न्यूजीलैंड की एक स्टार्टअप ओपनस्टार टेक्नोलॉजीज ने परमाणु संलयन (न्यूक्लियर फ्यूजन) की दिशा में बड़ी सफलता हासिल की है, जिससे 2030 तक घरों में बिजली पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। कंपनी ने हवा में तैरते चुंबक का उपयोग करके प्लाज्मा को सफलतापूर्वक नियंत्रित किया है, जो स्वच्छ और असीमित ऊर्जा का स्रोत हो सकता है।
न्यूजीलैंड की एक छोटी सी कंपनी ओपनस्टार टेक्नोलॉजीज ने परमाणु संलयन ( न्यूक्लियर फ्यूजन ) की दौड़ में पूरी दुनिया को पीछे छोड़ दिया है। इस स्टार्टअप ने एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जिसे अब तक असंभव माना जा रहा था। कंपनी ने आधे टन के भारी-भरकम चुंबक को हवा में तैराकर प्लाज्मा को सफलतापूर्वक नियंत्रित किया है। यह दुनिया में अपनी तरह का पहला वाणिज्यिक प्रयोग है। परमाणु संलयन को आधुनिक भौतिकी का सबसे बड़ा लक्ष्य माना जाता है। यदि यह तकनीक पूरी तरह सफल होती है, तो इंसानों को असीमित बिजली मिल सकेगी।
सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें न तो कार्बन उत्सर्जन होता है और न ही खतरनाक रेडियोधर्मी कचरा निकलता है।\ हवा में तैरते चुंबक से कैसे पैदा होगी बिजली? ओपनस्टार के संस्थापक रातु माताइरा ने इस मशीन के काम करने का तरीका समझाया है। उनकी कंपनी ‘लेविटेटेड डायपोल’ नाम की एक खास तकनीक पर काम कर रही है। इसमें एक शक्तिशाली चुंबक को चुंबकीय क्षेत्र की मदद से हवा में लटकाया जाता है। इसी तैरते हुए चुंबक के चारों ओर प्लाज्मा को रोककर रखा जाता है। अब तक पूरी इंडस्ट्री को लगता था कि ऐसी मशीन बनाना इंजीनियरिंग के हिसाब से संभव नहीं है। लेकिन न्यूजीलैंड के वैज्ञानिकों ने इस धारणा को गलत साबित कर दिया है। उन्होंने ‘जूनियर’ नाम के प्रोटोटाइप से यह दिखा दिया कि यह तकनीक न सिर्फ काम करती है, बल्कि इसे बड़े स्तर पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है। फ्यूजन और विखंडन (फिशन) के बीच क्या अंतर है? आजकल के परमाणु रिएक्टर ‘विखंडन’ तकनीक पर चलते हैं। इसमें एटम्स को तोड़ा जाता है, जिससे ऊर्जा निकलती है। लेकिन इस प्रक्रिया में बहुत सारा खतरनाक कचरा भी पैदा होता है। इसके उलट ‘संलयन’ की प्रक्रिया तारों और सूरज के अंदर होती है। इसमें दो एटम्स के केंद्र को आपस में जोड़ा जाता है। इस प्रक्रिया से विखंडन के मुकाबले कई गुना ज्यादा ऊर्जा निकलती है। ओपनस्टार टेक्नोलॉजीज की सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि इस प्रक्रिया को शुरू करने के लिए बहुत ज्यादा बिजली की जरूरत पड़ती थी। ओपनस्टार की नई खोज ने इस मुश्किल को आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब कम ऊर्जा खर्च करके ज्यादा बिजली बनाने का रास्ता साफ हो गया है।\ क्या 2030 तक घर-घर पहुंचेगी परमाणु बिजली? ओपनस्टार की सफलता के बाद अब अगले चरण की तैयारी शुरू हो गई है। कंपनी का अगला प्रोटोटाइप ‘ताही’ होगा, जिसकी चुंबकीय क्षेत्र मौजूदा मशीन से चार गुना ज्यादा ताकतवर होगी। न्यूजीलैंड की सरकार ने भी इस परियोजना की अहमियत को समझते हुए 3.5 करोड़ डॉलर की मदद देने का वादा किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह उच्च-ऊर्जा फ्लक्स-पंप तकनीक आने वाले समय में अनुसंधान की दिशा बदल देगी। कंपनी का लक्ष्य है कि 2030 के दशक तक ऐसे वाणिज्यिक रिएक्टर तैयार कर लिए जाएं, जो शहरों को बिजली की आपूर्ति कर सकें। यह सफलता कोयला और गैस जैसे पुराने ईंधन पर दुनिया की निर्भरता को पूरी तरह खत्म कर सकती है। यह एक महत्वपूर्ण प्रगति है जो ऊर्जा क्षेत्र में क्रांति ला सकती है। ओपनस्टार टेक्नोलॉजीज का काम भविष्य के लिए एक आशाजनक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है, जहां स्वच्छ, असीमित ऊर्जा एक वास्तविकता हो सकती है। यह पर्यावरण के लिए भी बहुत अच्छा है, क्योंकि यह ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने में मदद करेगा। यह पूरी दुनिया के लिए एक बहुत ही रोमांचक विकास है। इस तकनीक के सफल होने से ऊर्जा के क्षेत्र में क्रांति आ सकती है और दुनिया को एक स्वच्छ और टिकाऊ भविष्य की ओर ले जाया जा सकता है
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