विपक्षी इंडिया गठबंधन ने इस सीट से समाजवादी पार्टी के पूर्व राज्य मंत्री और 9 बार विधायक रह चुके दलित नेता अवधेश प्रसाद को चुनावी मैदान में उतारा है.
लोकसभा चुनाव के पांचवें चरण में 20 मई को जिन सीटों पर मतदान होना है उनमें से एक सीट उत्तर प्रदेश के फ़ैज़ाबाद की भी है. ज़ाहिर है, इसी साल अयोध्या में राम मंदिर में हुई प्राण-प्रतिष्ठा की वजह से ये सीट एक बार फिर सुर्ख़ियों में है.
केंद्र और उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी की सरकारों के लिए ये सीट बेहद अहम है क्योंकि बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि विवाद पर 2019 में सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला आया था जिसमें विवादित ज़मीन पर मंदिर और यहां से 24 किलोमीटर दूर धन्नीपुर में एक नई मस्जिद बनाने के आदेश दिए गए थे.दरअसल, 2017 से उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने अयोध्या को एक ‘वैश्विक नगरी’ बनाने के प्लान के तहत 10 हज़ार करोड़ रुपयों से ज़्यादा की परियोजनाओं को लॉन्च किया है.मध्य प्रदेश की राजगढ़ बन गई है 'हॉट सीट', 32 साल बाद दिग्विजय सिंह की वापसी- ग्राउंड रिपोर्टनगीना सीट पर कितनी मज़बूत है चंद्रशेखर आज़ाद की दावेदारी - ग्राउंड रिपोर्ट जौनपुर में धनंजय सिंह की पत्नी को बीएसपी का टिकट न मिलने से क्या बीजेपी को फ़ायदा होगा? - ग्राउंड रिपोर्ट अब अयोध्या में एक हवाई अड्डा भी चालू हो चुका है, यहां कई बड़े होटल और रेस्त्रां खुल चुके हैं और नामचीन बिल्डरों ने कई रिहायशी प्रोजेक्ट्स भी लॉन्च कर दिए हैं. हालांकि स्थानीय लोगों के अपने मसले भी हैं और दूसरी जगहों की तरह यहां भी चुनाव के दौरान उन पर खुल कर बात हो रही है.समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार अवधेश प्रसाद और भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार लल्लू सिंहअयोध्या निवासी और ट्रेडर्स एसोसिएशन के नंद कुमार गुप्ता के मुताबिक़, "राम मंदिर निर्माण और रामपथ बनाए जाने के बाद से इलाक़े से हटाए गए बहुत से छोटे व्यापारियों को पूरी तरह मुआवज़ा नहीं मिला है." "राम नवमी मेले पर अयोध्या में हर साल लाखों लोग आसपास के ज़िलों से आते थे, अब तो यहां वीआईपी लोगों के निरंतर आते रहने से दर्शन में भी बाधा होती है और सुरक्षा बैरिकेडों की वजह से जगह भी कम पड़ने लगी है. जो उम्मीदवार हमारी दिक़्क़तें दूर कर सके उसी को जीतना चाहिए." पिछले दो लोकसभा चुनावों में ये सीट भारतीय जनता पार्टी के लल्लू सिंह ने जीती थी जबकि उसके पहले यानी 2009 में इस सीट को कांग्रेस के निर्मल खत्री ने जीता था.लेकिन लल्लू सिंह ने जहां 2014 में 2,82,775 वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी वहीं 2019 में समाजवादी पार्टी उम्मीदवार से उनकी जीत का अंतर महज़ 65,000 रह गया था. यानी भाजपा के 5,29,021 वोट की तुलना में समाजवादी पार्टी को 4,63,544 वोट मिले थे जबकि कांग्रेस के उम्मीदवार के पास आए थे 53,386 वोट. फ़ैज़ाबाद लोकसभा सीट के महत्व को भारतीय जनता पार्टी नेतृत्व भी पूरी तरज़ीह दे रहा है क्योंकि फ़ैज़ाबाद की प्रतिष्ठित सीट को गंवाने से पार्टी के मनोबल को बड़ा झटका लग सकता है. ख़ुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ दिन पहले वहां पर राम मंदिर में दर्शन करने के बाद भाजपा प्रत्याशी लल्लू सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ एक खुली जीप में सवा घंटे का रोड शो किया. इस बारे में लल्लू सिंह ने बीबीसी से कहा, "500 वर्षों से राम मंदिर बनवाने की जो लड़ाई थी वो प्रधानमंत्री मोदी जी की लीडरशिप में पूरी हुई है." "फ़ैज़ाबाद-अयोध्या के सभी मतदाता देख रहे हैं कि सीएम योगी जी ने यहां कितना विकास किया है और न सिर्फ़ यहां बल्कि पूरे देश में भाजपा अपनी छाप छोड़ रही है."ज़ाहिर है, यहां के युवा भी इस चुनाव क्षेत्र की तरफ एकाएक बढ़े हुए फ़ोकस पर अपनी नज़र बनाए हुए हैं. अयोध्या के साकेत डिग्री कॉलेज की छात्रा पल्लवी कुमारी की उम्मीदें थोड़ी बढ़ी हैं. उन्होंने कहा, "जिसकी भी सरकार बने, जो भी उम्मीदवार जीते, हमें बस ये भरोसा चाहिए कि नौकरियां और रोज़गार के मौक़े बनें. बड़े-बड़े वादे तो सभी पार्टियाँ करती हैं, चुनाव के बाद हमारी सुध लेने कौन आता है ये देखने की बारी आ चुकी है." फ़ैज़ाबाद सिटी में रिकाबगंज के रहने वाले आशुतोष लाल इस बात से तो खुश हैं कि, "शहर में नई सड़कें बन गई हैं, रंगाई-पुताई हो रही है और पुरानी इमारतों की मरम्मत हो रही है" लेकिन आशुतोष को लगता है कि, "अयोध्या में जिस तरह से ज़मीनों और दुकानों के भाव बढ़े हैं उससे बहुत से पुराने निवासी चिंतित ज़रूर हैं. उन्हें चिंता है कि एकाएक इतने बाहरी लोगों के यहां ज़मीन ख़रीदने से क्या कुछ बदलेगा. कई लोग तो यहां बढ़ रही महंगाई और भीड़-भाड़ से निकलकर थोड़ा दूर भी जाने की भी सोच रहे हैं." विपक्षी इंडिया गठबंधन ने इस सीट से समाजवादी पार्टी के पूर्व राज्य मंत्री और 9 बार विधायक रह चुके दलित नेता अवधेश प्रसाद को चुनावी मैदान में उतारा है. बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी सच्चिदानंद पांडे और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के प्रत्याशी अरविंद सेन भी मैदान में हैं और दिन-रात चुनाव प्रचार में लगे हुए हैं.अगर भाजपा के लल्लू सिंह राम मंदिर निर्माण पर वोट मांग रहे हैं तो इंडिया ब्लॉक के अवधेश प्रसाद इस लोकसभा क्षेत्र में पांच लाख से भी ज़्यादा दलित मतदाताओं पर अपनी आस लगाए हुए हैं. अवधेश प्रसाद ने बीबीसी को बताया, "अगर मैं ये कहूं कि कोर्ट के आदेश का पालन तो सभी को करना पड़ता है तो इसमें भाजपा सरकार का क्या क्रेडिट है कि उन्होंने ही राम मंदिर का निर्माण करवाया है?" "हमारी सरकार होती और सुप्रीम कोर्ट का आदेश आता तो हम भी यही करते. भाजपा बेरोज़गारी और किसानों की समस्या की बात क्यों नहीं करती? पूरे इलाक़े में आवारा पशुओं ने इतने सालों से आतंक मचा रखा है, उस पर बात क्यों नहीं करती?"साल 1992 में अयोध्या की बाबरी मस्जिद गिराए जाने से लेकर 2024 में राम मंदिर बनने तक के सफ़र में फ़ैज़ाबाद लोकसभा क्षेत्र ने कई दिलचस्प नतीजे भी दिए हैं. 1991 और 1996 में भारतीय जनता पार्टी के विनय कटियार यहां से जीते थे जबकि 1998 में भाजपा उम्मीदवार को समाजवादी पार्टी के मित्रसेन यादव ने हरा दिया था. भाजपा के विनय कटियार ने 1999 में तीसरी बार ये सीट जीती लेकिन 2004 के चुनावों में समाजवादी पार्टी से बहुजन समाज पार्टी में शामिल हो चुके मित्रसेन यादव ने पिछली हार का बदला ले लिया.इस लोकसभा क्षेत्र में दलित वोटरों की अच्छी तादाद को ध्यान में रखते हुए बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार का चयन इस बार काफ़ी दिलचस्प बताया जा रहा है और कुछ विश्लेषकों का तो ये भी मत है कि, "बसपा के एक पूर्व-भाजपा नेता और ब्राह्मण कैंडिडेट उतारने से मौजूदा संसद लल्लू सिंह के समीकरण पर असर पड़ सकता है." दरअसल, सच्चिनान्द पांडे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और भाजपा के साथ लंबे समय तक जुड़े रहे थे और इसी साल मार्च में वे बसपा में ये कहते हुए शामिल हुए कि, "भाजपा में वे घुटन महसूस कर रहे थे." वैसे फ़ैज़ाबाद लोकसभा क्षेत्र में पांच विधानसभा सीटें आती हैं जिसमें से 2022 के विधानसभा चुनावों में चार भाजपा ने जीती थीं.दुनिया भर में फैलता चीनी जासूसों का जाल, पश्चिमी देश क्या क़दम उठा रहे हैं?चीन-रूस संबंध: पुतिन के युद्ध के लिए कितनी क़ीमत चुकाने को तैयार हैं शी जिनपिंगचुनाव लड़ने के लिए नामांकन प्रक्रिया क्या है और नॉमिनेशन फॉर्म कब खारिज हो सकता हैभावेश भिंडे: मुंबई में होर्डिंग गिरने के मामले में गिरफ़्तार शख़्स कौन?मध्य प्रदेश: लोकसभा चुनावों में भाजपा की आक्रामक 'रणनीति' कितनी कारगर होगी?
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