बाइपास फैट पशुओं के लिए एक अत्यंत लाभकारी आहार है, जो दूध उत्पादन बढ़ाने और ऊर्जा स्तर संतुलित रखने में मदद करता है. यह थकान और कमजोरी से बचाता है, पाचन प्रणाली को प्रभावित नहीं करता और पोषक तत्वों के उपयोग को बेहतर बनाता है.
पशुपालकों को उत्पादन बढ़ाने के लिए पशुओं के आहार पर विशेष ध्यान देना चाहिए. वे बिनौला सीड और सोयाबीन आधारित खाद्य पदार्थ पशुओं को खिला सकते हैं. इससे पशु के दूध में वसा की मात्रा बढ़ती है, खास बात यह है कि बिनौला सीड और सोयाबीन आधारित खाद्य पदार्थ पशुओं के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होते हैं.
अतिरिक्त बाइपास वसा देने से दूध का उत्पादन बढ़ता है और पशुओं को अतिरिक्त ऊर्जा मिलती है. यह संतुलित आहार पशुओं को स्वस्थ और उत्पादक बनाए रखता है. पशु चिकित्सक रामनिवास चौधरी ने बताया कि बाइपास फैट हल्के भूरे या क्रीम रंग का दानेदार पाउडर होता है. इसमें लगभग 80 प्रतिशत वसा और करीब 8 प्रतिशत कैल्सियम पाया जाता है. यह वसा में घुलनशील विटामिन्स से भरपूर होता है, जो पशुओं के शरीर में ताकत बनाए रखते हैं. यह विशेष रूप से अधिक दूध देने वाले पशुओं के लिए बहुत उपयोगी है. गर्भावस्था के अंतिम चरण और दुग्धावस्था की शुरुआत में बाइपास फैट खिलाने से अच्छे परिणाम मिलते हैं. पशु चिकित्सक के अनुसार, इससे पशुओं की दूध उत्पादन क्षमता में वृद्धि होती है और शरीर में ऊर्जा का स्तर संतुलित रहता है. यह थकान और कमजोरी से बचाव करता है, जिससे पशु लंबे समय तक सक्रिय और स्वस्थ बने रहते हैं. ऐसे में पशुपालकों के लिए अपने पशु को कच्चा खाद्य तेल देने की बजाय बाइपास फैट देना अधिक फायदेमंद होता है. यह रूमेन की पाचन क्रिया को प्रभावित नहीं करता और रेशेदार आहार के पाचन में कोई बाधा नहीं डालता. इसके उपयोग से पशुओं की पाचन प्रणाली संतुलित रहती है और भोजन में मौजूद पोषक तत्वों का पूरा उपयोग शरीर द्वारा किया जा सकता है. पशु चिकित्सक रामनिवास चौधरी ने बताया कि बाइपास फैट का निर्माण कई वैज्ञानिक विधियों से किया जाता है. इसमें फैट का हाइड्रोजनीकरण कर लंबी श्रृंखला वाले वसीय अम्लों के कैल्शियम साबुनिकृत लवण तैयार किए जाते हैं. इसके अलावा, तेल वाले बीजों का फॉर्मल्डिहाइड उपचार और फ्यूजन विधि से भी बाइपास फैट बनाया जाता है, जिससे इसकी गुणवत्ता बेहतर होती है. पशु चिकित्सक के अनुसार, बाइपास फैट पशुओं की ऊर्जा को संतुलित रखता है, जिससे उपापचयी रोग जैसे कीटोसिस और मिल्क फीवर नहीं होते. यह पशुओं की शारीरिक स्थिति सुधारता है, स्वास्थ्य को मजबूत बनाता है और प्रजनन क्षमता बढ़ाता है. इससे दूध में वसा की मात्रा बढ़ती है और बछड़ों का शारीरिक विकास भी तेज़ी से होता है। जो पशुपालक केवल दूध उत्पादन के लिए पशुपालन करते हैं, उनके लिए यह लाभकारी है, क्योंकि अधिक वसा वाला दूध बाजार में अधिक मांग वाला होता है और इसका भाव भी अधिक मिलता है. पशु चिकित्सक रामनिवास चौधरी ने बताया कि प्रत्येक गाय को प्रतिदिन 100 से 400 ग्राम बाइपास फैट खिलाना चाहिए. इससे दूध उत्पादन में वृद्धि होती है और पशुओं की सेहत बेहतर रहती है. इसके अलावा, इससे बछड़ों की वृद्धि भी तेज़ होती है. यह आधुनिक डेयरी प्रबंधन के लिए एक सुरक्षित, प्रभावी और लाभदायक आहार साबित हो रहा है. साथ ही, यह पशुपालकों की आय बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.
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