पूर्वांचल में बिरादरी पहले, दल दूसरे नंबर पर और सबसे अंत में आते हैं मुद्दे

United States News News

पूर्वांचल में बिरादरी पहले, दल दूसरे नंबर पर और सबसे अंत में आते हैं मुद्दे
United States Latest News,United States Headlines
  • 📰 Dainik Bhaskar
  • ⏱ Reading Time:
  • 235 sec. here
  • 5 min. at publisher
  • 📊 Quality Score:
  • News: 97%
  • Publisher: 51%

In the Purvanchal the fraternity first, the parties come to the second and the last ones | सपा यहां सिर्फ एक सीट पर, इस बार बसपा संग सपा का गठबंधन भाजपा को नुकसान पहुंचा सकता है आजमगढ़, लालगंज, घोसी, बलिया, जौनपुर और मछलीशहर संसदीय क्षेत्र में जातिगत समीकरण ही जीत की गारंटी

आजमगढ़, लालगंज, घोसी, बलिया, जौनपुर और मछलीशहर संसदीय क्षेत्र में जातिगत समीकरण ही जीत की गारंटी आजमगढ़ के बीचों-बीच टूटी सड़क व भीड़-भाड़ वाले कलेक्ट्रेट परिसर से लगा हुआ है लीडराबाद। राजनीतिक चिंतन का अहम अड्डा। छुटभैये नेता-कार्यकर्ता से लेकर शायर, शिक्षक, प्रोफेसर तक चाय की चुस्कियों के बीच चुनावी चर्चा में व्यस्त दिखे। चर्चा सपा-बसपा के गठबंधन से बनने वाले जातीय गठजोड़ और भाजपा के विकास-राष्ट्रीयता जैसे मुद्दों के नफा-नुकसान पर आधारित थी। राहुल सांस्कृतयायन का गांव पन्दहा , कैफी आजमी का गांव मिंजवां, अमर सिंह का गांव तरवां, बाटला हाउस कांड के आरोपियों का गांव संजरपुर और अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम के गांव सराय मीर के कारण आजमगढ़ हमेशा से सुर्खियाें में रहा है। इन गांवों के युवा रोजगार नहीं होने से चिंतित तो दिखे लेकिन चुनाव की बात आने पर जातीय गणित समझाने लगते हैं। आजमगढ़, लालगंज, घोसी, बलिया, जौनपुर और मछलीशहर संसदीय क्षेत्र में जातिगत समीकरण ही जीत की गारंटी हैं। क्षेत्र के पिछड़े होने के बावजूद भी यहां बिरादरी फर्स्ट, दल सेकंड और मुद्दा लास्ट है। जातियों में गुंथी यहां की राजनीति में हर सवाल का जवाब जाति ही है। फिर चाहे रोजगार हो, आरक्षण हो, विकास या कोई अन्य मुद्दा हो। आजमगढ़ 2014 के चुनावों के समय उस वक्त सुर्खियों में आया जब समाजवादी पार्टी के तत्कालीन अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने यहां से लड़ने का ऐलान किया। भाजपा की सुनामी में सपा इस इलाके में सिर्फ यही सीट जीत पाई थी। यह सीट यादव और मुसलमान बहुल है। ऐसे में सपा की संभावनाएं यहां मजबूत है। सपा से यहां इस बार अखिलेश यादव या मैनपुरी के सांसद और लालू प्रसाद यादव के दामाद तेज प्रताप सिंह यादव के लड़ने की चर्चा है। जबकि भाजपा के पास यहां सबसे मजबूत चेहरा पूर्व सांसद रमाकांत यादव हैं। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर का चुनाव क्षेत्र रहे बलिया में सपा से चंद्रशेखर के बेटे नीरज शेखर को फिर से टिकट मिलने की संभावना है। राजपूत-भूमिहार वोटों की बहुलता वाली सीट पर कांटे की टक्कर की संभावना है। लालगंज सीट पर बसपा मजबूत दिखती है, इसका आधार जातिगत वोट है। यहां सोनकर, यादव और जाटव वोट सर्वाधिक हैं। यहां कांग्रेस ने पंकज मोहन सोनकर को टिकट दिया है। जबकि भाजपा मौजूदा सांसद नीलम सोनकर पर ही दांव लगा सकती है। घोसी सीट पर भाजपा मुश्किल में फंसी है, मौजूदा सांसद हरिनारायण राजभर को फिर टिकट मिलने पर संशय है, यहां से योगी सरकार के मंत्री दारा सिंह चौहान को दावेदार माना जा रहा है, वे पिछली बार बसपा से प्रत्याशी थे। यहां गठबंधन से माफिया डॉन मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी के चुनाव लड़ने की चर्चा भी है। यहां करीब दो लाख मुस्लिम वोट हैं। क्षेत्र की राजनीतिक के संबंध में बात करते हुए शिब्ली नेशनल कॉलेज के पॉलिटिकल साइंस विभाग के प्रमुख और प्रिंसिपल गयास असद खान कहते हैं कि यहां लोग तमाम मुद्दों की बात तो करते हैं लेकिन जिस दिन वोट देते हैं जाति को ही याद करते हैं। मुसलमान उस पार्टी के साथ जाएंगे, जो पार्टी भाजपा को हराएगी। प्रियंका के कारण मुसलमान जरूर आकर्षित होंगे। सामाजिक कार्यकर्ता और अखिल भारतीय किसान महासभा के प्रदेश अध्यक्ष जयप्रकाश नारायण राय कहते हैं कि यहां 90% से अधिक सीमांत किसानों का क्षेत्र है इसलिए प्रदेश सरकार की कर्ज माफी और केंद्र सरकार की छह हजार रुपए प्रतिवर्ष देने की घोषणा का कुछ फायदा भाजपा को होगा। आजमगढ़ में मुलायम सिंह यादव बीते पांच साल में दो बार ही आए हैं। हालांकि पांच साल के दौरान कई विकास कार्य उन्होंने करवाए हैं। उनमें सठियांव में बंद चीनी मिल चालू कराई, अतरौलिया में 200 बैड का अस्पताल, कृषि विवि का कैंपस और नए कलेक्ट्रेट भवन का निर्माण शामिल है। हालांकि मुलायम सिंह द्वारा गोद लिए सांसद आदर्श गांव तमौली की स्थिति बदतर है। यादव बहुल 3636 आबादी वाले गांव में 32 प्रोजेक्ट की कार्ययोजना बनी थी लेकिन ज्यादातर पर कार्य नहीं हुआ। भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष और बलिया संसदीय सीट के प्रभारी प्रेम प्रकाश बताते हैं कि विधानसभा में हम एक सीट जीते लेकिन तीन सीटों पर हमारी हार का अंतर दो से तीन हजार है। इसलिए हमें गठबंधन हल्के में नहीं ले सकता। मोदी-योगी के कार्य से एंटी इनकम्बेंसी जैसी स्थिति नहीं है। पूर्वांचल एक्सप्रेस वे बना एक भी विवाद नहीं हुआ। एयरस्ट्राइक में जो दृढ़ता दिखाई उसका फायदा मिलेगा। यूपी में बसपा-सपा-रालोद का गठबंधन है। आजमगढ़, बलिया से सपा तो लालगंज, घोसी, जौनपुर और मछली शहर बसपा के हिस्से में आई है। 2014 में लालगंज में सपा दूसरे नंबर पर थी बावजूद इसके गठबंधन में सीट बसपा को दी। भाजपा का यहां यूं तो अपना दल और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी से गठबंधन है। क्षेत्र में इन दलों का सीमित प्रभाव है।पिछड़ापन, बेराजगारी और विकास सबसे बड़ा मुद्दा है। रोजगार के लिए पलायन, आवारा पशु, किसानों की बदहाली और अपराध भी मुद्दा है। किसानों की अधिक संख्या के कारण किसान सम्मान योजना की भी चर्चा। यहां जाति पार्टी और मुद्दों पर भारी है। आजमगढ़ में यूनिवर्सिटी का मुद्दा भी अहम था, आचार संहिता से पहले राज्य सरकार ने मंजूरी दे दी।यादव, जाटव और मुसलमान वोटों की तादाद ज्यादा है। इस वोट को सपा-बसपा गठबंधन अपने साथ मानता है। वहीं भाजपा को गैर यादव के अलावा पटेल, राजभर और गैर जाटव अनुसूचित जातियों का सहारा है। हालांकि भाजपा यहां यादव और जाटव वोटों में सेंध की कोशिश में है। पटेल और राजभर वोटों के लिए भाजपा ने अपना दल और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी से गठबंधन किया है।.

आजमगढ़, लालगंज, घोसी, बलिया, जौनपुर और मछलीशहर संसदीय क्षेत्र में जातिगत समीकरण ही जीत की गारंटी आजमगढ़ के बीचों-बीच टूटी सड़क व भीड़-भाड़ वाले कलेक्ट्रेट परिसर से लगा हुआ है लीडराबाद। राजनीतिक चिंतन का अहम अड्डा। छुटभैये नेता-कार्यकर्ता से लेकर शायर, शिक्षक, प्रोफेसर तक चाय की चुस्कियों के बीच चुनावी चर्चा में व्यस्त दिखे। चर्चा सपा-बसपा के गठबंधन से बनने वाले जातीय गठजोड़ और भाजपा के विकास-राष्ट्रीयता जैसे मुद्दों के नफा-नुकसान पर आधारित थी। राहुल सांस्कृतयायन का गांव पन्दहा , कैफी आजमी का गांव मिंजवां, अमर सिंह का गांव तरवां, बाटला हाउस कांड के आरोपियों का गांव संजरपुर और अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम के गांव सराय मीर के कारण आजमगढ़ हमेशा से सुर्खियाें में रहा है। इन गांवों के युवा रोजगार नहीं होने से चिंतित तो दिखे लेकिन चुनाव की बात आने पर जातीय गणित समझाने लगते हैं। आजमगढ़, लालगंज, घोसी, बलिया, जौनपुर और मछलीशहर संसदीय क्षेत्र में जातिगत समीकरण ही जीत की गारंटी हैं। क्षेत्र के पिछड़े होने के बावजूद भी यहां बिरादरी फर्स्ट, दल सेकंड और मुद्दा लास्ट है। जातियों में गुंथी यहां की राजनीति में हर सवाल का जवाब जाति ही है। फिर चाहे रोजगार हो, आरक्षण हो, विकास या कोई अन्य मुद्दा हो। आजमगढ़ 2014 के चुनावों के समय उस वक्त सुर्खियों में आया जब समाजवादी पार्टी के तत्कालीन अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने यहां से लड़ने का ऐलान किया। भाजपा की सुनामी में सपा इस इलाके में सिर्फ यही सीट जीत पाई थी। यह सीट यादव और मुसलमान बहुल है। ऐसे में सपा की संभावनाएं यहां मजबूत है। सपा से यहां इस बार अखिलेश यादव या मैनपुरी के सांसद और लालू प्रसाद यादव के दामाद तेज प्रताप सिंह यादव के लड़ने की चर्चा है। जबकि भाजपा के पास यहां सबसे मजबूत चेहरा पूर्व सांसद रमाकांत यादव हैं। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर का चुनाव क्षेत्र रहे बलिया में सपा से चंद्रशेखर के बेटे नीरज शेखर को फिर से टिकट मिलने की संभावना है। राजपूत-भूमिहार वोटों की बहुलता वाली सीट पर कांटे की टक्कर की संभावना है। लालगंज सीट पर बसपा मजबूत दिखती है, इसका आधार जातिगत वोट है। यहां सोनकर, यादव और जाटव वोट सर्वाधिक हैं। यहां कांग्रेस ने पंकज मोहन सोनकर को टिकट दिया है। जबकि भाजपा मौजूदा सांसद नीलम सोनकर पर ही दांव लगा सकती है। घोसी सीट पर भाजपा मुश्किल में फंसी है, मौजूदा सांसद हरिनारायण राजभर को फिर टिकट मिलने पर संशय है, यहां से योगी सरकार के मंत्री दारा सिंह चौहान को दावेदार माना जा रहा है, वे पिछली बार बसपा से प्रत्याशी थे। यहां गठबंधन से माफिया डॉन मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी के चुनाव लड़ने की चर्चा भी है। यहां करीब दो लाख मुस्लिम वोट हैं। क्षेत्र की राजनीतिक के संबंध में बात करते हुए शिब्ली नेशनल कॉलेज के पॉलिटिकल साइंस विभाग के प्रमुख और प्रिंसिपल गयास असद खान कहते हैं कि यहां लोग तमाम मुद्दों की बात तो करते हैं लेकिन जिस दिन वोट देते हैं जाति को ही याद करते हैं। मुसलमान उस पार्टी के साथ जाएंगे, जो पार्टी भाजपा को हराएगी। प्रियंका के कारण मुसलमान जरूर आकर्षित होंगे। सामाजिक कार्यकर्ता और अखिल भारतीय किसान महासभा के प्रदेश अध्यक्ष जयप्रकाश नारायण राय कहते हैं कि यहां 90% से अधिक सीमांत किसानों का क्षेत्र है इसलिए प्रदेश सरकार की कर्ज माफी और केंद्र सरकार की छह हजार रुपए प्रतिवर्ष देने की घोषणा का कुछ फायदा भाजपा को होगा। आजमगढ़ में मुलायम सिंह यादव बीते पांच साल में दो बार ही आए हैं। हालांकि पांच साल के दौरान कई विकास कार्य उन्होंने करवाए हैं। उनमें सठियांव में बंद चीनी मिल चालू कराई, अतरौलिया में 200 बैड का अस्पताल, कृषि विवि का कैंपस और नए कलेक्ट्रेट भवन का निर्माण शामिल है। हालांकि मुलायम सिंह द्वारा गोद लिए सांसद आदर्श गांव तमौली की स्थिति बदतर है। यादव बहुल 3636 आबादी वाले गांव में 32 प्रोजेक्ट की कार्ययोजना बनी थी लेकिन ज्यादातर पर कार्य नहीं हुआ। भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष और बलिया संसदीय सीट के प्रभारी प्रेम प्रकाश बताते हैं कि विधानसभा में हम एक सीट जीते लेकिन तीन सीटों पर हमारी हार का अंतर दो से तीन हजार है। इसलिए हमें गठबंधन हल्के में नहीं ले सकता। मोदी-योगी के कार्य से एंटी इनकम्बेंसी जैसी स्थिति नहीं है। पूर्वांचल एक्सप्रेस वे बना एक भी विवाद नहीं हुआ। एयरस्ट्राइक में जो दृढ़ता दिखाई उसका फायदा मिलेगा। यूपी में बसपा-सपा-रालोद का गठबंधन है। आजमगढ़, बलिया से सपा तो लालगंज, घोसी, जौनपुर और मछली शहर बसपा के हिस्से में आई है। 2014 में लालगंज में सपा दूसरे नंबर पर थी बावजूद इसके गठबंधन में सीट बसपा को दी। भाजपा का यहां यूं तो अपना दल और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी से गठबंधन है। क्षेत्र में इन दलों का सीमित प्रभाव है।पिछड़ापन, बेराजगारी और विकास सबसे बड़ा मुद्दा है। रोजगार के लिए पलायन, आवारा पशु, किसानों की बदहाली और अपराध भी मुद्दा है। किसानों की अधिक संख्या के कारण किसान सम्मान योजना की भी चर्चा। यहां जाति पार्टी और मुद्दों पर भारी है। आजमगढ़ में यूनिवर्सिटी का मुद्दा भी अहम था, आचार संहिता से पहले राज्य सरकार ने मंजूरी दे दी।यादव, जाटव और मुसलमान वोटों की तादाद ज्यादा है। इस वोट को सपा-बसपा गठबंधन अपने साथ मानता है। वहीं भाजपा को गैर यादव के अलावा पटेल, राजभर और गैर जाटव अनुसूचित जातियों का सहारा है। हालांकि भाजपा यहां यादव और जाटव वोटों में सेंध की कोशिश में है। पटेल और राजभर वोटों के लिए भाजपा ने अपना दल और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी से गठबंधन किया है।

We have summarized this news so that you can read it quickly. If you are interested in the news, you can read the full text here. Read more:

Dainik Bhaskar /  🏆 19. in İN

 

United States Latest News, United States Headlines

Similar News:You can also read news stories similar to this one that we have collected from other news sources.

फूलपुर सीट: नेहरू की विरासत,SP का कब्जा और मोदी लहर में खुला था BJP का खाताफूलपुर सीट: नेहरू की विरासत,SP का कब्जा और मोदी लहर में खुला था BJP का खातादेश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की कर्मभूमि फूलपुर लोकसभा सीट पर 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के चलते पहली बार भारतीय जनता पार्टी ने खाता खोला था. मार्च 2018 में हुए उपचुनाव में बसपा के समर्थन से सपा बीजेपी को करारी मात देने में कामयाब हुई थी. ऐसे में 2019 के लोकसभा चुनाव में एक बार फिर सपा-बसपा गठबंधन और बीजेपी के बीच मुकाबला होने की उम्मीद है.
Read more »

Amazon पर होगी Huawei की होली सेल, इन प्रोडक्ट्स पर मिलेगा बंपर डिस्काउंट– News18 हिंदीAmazon पर होगी Huawei की होली सेल, इन प्रोडक्ट्स पर मिलेगा बंपर डिस्काउंट– News18 हिंदीहोली के मौके पर हुवावे अपने ग्राहकों के लिए कमाल का ऑफर पेश करने जा रहा है जिसमें मिड -रेंड स्मार्टफोन और हाल ही में लॉन्च हुए स्मार्टवॉच पर जबरदस्त ऑफर दिया जाएगा. Amazon.in पर 18 मार्च से शुरू होने वाले Huawei Colourful Sale में ग्राहक हुवावे के प्रोडक्ट्स पर भारी डिस्काउंट और नो कॉस्ट ईएमआई का लाभ उठा सकते हैं. 22 मार्च तक चलने वाले इस सेल में HUAWEI Mate20 Pro और HUAWEI Y9 2019 स्मार्टफोन पर भी भारी डिस्काउंट और नो कॉस्ट ईएमआई का लाभ मिलेगा. जानें किस प्रोडक्ट पर मिलेगा कौन सा ऑफर...
Read more »

क्षेत्रीय पार्टियों की नीति और दृष्टिकोण में राष्ट्रहित के बजाय सीमित और संकुचित दृष्टि होती हैक्षेत्रीय पार्टियों की नीति और दृष्टिकोण में राष्ट्रहित के बजाय सीमित और संकुचित दृष्टि होती हैक्षेत्रीय पार्टियों की नीति और दृष्टिकोण में राष्ट्रहित के बजाय सीमित और संकुचित दृष्टि होती है ApniBaat NiranjankIndia nationalInter
Read more »

हॉन्गकॉन्ग, सिंगापुर और पेरिस सबसे महंगे; बेंगलुरू, चेन्नई और दिल्ली सबसे सस्ते शहरों में शामिलहॉन्गकॉन्ग, सिंगापुर और पेरिस सबसे महंगे; बेंगलुरू, चेन्नई और दिल्ली सबसे सस्ते शहरों में शामिलThree cities have been jointly named as the world\'s most expensive in 2019 | दुनिया के 133 शहरों के दामों का तुलनात्मक अध्ययन, वेनेजुएला का कराकास सबसे सस्ता पेरिस में महिलाओं की कटिंग का खर्च 8,238 रुपए, बेंगलुरू में सिर्फ 1010 रुपए न्यूयॉर्क में एक किलो ब्रेड के पैकेट की कीमत 575 रुपए, बेंगलुरू में सिर्फ 84 रुपए
Read more »

महाराष्ट्र में सपा-बसपा गठबंधन, क्या कांग्रेस और एनसीपी को होगा चुनावो में भारी नुकसान?महाराष्ट्र में सपा-बसपा गठबंधन, क्या कांग्रेस और एनसीपी को होगा चुनावो में भारी नुकसान?माजवादी पार्टी के नेता अबु आसिम आज़मी ने कहा कि हम दोनों पार्टियां पूरे महाराष्ट्र की 48 सीटों पर इस गठबंधन से चुनाव लड़ेगी.
Read more »

ट्वीटर पर चुनावी रार- जेल में लालू और बाहर चौकीदारट्वीटर पर चुनावी रार- जेल में लालू और बाहर चौकीदारआम चुनावों में असल सियासी खेल ट्वीटर के मैदान में हो रहा है, जिसके बाद समाचारों में तो बासी कढ़ी ही परोसी जाती है. लालू यादव जेल से बैठकर ट्वीट करवा रहे हैं तो मोदी सरकार ने देश की चौकीदारी शुरू कर दी.
Read more »

कांग्रेस ने आंध्र में लोकसभा की तीन और विधानसभा की 45 सीटों पर उम्मीदवार घोषित किएकांग्रेस ने आंध्र में लोकसभा की तीन और विधानसभा की 45 सीटों पर उम्मीदवार घोषित किएकांग्रेस ने लोकसभा उम्मीदवारों की यह सातवीं सूची जारी की है. इससे पहले कांग्रेस उत्तर प्रदेश और कुछ अन्य राज्यों के लिए छह बार में कुल 146 उम्मीदवारों की घोषणा कर चुकी है जिनमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी के नाम भी शामिल हैं.
Read more »

कांग्रेस प्रत्याशी की किरकिरी, आतंकी गतिविधियों में गिरफ्तार शख्स का किया था समर्थन!कांग्रेस प्रत्याशी की किरकिरी, आतंकी गतिविधियों में गिरफ्तार शख्स का किया था समर्थन!कांग्रेस नेता नवीनचंद्र बांदीवडेकर ने सनातन संस्था के कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। सोशल मीडिया पर एक तस्वीर वायरल हो रही है, जिसमें बांदीवडेकर महाराष्ट्र में आतंकी हमले की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार वैभव राउत के समर्थन में खड़े हैं।
Read more »



Render Time: 2026-04-01 22:28:21