पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती मुस्लिम बहुल इलाकों में मतदाताओं की संख्या में भारी वृद्धि हुई है, जो राष्ट्रीय औसत से दोगुनी है। भाजपा ने इस वृद्धि को घुसपैठ का नतीजा बताते हुए राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इस मुद्दे पर राजनीतिक घमासान शुरू हो गया...
राज्य ब्यूरो, जागरण, कोलकाता। बंगाल में पिछले दो दशक में बांग्लादेश की सीमा से सटे मुस्लिम बहुल इलाकों में देश की तुलना में मतदाताओं की संख्या में असामान्य वृद्धि दर्ज हुई है। चुनाव आयोग के आंकड़े बताते हैं कि 2002 से 2025 के दौरान उत्तर दिनाजपुर जिले में यह बढ़ोतरी 105 प्रतिशत यानी दुगुनी से भी ज्यादा है। मालदा में मतदाताओं की संख्या 95 प्रतिशत व जलपाईगुड़ी में 82 प्रतिशत बढ़ी हैं, वहीं उत्तर 24 परगना में 83 प्रतिशत व दक्षिण 24 परगना में 72 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई है, हालांकि इससे इतर कोलकाता में पिछले 23 वर्षों के दौरान मतदाताओं की संख्या में मात्र चार प्रतिशत का ही इजाफा हुआ है। मतदाताओं की संख्या में 67.
28 प्रतिशत की वृद्धि समग्र रूप से देखें तो बंगाल में 2002 से 2025 के दौरान मतदाताओं की संख्या में 67.28 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई है, जो राष्ट्रीय दर से अधिक है। 2002 में देश में लगभग 65 करोड़ मतदाता थे, जिनकी संख्या वर्तमान में करीब 97 करोड़ हो गई है। यह बढ़ोतरी 49 प्रतिशत की है। आंकड़ों के अनुसार बंगाल में 2002-2009 के दौरान मतदाताओं की संख्या में 4.99 प्रतिशत, 2009 से 2017 तक 21.8 प्रतिशत और 2017-2025 में 12 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। 2002 से 2025 तक की कुल वृद्धि 67.28 प्रतिशत की है। भाजपा ने लगाए घुसपैठ के आरोप भाजपा का आरोप है कि सीमावर्ती जिलों में बांग्लादेशी घुसपैठियों की तादाद बढ़ी है। वे ही मतदाता बनकर बैठे हुए हैं। भाजपा नेता व नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने दावा किया है कि बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से मतदाता सूची से एक करोड़ बांग्लादेशी घुसपैठियों के नाम कटेंगे।
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