फिलहाल नेपाली सेना सुरक्षा की कमान संभाले हुए है और प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर रही है. विशेषज्ञों के अनुसार, नेपाली सेना की कोई राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं है और वह जल्द से जल्द एक सरकार का गठन चाहती है.
नेपाल इन दिनों गहरे राजनीतिक और संवैधानिक संकट से गुजर रहा है. जेन-जी युवाओं के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शनों ने केपी शर्मा ओली सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया है. अब आंदोलनकारी युवाओं की मांग है कि एक गैर-राजनीतिक नेतृत्व के तहत नई सरकार का गठन किया जाए.
हालांकि संविधान के मुताबिक वर्तमान संसद रहते हुए किसी गैर-सांसद को प्रधानमंत्री बनाना संभव नहीं है. इसी कारण प्रदर्शनकारी संसद भंग करने की मांग पर अड़े हैं.सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल प्रदर्शनकारियों की मांग पर कार्रवाई नहीं कर रहे हैं क्योंकि संविधान उन्हें सीधे संसद भंग करने का अधिकार नहीं देता है.आर्मी हेडक्वार्टर में लंबी बैठक, नामों पर मतभेदबुधवार को काठमांडू स्थित आर्मी हेडक्वार्टर में करीब 9 घंटे तक अहम बैठक चली जिसमें नई सरकार को लेकर सहमति नहीं बन सकी. हामी नेपाली एनजीओ की ओर से पूर्व जस्टिस सुशीला कार्की के नाम का प्रस्ताव रखा गया.यह भी पढ़ें: कहानी सुशीला कार्की की... 8 साल पहले नेताओं ने महाभियोग से हटाया, अब उसी नेपाल की कमान संभालेंगीकाठमांडू के मेयर बालेंद्र शाह ने भी कार्की का समर्थन किया, लेकिन शर्त रखी कि पहले संसद भंग हो, तभी अंतरिम सरकार बने. हालांकि अन्य जेन-ज़ी समूहों ने सुशीला कार्की के नाम का विरोध किया. नेपाली सेना ने सभी जेन-ज़ी समूहों से आज वार्ता में शामिल होने की अपील की है. Advertisement मौजूदा हालात में दो विकल्प ही मौजूदसंवैधानिक विशेषज्ञों के मुताबिक मौजूदा हालात में राष्ट्रपति के पास दो विकल्प हैं. जिसमें पहला ये है कि संसद में मौजूद किसी सदस्य को प्रधानमंत्री नियुक्त किया जाए, जिसे आंदोलनकारी स्वीकार करें. इसके बाद कैबिनेट की सिफारिश पर संसद भंग कर चुनाव कराया जा सकता है.दूसरा रास्ता है कि राष्ट्रपति आंदोलनकारियों द्वारा प्रस्तावित सर्वसम्मत उम्मीदवार को प्रधानमंत्री नियुक्त करें. हालांकि संविधान में इसका प्रावधान नहीं है, लेकिन जन आंदोलनों के बाद कई बार स्थापित संवैधानिक परंपराओं से इतर भी फैसले लिए गए हैं.विशेषज्ञों की राय और सुरक्षा हालातवरिष्ठ अधिवक्ता दिनेश त्रिपाठी ने कहा कि देश राजनीतिक और संवैधानिक शून्य की स्थिति में है. "आंदोलनकारियों के एक साझा उम्मीदवार को प्रधानमंत्री नियुक्त करना ही एकमात्र विकल्प बचा है," उन्होंने कहा.यह भी पढ़ें: नेपाल में फंसे सैकड़ों भारतीय ट्रक ड्राइवर, कर्फ्यू के चलते नहीं मिल रहा खाना, वतन वापसी का इंतजारइस बीच नेपाल आर्मी ने सुरक्षा का जिम्मा संभाल लिया है और प्रदर्शनकारियों से वार्ता की अगुवाई भी कर रही है. पूर्व मेजर जनरल बिनोज बस्न्यात ने कहा कि “नेपाल आर्मी की कोई राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं है. संभवतः गुरुवार शाम तक अंतरिम सरकार बन जाएगी.”20 युवाओं की मौत और जांच की मांग Advertisement सोमवार को हुई पुलिस कार्रवाई में कम से कम 20 जेन-ज़ी युवाओं की मौत हो चुकी है और दर्जनों घायल हैं. विशेषज्ञों ने मांग की है कि मौत की घटनाओं की जांच के लिए स्वतंत्र पैनल गठित किया जाए और दोषियों को कानून के दायरे में लाया जाए. 25 से अधिक जेलों से 15 हज़ार कैदी फरारराजनीतिक उथल-पुथल के बीच नेपाल ने अपनी इतिहास की सबसे बड़ी जेलब्रेक घटनाओं में से एक देखी. मंगलवार और बुधवार को देशभर की 25 से ज्यादा जेलों से करीब 15,000 कैदी फरार हो गए. प्रदर्शनकारियों ने कई जेलों पर हमला कर प्रशासनिक भवनों में आग लगा दी और गेट तोड़कर कैदियों को छुड़ा लिया.सबसे भीषण घटना बांके के किशोर सुधार गृह में हुई, जहां उपद्रव के दौरान पुलिस की गोलीबारी में पांच कैदियों की मौत हो गई. यहां 228 किशोर बंद थे, जिनमें से 122 भाग निकले. काठमांडू घाटी की दो बड़ी जेलों में भी सामूहिक भागने की घटनाएं हुईं. वहीं सुनधारा की सेंट्रल जेल से करीब 3,300 कैदी भाग चुके है जबकि ललितपुर की नक्खु जेल से लगभग 1,400 कैदी फरार हुए हैं. दिल्लीबाजार जेल में कैदियों ने आगजनी कर भागने की कोशिश की, लेकिन सुरक्षा बलों ने नाकाम कर दिया.यह भी पढ़ें: नेपाल में अब शुक्रवार तक कर्फ्यू, फंसे लोगों के लिए भारत ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर्स Advertisement रवि लामिछाने का पोस्टवहीं जेल से बाहर आए राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के अध्यक्ष रवि लामिछाने ने फेसबुक पोस्ट पर कहा कि उन्हें नई सरकार बनाने में कोई दिलचस्पी नहीं है, हालात सामान्य होने पर दोबारा जेल जाने की पेशकश की है. पेज फेसबुक पर वीडियो संदेश जारी कर खुद के जेल से बाहर आने पर सफाई दी और कहा कि कहा मुझे जेल प्रशासन ने बाहर जाने को कहा है.---- समाप्त ---- ये भी देखें
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