दिल्ली कार धमाके में पुलवामा के डॉक्टर उमर नबी की कथित संलिप्तता के बाद उनके गांव में दहशत का माहौल है। गांव के लोग स्तब्ध हैं और जांच एजेंसियां मामले की पड़ताल कर रही हैं। उमर के परिवार और गांव वालों की प्रतिक्रियाएं अलग-अलग हैं।
दिल्ली कार धमाके में पुलवामा के डॉक्टर उमर नबी की कथित संलिप्तता से उनके पैतृक गांव कोइल ( पुलवामा ) में खलबली मच गई है। गांव के लोग इस घटना से स्तब्ध हैं और उनकी प्रतिक्रियाएं मिली-जुली हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उमर एक शांत स्वभाव का व्यक्ति था और वह ज्यादातर लोगों से अलग-थलग रहता था। वह जरूरत पर ही घर से बाहर निकलता था और अधिकांश ग्रामीण तो उसका नाम तक नहीं जानते थे। अमर उजाला की टीम ने उमर के गांव कोइल में जाकर वहां के हालात का जायजा लिया। गांव के छोटे बाजार में शुरुआत में मीडिया से बात
करने में लोग हिचकिचा रहे थे। फोटो या वीडियो न लेने का आश्वासन देने के बाद कुछ लोग बातचीत के लिए राजी हुए। एक किराना दुकानदार मोहम्मद शफी ने डॉ. उमर के बारे में बताया कि वह बचपन से उसे देखता आ रहा है। शफी ने कहा, “जिस तरह से लड़के बाजार में घूमते हैं, मैंने उसे कभी उस तरह घूमते नहीं देखा। वह पांच वक्त की नमाज घर पर ही पढ़ता था और लोगों से कम बात करता था।” उमर की दिल्ली ब्लास्ट में भूमिका पर शफी ने कहा, “हमने जब मीडिया के जरिए यह बात सुनी तो हमारे पैरों तले से जमीन खिसक गई।” एक अन्य स्थानीय निवासी बशीर अहमद ने बताया कि उमर को गांव के करीब एक लाख लोगों में से केवल 1500 ही जानते थे और उमर शायद ही इन 1500 लोगों को पहचानता होगा।\बाजार के बाद, टीम उमर के घर की ओर बढ़ी। संकरी गलियों से गुजरते हुए, वे उसके घर के गेट के पास पहुंचे। उमर के घर पर लोगों का आना-जाना लगा हुआ था। घर के बाहर खड़े कुछ युवकों ने भी यही बात कही कि उमर धार्मिक प्रवृत्ति का था। एक युवक आबिद (बदला हुआ नाम) ने कहा, “इस परिवार में ऐसा कोई व्यक्ति नहीं था। अगर उमर ने ऐसा किया है तो जांच होनी चाहिए।” इस बीच, आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि विस्फोट में शामिल कार की खरीद-फरोख्त से जुड़े तीन लोगों को हिरासत में लिया गया है। वहीं, एचआर नंबर की आई-20 गाड़ी के साथ वायरल हुई फोटो में संबूरा, पुलवामा के आमिर रशीद मीर को लेकर भी चर्चा है कि यह गाड़ी उसकी है। हालांकि, आमिर के परिवार का कहना है कि तस्वीर में आमिर के साथ दिख रही गाड़ी उसकी नहीं है। बताया जा रहा है कि आमिर पेशे से प्लंबर है। डॉ. उमर के बारे में पूछने पर, उनके पिता गुलाम नबी ने बताया कि वे पहले शिक्षक थे, लेकिन 2003 में पदोन्नति के दौरान जरूरी कागजात खो जाने के कारण, 2012 में उनकी नौकरी चली गई। उन्होंने बताया कि अब परिवार में डॉ. उमर ही एकमात्र कमाने वाला था। उनका दूसरा बेटा एमए पास है, लेकिन वह प्लंबर का काम करता है। उन्होंने बताया कि उमर अकेले रहना पसंद करता था और घर से बहुत कम बाहर निकलता था। इस सवाल पर कि क्या वह खेलकूद में रुचि नहीं रखता था, भट ने घर के आगे के छोटे से आंगन की ओर इशारा करते हुए कहा, “जब मन करता था, हम बाप-बेटे यहीं एक साथ खेलते थे।”\गुलाम नबी ने बताया कि कई जांच एजेंसियां आईं, लेकिन पूछताछ केवल जम्मू-कश्मीर पुलिस ने ही की। उन्होंने यह भी बताया कि डॉ. उमर ने श्रीनगर के सरकारी मेडिकल कॉलेज से एमडी की पढ़ाई की थी। वह जीएमसी अनंतनाग में सीनियर रेजिडेंट था और कुछ समय पहले नौकरी छोड़कर चला गया था। वर्तमान में, वह फरीदाबाद में अल फलाह यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत था। दिल्ली कार धमाके में डॉ. उमर नबी की संलिप्तता पर उनके पिता गुलाम नबी भट भी परेशान हैं। उन्होंने बताया कि दिल्ली ब्लास्ट के बाद सबसे पहले उमर के ससुराल में छापा पड़ा था। उसके बाद उनके घर पर कई जांच टीमें आईं। भट ने बताया कि डॉ. उमर की दो महीने पहले ही श्रीनगर में मंगनी हुई थी। उन्हें उमर के ससुराल वालों ने ही बताया कि पुलिस उमर को ढूंढ रही है। पहले तो उन्होंने सोचा कि यह कोई सामान्य बात होगी। बाद में, जब पुलिस और सुरक्षाबल उनके घर आए, तो उन्हें चिंता हुई। उन्होंने बताया कि उनके बड़े बेटे को सेना ने बुलाया और कुछ घंटों के बाद छोड़ दिया। पिछले दो दिनों में उनके घर पर पुलिस, स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप और अन्य जांच एजेंसियों ने कई बार छापे मारे
दिल्ली कार धमाका उमर नबी पुलवामा जांच आतंकवाद
