नो पीयूसी–नो फ्यूल अभियान का असर: दिल्ली-एनसीआर में PUC केंद्रों पर उमड़ी भीड़, तेजी से बढ़ रहा आंकड़ा

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नो पीयूसी–नो फ्यूल अभियान का असर: दिल्ली-एनसीआर में PUC केंद्रों पर उमड़ी भीड़, तेजी से बढ़ रहा आंकड़ा
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दिल्ली-एनसीआर में 'नो पीयूसी-नो फ्यूल' अभियान का असर दिखने लगा है। पीयूसी केंद्रों पर भारी भीड़ उमड़ रही है, क्योंकि लोग अपने वाहनों के लिए प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र पीयूसी प्राप्त करने के लिए उत्सुक हैं। यह अभियान दिल्ली में प्रदूषण के स्तर को कम करने के उद्देश्य से शुरू किया गया है, जिसके चलते पीयूसी केंद्रों पर लोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही...

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। वायु प्रदूषण के कारण दिल्ली समेत एनसीआर पिछले कुछ दिनों से गैस चैंबर में तब्दील है। खतरनाक होते प्रदूषण को रोकने के लिए सरकार जागी हुई है। कई तरह के उपाय किए जा रहे हैं। धूल नियंत्रण के साथ वाहनों से निकलने वाले प्रदूषण पर भी रोकथाम की कवायद तेज की गई है। इसी क्रम में सभी वाहनों को पीयूसी से लैस कराने के लिए अभियान शुरू किया गया तो लापरवाह लोगों की नींद भी टूट गई। वे भी अब जिम्मेदार नागरिक होने का फर्ज निभाने के लिए पीयूसी केंद्रों पर भारी संख्या में जुट रहे हैं। 16 दिसंबर को किया था एलान 16 दिसंबर को सरकार ने नो पीयूसी, नो फ्यूल अभियान शुरू करने का एलान किया। इसके तहत अगर किसी वाहन का पीयूसी नहीं है तो उसे पेट्रोल या डीजल नहीं मिलना था। अभियान 18 दिसंबर को शुरू होना था लेकिन 17 दिसंबर से ही पीयूसी केंद्रों पर भीड़ जुटने लगी। 16 दिसंबर तक जहां दिल्ली में प्रतिदिन 15 से 17 हजार पीयूसी जारी किए जाते थे। अगले दिन इनकी संख्या लगभग दोगुनी होकर 31 हजार हो गई। अभियान के दूसरे दिन यह आंकड़ा 47 हजार तक पहुंच गया। दिल्ली से सटे गाजियाबाद में भी इस अभियान का असर देखा जा रहा है। अभियान के शुरुआती दो दिनों में यहां पीयूसी कराने वालों की संख्या डेढ़ गुनी हो गई है। हालांकि नोएडा और सोनीपत में इसका कोई खास प्रभाव नहीं है। सोनीपत में रोजाना 1450 से 1650 पीयूसी बनाए जा रहे हैं। तीन दिन में ज्यादा फेरबदल नहीं हुआ। फरीदाबाद में आंशिक बढ़ाेतरी देखी जा रही है। पहले प्रतिदिन 1500 से 1700 पीयूसी होते थे, अब यह 1800 से 2000 हो रहे हैं। मात्र 25 प्रतिशत वाहन थे पीयूसी से लैस दिल्ली पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष निश्चल सिंघानिया बताते हैं कि अभियान शुरू होने से पहले दिल्ली में मात्र 25 प्रतिशत वाहनों का ही पीयूसी जारी हुआ था। अभियान के दौरान कार्रवाई और फ्यूल नहीं मिलने के कारण वाहन चालक पीयूसी कराने के लिए विवश हो गए। इसलिए अब इसमें तेजी देखी जा रही है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि अगर अभियान को सफल बनाना है तो एनसीआर के अन्य शहरों में भी इसे लागू किया जाए। क्योंकि प्रदूषण की कोई सीमा नहीं है। पिछले चार दिनों में जारी हुए पीयूसी के आंकड़े तिथि दिल्ली गाजियाबाद गौतमबुद्ध नगर 19 दिसंबर 47,600 3,862 2,659 18 दिसंबर 31,000 3,566 2,578 17 दिसंबर 31,197 2,688 2,530 16 दिसंबर 17,000 2,809 2,477.

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। वायु प्रदूषण के कारण दिल्ली समेत एनसीआर पिछले कुछ दिनों से गैस चैंबर में तब्दील है। खतरनाक होते प्रदूषण को रोकने के लिए सरकार जागी हुई है। कई तरह के उपाय किए जा रहे हैं। धूल नियंत्रण के साथ वाहनों से निकलने वाले प्रदूषण पर भी रोकथाम की कवायद तेज की गई है। इसी क्रम में सभी वाहनों को पीयूसी से लैस कराने के लिए अभियान शुरू किया गया तो लापरवाह लोगों की नींद भी टूट गई। वे भी अब जिम्मेदार नागरिक होने का फर्ज निभाने के लिए पीयूसी केंद्रों पर भारी संख्या में जुट रहे हैं। 16 दिसंबर को किया था एलान 16 दिसंबर को सरकार ने नो पीयूसी, नो फ्यूल अभियान शुरू करने का एलान किया। इसके तहत अगर किसी वाहन का पीयूसी नहीं है तो उसे पेट्रोल या डीजल नहीं मिलना था। अभियान 18 दिसंबर को शुरू होना था लेकिन 17 दिसंबर से ही पीयूसी केंद्रों पर भीड़ जुटने लगी। 16 दिसंबर तक जहां दिल्ली में प्रतिदिन 15 से 17 हजार पीयूसी जारी किए जाते थे। अगले दिन इनकी संख्या लगभग दोगुनी होकर 31 हजार हो गई। अभियान के दूसरे दिन यह आंकड़ा 47 हजार तक पहुंच गया। दिल्ली से सटे गाजियाबाद में भी इस अभियान का असर देखा जा रहा है। अभियान के शुरुआती दो दिनों में यहां पीयूसी कराने वालों की संख्या डेढ़ गुनी हो गई है। हालांकि नोएडा और सोनीपत में इसका कोई खास प्रभाव नहीं है। सोनीपत में रोजाना 1450 से 1650 पीयूसी बनाए जा रहे हैं। तीन दिन में ज्यादा फेरबदल नहीं हुआ। फरीदाबाद में आंशिक बढ़ाेतरी देखी जा रही है। पहले प्रतिदिन 1500 से 1700 पीयूसी होते थे, अब यह 1800 से 2000 हो रहे हैं। मात्र 25 प्रतिशत वाहन थे पीयूसी से लैस दिल्ली पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष निश्चल सिंघानिया बताते हैं कि अभियान शुरू होने से पहले दिल्ली में मात्र 25 प्रतिशत वाहनों का ही पीयूसी जारी हुआ था। अभियान के दौरान कार्रवाई और फ्यूल नहीं मिलने के कारण वाहन चालक पीयूसी कराने के लिए विवश हो गए। इसलिए अब इसमें तेजी देखी जा रही है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि अगर अभियान को सफल बनाना है तो एनसीआर के अन्य शहरों में भी इसे लागू किया जाए। क्योंकि प्रदूषण की कोई सीमा नहीं है। पिछले चार दिनों में जारी हुए पीयूसी के आंकड़े तिथि दिल्ली गाजियाबाद गौतमबुद्ध नगर 19 दिसंबर 47,600 3,862 2,659 18 दिसंबर 31,000 3,566 2,578 17 दिसंबर 31,197 2,688 2,530 16 दिसंबर 17,000 2,809 2,477

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