बोइंग का स्टारलाइनर मिशन टला: इससे भारतीय मूल की सुनीता विलियम्स स्पेस स्टेशन जाने वाली थीं, ऑक्सीजन रिलीफ ...

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बोइंग का स्टारलाइनर मिशन टला: इससे भारतीय मूल की सुनीता विलियम्स स्पेस स्टेशन जाने वाली थीं, ऑक्सीजन रिलीफ ...
Sunita WilliamsBoeing's StarlinerNASA Mission
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Astronaut Sunita Williams, Sunita Williams, Boeing's Starliner, NASA mission, ISS, International space station 7 मई 2024 को भारतवंशी सुनीता विलियम्स स्टारलाइनर मिशन के तहत स्पेश स्टेशन के लिए रवाना होंगी। ये उनकी अंतरिक्ष यात्रा होगी। वो इस मिशन पायलट...

इससे भारतीय मूल की सुनीता विलियम्स स्पेस स्टेशन जाने वाली थीं, ऑक्सीजन रिलीफ वैल्व में आई खराबीभारतीय मूल की एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन ले जाने वाला बोइंग का स्टारलाइनर मिशन टल गया है। इसे ULA के एटलस V रॉकेट से आज सुबह 8:04 बजे लॉन्च किया जाना था। रॉकेट की सेकेंड स्टेज में ऑक्सीजन रिलीफ वैल्व में आई समस्या के कारण इस मिशन को टाला गया है। मिशन टलने के बाद एस्ट्रोनॉट क्रू क्वार्टर में लौट गए हैं। अब अगला लॉन्च कब होगा इसकी फिलहाल कोई जानकारी नहीं दी गई है। इस मिशन के सफल होने पर इतिहास में पहली बार अमेरिका के पास एस्ट्रोनॉट को स्पेस में भेजने के लिए 2 स्पेसक्राफ्ट हो जाएंगे। अभी अमेरिका के पास स्पेसएक्स का ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट ही है। बाएं से दाएं, नासा के एस्ट्रोनॉट बुच विल्मोर और सुनीता विलियम्स यूनाइटेड लॉन्च एलायंस एटलस V रॉकेट और बोइंग के स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट के साथ पोज देते हुए। फोटो क्रेडिट: NASAस्टारलाइनर में एक क्रू कैप्सूल और एक सर्विस मॉड्यूल है। क्रू कैप्सूल में एस्ट्रोनॉट रहेंगे। वहीं सर्विस मॉड्यूल में ऐसे सिस्टम्स शामिल हैं जिनकी अंतरिक्ष में जीवित रहने के लिए जरूरत होती है। जैसे हवा और तापमान नियंत्रण, वाटर सप्लाई। सर्विस मॉड्यूल रीयूजेबल नहीं होगा।एटलस V रॉकेट लॉन्च होगा। 15 मिनट बाद ये स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट को रिलीज कर देगा। स्पेसक्राफ्ट के इंजन फायर होंगे और ये स्पेस स्टेशन की लगभग 24 घंटे की यात्रा के लिए कक्षा में स्थापित हो जाएगा। स्टारलाइनर हार्मनी मॉड्यूल के आगे वाले पोर्ट पर डॉक करेगा। अपने स्टे के दौरान क्रू स्टारलाइनर के अंदर जाएगा, हैच बंद करेगा और दिखाएगा कि भविष्य में मलबे के साथ टकराव के रिस्क जैसी स्थिति में स्पेसक्राफ्ट"सुरक्षित आश्रय" के रूप में काम कर सकता है। विल्मोर और विलियम्स पृथ्वी पर लौटने से पहले लगभग एक हफ्ते तक एक्सपेडिशन 71 क्रू के साथ रहेंगे और काम करेंगे। अनडॉकिंग के बाद, स्टारलाइनर के मैनुअल पायलटिंग का आकलन होगा। चालक दल अनडॉकिंग से लेकर लैंडिंग तक लगभग छह घंटे बिताएगा। पृथ्वी के वायुमंडल में रीएंट्री के दौरान, स्पेसक्राफ्ट 28,000 Km/घंटे की गति से धीमा होना शुरू हो जाएगा। इस दौरान क्रू 3.

5 g तक भार महसूस कर सकता है। रीएंट्री के बाद पैराशूट सिस्टम की सुरक्षा के लिए स्पेसक्राफ्ट की आगे लगी हीट शील्ड को हटा दिया जाएगा। दो ड्रैग और तीन मुख्य पैराशूट स्टारलाइनर की गति को और धीमा कर देंगे। बेस हीट शील्ड डुअल एयरबैग सिस्टम को एक्सपोज करते हुए डिप्लॉय हो जाएगी। 6 प्राइमरी एयरबैग कैप्सूल के बेस पर डिप्लॉय होंगे। ये लैंडिंग के दौरान कुशन की तरह काम करेंगी। लैंडिंग के दौरान स्पेसक्राफ्ट की गति करीब 6 किलोमीटर प्रति घंटे की होगी। संभावित लैंडिंग स्थानों में एरिजोना का विलकॉक्स और यूटा का डगवे प्रोविंग ग्राउंड शामिल है। कैलिफोर्निया में एडवर्ड्स एयर फोर्स बेस एक इमरजेंसी लैंडिंग साइट के रूप में उपलब्ध है। टचडाउन के बाद, चालक दल पैराशूट हटाएगा, स्पेसक्राफ्ट की बिजली बंद करेगा और मिशन कंट्रोल लैंडिंग और रिकवरी टीमों से सैटेलाइट फोन कॉल के जरिए संपर्क करेगा। रिकवरी टीम स्टारलाइनर के चारों ओर एक टेंट लगाएगी और स्पेसक्राफ्ट में ठंडी हवा पंप करेगी। स्टारलाइनर का हैच खुलने और, लैंडिंग के एक घंटे से भी कम समय बीतने के बाद, दोनों एस्ट्रोनॉट्स हेल्थ चेक के लिए मेडिकल व्हीकल में जाएंगे। फिर नासा के विमान तक पहुंचने के लिए हेलिकॉप्टर में उड़ान भरेंगे। ये विमान उन्हें ह्यूस्टन के एलिंगटन फील्ड लेकर जाएगा। लैंडिंग और सक्सेसफुल रिकवरी के बाद, नासा स्पेस स्टेशन पर मिशनों के लिए एक ऑपरेशनल क्रू सिस्टम के रूप में स्पेसक्राफ्ट को सर्टिफाई करने का काम पूरा करेगा। सर्टिफिकेशन के बाद मिशन्स की शुरुआत 2025 में होने की उम्मीद है।स्टारलाइनर को मैक्सिमम सात लोगों के क्रू को फिट करने के लिए डिजाइन किया गया है, लेकिन नासा मिशन चार लोगों के क्रू को ले जाएगा। सवाल 2: क्या स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट रीयूजेबल है? जवाब: हां, क्रू मॉड्यूल को 10 मिशनों तक उड़ान भरने के लिए डिजाइन किया गया है, लेकिन सर्विस मॉड्यूल रीयूजेबल नहीं है।हां, नासा मिशनों पर अतिरिक्त पांचवीं सीट को बोइंग सेल करेगा। प्राइवेट सिटिजन इसमें टूरिस्ट की तरह फ्लाई कर सकेंगे। सवाल 4: नासा को प्राइवेट प्लेयर्स की जरूरत क्यों पड़ी? जवाब: नासा को प्राइवेट कंपनियों के स्पेस सेक्टर में आने से एडवांस टेक्नोलॉजी डेवलप करने में मदद मिली है। इससे मिशन कॉस्ट भी घटी है। 2011 स्पेस शटल प्रोग्राम बंद होने के बाद अमेरिका ISS तक पहुंचने के लिए रूस के सोयूज स्पेसक्राफ्ट पर निर्भर हो गया था। हालांकि, स्पेसएक्स जैसे प्राइवेट प्लेयर के आने से उसकी रूस पर निर्भरता कम हुई है। स्पेसएक्स के मालिक इलॉन मस्क अपने ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट के साथ। नासा इसी स्पेसक्राफ्ट से एस्ट्रोनॉट्स के स्पेस स्टेशन भेजता है।बोइंग लंबे समय से अपने 737 मैक्स विमानों को लेकर विवादों में है। अक्टूबर 2018 में इस्तेमाल शुरू होने के एक साल बाद ही ये हादसे का शिकार हो गया। इथियोपिया एयरलाइन्स के बेड़े में शामिल ये विमान उड़ान भरने के 13 मिनट बाद क्रैश हो गया। इसमें 189 लोगों की मौत हो गई। 2019 में फिर एक हादसा हुआ, जिसमें 157 लोग मारे गए। इस साल जनवरी में बोइंग के 737 सीरीज के एक और विमान मैक्स-9 का दरवाजा 16 हजार फीट की ऊंचाई से टूट कर गिर गया। इससे एक बार फिर बोइंग के विमानों में सेफ्टी से जुड़े सवाल उठने लगे। इन सब घटनाओं के बीच बोइंग नासा के लिए एक बड़े मिशन को अंजाम देने की तैयारी में है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक अगर स्टारलाइनर मिशन कामयाब रहा तो ये बोइंग की इमेज को सुधारने का काम करेगा। हालांकि, अगर मिशन में गड़बड़ी हुई तो कंपनी की साख को बड़ी ठेस पहुंचेगी।इनकी बदौलत कैंसर का इलाज 10 गुना सस्ता, अकेलेपन से लड़ाई आसान, अल्जाइमर की पहचान भी जल्द होगी53 दिनों में सबसे अंधेरे हिस्से से सैंपल लाएगा चैंग'ई-6; भारत-अमेरिका से पहले लॉन्च किया मिशनएक्सपर्ट्स कोवीशील्ड के साइड इफेक्ट जांचें-सुप्रीम कोर्ट में याचिका:

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