अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने आर्टेमिस II मिशन लॉन्च किया है, जो चांद के चारों ओर चक्कर लगाएगा। यह मिशन भविष्य के मानव चंद्र मिशनों की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण है और इसमें महत्वपूर्ण तकनीकी परीक्षण शामिल हैं। यह कार्यक्रम भविष्य में चंद्रमा पर एक स्थायी बेस स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी से 400,000 किलोमीटर की दूरी तय करेंगे।
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने अपने महत्वाकांक्षी मून मिशन ' आर्टेमिस II ' को लॉन्च कर दिया है। फ्लोरिडा से चार अंतरिक्ष यात्रियों ने उड़ान भरी, जो लगभग 10 दिनों तक अंतरिक्ष में रहेंगे। यह मिशन विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें अंतरिक्ष यात्री चांद के चारों ओर चक्कर लगाएंगे, लेकिन उसकी सतह पर उतरेंगे नहीं। आर्टेमिस II मिशन का मुख्य उद्देश्य चंद्रमा पर भविष्य में मानव मिशन की तैयारी करना है। यह मिशन डीप स्पेस मिशन के लिए आवश्यक तकनीक ों और प्रणालियों की जांच करेगा। विशेष रूप से, SLS रॉकेट और
ओरियन कैप्सूल के लाइफ सपोर्ट सिस्टम को मानव के साथ परखा जाएगा, ताकि भविष्य में कोई जोखिम न रहे। आर्टेमिस कार्यक्रम एक विशाल योजना का हिस्सा है। 2022 में आर्टेमिस I मिशन लॉन्च किया गया था, जिसमें बिना इंसानों के चांद की परिक्रमा की गई थी। अब आर्टेमिस II में मानव भेजकर सिस्टम की विश्वसनीयता जांची जा रही है। इसके बाद आर्टेमिस III मिशन में पृथ्वी की कक्षा में डॉकिंग तकनीक का परीक्षण होगा, जबकि 2028 में प्रस्तावित आर्टेमिस IV मिशन में अंतरिक्षयात्री चांद की सतह पर उतरेंगे। इस मिशन में, 4 अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी से 400,000 किलोमीटर की दूरी तय करेंगे, जो मानवता के इतिहास में किसी भी इंसान द्वारा तय की गई सबसे लंबी दूरी होगी। नासा के अनुसार, इस मिशन का सबसे बड़ा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि अंतरिक्ष यान के सभी सिस्टम इंसानों के साथ सुरक्षित रूप से काम कर रहे हैं या नहीं। मिशन विशेषज्ञों के अनुसार, चालक दल की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके अतिरिक्त, नेविगेशन, संचार और ऑनबोर्ड तकनीकों का परीक्षण भी किया जाएगा। इन सभी परीक्षणों के आधार पर भविष्य के चंद्र मिशनों की रणनीति निर्धारित की जाएगी।\आर्टेमिस कार्यक्रम का दीर्घकालिक लक्ष्य केवल चांद पर पहुंचना ही नहीं है, बल्कि वहां एक स्थायी बेस बनाना है। यह बेस भविष्य में मंगल और अन्य ग्रहों की यात्रा के लिए लॉन्चिंग प्लेटफॉर्म का काम कर सकता है। यानी यह मिशन मानव अंतरिक्ष यात्रा के अगले बड़े अध्याय की नींव रख रहा है। इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम की लागत भी काफी बड़ी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, 2025 तक आर्टेमिस कार्यक्रम पर लगभग 93 अरब डॉलर (लगभग 7.7 लाख करोड़ रुपये) खर्च होने का अनुमान है। इस वित्त पोषण का मुख्य स्रोत अमेरिकी सरकार और वहां के करदाता हैं। साथ ही निजी कंपनियां भी इस मिशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इस मिशन में बोइंग, नॉर्थोप ग्रुमन और लोखीड मार्टिन जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं। ये कंपनियां रॉकेट, कैप्सूल और अन्य तकनीकी उपकरणों के निर्माण में सहयोग कर रही हैं। सरकारी अनुबंधों के माध्यम से इन कंपनियों को भुगतान किया जाता है, जिससे अंतरिक्ष क्षेत्र में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप को बढ़ावा मिलता है।\आर्टेमिस II मिशन यह साबित करता है कि अंतरिक्ष अन्वेषण केवल वैज्ञानिक जिज्ञासा नहीं है, बल्कि भविष्य की संभावनाओं का द्वार है। यह मिशन आने वाले समय में चांद पर मानव बसावट और मंगल जैसे ग्रहों की यात्रा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह मिशन मानव अंतरिक्ष अन्वेषण में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और भविष्य की अंतरिक्ष यात्रा के लिए नए रास्ते खोलता है। यह न केवल वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देगा बल्कि तकनीकी नवाचारों को भी प्रेरित करेगा, जिससे समाज को लाभ होगा। आर्टेमिस कार्यक्रम से प्राप्त जानकारी और अनुभव भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों के लिए महत्वपूर्ण साबित होंगे। यह मिशन अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा और लंबी अवधि के मिशनों के लिए आवश्यक तकनीकों को विकसित करने पर केंद्रित है। इस मिशन के माध्यम से प्राप्त डेटा और परीक्षण भविष्य के चंद्र मिशनों और उससे आगे के मिशनों के लिए आधारशिला रखेंगे। आर्टेमिस II मिशन एक वैश्विक प्रयास है जो विभिन्न देशों और अंतरिक्ष एजेंसियों के बीच सहयोग को बढ़ावा देता है। यह मिशन मानवता को अंतरिक्ष की विशालता में नए अनुभवों और खोजों की ओर ले जाएगा। यह मिशन अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदान है, जो भविष्य की पीढ़ियों को प्रेरित करेगा
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