आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद जी गिरि के अनुसार, दूसरों से सम्मान और सहयोग की अत्यधिक अपेक्षाएं ही दुखों का कारण हैं। अज्ञानता से उत्पन्न होने वाले भ्रम और अपेक्षाओं के जाल से बाहर निकलने का मार्ग बताते हुए, वे धैर्य, ज्ञान और सत्य की ओर अग्रसर होने का महत्व समझाते हैं।
Avdheshanand Giri Maharaj Life Lesson. We Expect Too Much Respect And Support From Others, And This Is The Cause Of Suffering.हम दूसरों से सम्मान और सहयोग पाने की बहुत ज्यादा अपेक्षा रखते हैं, ये दुख का कारण हैहमारी सभी समस्याएं और भ्रम अ ज्ञान के कारण हैं। अ ज्ञान की वजह से ही जीवन में दुख आता है। जब तक हम वास्तविकता को नहीं समझते, तब तक अपेक्षाओं के जाल में फंसे रहते हैं। हम दूसरों से सम्मान, सहयोग और विचारों की स्वीकृति की आशा रखते हैं। यही अपेक्षाएं हमें भीतर से कमजोर बनाती हैं। ज्ञान के अभाव में हम असंतुष्ट रहते हैं। आज जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद जी गिरि के जीवन सूत्र में जानिए दुख ों को दूर करने के लिए क्या करना चाहिए?हमें धैर्य के साथ आगे बढ़ना चाहिए, क्योंकि सफलता मेहनत, अध्ययन और अनुभव से मिलती हैसमस्याएं वास्तव में उतनी बड़ी नहीं होतीं, जितनी बड़ी हम अपने अ ज्ञान से बना लेते हैंवेद-शास्त्र ज्ञान देते हैं, सत्य की ओर ले जाते हैं और जीवन में संतुलन बनाए रखते हैंभोपाल में बूंदाबांदी, इंदौर समेत 9 जिलों में हल्की बारिश'मोन्था' कमजोर.
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