केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी नहीं मानतीं कि इन चुनावों में ध्रुवीकरण की सियासत हो रही है.
केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी की सांसद मेनका गांधी ने माना है कि,"भाजपा इन चुनावों मे नरेंद्र मोदी के नाम पर चुनाव लड़ रही है न कि नोटबंदी जैसे मुद्दों पर". सुल्तानपुर से भाजपा की लोक सभा प्रत्याशी मेनका गांधी ने ये बात बीबीसी हिंदी से हुई एक विशेष बातचीत के दौरान कही.
जब उनसे पूछा गया कि,"क्या भाजपा को लग रहा है कि उनको नरेंद्र मोदी के नाम से ही फ़ायदा हो सकता है और पार्टी नोटबंदी जैसे मुद्दों को लेकर मतदाताओं के पास दोबारा जाने लायक़ नहीं हैं?" मेनका ने कहा,"निश्चित तौर पर इस बात से फ़ायदा है कि श्री मोदी बतौर प्रधानमंत्री दोबारा पीएम उम्मीदवार हैं. क्योंकि काम भी किया गया है, चाहे गैस सिलेंडर की बात हो या पक्के घरों को मुहैया कराने की, चुनाव में इन चीज़ों से बढ़त तो मिलती है." उन्होंने इस बात से भी सहमति जताई कि मौजूदा लोक सभा चुनाव विकास या अर्थव्यवस्था या नौकरियों के मुद्दे से ज़्यादा 'पर्सनालिटी ड्रिवेन' है यानी व्यक्तित्व पर आधारित. उन्होंने कहा,"ये हर प्रत्याशी को चुनना पड़ेगा कि वो मुद्दा क्या बनाएँगे. कुछ लोगों ने विकास चुन लिया और कुछ ने पर्सनालिटी को." सात बार सांसद रह चुकी मेनका गांधी इस बार अपनी पीलीभीत की सीट छोड़ कर सुल्तानपुर से चुनाव लड़ रही हैं जहाँ 2014 में उनके बेटे वरुण गांधी ने भाजपा के ही टिकट पर चुनाव जीता था. लेकिन जब मेनका गांधी से पूछा गया कि क्या भाजपा को लगा कि इस बार वरुण के बदले वे बेहतर कैंडिडेट हो सकती हैं तो मेनका ने जवाब दिया,"शायद पार्टी ने यही सोचा था इसलिए अदल-बदल कर दिया".उत्तर प्रदेश की सुल्तानपुर लोक सभा सीट पर 12 मई को मतदान होना है और मेनका गांधी का मुक़ाबला कांग्रेस पार्टी के पूर्व सांसद संजय सिंह, सपा-बसपा महगठबंधन के चंद्र भद्र सिंह उर्फ़ 'सोनू' और प्रगतिशील समाजवादी पार्टी की कमला यादव से है. प्रचार के दौरान मेनका गांधी के कुछ विवादित बयान भी सुनने को मिले हैं और एक मामले में उन्हें ज़िला चुनाव अधिकारी से नोटिस भी मिल चुका है. एक वायरल हुए वीडियो में मेनका ने अपनी जीत का दावा करते हुए कहा था कि जीत के बाद अगर मुसलमान उनके पास काम करवाने आते हैं तो उन्हें इस बारे में सोचना पड़ेगा. उन्होंने कहा था,"'मैं जीत रही हूं. लोगों की मदद और प्यार से मैं जीत रही हूं. लेकिन अगर मेरी जीत मुसलमानों के बिना होगी, तो मुझे बहुत अच्छा नहीं लगेगा. क्योंकि इतना मैं बता देती हूं कि दिल खट्टा हो जाता है. फिर जब मुसलमान आता है काम के लिए तो मैं सोचती हूं कि रहने दो, क्या फ़र्क़ पड़ता है." हालाँकि बीबीसी से हुई बातचीत में उन्होंने कहा कि,"मेरे बयान को तोड़ मरोड़ के पेश किया गया है और जो मैंने असल में कहा उसमें विवादित कुछ भी नहीं". उन्होंने कहा,"मैं निराश हो जाऊँगी अगर अल्पसंख्यक मुझे वोट नहीं देंगे क्योंकि मैं हमेशा उनको उतना ही प्यार देती हूँ जितना दूसरों को. अगर आप पीलीभीत के लोगों से पूछिए तो वो सब तो उतना ही आगे हैं जितने बाक़ी और इस समय पीलीभीत से हज़ार लोग यहाँ आए हैं चुनाव में मदद के लिए उसमें से आधे अल्पसंख्यक हैं. केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने अपने उस बयान पर भी सफ़ाई दी जिसमें उन्होंने कहा था कि,"चुनाव क्षेत्र के उन गाँवों को ABCD कैटिगरी में डाल देंगे जो मुझे वोट नहीं देंगे". मेनका गांधी ने कहा,"इसको एक हौवा बनाया गया है. एक तो ये पब्लिक मीटिंग भी नहीं थी और हमारे बूथ प्रमुखों की बैठक थी जो भाजपा के बूथ सम्भालते हैं. मैंने उनको कहा कि पीलीभीत में हम हर चुनाव के बाद बूथ प्रमुखों की क़ाबलियत देखते हैं और जीत के मार्जिन वग़ैरह से उनके कार्य को आँकते हैं. हर पार्टी में ये चीज़ें होती हैं और आंतरिक होती हैं." लेकिन ये पूछने पर कि क्या उनका ये रुख़ भारतीय जनता पार्टी की नीतियों से थोड़ा इतर नहीं है, मेनका ने जवाब दिया,"ये पार्टी लाइन का सवाल नहीं है मैं जो बोलती हूँ वो दिल से बोलती हूँ. मैं दिल से चाहती हूँ हर कोई वोट करे, और वो भी काम के बल पर."पिछले कुछ दिनों से यहाँ के मौजूदा सांसद और इस बार पीलीभीत से चुनाव लड़ने वाले वरुण गांधी भी यहाँ पहुँच गए हैं और मेनका गांधी के चुनाव प्रचार में जुटे हैं. वरुण गांधी ने सुल्तानपुर आते ही कुछ बयान दिए हैं जिन पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. मिसाल के तौर पर उन्होंने अखिलेश यादव के परिवार पर निशाना साधा है और साथ ही सुल्तानपुर के महागठबंधन उम्मीदवार पर भी.मेनका गांधी ने इस बात को भी मानने से इनकार किया कि इस चुनाव प्रचार के दौरान नेताओं पर पर्सनल अटैक बढ़ गए दिखते हैं जब 'चौकीदार चोर है' या अब इस दुनिया में नहीं रहे 'पूर्व प्रधानमंत्री भ्रष्टाचारी नंबर वन" जैसे जुमले सुनने को मिल रहे हैं. उन्होंने कहा,"पिछले चुनाव में देखे और उसके पहले भी सभी चुनावों में, हर दफ़ा आप यही पूछते हैं कि क्या पॉलिटिक्स का स्टैंडर्ड नहीं रहा. प्राचीन ग्रीक सभ्यता में भी लोग ऐसे बात करते थे कि नई पौध बहुत गिरी हुई है, ऐसे ही हम लोग भी बात करते हैं कि आज कल के चुनाव गिरे हुए हैं. ये ग़लत है"मौजूदा चुनावों में किसानों की ऋणमाफ़ी और उनकी नाराज़गी एक बड़ा मुद्दा बना रहा है और ख़ुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की है कि जीत की स्थिति में वे किसानों की पैसे-रुपए से और मदद करेंगे. मेनका गांधी ने इस बात को माना कि भारत में किसान पिछले लंबे समय से नाराज़ चल रहे हैं. मेनका ने कहा,"बहुत सालों से हम लोगों ने कृषि को पैसे की नज़र से देखना जारी रखा है. हम और पैसे देंगे, हम कम पैसे देंगे, हमने कोशिश भी नहीं की कि हम कृषि के तरीक़े बदलें. ये कृषि विज्ञान केंद्र जैसे सुस्त और नालायक़ संगठनों के चलते, इनके ही ज़रिए हम लोग वही चीज़ करवाते जा रहे हैं. हमने कोशिश भी नहीं की कि मॉडर्न फ़ार्मिंग को हम लोग सिखाएँ. इससे मेरा अभिप्राय सिर्फ़ मशीनों पर आधारित होना नहीं है, मेरा मतलब है ऐसी चीज़ें जिसमें कम पानी लगे, कम लागत लगे, हम लोग हॉर्टिकल्चर को भी ध्यान नहीं देते. भारत का कृषि मॉडल 1930's का है". आख़िर में मेनका गांधी ने इस बात से भी इनकार किया कि इन चुनावों में ध्रुवीकरण की राजनीति देखने को मिल रही है. उन्होंने कहा,"मुझे नहीं लगता कि इस समय ध्रुवीकरण की राजनीति की कोई कोशिश हो रही है, मुझे लगता है कोई भी पार्टी ये नहीं कर रही है. ये पूछे जाने पर कि संदेश तो ध्रुवीकरण का ही जाता है जब मालेगांव बम धमाकों की अभियुक्त प्रज्ञा ठाकुर को भोपाल में लोक सभा प्रत्याशी बनाया जाता है?
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