की जाएगी और इसमें राज्यों को आर्थिक मदद भी दी जाएगी। वायु प्रदूषण की वजह से दिल्ली सहित कई शहर जहरीली गैस के चेंबर बन चुके हैं। प्रदूषण के बाबत आए दिन नए-नए तथ्य और आंकड़े भयानक तस्वीर पेश कर रहे हैं। अगले पांच सालों में वायु प्रदूषण को तीस फीसद तक कम करना एक है। इसकी वजह यह है कि पहले ही इस काम में काफी देर हो चुकी है और प्रदूषण बढ़ने की रफ्तार उठाए जाने वाले कदमों की तुलना में कई गुना ज्यादा है। प्रदूषण से निपटने के लिए जन भागीदारी भी बहुत जरूरी है। जब तक लोगों को जागरूक नहीं किया जाएगा, सरकार के प्रयास बेकार साबित होंगे।आजादी के सात दशक बाद भी भ्रष्टाचार एक गंभीर समस्या के रूप में देश में मौजूद है। कोई भी क्षेत्र इससे अछूता नहीं रह गया है। यह एक दीमक की तरह भारतीय तंत्र की जड़ें खोखली कर रहा है। नौबत यह है कि बड़ी संख्या में लोग स्वार्थ सिद्धि के लिए रिश्वतखोरी का सहारा लेते हैं। विडंबना यह कि हम इसके खात्मे के उपाय ढूंढ़ने के बजाय एक-दूसरे को दोष देते रहते हैं। अगर समय रहते भ्रष्टाचार के खिलाफ कारगर कदम नहीं उठाए गए तो देश को इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे।पाकिस्तान के आतंकवाद को विश्व के सामने लाने के प्रयासों में भारत को अभूतपूर्व सफलता मिली है। भारत के अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को साधने का ही नतीजा रहा कि पाकिस्तान शेष विश्व से लगभग अलग-थलग पड़ गया है। इसी कूटनीति दबाव के चलते उसे भारत के एक पायलट को लगभग चौबीस घंटे में ही बिना शर्त रिहा करने पर मजबूर होना पड़ा है। सारा विश्व जानता है कि पाकिस्तान आतंकवाद का पोषक है और पिछले दो-तीन दशकों से वह इस्लामिक आतंकवाद का सिरमौर बना बैठा है। यह सही है कि अमेरिका ने ही अफगानिस्तान में सोवियत संघ की मौजूदगी के खिलाफ पाकिस्तान को आतंक की फैक्ट्री स्थापित करने में मदद की थी। जब उसी फैक्ट्री से फल-फूल कर अनेक फैक्ट्रियां बन गर्इं और वे स्वयं अमेरिका के खिलाफ खड़ी हो गईं तब अमेरिका को अपनी भूल का अहसास हुआ। भारत पिछले चालीस वर्षों से पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद से पीड़ित है। पुलवामा हमले के बाद पैदा हालात ने भारत को सहनशीलता का चोला उतार फेंकने पर मजबूर कर दिया और भारतीय वायु सेना ने बालाकोट में कार्रवाई करके पाकिस्तान को उसकी करनी का फल चखा दिया। कंधार कांड या मुंबई हमले के बाद अगर ऐसी कार्रवाई हो गई होती तो भारत को शायद आतंकवाद के इतने दंश न झेलने पड़ते। हालांकि अभी ऐसा कुछ नहीं हुआ है जिससे पाकिस्तान-पोषित आतंकवाद पर पूरी तरह लगाम लग जाएगी, लेकिन भारत ने आतंकवाद के विरुद्ध जो आक्रामक नीति अपनाई है, उसे नए युग की शुरुआत समझा जाना चाहिए और इसके सुखद परिणाम अवश्य आएंगे।Hindi News से जुड़े अपडेट और व्यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App.
चौपाल: गले पांच सालों में वायु प्रदूषण को तीस फीसद तक कम करना एक है। इसकी वजह यह है कि पहले ही इस काम में काफी देर हो चुकी है और प्रदूषण बढ़ने की रफ्तार उठाए जाने वाले कदमों की तुलना में कई गुना ज्यादा है। जनसत्ता March 7, 2019 3:32 AM दिल्ली में प्रदूषण के चलते छाई धुंध फोटो सोर्स- पीटीआई पर्यावरण मंत्रालय ने गंभीर वायु प्रदूषण से निपटने के लिए देशव्यापी योजना बनाई है। इसके तहत अगले पांच साल में एक सौ दो प्रदूषित शहरों की हवा को 20 से 30 फीसद तक साफ करने का लक्ष्य रखा गया है। यह योजना कई चरणों में लागू की जाएगी और इसमें राज्यों को आर्थिक मदद भी दी जाएगी। वायु प्रदूषण की वजह से दिल्ली सहित कई शहर जहरीली गैस के चेंबर बन चुके हैं। प्रदूषण के बाबत आए दिन नए-नए तथ्य और आंकड़े भयानक तस्वीर पेश कर रहे हैं। अगले पांच सालों में वायु प्रदूषण को तीस फीसद तक कम करना एक है। इसकी वजह यह है कि पहले ही इस काम में काफी देर हो चुकी है और प्रदूषण बढ़ने की रफ्तार उठाए जाने वाले कदमों की तुलना में कई गुना ज्यादा है। प्रदूषण से निपटने के लिए जन भागीदारी भी बहुत जरूरी है। जब तक लोगों को जागरूक नहीं किया जाएगा, सरकार के प्रयास बेकार साबित होंगे।आजादी के सात दशक बाद भी भ्रष्टाचार एक गंभीर समस्या के रूप में देश में मौजूद है। कोई भी क्षेत्र इससे अछूता नहीं रह गया है। यह एक दीमक की तरह भारतीय तंत्र की जड़ें खोखली कर रहा है। नौबत यह है कि बड़ी संख्या में लोग स्वार्थ सिद्धि के लिए रिश्वतखोरी का सहारा लेते हैं। विडंबना यह कि हम इसके खात्मे के उपाय ढूंढ़ने के बजाय एक-दूसरे को दोष देते रहते हैं। अगर समय रहते भ्रष्टाचार के खिलाफ कारगर कदम नहीं उठाए गए तो देश को इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे।पाकिस्तान के आतंकवाद को विश्व के सामने लाने के प्रयासों में भारत को अभूतपूर्व सफलता मिली है। भारत के अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को साधने का ही नतीजा रहा कि पाकिस्तान शेष विश्व से लगभग अलग-थलग पड़ गया है। इसी कूटनीति दबाव के चलते उसे भारत के एक पायलट को लगभग चौबीस घंटे में ही बिना शर्त रिहा करने पर मजबूर होना पड़ा है। सारा विश्व जानता है कि पाकिस्तान आतंकवाद का पोषक है और पिछले दो-तीन दशकों से वह इस्लामिक आतंकवाद का सिरमौर बना बैठा है। यह सही है कि अमेरिका ने ही अफगानिस्तान में सोवियत संघ की मौजूदगी के खिलाफ पाकिस्तान को आतंक की फैक्ट्री स्थापित करने में मदद की थी। जब उसी फैक्ट्री से फल-फूल कर अनेक फैक्ट्रियां बन गर्इं और वे स्वयं अमेरिका के खिलाफ खड़ी हो गईं तब अमेरिका को अपनी भूल का अहसास हुआ। भारत पिछले चालीस वर्षों से पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद से पीड़ित है। पुलवामा हमले के बाद पैदा हालात ने भारत को सहनशीलता का चोला उतार फेंकने पर मजबूर कर दिया और भारतीय वायु सेना ने बालाकोट में कार्रवाई करके पाकिस्तान को उसकी करनी का फल चखा दिया। कंधार कांड या मुंबई हमले के बाद अगर ऐसी कार्रवाई हो गई होती तो भारत को शायद आतंकवाद के इतने दंश न झेलने पड़ते। हालांकि अभी ऐसा कुछ नहीं हुआ है जिससे पाकिस्तान-पोषित आतंकवाद पर पूरी तरह लगाम लग जाएगी, लेकिन भारत ने आतंकवाद के विरुद्ध जो आक्रामक नीति अपनाई है, उसे नए युग की शुरुआत समझा जाना चाहिए और इसके सुखद परिणाम अवश्य आएंगे।Hindi News से जुड़े अपडेट और व्यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App
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