पहले भी तीन बार पाकिस्तान में उतरे भारतीय वायुसेना के जांबाज, अब चौथी बार की सरहद पार - Amarujala

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पहले भी तीन बार पाकिस्तान में उतरे भारतीय वायुसेना के जांबाज, अब चौथी बार की सरहद पार IndianAirForce IAF_MCC AirStrike pid_gov

उसके कब्जे में है। यह चौथा मौका है जब भारतीय वायुसेना का कोई पायलट सरहद पार कर गया। इससे पहले युद्ध के दौरान दो लड़ाकू विमान और सामान्य स्थितियों के दौरान एक हेलिकाप्टर पाकिस्तान में घुस गया था। इन सभी के पायलट सुरक्षित लौट आए थे। कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय वायुसेना द्वारा चलाए गए ऑपरेशन ‘सफेद सागर’ में शामिल फ्लाइट लेफ्टिनेंट नचिकेता 27 मई, 1999 को मिग-27 उड़ा रहे थे। दुश्मन पर हमले के दौरान विमान के इंजन में खराबी आ गई और आग लग गई। ऐसे में उन्हें इजेक्ट करना पड़ा। विमान क्रैश हो गया और वे पाकिस्तान की सरहद में स्कार्दू क्षेत्र में सुरक्षित उतर गए। वहां उन्हें पाकिस्तान की सेना ने घेर लिया और गिरफ्तार कर पूछताछ की गई। इस दौरान भारतीय वायुसेना की खुफिया जानकारियां हासिल करने के लिए उन्हें खूब प्रताड़ित किया गया लेकिन उन्होंने मुंह नहीं खोला। दबाव के कारण पाकिस्तान ने उन्हें रेडक्रास सोसायटी को सौंप दिया। एक सप्ताह बाद 3 जून को वे भारत लौट आए थे। युद्ध के दौरान किसी भारतीय पायलट के पाकिस्तान की सीमा में घुसने का यह दूसरा अवसर था। इससे पहले वर्ष 1965 के युद्ध में जीनेट विमान उड़ा रहे एयर मार्शल सिकंद, जो उस समय स्क्वाड्रन लीडर थे, अपने दल के अन्य विमानों व पायलट से अलग होकर रास्ता भटक गए थे। भारत से उनका संपर्क कट गया था और विमान में तकनीकी खराबी आने के साथ ईंधन भी खत्म होने वाला था। उस समय वे सियालकोट के निकट पाक अधिकृत कश्मीर में स्थित पसरूर के ऊपर थे। वहां हवाई पट्टी देख उन्होंने विमान वहीं उतार दिया। उन्हें भी गिरफ्तार कर पूछताछ की गई लेकिन जिन परिस्थितियों में उन्होंने विमान उतारा, उन्हें देखते हुए कुछ दिन बाद रिहा कर दिया गया। इसके अलावा भारतीय वायुसेना का एक चेतक हेलिकाप्टर अक्टूबर, 2011 में खराब मौसम की वजह से रास्ता भटक कर पाक अधिकृत कश्मीर में घुस गया था। यह हेलिकाप्टर जम्मू कश्मीर के लदाख क्षेत्र में लेह से उड़ा था और इसे कारगिल के निकट द्रास सेक्टर में भीमभाट में उतरना था। नियंत्रण रेखा पार करने के कारण इसे पाकिस्तान सेना ने लैंडिंग के लिए मजबूर कर दिया था। इसमें सवार दो पायलटों, एक जूनियर कमीशंड अफसर और एक इंजीनियर को हिरासत में ले लिया गया था। सामान्य परिस्थिति होने के कारण उन्हें सामान्य पूछताछ के बाद भारत को सौंप दिया गया था। उसके कब्जे में है। यह चौथा मौका है जब भारतीय वायुसेना का कोई पायलट सरहद पार कर गया। इससे पहले युद्ध के दौरान दो लड़ाकू विमान और सामान्य स्थितियों के दौरान एक हेलिकाप्टर पाकिस्तान में घुस गया था। इन सभी के पायलट सुरक्षित लौट आए थे।कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय वायुसेना द्वारा चलाए गए ऑपरेशन ‘सफेद सागर’ में शामिल फ्लाइट लेफ्टिनेंट नचिकेता 27 मई, 1999 को मिग-27 उड़ा रहे थे। दुश्मन पर हमले के दौरान विमान के इंजन में खराबी आ गई और आग लग गई। ऐसे में उन्हें इजेक्ट करना पड़ा। विमान क्रैश हो गया और वे पाकिस्तान की सरहद में स्कार्दू क्षेत्र में सुरक्षित उतर गए। वहां उन्हें पाकिस्तान की सेना ने घेर लिया और गिरफ्तार कर पूछताछ की गई। इस दौरान भारतीय वायुसेना की खुफिया जानकारियां हासिल करने के लिए उन्हें खूब प्रताड़ित किया गया लेकिन उन्होंने मुंह नहीं खोला। दबाव के कारण पाकिस्तान ने उन्हें रेडक्रास सोसायटी को सौंप दिया। एक सप्ताह बाद 3 जून को वे भारत लौट आए थे। युद्ध के दौरान किसी भारतीय पायलट के पाकिस्तान की सीमा में घुसने का यह दूसरा अवसर था। इससे पहले वर्ष 1965 के युद्ध में जीनेट विमान उड़ा रहे एयर मार्शल सिकंद, जो उस समय स्क्वाड्रन लीडर थे, अपने दल के अन्य विमानों व पायलट से अलग होकर रास्ता भटक गए थे। भारत से उनका संपर्क कट गया था और विमान में तकनीकी खराबी आने के साथ ईंधन भी खत्म होने वाला था। उस समय वे सियालकोट के निकट पाक अधिकृत कश्मीर में स्थित पसरूर के ऊपर थे। वहां हवाई पट्टी देख उन्होंने विमान वहीं उतार दिया। उन्हें भी गिरफ्तार कर पूछताछ की गई लेकिन जिन परिस्थितियों में उन्होंने विमान उतारा, उन्हें देखते हुए कुछ दिन बाद रिहा कर दिया गया। इसके अलावा भारतीय वायुसेना का एक चेतक हेलिकाप्टर अक्टूबर, 2011 में खराब मौसम की वजह से रास्ता भटक कर पाक अधिकृत कश्मीर में घुस गया था। यह हेलिकाप्टर जम्मू कश्मीर के लदाख क्षेत्र में लेह से उड़ा था और इसे कारगिल के निकट द्रास सेक्टर में भीमभाट में उतरना था। नियंत्रण रेखा पार करने के कारण इसे पाकिस्तान सेना ने लैंडिंग के लिए मजबूर कर दिया था। इसमें सवार दो पायलटों, एक जूनियर कमीशंड अफसर और एक इंजीनियर को हिरासत में ले लिया गया था। सामान्य परिस्थिति होने के कारण उन्हें सामान्य पूछताछ के बाद भारत को सौंप दिया गया था।.

उसके कब्जे में है। यह चौथा मौका है जब भारतीय वायुसेना का कोई पायलट सरहद पार कर गया। इससे पहले युद्ध के दौरान दो लड़ाकू विमान और सामान्य स्थितियों के दौरान एक हेलिकाप्टर पाकिस्तान में घुस गया था। इन सभी के पायलट सुरक्षित लौट आए थे। कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय वायुसेना द्वारा चलाए गए ऑपरेशन ‘सफेद सागर’ में शामिल फ्लाइट लेफ्टिनेंट नचिकेता 27 मई, 1999 को मिग-27 उड़ा रहे थे। दुश्मन पर हमले के दौरान विमान के इंजन में खराबी आ गई और आग लग गई। ऐसे में उन्हें इजेक्ट करना पड़ा। विमान क्रैश हो गया और वे पाकिस्तान की सरहद में स्कार्दू क्षेत्र में सुरक्षित उतर गए। वहां उन्हें पाकिस्तान की सेना ने घेर लिया और गिरफ्तार कर पूछताछ की गई। इस दौरान भारतीय वायुसेना की खुफिया जानकारियां हासिल करने के लिए उन्हें खूब प्रताड़ित किया गया लेकिन उन्होंने मुंह नहीं खोला। दबाव के कारण पाकिस्तान ने उन्हें रेडक्रास सोसायटी को सौंप दिया। एक सप्ताह बाद 3 जून को वे भारत लौट आए थे। युद्ध के दौरान किसी भारतीय पायलट के पाकिस्तान की सीमा में घुसने का यह दूसरा अवसर था। इससे पहले वर्ष 1965 के युद्ध में जीनेट विमान उड़ा रहे एयर मार्शल सिकंद, जो उस समय स्क्वाड्रन लीडर थे, अपने दल के अन्य विमानों व पायलट से अलग होकर रास्ता भटक गए थे। भारत से उनका संपर्क कट गया था और विमान में तकनीकी खराबी आने के साथ ईंधन भी खत्म होने वाला था। उस समय वे सियालकोट के निकट पाक अधिकृत कश्मीर में स्थित पसरूर के ऊपर थे। वहां हवाई पट्टी देख उन्होंने विमान वहीं उतार दिया। उन्हें भी गिरफ्तार कर पूछताछ की गई लेकिन जिन परिस्थितियों में उन्होंने विमान उतारा, उन्हें देखते हुए कुछ दिन बाद रिहा कर दिया गया। इसके अलावा भारतीय वायुसेना का एक चेतक हेलिकाप्टर अक्टूबर, 2011 में खराब मौसम की वजह से रास्ता भटक कर पाक अधिकृत कश्मीर में घुस गया था। यह हेलिकाप्टर जम्मू कश्मीर के लदाख क्षेत्र में लेह से उड़ा था और इसे कारगिल के निकट द्रास सेक्टर में भीमभाट में उतरना था। नियंत्रण रेखा पार करने के कारण इसे पाकिस्तान सेना ने लैंडिंग के लिए मजबूर कर दिया था। इसमें सवार दो पायलटों, एक जूनियर कमीशंड अफसर और एक इंजीनियर को हिरासत में ले लिया गया था। सामान्य परिस्थिति होने के कारण उन्हें सामान्य पूछताछ के बाद भारत को सौंप दिया गया था। उसके कब्जे में है। यह चौथा मौका है जब भारतीय वायुसेना का कोई पायलट सरहद पार कर गया। इससे पहले युद्ध के दौरान दो लड़ाकू विमान और सामान्य स्थितियों के दौरान एक हेलिकाप्टर पाकिस्तान में घुस गया था। इन सभी के पायलट सुरक्षित लौट आए थे।कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय वायुसेना द्वारा चलाए गए ऑपरेशन ‘सफेद सागर’ में शामिल फ्लाइट लेफ्टिनेंट नचिकेता 27 मई, 1999 को मिग-27 उड़ा रहे थे। दुश्मन पर हमले के दौरान विमान के इंजन में खराबी आ गई और आग लग गई। ऐसे में उन्हें इजेक्ट करना पड़ा। विमान क्रैश हो गया और वे पाकिस्तान की सरहद में स्कार्दू क्षेत्र में सुरक्षित उतर गए। वहां उन्हें पाकिस्तान की सेना ने घेर लिया और गिरफ्तार कर पूछताछ की गई। इस दौरान भारतीय वायुसेना की खुफिया जानकारियां हासिल करने के लिए उन्हें खूब प्रताड़ित किया गया लेकिन उन्होंने मुंह नहीं खोला। दबाव के कारण पाकिस्तान ने उन्हें रेडक्रास सोसायटी को सौंप दिया। एक सप्ताह बाद 3 जून को वे भारत लौट आए थे। युद्ध के दौरान किसी भारतीय पायलट के पाकिस्तान की सीमा में घुसने का यह दूसरा अवसर था। इससे पहले वर्ष 1965 के युद्ध में जीनेट विमान उड़ा रहे एयर मार्शल सिकंद, जो उस समय स्क्वाड्रन लीडर थे, अपने दल के अन्य विमानों व पायलट से अलग होकर रास्ता भटक गए थे। भारत से उनका संपर्क कट गया था और विमान में तकनीकी खराबी आने के साथ ईंधन भी खत्म होने वाला था। उस समय वे सियालकोट के निकट पाक अधिकृत कश्मीर में स्थित पसरूर के ऊपर थे। वहां हवाई पट्टी देख उन्होंने विमान वहीं उतार दिया। उन्हें भी गिरफ्तार कर पूछताछ की गई लेकिन जिन परिस्थितियों में उन्होंने विमान उतारा, उन्हें देखते हुए कुछ दिन बाद रिहा कर दिया गया। इसके अलावा भारतीय वायुसेना का एक चेतक हेलिकाप्टर अक्टूबर, 2011 में खराब मौसम की वजह से रास्ता भटक कर पाक अधिकृत कश्मीर में घुस गया था। यह हेलिकाप्टर जम्मू कश्मीर के लदाख क्षेत्र में लेह से उड़ा था और इसे कारगिल के निकट द्रास सेक्टर में भीमभाट में उतरना था। नियंत्रण रेखा पार करने के कारण इसे पाकिस्तान सेना ने लैंडिंग के लिए मजबूर कर दिया था। इसमें सवार दो पायलटों, एक जूनियर कमीशंड अफसर और एक इंजीनियर को हिरासत में ले लिया गया था। सामान्य परिस्थिति होने के कारण उन्हें सामान्य पूछताछ के बाद भारत को सौंप दिया गया था।

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