पाकिस्तान की तेल रिफाइनरियां तहरीक-ए-तालिबान के निशाने पर हैं. टीटीपी ने ड्रोन का इस्तेमाल शुरू कर दिया है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है. क्योंकि छोटे और लो-फ्लाइंग ड्रोन पारंपरिक एयर डिफेंस को चुनौती दे रहे हैं.
पाकिस्तान को अपनी तेल रिफाइनरियां पर ड्रोन हमले का डर सता रहा है. इस आशंका के बीच पाकिस्तानी सेना ने अपनी काउंटर-ड्रोन यूनिट को एक्टिव कर दिया है. यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब देश पश्चिम एशिया में जारी तनाच के कारण गंभीर ऊर्जा संकट से जूझ रहा है.
आजतक को शीर्ष खुफिया सूत्रों से मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान ने यह फैसला तहरीक-ए-तालिबान की रणनीति में आए बदलाव के जवाब में लिया गया है. और पढ़ेंमाना जा रहा है कि यह आतंकी संगठन पाकिस्तान की रिफाइनरियों और स्टोरेज डिपो को निशाना बनाकर उसके ट्रांसपोर्ट सिस्टम को पूरी तरह ठप करना चाहता है. पाकिस्तान स्टेट ऑयल जैसे बड़े एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर कोई भी हमला पूरे देश को ठप कर सकता है. तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान ने 2025 के अंत में अपने 'एयर फोर्स यूनिट' के गठन का ऐलान किया था. अब वह आर्म्ड क्वाडकॉप्टर ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है.तहरीक-ए-तालिबान ने हाल ही में खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में क्वाडकॉप्टर ड्रोन का इस्तेमाल करके फेडरल कांस्टेबुलरी की चौकी को निशाना बनाया था, जिसमें कई अधिकारी घायल हो गए थे. सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान का ट्रेडिशनल एयर डिफेंस सिस्टम ऊंचाई से आने वाले खतरों के लिए बना है, जबकि कम ऊंचाई पर धीमी गति से उड़ने वाले ये छोटे ड्रोन जो 'एरियल सुसाइड बॉम्बर' की तरह काम करते हैं, एयर डिफेंस सिस्टम के रडार से बच निकलते हैं. ऐसे में सॉफ्ट-किल और हार्ड-किल तकनीक की जरूरत पड़ रही है. Advertisement पाकिस्तान का पेट्रोलियम इंफ्रास्ट्रक्चर अब तहरीक-ए-तालिबान के निशाने पर है, जो उसके लिए बेहद चिंता की बात है. अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने के कारण पाकिस्तान की ऊर्जा सुरक्षा पहले ही संकट में है. पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने अटक और कराची की रिफाइनरियों के आसपास गश्त बढ़ा दी है. काउंटर-ड्रोन यूनिट को पोर्टेबल इलेक्ट्रॉनिक जैमर और तेज प्रतिक्रिया वाले इंटरसेप्टर से लैस किया जा रहा है, ताकि महत्वपूर्ण ऊर्जा ढाचों के चारों ओर 'नो-फ्लाई बबल' तैयार किया जा सके.---- समाप्त ---- ये भी देखें
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