योगी आदित्यनाथ की पहचान हिंदुत्व के प्रखर नेता के तौर पर पूरे सूबे में है
उत्तर प्रदेश में साल 2017 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की सोशल इंजीनियरिंग और हिंदुत्व कार्ड से मिले प्रचंड बहुमत के बाद यह कयास लगाए जा रहे थे कि किसी ओबीसी को राज्य का मुख्यमंत्री बनाया जाएगा.
लेकिन बीजेपी ने सांसद योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाकर सभी को चौंका दिया. गैर-यादव ओबीसी और हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण ने एक-दूसरे के धुर विरोधी समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी को सोचने को मजबूर कर दिया कि 2019 के लोकसभा चुनाव में अपनी राजनीतिक साख बचानी है तो साथ आना होगा. योगी आदित्यनाथ की पहचान हिंदुत्व के प्रखर नेता के तौर पर पूरे सूबे में है, जो आगामी चुनाव में बीजेपी के कोर वोट को संगठित रखने के लिहाज से निर्णायक साबित हो सकती है. वहीं ब्राह्मण दिनेश शर्मा और ओबीसी केशव प्रसाद मौर्या को उप-मुख्यमंत्री बनाकर बीजेपी ने सभी वर्गों को संतुष्ट करने की कोशिश की. बीजेपी के समाने साथ आए गैर-यादव ओबीसी वोट को बनाए रखने की चुनौती भी थी. लिहाजा बीजेपी ने लोकसभा चुनाव के मद्देनजर केशव प्रसाद मौर्या की अगुवाई में अलग-अलग जातियों का सम्मेलन कर उन्हें साधने की कोशिश की. यूपी की सियासी जमीन में यह इबारत तब लिखी जा रही थी जब विधानसभा चुनाव में सूबे की जनता को यूपी के लड़कों का साथ पसंद नहीं आया मसलन कांग्रेस-सपा गठबंधन को जनता ने नकार दिया था. ऐसी परिस्थिति ने यूपी के दो बड़े विपक्षी दल सपा और बसपा को अपनी राजनीतिक साख बचाने के लिए सोचने को मजबूर कर दिया. लेकिन अभी इस पर औपचारिक मुहर लगना बाकी थी. गोरखपुर सांसद योगी आदित्यनाथ और फूलपुर सांसद केशव प्रसाद मौर्या के मुख्यमंत्री व उप-मुख्यमंत्री बनने के साथ खाली हुई दो लोकसभा सीटों ने इन दोनों दलों को प्रयोग का एक मौका दिया. सूबे में गोरखपुर, फूलपुर और सांसद हुकुम सिंह के निधन से खाली हुई कैराना लोकसभा सीट पर उप-चुनाव हुए. हालांकि बीएसपी का इतिहास रहा है कि पार्टी उप-चुनावों में दिलचस्पी नहीं दिखाती. लेकिन इस बार का उप-चुनाव मायावती और अखिलेश यादव के लिए साख की लड़ाई थी. क्योंकि अखिलेश यादव सपा की कमान संभालने के बाद विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से गठबंधन के बावजूद बुरी तरह असफल हो चुके थे. वहीं मायावती की बीएसपी का प्रदर्शन भी कुछ खास नहीं रहा. ऐसे में कभी उप-चुनाव ना लड़ने वाली बीएसपी ने एक प्रयोग के तौर पर गठबंधन के उम्मीदवारों का समर्थन किया. इसका नतीजा यह हुआ कि बीजेपी उत्तर प्रदेश की तीनों सीटों पर हार गई और देश में इस तरह का माहौल बना कि बीजेपी अजेय नहीं है. जानकारों की मानें तो उप-चुनाव में सपा-बसपा-राष्ट्रीय लोकदल गठबंधन की जीत ने विपक्षी गठबंधन की नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. और आज की तारीख में सपा-बसपा-रालोद गठबंधन सूबे में गठबंधन के साथ बीजेपी को चुनौती देने के लिए तैयार खड़े दिख रहे हैं. लिहाजा यह स्पष्ट है कि बीजेपी की आक्रामक राष्ट्रवादी राजनीति के साथ-साथ सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले के सामने बड़े विपक्षी दलों के पास साथ आने के अलावा कोई चारा नहीं था. क्योंकि सपा-बसपा ने पहले 2014 और फिर 2017 में एक दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़कर देख लिया था कि अगर उत्तर प्रदेश में अपनी सियासी दाल गलानी है तो उन्हें गठबंधन की खिचड़ी पकानी ही होगी.
United States Latest News, United States Headlines
Similar News:You can also read news stories similar to this one that we have collected from other news sources.
जैसलमेर के सीमावर्ती इलाके में पाक के लिए जासूसी के आरोप में एक व्यक्ति गिरफ्तारगौरतलब है कि भारत-पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण माहौल के चलते जैसलमेर में अब तक एक दर्जन संदिग्धों को पकड़ा जा चुका है.
Read more »
पूर्व बीजेपी सांसद पटोले कांग्रेस के टिकट पर नागपुर में गडकरी के खिलाफ ठोकेंगे तालLok Sabha Elecetion 2019 लोकसभा चुनाव की घोषणा होते ही सभी दल प्रत्याशियों को घोषित करने में लगे हैं. इस बार महाराष्ट्र की नागपुर सीट पर बीजेपी के कद्दावर नेता और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को चुनौती देने के लिए कांग्रेस ने बीजेपी के ही पूर्व सांसद नानाभाऊ पटोले को मैदान में उतारा है. आइये जानते हैं नाना पटोले के बारे में जो कांग्रेस के झंडे तले आरएसएस के गढ़ में बीजेपी को चुनौती देंगे.
Read more »
दो दिन में कांग्रेस को दूसरा झटका, शशि थरूर के चाचा-चाची भाजपा में शामिलथरूर की चाची शोभना शशिकुमार और उनके पति शशिकुमार ने कहा कि वे लंबे वक्त से भाजपा के समर्थक रहे हैं।
Read more »
अमेरिका में टेक्सस के अस्पताल में महिला ने दिया छह बच्चों को जन्म-Navbharat Timesटेक्सस के ह्यूस्टन में एक महिला ने छह बच्चों को एकसाथ जन्म दिया है। दुनियाभर में 4.7 अरब में से कोई एक मामला ही ऐसा होता है, जब कोई महिला छह बच्चों को जन्म देती है।
Read more »
