प्रेग्नेंसी से पहले मुझे आभास हो गया था कि मैं जुड़वा बच्चों की मां बनूंगी, डिलीवरी के 40 दिन बाद दिया ऑडिशन

जुड़वा बच्चों की मां अभिनेत्री अशिता धवन News

प्रेग्नेंसी से पहले मुझे आभास हो गया था कि मैं जुड़वा बच्चों की मां बनूंगी, डिलीवरी के 40 दिन बाद दिया ऑडिशन
टीवी एक्ट्रेस अशिता धवन का प्रेग्नेंसी का अनुभवअशिता धवन का एक्टिंग करियरटीवी एक्ट्रेस अशिता धवन की लव स्टोरी
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टीवी एक्ट्रेस आशिता धवन को पहले ही आभास हो गया था कि वो जुड़वा बच्चों की मां बनने वाली हैं। आखिर क्या थी इसकी वजह? जुड़वा बच्चों की परवरिश करना कितना मुश्किल है?

आम महिला हो या सेलिब्रिटी मां बनने का एहसास और उससे जुड़ी तकलीफें सबकी एक जैसी होती हैं। वर्किंग मदर के लिए प्रेग्नेंसी का समय ज्यादा चैलेंज से भरा होता है। टीवी सेलिब्रिटी जब जुड़वा बच्चों की मां बनती हैं तो उनकी जिंदगी में क्या बदलाव आते हैं? टीवी एक्ट्रेस आशिता धवन ने अपनी प्रेग्नेंसी के अनुभव से लेकर मां बनने के बाद की तकलीफें और पेरेंटिंग स्टाइल के बारे में हम से खुलकर बात की।मेरा प्रेग्नेंसी एक्सपीरियंस स्पेशल था प्रेग्नेंसी के मामले में मेरा मेनिफेस्टेशन बहुत काम आया। मैं अक्सर कहा करती थी कि मुझे जुड़वा बच्चे होंगे। तब मेरी फ्रेंड्स मुझ पर हंसती थी। वो मुझे डराती भी थीं कि लोगों से एक बच्चा नहीं संभलता, तुम जुड़वा बच्चों को कैसे संभालोगी। शादी के बाद हमने बेबी प्लान नहीं किया था। जब मुझे पता चला कि मैं प्रेग्नेंट हूं तो हम डॉक्टर के पास गए। जब अगले दिन हमें पहली सोनोग्राफी के लिए जाना था तो रात में मैंने शैलेश से कहा कि कितना मजा आएगा ना जब डॉक्टर कहेगी कि तुम्हारे पेट में मुझे दो हार्ट बीट्स सुनाई दे रही हैं। एक बेटा है और एक बेटी। शैलेश ने मेरी बात पर मुस्कुराते हुए हामी भरी।सुबह जब हम सोनोंग्राफी के लिए गए तो डॉक्टर ने बताया कि उन्हें दो अलग-अलग प्लेसेंटा में दो हार्ट बीट सुनाई दे रही हैं। डॉक्टर ने कहा कि हो सकता है एक लड़का हो और एक लड़की। ये सुनकर हम दोनों की आंखों में आंसू आ गए। डॉक्टर ने सोचा कि जुड़वा बच्चों की बात सुनकर हम डर गए हैं। वो हमें तसल्ली देने लगी कि घबराने की कोई बात नहीं है। जुड़वा बच्चे होना नॉर्मल है। तब हमने डॉक्टर को बताया कि कल रात ही हम जुड़वा बच्चों की कामना कर रहे थे और आज हमारी इच्छा पूरी हो गई। मैंने कभी सोचा नहीं था कि मेरा मेनिफेस्टेशन इस तरह पूरा होगा। प्रेग्नेंसी के दौरान मैं शैलेश से कहती कि लेफ्ट साइड वाली लड़की है। ये शांत है और दिल के करीब है। राइट साइड से लात मारने का अनुभव ज्यादा होता है। राइट में लड़का ही होगा। जब मेरी डिलीवरी हुई तो ये बात भी सच निकली- लेफ्ट में लड़की थी और राइट में लड़का। मेरी हाइट कम है इसलिए पेट बड़ा दिखता था प्रेग्नेंसी के दौरान मुझे कोई तकलीफ नहीं हुई। न कोई खट्टी-मीठी या चटपटी चीज खाने की इच्छा हुई और न ही किसी चीज से परहेज करने का मन हुआ। शारीरिक रूप से मुझे कोई तकलीफ नहीं हुई। लेकिन जैसे जैसे प्रेग्नेंसी का समय बीतता गया मुझे अपनी बॉडी हेवी लगने लगी। मेरी हाइट कम है इसलिए पेट ज्यादा बड़ा दिखता था। मैंने जब अपना एक वीडियो देखा तो घर के अंदर पहले मेरा पेट दिखा, फिर मैं। मेरा वजन बहुत बढ़ गया था। इससे ब्लैडर पर बुरा असर न पड़े इसलिए डिलीवरी से 2 हफ्ते पहले डॉक्टर ने मुझे बेड रेस्ट करने और घर पर ही रहने के लिए कहा। प्रेग्नेंसी के लास्ट के दो हफ्ते मैं बैठ नहीं पाती थी। हमने सिजेरियन डिलीवरी के लिए जो दिन चुना उस दिन कोई डॉक्टर उपलब्ध नहीं था इसलिए हमें अगले दिन सिजेरियन डिलीवरी करानी पड़ी। जिस दिन मेरी डिलीवरी हुई उस दिन मुझे बहुत खांसी हो रही थी। डॉक्टर ने कहा कि डिलीवरी की डेट आगे बढ़ा देते हैं। लेकिन मैं और रुकना नहीं चाहती थी। मैंने जिद की और उसी दिन जुड़वा बच्चों को जन्म दिया। मुझे पैसों की जरूरत थी मुझे दोनों बच्चों को ब्रेस्टफीडिंग कराने में बहुत तकलीफ होती थी। जब तक एक को फीड कराती, तब तक दूसरे को भूख लग जाती। डिलीवरी के बाद मैं बॉडी मसाज भी नहीं करा सकी। मुझसे पहले बच्चों की मालिश होती थी। मालिश के बाद बच्चों को भूख लगती है। एक की मालिश होते ही पहले उसे दूध पिलाती थी। लेकिन जब तक दूसरा दूध पीता तब तक पहले वाले को फिर से भूख लग जाती। इस तरह दोनों की देखभाल में समय निकल जाता और मेरी मालिश नहीं हो पाती थी। जुड़वा बच्चों के जन्म के बाद भी मेरे लिए काम से ब्रेक लेना संभव नहीं था। मुझे पैसों की जरूरत थी इसलिए डिलीवरी के बाद मैं जल्द से जल्द काम शुरू कर देना चाहती थी। तब मेरी डिलीवरी को 40 दिन ही हुए थे। मुझे ऑडिशन के लिए फोन आया तो मैंने ‘हां’ कह दिया। मैंने उन्हें पहले ही बता दिया था कि डिलीवरी के बाद मेरा वजन बढ़ गया है। फिर भी उन्होंने मुझे ऑडिशन के लिए बुलाया। उन्होंने बताया कि जो कैरेक्टर उन्होंने मेरे लिए चुना है उसके लिए बढ़ा हुआ वजन चल जाएगा। मेरे सिजेरियन डिलीवरी के टांके भी ठीक नहीं हुए थी। फिर भी मैं खुद ड्राइव करके ऑडिशन देने गई।उस दिन पहली बार मैं अपने बच्चों से 4-5 घंटे दूर रही। बच्चों को ब्रेस्टफीडिंग न करा पाने के कारण मुझे बेचैनी होने लगी। ऑडिशन देकर मैं तुरंत घर लौट आई। लेकिन 2-3 दिन बाद जवाब आया कि बढ़े हुए वजन के कारण मेरा सिलेक्शन नहीं हुआ। ये जानकार मुझे बहुत दुख हुआ। तब मैंने सोच लिया कि अब मैं वजन कम करने के बाद ही फिर से काम शुरू करूंगी। मायके से एक दिन में लौट आई जब मेरे बच्चे 7 महीने के हुए तो मैंने कुछ समय मायके जाकर इत्मीनान से मम्मी के पास रहने का प्लान बनाया। मैं दो गाड़ियों में सामान भरकर मायके गई, लेकिन वहां रह नहीं सकी। मैंने देखा कि घर में मम्मी की अपनी जिम्मेदारियां हैं। ऐसे में मेरी और मेरे जुड़वा बच्चों की देखभाल मम्मी कैसे कर सकेंगी। मुझे मम्मी को तकलीफ देना अच्छा नहीं लगा इसलिए मैं अगले ही दिन वापस ससुराल आ गई। मम्मी को मेरा ऐसे लौटना बुरा लगा। वो रोने लगीं। मैंने मम्मी को समझाया कि मैं उनका प्यार समझती हूं। लेकिन जुड़वा बच्चों की देखभाल करना उनके बस की बात नहीं है। जिस दिन मैं मम्मी के घर गई उसी दिन मुझे कपिल शर्मा के शो 'कॉमेडी नाइट्स विद कपिल' के ऑडिशन के लिए बुलाया गया। तब मेरे बच्चे 7 महीने के थे। मुझे कपिल शर्मा की वाइफ का रोल ऑफर किया जा रहा था। लेकिन मम्मी के घर पर बच्चों को छोड़कर मैं नहीं जा सकी। मैंने उनसे कहा कि मैं कल आ सकती हूं, लेकिन वो नहीं माने। बाद में मुझे ‘ना’ कहने का बहुत अफसोस हुआ। उस दिन अगर मैं किसी तरह जुगाड़ करके ऑडिशन दे देती, तो मेरे करियर की दिशा बदल सकती थी। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। उसके बाद एक ऑफर ऐसा भी आया जहां मुझे बहुत कम पैसे में काम करने को कहा गया। मुझे पैसों की जरूरत थी, लेकिन वो काम भी नहीं मिला। फिर मैंने तय कर लिया कि अब या तो अपनी शर्तों पर काम करूंगी या काम ही नहीं करूंगी। मैंने अपनी फिटनेस पर काम करना शुरू किया। राजन शाही ने बनाया मेरा करियर मेरे बच्चे जब एक साल के हुए तो राजन शाही जी ने एक बार फिर मेरे करियर को नई दिशा दी। उन्होंने मुझे ‘और प्यार हो गया’ शो ऑफर किया। ‘बिदाई’ शो की तरह ही राजन शाही जी ने एक बार फिर मुझे घर-घर में पहुंचा दिया। उसके बाद पीछे मुड़कर देखने की जरूरत नहीं पड़ी। एक के बाद एक शो मिलता रहा और मुझे फिर कभी खाली नहीं बैठना पड़ा। पिछले साल ही हमने मेरे ससुरजी को खोया। मेरी सासूमां की तबीयत भी अब ठीक नहीं रहती। उन्हें डिमेंशिया है। अब मुझे पहले के मुकाबले परिवार को ज्यादा समय देना होता है। अच्छी बात ये है कि अब मैं करियर और पर्सनल लाइफ में बैलेंस बना पा रही हूं। अब न करियर से शिकायत है और न ही पर्सनल लाइफ से। टेलीविजन के लिए काम करने के कई फायदे हैं। यहां काम के साथ साथ परिवार को संभालने की सहूलियत मिल जाती है। आप अपने लिए ऐसा किरदार चुन सकते हैं जिसके लिए आपको घंटों सेट पर रहने की जरूरत न पड़े। अगर आप टैलेंटेड हैं तो काम की कोई कमी नहीं है। प्री-टीन को संभालना आसान नहीं अब बच्चे अपने कई काम खुद कर लेते हैं। लेकिन प्री-टीन बच्चों को संभालना एक बड़ी जिम्मेदारी है। हर समय ये चिंता रहती है कि कहीं बच्चे गलत संगत या गलत कंटेंट के चक्कर में न फंस जाएं। मैं हर समय बच्चों के पीछे नहीं पड़ती, लेकिन इस बात का ध्यान जरूर रखती हूं कि बच्चे किस समय क्या कर रहे हैं। कल की ही बात करूं तो जब मैं घर पहुंची तो देखा दोनों बच्चे टीवी देखते हुए खाना खा रहे थे। मुझे गुस्सा आ गया। मैंने हमेशा इस बात का ध्यान रखा है कि बच्चे खाना खाते समय टीवी न देखें। खाना खाते समय उनका ध्यान कहीं और न हो। लेकिन जब बच्चे ऐसा नहीं करते तो मुझे उन्हें डांटना पड़ता है। मेरे दोनों बच्चों की अच्छी बात ये है कि वो आपस में खेलते रहते हैं इसलिए बोर नहीं होते। मेरा ये मानना है कि बच्चों के मन को जानने के लिए उनसे बातें करना जरूरी है। मैं अपने बच्चों से हर तरह की बातें करती हूं। उन्हें ‘गुड टच बैड टच’ के बारे में बताती हूं। बेटी के पीरियड्स शुरू होने से पहले मैंने उसे मानसिक रूप से तैयार कर लिया। शैलेश बच्चों के साथ बोल्ड विषय पर बात नहीं कर पाते। उन्हें इसमें हिचक महसूस होती है। लेकिन मैं बच्चों से हर तरह की बातें कर लेती हूं। रिश्ते की खुशहाली इसी में है कि पति-पत्नी दोनों एक दूसरे के काम की कद्र करें। घर में क्वालिटी टाइम बिताएं और बिजी शेड्यूल में एक दूसरे को सपोर्ट करें। शैलेश और मैंने हमारे घर की बालकनी में कई रातें जागकर बिताई हैं। ये हमारी फेवरेट जगह है। जब भी फुर्सत मिलती है हम दोनों यहीं आकर बैठ जाते हैं। मैं शैलेश पर कई जोक्स क्रैक करती हूं। मैं अक्सर कहती हूं कि अगर मैं स्टैंडअप कॉमेडियन बन गई तो शैलेश पर जोक्स क्रैक करके करोड़पति बन सकती हूं।.

आम महिला हो या सेलिब्रिटी मां बनने का एहसास और उससे जुड़ी तकलीफें सबकी एक जैसी होती हैं। वर्किंग मदर के लिए प्रेग्नेंसी का समय ज्यादा चैलेंज से भरा होता है। टीवी सेलिब्रिटी जब जुड़वा बच्चों की मां बनती हैं तो उनकी जिंदगी में क्या बदलाव आते हैं? टीवी एक्ट्रेस आशिता धवन ने अपनी प्रेग्नेंसी के अनुभव से लेकर मां बनने के बाद की तकलीफें और पेरेंटिंग स्टाइल के बारे में हम से खुलकर बात की।मेरा प्रेग्नेंसी एक्सपीरियंस स्पेशल था प्रेग्नेंसी के मामले में मेरा मेनिफेस्टेशन बहुत काम आया। मैं अक्सर कहा करती थी कि मुझे जुड़वा बच्चे होंगे। तब मेरी फ्रेंड्स मुझ पर हंसती थी। वो मुझे डराती भी थीं कि लोगों से एक बच्चा नहीं संभलता, तुम जुड़वा बच्चों को कैसे संभालोगी। शादी के बाद हमने बेबी प्लान नहीं किया था। जब मुझे पता चला कि मैं प्रेग्नेंट हूं तो हम डॉक्टर के पास गए। जब अगले दिन हमें पहली सोनोग्राफी के लिए जाना था तो रात में मैंने शैलेश से कहा कि कितना मजा आएगा ना जब डॉक्टर कहेगी कि तुम्हारे पेट में मुझे दो हार्ट बीट्स सुनाई दे रही हैं। एक बेटा है और एक बेटी। शैलेश ने मेरी बात पर मुस्कुराते हुए हामी भरी।सुबह जब हम सोनोंग्राफी के लिए गए तो डॉक्टर ने बताया कि उन्हें दो अलग-अलग प्लेसेंटा में दो हार्ट बीट सुनाई दे रही हैं। डॉक्टर ने कहा कि हो सकता है एक लड़का हो और एक लड़की। ये सुनकर हम दोनों की आंखों में आंसू आ गए। डॉक्टर ने सोचा कि जुड़वा बच्चों की बात सुनकर हम डर गए हैं। वो हमें तसल्ली देने लगी कि घबराने की कोई बात नहीं है। जुड़वा बच्चे होना नॉर्मल है। तब हमने डॉक्टर को बताया कि कल रात ही हम जुड़वा बच्चों की कामना कर रहे थे और आज हमारी इच्छा पूरी हो गई। मैंने कभी सोचा नहीं था कि मेरा मेनिफेस्टेशन इस तरह पूरा होगा। प्रेग्नेंसी के दौरान मैं शैलेश से कहती कि लेफ्ट साइड वाली लड़की है। ये शांत है और दिल के करीब है। राइट साइड से लात मारने का अनुभव ज्यादा होता है। राइट में लड़का ही होगा। जब मेरी डिलीवरी हुई तो ये बात भी सच निकली- लेफ्ट में लड़की थी और राइट में लड़का। मेरी हाइट कम है इसलिए पेट बड़ा दिखता था प्रेग्नेंसी के दौरान मुझे कोई तकलीफ नहीं हुई। न कोई खट्टी-मीठी या चटपटी चीज खाने की इच्छा हुई और न ही किसी चीज से परहेज करने का मन हुआ। शारीरिक रूप से मुझे कोई तकलीफ नहीं हुई। लेकिन जैसे जैसे प्रेग्नेंसी का समय बीतता गया मुझे अपनी बॉडी हेवी लगने लगी। मेरी हाइट कम है इसलिए पेट ज्यादा बड़ा दिखता था। मैंने जब अपना एक वीडियो देखा तो घर के अंदर पहले मेरा पेट दिखा, फिर मैं। मेरा वजन बहुत बढ़ गया था। इससे ब्लैडर पर बुरा असर न पड़े इसलिए डिलीवरी से 2 हफ्ते पहले डॉक्टर ने मुझे बेड रेस्ट करने और घर पर ही रहने के लिए कहा। प्रेग्नेंसी के लास्ट के दो हफ्ते मैं बैठ नहीं पाती थी। हमने सिजेरियन डिलीवरी के लिए जो दिन चुना उस दिन कोई डॉक्टर उपलब्ध नहीं था इसलिए हमें अगले दिन सिजेरियन डिलीवरी करानी पड़ी। जिस दिन मेरी डिलीवरी हुई उस दिन मुझे बहुत खांसी हो रही थी। डॉक्टर ने कहा कि डिलीवरी की डेट आगे बढ़ा देते हैं। लेकिन मैं और रुकना नहीं चाहती थी। मैंने जिद की और उसी दिन जुड़वा बच्चों को जन्म दिया। मुझे पैसों की जरूरत थी मुझे दोनों बच्चों को ब्रेस्टफीडिंग कराने में बहुत तकलीफ होती थी। जब तक एक को फीड कराती, तब तक दूसरे को भूख लग जाती। डिलीवरी के बाद मैं बॉडी मसाज भी नहीं करा सकी। मुझसे पहले बच्चों की मालिश होती थी। मालिश के बाद बच्चों को भूख लगती है। एक की मालिश होते ही पहले उसे दूध पिलाती थी। लेकिन जब तक दूसरा दूध पीता तब तक पहले वाले को फिर से भूख लग जाती। इस तरह दोनों की देखभाल में समय निकल जाता और मेरी मालिश नहीं हो पाती थी। जुड़वा बच्चों के जन्म के बाद भी मेरे लिए काम से ब्रेक लेना संभव नहीं था। मुझे पैसों की जरूरत थी इसलिए डिलीवरी के बाद मैं जल्द से जल्द काम शुरू कर देना चाहती थी। तब मेरी डिलीवरी को 40 दिन ही हुए थे। मुझे ऑडिशन के लिए फोन आया तो मैंने ‘हां’ कह दिया। मैंने उन्हें पहले ही बता दिया था कि डिलीवरी के बाद मेरा वजन बढ़ गया है। फिर भी उन्होंने मुझे ऑडिशन के लिए बुलाया। उन्होंने बताया कि जो कैरेक्टर उन्होंने मेरे लिए चुना है उसके लिए बढ़ा हुआ वजन चल जाएगा। मेरे सिजेरियन डिलीवरी के टांके भी ठीक नहीं हुए थी। फिर भी मैं खुद ड्राइव करके ऑडिशन देने गई।उस दिन पहली बार मैं अपने बच्चों से 4-5 घंटे दूर रही। बच्चों को ब्रेस्टफीडिंग न करा पाने के कारण मुझे बेचैनी होने लगी। ऑडिशन देकर मैं तुरंत घर लौट आई। लेकिन 2-3 दिन बाद जवाब आया कि बढ़े हुए वजन के कारण मेरा सिलेक्शन नहीं हुआ। ये जानकार मुझे बहुत दुख हुआ। तब मैंने सोच लिया कि अब मैं वजन कम करने के बाद ही फिर से काम शुरू करूंगी। मायके से एक दिन में लौट आई जब मेरे बच्चे 7 महीने के हुए तो मैंने कुछ समय मायके जाकर इत्मीनान से मम्मी के पास रहने का प्लान बनाया। मैं दो गाड़ियों में सामान भरकर मायके गई, लेकिन वहां रह नहीं सकी। मैंने देखा कि घर में मम्मी की अपनी जिम्मेदारियां हैं। ऐसे में मेरी और मेरे जुड़वा बच्चों की देखभाल मम्मी कैसे कर सकेंगी। मुझे मम्मी को तकलीफ देना अच्छा नहीं लगा इसलिए मैं अगले ही दिन वापस ससुराल आ गई। मम्मी को मेरा ऐसे लौटना बुरा लगा। वो रोने लगीं। मैंने मम्मी को समझाया कि मैं उनका प्यार समझती हूं। लेकिन जुड़वा बच्चों की देखभाल करना उनके बस की बात नहीं है। जिस दिन मैं मम्मी के घर गई उसी दिन मुझे कपिल शर्मा के शो 'कॉमेडी नाइट्स विद कपिल' के ऑडिशन के लिए बुलाया गया। तब मेरे बच्चे 7 महीने के थे। मुझे कपिल शर्मा की वाइफ का रोल ऑफर किया जा रहा था। लेकिन मम्मी के घर पर बच्चों को छोड़कर मैं नहीं जा सकी। मैंने उनसे कहा कि मैं कल आ सकती हूं, लेकिन वो नहीं माने। बाद में मुझे ‘ना’ कहने का बहुत अफसोस हुआ। उस दिन अगर मैं किसी तरह जुगाड़ करके ऑडिशन दे देती, तो मेरे करियर की दिशा बदल सकती थी। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। उसके बाद एक ऑफर ऐसा भी आया जहां मुझे बहुत कम पैसे में काम करने को कहा गया। मुझे पैसों की जरूरत थी, लेकिन वो काम भी नहीं मिला। फिर मैंने तय कर लिया कि अब या तो अपनी शर्तों पर काम करूंगी या काम ही नहीं करूंगी। मैंने अपनी फिटनेस पर काम करना शुरू किया। राजन शाही ने बनाया मेरा करियर मेरे बच्चे जब एक साल के हुए तो राजन शाही जी ने एक बार फिर मेरे करियर को नई दिशा दी। उन्होंने मुझे ‘और प्यार हो गया’ शो ऑफर किया। ‘बिदाई’ शो की तरह ही राजन शाही जी ने एक बार फिर मुझे घर-घर में पहुंचा दिया। उसके बाद पीछे मुड़कर देखने की जरूरत नहीं पड़ी। एक के बाद एक शो मिलता रहा और मुझे फिर कभी खाली नहीं बैठना पड़ा। पिछले साल ही हमने मेरे ससुरजी को खोया। मेरी सासूमां की तबीयत भी अब ठीक नहीं रहती। उन्हें डिमेंशिया है। अब मुझे पहले के मुकाबले परिवार को ज्यादा समय देना होता है। अच्छी बात ये है कि अब मैं करियर और पर्सनल लाइफ में बैलेंस बना पा रही हूं। अब न करियर से शिकायत है और न ही पर्सनल लाइफ से। टेलीविजन के लिए काम करने के कई फायदे हैं। यहां काम के साथ साथ परिवार को संभालने की सहूलियत मिल जाती है। आप अपने लिए ऐसा किरदार चुन सकते हैं जिसके लिए आपको घंटों सेट पर रहने की जरूरत न पड़े। अगर आप टैलेंटेड हैं तो काम की कोई कमी नहीं है। प्री-टीन को संभालना आसान नहीं अब बच्चे अपने कई काम खुद कर लेते हैं। लेकिन प्री-टीन बच्चों को संभालना एक बड़ी जिम्मेदारी है। हर समय ये चिंता रहती है कि कहीं बच्चे गलत संगत या गलत कंटेंट के चक्कर में न फंस जाएं। मैं हर समय बच्चों के पीछे नहीं पड़ती, लेकिन इस बात का ध्यान जरूर रखती हूं कि बच्चे किस समय क्या कर रहे हैं। कल की ही बात करूं तो जब मैं घर पहुंची तो देखा दोनों बच्चे टीवी देखते हुए खाना खा रहे थे। मुझे गुस्सा आ गया। मैंने हमेशा इस बात का ध्यान रखा है कि बच्चे खाना खाते समय टीवी न देखें। खाना खाते समय उनका ध्यान कहीं और न हो। लेकिन जब बच्चे ऐसा नहीं करते तो मुझे उन्हें डांटना पड़ता है। मेरे दोनों बच्चों की अच्छी बात ये है कि वो आपस में खेलते रहते हैं इसलिए बोर नहीं होते। मेरा ये मानना है कि बच्चों के मन को जानने के लिए उनसे बातें करना जरूरी है। मैं अपने बच्चों से हर तरह की बातें करती हूं। उन्हें ‘गुड टच बैड टच’ के बारे में बताती हूं। बेटी के पीरियड्स शुरू होने से पहले मैंने उसे मानसिक रूप से तैयार कर लिया। शैलेश बच्चों के साथ बोल्ड विषय पर बात नहीं कर पाते। उन्हें इसमें हिचक महसूस होती है। लेकिन मैं बच्चों से हर तरह की बातें कर लेती हूं। रिश्ते की खुशहाली इसी में है कि पति-पत्नी दोनों एक दूसरे के काम की कद्र करें। घर में क्वालिटी टाइम बिताएं और बिजी शेड्यूल में एक दूसरे को सपोर्ट करें। शैलेश और मैंने हमारे घर की बालकनी में कई रातें जागकर बिताई हैं। ये हमारी फेवरेट जगह है। जब भी फुर्सत मिलती है हम दोनों यहीं आकर बैठ जाते हैं। मैं शैलेश पर कई जोक्स क्रैक करती हूं। मैं अक्सर कहती हूं कि अगर मैं स्टैंडअप कॉमेडियन बन गई तो शैलेश पर जोक्स क्रैक करके करोड़पति बन सकती हूं।

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