the story of famous election slogans on Indira Gandhi and Sanjay Gandhi | भारत में मारुति का प्रोजेक्ट संजय गांधी लाए थे विपक्ष ने 1977 के चुनाव तक इस नारे का इस्तेमाल किया और इंदिरा की हार हुई
विपक्ष ने 1977 के चुनाव तक इस नारे का इस्तेमाल किया और इंदिरा की हार हुई 1971 के चुनाव में जीत के बाद सारी ताकत इंदिरा के हाथ में आ गई। संजय गांधी राजनीति में सक्रिय दिखाई देने लगे। भारत में कार कंपनी खोलने से पहले संजय ने इंग्लैंड में थोड़े समय के लिए रॉल्स रॉयस कंपनी में ट्रेनिंग ली थी। जब वह कंपनी के लिए जमीन देख रहे थे तब उनकी राजनीति में एंट्री हुई।सरकार के पास छोटी कार बनाने के लिए 18 आवेदन आए। लेकिन मंजूरी सिर्फ एक को मिली। यह आवेदन संजय गांधी का था। हरियाणा की कांग्रेस की बंसीलाल सरकार ने संजय गांधी के कार प्रोजेक्ट के लिए 300 एकड़ जमीन औने-पौने दामों में दी।इधर सरकार बेरोजगारी के मोर्चे पर जूझ रही थी। रोजगार घट रहे थे। जब आपातकाल की घोषणा हुई तो लोगों में सबसे ज्यादा गुस्सा बेरोजगारी को लेकर था। तब नारा आया ‘बेटा कार बनाता है, मां बेकार बनाती है।’ यह नारा विपक्ष ने 1977 के चुनाव तक इस्तेमाल किया। 1977 में इंदिरा की हार हुई।.
विपक्ष ने 1977 के चुनाव तक इस नारे का इस्तेमाल किया और इंदिरा की हार हुई 1971 के चुनाव में जीत के बाद सारी ताकत इंदिरा के हाथ में आ गई। संजय गांधी राजनीति में सक्रिय दिखाई देने लगे। भारत में कार कंपनी खोलने से पहले संजय ने इंग्लैंड में थोड़े समय के लिए रॉल्स रॉयस कंपनी में ट्रेनिंग ली थी। जब वह कंपनी के लिए जमीन देख रहे थे तब उनकी राजनीति में एंट्री हुई।सरकार के पास छोटी कार बनाने के लिए 18 आवेदन आए। लेकिन मंजूरी सिर्फ एक को मिली। यह आवेदन संजय गांधी का था। हरियाणा की कांग्रेस की बंसीलाल सरकार ने संजय गांधी के कार प्रोजेक्ट के लिए 300 एकड़ जमीन औने-पौने दामों में दी।इधर सरकार बेरोजगारी के मोर्चे पर जूझ रही थी। रोजगार घट रहे थे। जब आपातकाल की घोषणा हुई तो लोगों में सबसे ज्यादा गुस्सा बेरोजगारी को लेकर था। तब नारा आया ‘बेटा कार बनाता है, मां बेकार बनाती है।’ यह नारा विपक्ष ने 1977 के चुनाव तक इस्तेमाल किया। 1977 में इंदिरा की हार हुई।
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