बांग्लादेश में हाल ही में हुए संसदीय चुनाव के बाद, नई कैबिनेट में व्यवसायियों का दबदबा देखने को मिल रहा है। 50 मंत्रियों और राज्य मंत्रियों में से 35 ने अपने पेशे के रूप में व्यवसाय दर्ज किया है। टीआईबी ने चिंता जताई है कि कैबिनेट में बिजनेस करने वालों का दबदबा मुश्किलें खड़ी कर सकता है और हितों के टकराव से ऊपर उठना होगा। चुनाव में निर्वाचित सांसदों में भी व्यवसायियों की संख्या अधिक है, जिससे नीति निर्माण में प्रभाव की संभावना है।
ढाका, 22 फरवरी (आईएएनएस)। बांग्लादेश में हाल ही में हुए 13वें संसदीय चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ( बीएनपी ) की निर्णायक जीत के बाद, नई कैबिनेट में व्यवसायियों का दबदबा देखने को मिल रहा है। स्थानीय मीडिया में निर्वाचन आयोग को सौंपे गए हलफनामों का हवाला देते हुए बताया गया है कि 50 मंत्रियों और राज्य मंत्रियों में से 35 ने अपने पेशे के रूप में व्यवसाय दर्ज किया है। यह आंकड़ा कैबिनेट सदस्यों का 70 प्रतिशत बैठता है, जो इस बात का संकेत है कि सरकार में व्यवसायियों का महत्वपूर्ण प्रभाव
है।\ढाका ट्रिब्यून के अनुसार, प्रधानमंत्री, मंत्रियों और राज्य मंत्रियों द्वारा प्रस्तुत हलफनामों के विश्लेषण से यह भी पता चला है कि 19 कैबिनेट मंत्रियों और 16 राज्य मंत्रियों ने स्वयं को व्यवसायी बताया है। वकीलों का समूह मंत्रिमंडल में दूसरा सबसे बड़ा पेशेवर समूह है, जबकि कुछ सदस्यों ने एक से अधिक पेशों का उल्लेख किया है। उल्लेखनीय है कि केवल दो कैबिनेट सदस्यों, प्रधानमंत्री और बीएनपी अध्यक्ष तारिक रहमान तथा शिक्षा मंत्री एएनएम एहसानुल हक मिलन ने ही राजनीति को अपना पेशा बताया है, हालांकि ये सभी अनुभवी राजनेता हैं। 17 फरवरी को ढाका में नेशनल पार्लियामेंट के साउथ प्लाजा में टेक्नोक्रेट कोटे के तहत नियुक्त दो मंत्रियों समेत 25 मंत्रियों ने शपथ ली थी। इस घटनाक्रम पर भ्रष्टाचार निरोधक निगरानी संस्था ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल बांग्लादेश (टीआईबी) ने चिंता व्यक्त की है। टीआईबी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर इफ्तेखारुज्जमान ने कहा कि कैबिनेट में व्यवसायियों का दबदबा मुश्किलें खड़ी कर सकता है। उन्होंने कहा कि मंत्रियों को कैबिनेट के फैसलों और मंत्रालय की गतिविधियों में हितों के टकराव से ऊपर उठना होगा। उन्हें ऐसे फैसलों से बचना चाहिए जिनसे सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से उनके अपने व्यवसाय या क्षेत्र को लाभ हो सकता है। इफ्तेखारुज्जमान ने चेतावनी दी कि यदि इन मानकों का पालन नहीं किया गया, तो यह प्रतिस्पर्धी बाजार व्यवस्था को कमजोर कर सकता है और इसके नकारात्मक परिणाम आम नागरिकों को भुगतने पड़ सकते हैं।\रिपोर्टों से पता चलता है कि व्यवसायियों का प्रभाव केवल मंत्रिमंडल तक ही सीमित नहीं है। 13वें संसदीय चुनाव में निर्वाचित 300 सांसदों में से 174 (59 प्रतिशत) ने अपने पेशे के रूप में व्यवसाय घोषित किया है। इनमें से कम से कम 15 सांसद परिधान उद्योग से जुड़े हैं। बीएनपी ने 209 सीटें जीतीं, जिनमें उसके 145 विजयी उम्मीदवारों ने स्वयं को व्यवसायी बताया। 68 सीटें जीतने वाली जमात-ए-इस्लामी के 20 सांसद भी व्यवसायिक पृष्ठभूमि से हैं। टीआईबी के शोधकर्ता मोहम्मद तौहीदुल इस्लाम ने पिछले सप्ताह ढाका में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में 'तेरहवीं नेशनल पार्लियामेंट इलेक्शन प्रोसेस एंड एफिडेविट-बेस्ड ऑब्ज़र्वेशन' नाम की एक स्टडी पेश की, जिसमें नए चुने गए सांसदों की संपत्ति, देनदारियों और पेशेवर स्थिति का विश्लेषण किया गया था। बांग्लादेश के एक प्रमुख बंगाली अखबार बोनिक बार्टा के अनुसार, टीआईबी के अध्ययन में पाया गया कि 236 नए निर्वाचित सांसद करोड़पति हैं, जो कुल सांसदों का 79.46 प्रतिशत है। इनमें 13 अरबपति भी शामिल हैं। आंकड़ों से पता चलता है कि बीएनपी के 189 सांसद करोड़पति हैं, जो पार्टी के नव-निर्वाचित सांसदों का 90.87 प्रतिशत है, जबकि जमात के 38 सांसद करोड़पति हैं, जो उसकी संसदीय ताकत का 55.07 प्रतिशत है। यह स्थिति बांग्लादेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देती है, जहां व्यवसायी वर्ग का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। यह चिंता का विषय है क्योंकि इससे नीति निर्माण और सरकार के कामकाज में हितों के टकराव की संभावना बढ़ सकती है
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