दुनिया की 'ऑयल लाइफलाइन' क्यों है होर्मुज? 1453 से रही है 'कब्जे' की लड़ाई, अंग्रेज भी चाहते थे दबदबा

Strait Of Hormuz News

दुनिया की 'ऑयल लाइफलाइन' क्यों है होर्मुज? 1453 से रही है 'कब्जे' की लड़ाई, अंग्रेज भी चाहते थे दबदबा
Strait Of Hormuz Is The WorldBritishersStrait Of Hormuz News
  • 📰 NBT Hindi News
  • ⏱ Reading Time:
  • 130 sec. here
  • 11 min. at publisher
  • 📊 Quality Score:
  • News: 79%
  • Publisher: 51%

11वीं से 14वीं सदी में होर्मुज द्वीप वैश्विक व्यापार का प्रमुख केंद्र था, जहां से एशिया-यूरोप व्यापार चलता था। समुद्री मार्गों की खोज के बाद पुर्तगाली और फिर ब्रिटिश शक्तियों ने यहां नियंत्रण स्थापित किया। आज भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज रणनीतिक और आर्थिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है, जहां से तेल, LNG और भारत का बड़ा विदेशी व्यापार गुजरता...

नवदीप सूरी: 11वीं से 14वीं सदी के बीच होर्मुज का छोटा-सा द्वीप अपने पूरे वैभव पर था। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास स्थित यह द्वीप व्यापारियों और साम्राज्यों के लिए सोने की खान जैसा था। अरब, फारसी, चीनी और भारतीय व्यापारी यहीं से अपने मसाले, सूती कपड़े, नील, चावल और चीनी वगैरह फारस, मेसोपोटामिया, तुर्किये और यूरोप तक बेचते। कुछ व्यापारियों ने यहां बसने के लिए स्थानीय लोगों से शादी भी की थी। उन्होंने अपनी भाषा, रीति-रिवाज और खाने-पीने की चीजें द्वीप की संस्कृति में शामिल कर दीं। वहीं से वे फारसी घोड़े, मोती, खजूर और चीनी रेशम लेकर भारत लौटते और बड़ा मुनाफा कमाते।समुद्री रास्ता: 14वीं सदी में मंगोलों के हमलों के बाद शासक मुख्य भूमि पर चले गए, जिससे व्यापार समुद्री मार्गों की ओर बढ़ा। 1453 में ऑटोमन साम्राज्य ने कुस्तुनतुनिया पर कब्जा जमाया और व्यापार के जमीनी रास्तों पर यूरोपियों की पहुंच मुश्किल कर दी। यूरोप के व्यापारी अब भारत और चीन तक पहुंचने के लिए समुद्री रास्ता तलाश रहे थे। 1498 से ही पुर्तगाल ने धीरे-धीरे भारत के पश्चिमी तट पर नियंत्रण बना लिया। 1507 तक अफोंसो डी अल्बाकर्की ने गोवा, बंबई और दीव तक अपनी पकड़ मजबूत की और होर्मुज पर ‘फोर्ट ऑफ आवर लेडी ऑफ द कॉन्सेप्शन’ बनाकर समुद्री मार्गों पर नियंत्रण जमाया।व्यापारिक चौकी: ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी भी यहां पैठ बनाना चाह रही थी। 1608 में कैप्टन विलियम हॉकिन्स मुगल बादशाह जहांगीर के दरबार में गए और सूरत में व्यापारिक चौकी खोलने की अनुमति मांगी। इसके करीब 14 बरस बाद, 1622 में ब्रिटिश नौसेना ने शाह अब्बास की मदद से पुर्तगालियों को होर्मुज से बेदखल कर दिया। अगले 150 बरसों तक ब्रिटिश पॉलिटिकल रेजिडेंट्स ने होर्मुज पर अपना दबदबा रखा। भारत के वायसराय और बंबई के गवर्नर उनके कामकाज की देखरेख करते थे।अमेरिका की मंशा: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का महत्व आज भी कम नहीं हुआ है। पश्चिम एशिया के मौजूदा संघर्ष में दुनिया की नजरें इस पर टिकी हैं। अमेरिका की मंशा इसे स्वतंत्र समुद्री गलियारा घोषित करने की है ताकि हर देश का जहाज यहां से सुरक्षित गुजर सके। ईरान हमेशा कहता रहा है कि यह उसका पानी है।अर्थव्यवस्था पर असर: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का राजनीतिक के अलावा आर्थिक महत्व भी है। भारत का करीब 16% विदेशी व्यापार इसी रास्ते से होता है। क्रूड ऑयल और करीब आधी LNG यहीं से होकर आती है। उर्वरक के लिए जरूरी यूरिया और अमोनिया का दो तिहाई हिस्सा भी इसी रूट से ट्रांसपोर्ट होता है। इसलिए यहां पाबंदी लगने का सीधा असर पड़ता है।ताकत का प्रतीक: यही कारण है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज हमेशा से दुनिया की राजनीति और व्यापार का महत्वपूर्ण रास्ता रहा है। पुर्तगाली, फारसी और अंग्रेजों ने इस पर नियंत्रण की कोशिश की। यह सिर्फ तेल और व्यापार का मार्ग नहीं, सुरक्षा और सामरिक लिहाज से महत्वपूर्ण है। आज भी बड़ी शक्तियां इसे लेकर सतर्क हैं। इतिहास गवाह है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण की होड़ रही है। यह मानव सभ्यता, व्यापार और शक्ति का प्रतीक भी है।.

नवदीप सूरी: 11वीं से 14वीं सदी के बीच होर्मुज का छोटा-सा द्वीप अपने पूरे वैभव पर था। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास स्थित यह द्वीप व्यापारियों और साम्राज्यों के लिए सोने की खान जैसा था। अरब, फारसी, चीनी और भारतीय व्यापारी यहीं से अपने मसाले, सूती कपड़े, नील, चावल और चीनी वगैरह फारस, मेसोपोटामिया, तुर्किये और यूरोप तक बेचते। कुछ व्यापारियों ने यहां बसने के लिए स्थानीय लोगों से शादी भी की थी। उन्होंने अपनी भाषा, रीति-रिवाज और खाने-पीने की चीजें द्वीप की संस्कृति में शामिल कर दीं। वहीं से वे फारसी घोड़े, मोती, खजूर और चीनी रेशम लेकर भारत लौटते और बड़ा मुनाफा कमाते।समुद्री रास्ता: 14वीं सदी में मंगोलों के हमलों के बाद शासक मुख्य भूमि पर चले गए, जिससे व्यापार समुद्री मार्गों की ओर बढ़ा। 1453 में ऑटोमन साम्राज्य ने कुस्तुनतुनिया पर कब्जा जमाया और व्यापार के जमीनी रास्तों पर यूरोपियों की पहुंच मुश्किल कर दी। यूरोप के व्यापारी अब भारत और चीन तक पहुंचने के लिए समुद्री रास्ता तलाश रहे थे। 1498 से ही पुर्तगाल ने धीरे-धीरे भारत के पश्चिमी तट पर नियंत्रण बना लिया। 1507 तक अफोंसो डी अल्बाकर्की ने गोवा, बंबई और दीव तक अपनी पकड़ मजबूत की और होर्मुज पर ‘फोर्ट ऑफ आवर लेडी ऑफ द कॉन्सेप्शन’ बनाकर समुद्री मार्गों पर नियंत्रण जमाया।व्यापारिक चौकी: ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी भी यहां पैठ बनाना चाह रही थी। 1608 में कैप्टन विलियम हॉकिन्स मुगल बादशाह जहांगीर के दरबार में गए और सूरत में व्यापारिक चौकी खोलने की अनुमति मांगी। इसके करीब 14 बरस बाद, 1622 में ब्रिटिश नौसेना ने शाह अब्बास की मदद से पुर्तगालियों को होर्मुज से बेदखल कर दिया। अगले 150 बरसों तक ब्रिटिश पॉलिटिकल रेजिडेंट्स ने होर्मुज पर अपना दबदबा रखा। भारत के वायसराय और बंबई के गवर्नर उनके कामकाज की देखरेख करते थे।अमेरिका की मंशा: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का महत्व आज भी कम नहीं हुआ है। पश्चिम एशिया के मौजूदा संघर्ष में दुनिया की नजरें इस पर टिकी हैं। अमेरिका की मंशा इसे स्वतंत्र समुद्री गलियारा घोषित करने की है ताकि हर देश का जहाज यहां से सुरक्षित गुजर सके। ईरान हमेशा कहता रहा है कि यह उसका पानी है।अर्थव्यवस्था पर असर: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का राजनीतिक के अलावा आर्थिक महत्व भी है। भारत का करीब 16% विदेशी व्यापार इसी रास्ते से होता है। क्रूड ऑयल और करीब आधी LNG यहीं से होकर आती है। उर्वरक के लिए जरूरी यूरिया और अमोनिया का दो तिहाई हिस्सा भी इसी रूट से ट्रांसपोर्ट होता है। इसलिए यहां पाबंदी लगने का सीधा असर पड़ता है।ताकत का प्रतीक: यही कारण है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज हमेशा से दुनिया की राजनीति और व्यापार का महत्वपूर्ण रास्ता रहा है। पुर्तगाली, फारसी और अंग्रेजों ने इस पर नियंत्रण की कोशिश की। यह सिर्फ तेल और व्यापार का मार्ग नहीं, सुरक्षा और सामरिक लिहाज से महत्वपूर्ण है। आज भी बड़ी शक्तियां इसे लेकर सतर्क हैं। इतिहास गवाह है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण की होड़ रही है। यह मानव सभ्यता, व्यापार और शक्ति का प्रतीक भी है।

We have summarized this news so that you can read it quickly. If you are interested in the news, you can read the full text here. Read more:

NBT Hindi News /  🏆 20. in İN

Strait Of Hormuz Is The World Britishers Strait Of Hormuz News Iran Us War Iran Israel War ईरान-अमेरिका युद्ध ईरान-इजरायल युद्द

 

United States Latest News, United States Headlines

Similar News:You can also read news stories similar to this one that we have collected from other news sources.

Bhilwara News : CBEO के 14 में से 11 पद खाली, कार्यवाहक के भरोसे DEO का पदBhilwara News : CBEO के 14 में से 11 पद खाली, कार्यवाहक के भरोसे DEO का पदकांग्रेस कार्यालय में प्रदेश महासचिव प्रशांत बैरवा एवं जिलाध्यक्ष अक्षय त्रिपाठी के सानिध्य में बैठक हुई।
Read more »

बिहार में 14 आईएएस अधिकारियों के तबादले, 11 को फिलहाल सामान्य प्रशासन विभाग में भेजाबिहार में 14 आईएएस अधिकारियों के तबादले, 11 को फिलहाल सामान्य प्रशासन विभाग में भेजाबिहार की नीतीश कुमार सरकार ने बुधवार को भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के 14 अधिकारियों का तबादला कर दिया. बिहार सरकार की ओर से जारी एक अधिसूचना के अनुसार 11 आईएएस अधिकारियों को राज्य सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) में पदस्थापन की प्रतिक्षा में सूची में डाला गया है.
Read more »

ಬಿಗ್‌ ಬಾಸ್‌ ಕನ್ನಡ ಸೀಸನ್‌ 11 ಮನೆ ಸೇರುವ 14 ಸ್ಪರ್ಧಿಗಳು ಇವರೇ .!ಬಿಗ್‌ ಬಾಸ್‌ ಕನ್ನಡ ಸೀಸನ್‌ 11 ಮನೆ ಸೇರುವ 14 ಸ್ಪರ್ಧಿಗಳು ಇವರೇ .!BBK season 11 contestants: ಬಿಗ್ ಬಾಸ್ ಕನ್ನಡ ಸೀಸನ್ 11 ಕ್ಕೆ ದಿನಗಣನೆ ಆರಂಭವಾಗಿದೆ.
Read more »

पीएम मोदी 8 से 14 नवंबर तक महाराष्ट्र में करेंगे 11 रैलियांपीएम मोदी 8 से 14 नवंबर तक महाराष्ट्र में करेंगे 11 रैलियांपीएम मोदी 8 से 14 नवंबर तक महाराष्ट्र में करेंगे 11 रैलियां
Read more »

Bihar Assembly Election date 2025: অশান্ত বিহারে মাত্র দুদফায় নির্বাচন! ১৪-য় নভেম্বর ফল ঘোষণা...Bihar Assembly Election date 2025: অশান্ত বিহারে মাত্র দুদফায় নির্বাচন! ১৪-য় নভেম্বর ফল ঘোষণা...Bihar To Vote On November 6 And 11 In Two Phases, Results On November 14
Read more »

दक्षिण अफ्रीका: हॉस्टल में घुसकर बदमाशों ने की फायरिंग, 11 की मौत, 14 घायलदक्षिण अफ्रीका: हॉस्टल में घुसकर बदमाशों ने की फायरिंग, 11 की मौत, 14 घायलदक्षिण अफ्रीका: हॉस्टल में घुसकर बदमाशों ने की फायरिंग, 11 की मौत, 14 घायल
Read more »



Render Time: 2026-04-02 22:34:32