न्यूजीलैंड की कंपनी ने न्यूक्लियर फ्यूजन में हासिल की बड़ी सफलता, 2030 तक घरों में बिजली!

विज्ञान और तकनीक News

न्यूजीलैंड की कंपनी ने न्यूक्लियर फ्यूजन में हासिल की बड़ी सफलता, 2030 तक घरों में बिजली!
न्यूक्लियर फ्यूजनओपनस्टार टेक्नोलॉजीजपरमाणु ऊर्जा
  • 📰 News18 Hindi
  • ⏱ Reading Time:
  • 125 sec. here
  • 13 min. at publisher
  • 📊 Quality Score:
  • News: 84%
  • Publisher: 51%

न्यूजीलैंड की एक स्टार्टअप ओपनस्टार टेक्नोलॉजीज ने परमाणु संलयन (न्यूक्लियर फ्यूजन) की दिशा में बड़ी सफलता हासिल की है, जिससे 2030 तक घरों में बिजली पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। कंपनी ने हवा में तैरते चुंबक का उपयोग करके प्लाज्मा को सफलतापूर्वक नियंत्रित किया है, जो स्वच्छ और असीमित ऊर्जा का स्रोत हो सकता है।

न्यूजीलैंड की एक छोटी सी कंपनी ओपनस्टार टेक्नोलॉजीज ने परमाणु संलयन ( न्यूक्लियर फ्यूजन ) की दौड़ में पूरी दुनिया को पीछे छोड़ दिया है। इस स्टार्टअप ने एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जिसे अब तक असंभव माना जा रहा था। कंपनी ने आधे टन के भारी-भरकम चुंबक को हवा में तैराकर प्लाज्मा को सफलतापूर्वक नियंत्रित किया है। यह दुनिया में अपनी तरह का पहला वाणिज्यिक प्रयोग है। परमाणु संलयन को आधुनिक भौतिकी का सबसे बड़ा लक्ष्य माना जाता है। यदि यह तकनीक पूरी तरह सफल होती है, तो इंसानों को असीमित बिजली मिल सकेगी।

सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें न तो कार्बन उत्सर्जन होता है और न ही खतरनाक रेडियोधर्मी कचरा निकलता है।\ हवा में तैरते चुंबक से कैसे पैदा होगी बिजली? ओपनस्टार के संस्थापक रातु माताइरा ने इस मशीन के काम करने का तरीका समझाया है। उनकी कंपनी ‘लेविटेटेड डायपोल’ नाम की एक खास तकनीक पर काम कर रही है। इसमें एक शक्तिशाली चुंबक को चुंबकीय क्षेत्र की मदद से हवा में लटकाया जाता है। इसी तैरते हुए चुंबक के चारों ओर प्लाज्मा को रोककर रखा जाता है। अब तक पूरी इंडस्ट्री को लगता था कि ऐसी मशीन बनाना इंजीनियरिंग के हिसाब से संभव नहीं है। लेकिन न्यूजीलैंड के वैज्ञानिकों ने इस धारणा को गलत साबित कर दिया है। उन्होंने ‘जूनियर’ नाम के प्रोटोटाइप से यह दिखा दिया कि यह तकनीक न सिर्फ काम करती है, बल्कि इसे बड़े स्तर पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है। फ्यूजन और विखंडन (फिशन) के बीच क्या अंतर है? आजकल के परमाणु रिएक्टर ‘विखंडन’ तकनीक पर चलते हैं। इसमें एटम्स को तोड़ा जाता है, जिससे ऊर्जा निकलती है। लेकिन इस प्रक्रिया में बहुत सारा खतरनाक कचरा भी पैदा होता है। इसके उलट ‘संलयन’ की प्रक्रिया तारों और सूरज के अंदर होती है। इसमें दो एटम्स के केंद्र को आपस में जोड़ा जाता है। इस प्रक्रिया से विखंडन के मुकाबले कई गुना ज्यादा ऊर्जा निकलती है। ओपनस्टार टेक्नोलॉजीज की सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि इस प्रक्रिया को शुरू करने के लिए बहुत ज्यादा बिजली की जरूरत पड़ती थी। ओपनस्टार की नई खोज ने इस मुश्किल को आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब कम ऊर्जा खर्च करके ज्यादा बिजली बनाने का रास्ता साफ हो गया है।\ क्या 2030 तक घर-घर पहुंचेगी परमाणु बिजली? ओपनस्टार की सफलता के बाद अब अगले चरण की तैयारी शुरू हो गई है। कंपनी का अगला प्रोटोटाइप ‘ताही’ होगा, जिसकी चुंबकीय क्षेत्र मौजूदा मशीन से चार गुना ज्यादा ताकतवर होगी। न्यूजीलैंड की सरकार ने भी इस परियोजना की अहमियत को समझते हुए 3.5 करोड़ डॉलर की मदद देने का वादा किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह उच्च-ऊर्जा फ्लक्स-पंप तकनीक आने वाले समय में अनुसंधान की दिशा बदल देगी। कंपनी का लक्ष्य है कि 2030 के दशक तक ऐसे वाणिज्यिक रिएक्टर तैयार कर लिए जाएं, जो शहरों को बिजली की आपूर्ति कर सकें। यह सफलता कोयला और गैस जैसे पुराने ईंधन पर दुनिया की निर्भरता को पूरी तरह खत्म कर सकती है। यह एक महत्वपूर्ण प्रगति है जो ऊर्जा क्षेत्र में क्रांति ला सकती है। ओपनस्टार टेक्नोलॉजीज का काम भविष्य के लिए एक आशाजनक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है, जहां स्वच्छ, असीमित ऊर्जा एक वास्तविकता हो सकती है। यह पर्यावरण के लिए भी बहुत अच्छा है, क्योंकि यह ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने में मदद करेगा। यह पूरी दुनिया के लिए एक बहुत ही रोमांचक विकास है। इस तकनीक के सफल होने से ऊर्जा के क्षेत्र में क्रांति आ सकती है और दुनिया को एक स्वच्छ और टिकाऊ भविष्य की ओर ले जाया जा सकता है

We have summarized this news so that you can read it quickly. If you are interested in the news, you can read the full text here. Read more:

News18 Hindi /  🏆 13. in İN

न्यूक्लियर फ्यूजन ओपनस्टार टेक्नोलॉजीज परमाणु ऊर्जा असीमित ऊर्जा नवीकरणीय ऊर्जा प्लाज्मा न्यूजीलैंड तकनीक विज्ञान

 

United States Latest News, United States Headlines

Similar News:You can also read news stories similar to this one that we have collected from other news sources.

ISS 2030 में रिटायर! अंतरिक्ष का युग बदलने वाले ये हैं नए स्पेस स्टेशन; चाइना-इंडिया भी रेस में...ISS 2030 में रिटायर! अंतरिक्ष का युग बदलने वाले ये हैं नए स्पेस स्टेशन; चाइना-इंडिया भी रेस में...ISS retirement 2030: अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) 2030 तक रिटायर होगा, लेकिन प्राइवेट कंपनियों जैसे Axiom Space और Blue Origin नए स्पेस स्टेशन लॉन्च कर अंतरिक्ष में शोध और खोज जारी रखेंगी.
Read more »

Gujarat Govt: 'कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 की तैयार जारी है', राज्य मंत्री जयराम गामित ने दी जानकारीGujarat Govt: 'कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 की तैयार जारी है', राज्य मंत्री जयराम गामित ने दी जानकारीराज्य | गुजरात Gujarat Govt MoS Jairam Gamit on CommonWealth Games 2030 Gujarat Govt: 'कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 की तैयार जारी है', राज्य मंत्री जयराम गामित ने दी जानकारी
Read more »

FIFA World Cup 2030 की मेजबानी से पहले मोरक्को पर लगे गंभीर आरोप, 30 लाख कुत्तों को मारने का मामला आया सामनेFIFA World Cup 2030 की मेजबानी से पहले मोरक्को पर लगे गंभीर आरोप, 30 लाख कुत्तों को मारने का मामला आया सामनेFIFA World Cup 2030: मोरक्को में 30 लाख आवारा कुत्तों को मार दिया गया है. अब इन आरोपों पर फीफा की ओर से भी बयान आया है. खेल समाचार | अन्य खेल
Read more »

मुफ्त ChatGPT: OpenAI का खर्च कैसे निकलता है?मुफ्त ChatGPT: OpenAI का खर्च कैसे निकलता है?ChatGPT, जो 80-90 करोड़ एक्टिव यूजर्स को मुफ्त सेवा प्रदान करता है, इसका खर्चा कैसे मैनेज होता है? जबकि इसके 35 मिलियन सब्सक्राइबर भुगतान करते हैं, कंपनी को बड़े कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और ऑपरेटिंग खर्चों का सामना करना पड़ता है। हर दिन लगभग 7 करोड़ रुपये का खर्च हार्डवेयर और इंफरेंस कॉस्ट पर आता है। OpenAI का वार्षिक बर्न रेट 17 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, और 2030 तक मुनाफे की उम्मीद नहीं है।
Read more »

नई दिल्ली से बड़ा ऐलान! फ्रांस ने खोला स्टडी का ‘सुपर गेट’, 30 हजार छात्रों के लिए ट्रांजिट वीजा फ्रीनई दिल्ली से बड़ा ऐलान! फ्रांस ने खोला स्टडी का ‘सुपर गेट’, 30 हजार छात्रों के लिए ट्रांजिट वीजा फ्रीFrance Announces Visa Free Transit: फ्रांस ने भारतीय छात्रों के लिए एक बड़ी घोषणा की है. अब 2030 तक 30,000 भारतीय छात्रों को अपने यहां पढ़ाई का मौका देने वाला है. साथ ही भारतीय यात्रियों के लिए एयरपोर्ट ट्रांजिट वीजा फ्री कर दिया गया है जिससे यात्रा भी काफी आसान हो जाएगी.
Read more »

स्पेशल ट्रीटमेंट कार्ड से होगी मलेरिया के मरीजों की निगरानी, 2030 तक देश को मलेरिया मुक्त का लक्ष्यस्पेशल ट्रीटमेंट कार्ड से होगी मलेरिया के मरीजों की निगरानी, 2030 तक देश को मलेरिया मुक्त का लक्ष्यदेश को 2030 तक मलेरिया मुक्त बनाने के लक्ष्य के तहत, लखनऊ में स्वास्थ्य अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया। अब मलेरिया मरीजों की निगरानी 'स्पेशल ट्रीटमेंट कार्ड' से की जाएगी, जिसमें 14 दिन का दवा कोर्स पूरा करना अनिवार्य होगा। इस पहल के तहत, टेक्नीशियन, डॉक्टर, आशा कार्यकर्ता और वरिष्ठ अधिकारी नियमित जांच करेंगे, जिससे डेटा पोर्टल पर अपलोड कर...
Read more »



Render Time: 2026-04-02 21:43:17