बजट 2024-25 में किसानों की आय बढ़ाने, कृषि के आधुनिकीकरण और ग्रामीण विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है। सरकार ने कृषि शिक्षा, अनुसंधान, उन्नत तकनीकों और उच्च-मूल्य वाली फसलों को बढ़ावा देने की योजना बनाई है। ग्रामीण विकास के लिए मनरेगा के स्थान पर नई योजनाएं और महिला सशक्तिकरण पर जोर दिया गया है।
अरविंद शर्मा, नई दिल्ली। केंद्र सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती किसानों की आय बढ़ाने की रही है। बजट में इसी को ध्यान में रखकर कृषि , ग्रामीण विकास और उससे जुड़े क्षेत्रों के लिए प्रावधान किए गए हैं। सरकार का मानना है कि केवल परंपरागत खेती से किसानों की आमदनी नहीं बढ़ेगी, इसके लिए उत्पादकता बढ़ानी होगी, नकदी और उच्च-मूल्य फसलों की ओर जाना होगा और तकनीक को खेत तक पहुंचाना होगा। ग्रामीण विकास और कृषि मंत्रालय का सम्मिलित बजट अब 4.
35 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दावा किया है कि यह बजट विकसित, स्वावलंबी और रोजगारयुक्त गांवों के निर्माण को मजबूती देगा। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि राशि आवंटन के साथ योजनाओं के जमीन पर उतरने और उनके क्रियान्वयन ही असली कसौटी होगी। वर्ष 2026-27 के बजट में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के लिए कुल 1,62,671 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। कृषि विभाग को 1,40,528.78 करोड़ रुपये दिए गए हैं, जिसमें कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान पर 9,967 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इससे फसलों की नई किस्में, बेहतर तकनीक और जलवायु के अनुकूल खेती को बढ़ावा मिल सकेगा। हालांकि कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र को पिछले वर्ष के मुकाबले करीब नौ हजार करोड़ रुपये कम मिले हैं। फिर भी खेती की गुणवत्ता एवं उत्पादकता बढ़ाने, जोखिम घटाने और आय के नए स्त्रोत तैयार करने पर विशेष फोकस किया गया है। खेती के साथ गांवों को आर्थिक विकास का केंद्र बनाने का संकल्प भी दिख रहा है, क्योंकि ग्रामीण विकास के लिए 2,73,108 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष से लगभग 21 प्रतिशत अधिक है। पशुपालन, मत्स्य पालन, बागवानी पर भी जोर दिया गया है। संकेत साफ है कि किसान केवल फसल उगाने तक सीमित न रहे, बल्कि पशुपालन, मत्स्य पालन, बागवानी और मूल्यवर्धन जैसी गतिविधियों से भी जुड़ें। इसी सोच के तहत मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों के विकास की घोषणा की गई है। जाहिर है, इससे मछली उत्पादन बढ़ेगा, गांवों में रोजगार बढ़ेगा और महिला समूहों एवं मछली उत्पादकों को बाजार से जोड़ा जाएगा। किसानों की लागत कम करने के लिए खाद और उर्वरकों पर सरकार ने 1,70,944 करोड़ रुपये की सब्सिडी का प्रावधान किया है। सरकार का दावा है कि सस्ती खाद उपलब्ध होने से उत्पादन लागत घटेगी और किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। बजट में खेती के विविधीकरण पर विशेष जोर दिया गया है। परंपरागत फसलों के साथ-साथ नारियल, काजू, कोको, चंदन, बादाम और अखरोट जैसी उच्च-मूल्य वाली फसलों को बढ़ावा देने की योजना है। काजू और कोको बनेंगे प्रीमियम वैश्विक ब्रांड। नारियल के पुराने और कम उत्पादन देने वाले बागानों के पुनरुद्धार के लिए विशेष योजना लाई जाएगी। तटीय क्षेत्रों में नारियल और काजू उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान दिया जाएगा। सरकार ने लक्ष्य रखा है कि वर्ष 2030 तक भारतीय काजू और कोको को प्रीमियम वैश्विक ब्रांड के रूप में स्थापित किया जाए। इसके लिए उत्पादन के साथ-साथ प्रोसेसिंग, मूल्यवर्धन और ब्रांडिंग पर भी काम किया जाएगा। इससे किसानों को बेहतर दाम मिलने की उम्मीद है। ग्रामीण व्यवस्था को संबल देने के लिए सरकार ने मनरेगा के बदले विकसित भारत जी-रामजी योजना शुरू की है। लखपति दीदी योजना की सफलता को देखते हुए, पहली बार केंद्र सरकार ने अपने हिस्से के रूप में 95,600 करोड़ रुपये का आवंटन किया है। राज्यों के हिस्से को जोड़ने पर यह राशि एक लाख 51 हजार करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच जाएगी। इससे गांवों में रोजगार के मौके बढ़ेंगे। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। गांवों को मजबूती 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों से भी मिलेगी, जिसके तहत पंचायतों को सीधे 55,900 करोड़ रुपये से अधिक की राशि मिलेगी। इससे स्थानीय स्तर पर सड़क, पानी, तालाब और अन्य बुनियादी ढांचे के काम तेज होंगे। लखपति दीदी योजना की सफलता को आगे बढ़ाते हुए बजट में 'शी-मार्ट' की व्यवस्था की गई है। हर जिले में सामुदायिक स्वामित्व वाले रिटेल केंद्र बनाए जाएंगे, जहां स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार उत्पादों को बाजार मिलेगा। इससे ग्रामीण महिलाएं केवल आजीविका तक सीमित न रहकर उद्यमी बन सकेंगी। उत्पादकता बढ़ाने के लिए एआई टूल की मदद ली जाएगी। बजट में खेती के लिए 'भारत विस्तार' नाम से बहुभाषी एआई टूल की घोषणा की गई है, जो एग्रीस्टैक पोर्टल और आईसीएआर की कृषि पद्धतियों को जोड़कर किसानों को फसल, मौसम और बाजार से जुड़ी सलाह देगा। इसके जरिए किसानों की निर्णय लेने की क्षमता बेहतर होगी, जोखिम कम होगा और उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिलेगी। वित्त मंत्री ने कहा कि यह टूल भारत के लगभग 46.1 प्रतिशत श्रमशक्ति को टारगेट करता है, जो खेती पर निर्भर है। छोटे एवं सीमांत किसानों को सहयोग कर विकसित भारत के लक्ष्यों के साथ तालमेल बिठाने के लिए सटीक खेती में एक बड़ी छलांग है।\केंद्र सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने, कृषि और ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण बजट पेश किया है। बजट में कृषि के आधुनिकीकरण, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, और किसानों को सशक्त बनाने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। सरकार का लक्ष्य है कि किसानों को बेहतर तकनीक, बाजार तक पहुंच, और वित्तीय सहायता प्रदान करके उनकी आय में वृद्धि की जाए। इस बजट में ग्रामीण विकास पर विशेष जोर दिया गया है, जिसमें रोजगार सृजन, बुनियादी ढांचे का विकास, और महिला सशक्तिकरण शामिल हैं।\बजट में कृषि क्षेत्र के लिए कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं, जिनमें कृषि शिक्षा, अनुसंधान, और नई तकनीकों को बढ़ावा देना शामिल है। सरकार का मानना है कि उन्नत तकनीकों और बेहतर कृषि पद्धतियों के माध्यम से किसानों की उत्पादकता और आय बढ़ाई जा सकती है। इसके अलावा, बजट में उच्च-मूल्य वाली फसलों, जैसे काजू, कोको, और नारियल को बढ़ावा देने पर भी ध्यान दिया गया है। सरकार का लक्ष्य है कि इन फसलों को वैश्विक बाजार में प्रीमियम ब्रांड के रूप में स्थापित किया जाए, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य मिल सके। पशुपालन, मत्स्य पालन, और बागवानी जैसी गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जाएगा ताकि किसानों की आय में विविधता लाई जा सके।\ग्रामीण विकास के लिए बजट में महत्वपूर्ण पहल की गई हैं, जिसमें मनरेगा के स्थान पर विकसित भारत जी-रामजी योजना शुरू करना शामिल है। इस योजना का उद्देश्य गांवों में रोजगार के अवसर पैदा करना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना है। इसके अतिरिक्त, लखपति दीदी योजना की सफलता को आगे बढ़ाते हुए 'शी-मार्ट' की व्यवस्था की गई है, जिससे स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार उत्पादों को बाजार मिलेगा और ग्रामीण महिलाएं उद्यमी बन सकेंगी। बजट में एआई टूल 'भारत विस्तार' की भी घोषणा की गई है, जो किसानों को फसल, मौसम और बाजार से संबंधित जानकारी प्रदान करेगा। इन पहलों के माध्यम से, सरकार का लक्ष्य है कि ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाया जाए, जिससे किसानों का जीवन स्तर सुधारा जा सके और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके
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