दावोस शिखर सम्मेलन में, यूरोपीय नेताओं ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार नीतियों और एकतरफा दृष्टिकोण की कड़ी आलोचना की। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने टैरिफ के खतरे का सामना करने के लिए ‘ट्रेड बजूका’ के इस्तेमाल की चेतावनी दी, जबकि अन्य नेताओं ने ट्रंप की नीतियों को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए हानिकारक बताया।
दावोस में यूरोपीय देशों के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की नीतियों को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। दावोस के मंच पर यूरोपीय संघ (EU) के कई प्रमुख नेताओं ने ट्रंप की नीतियों की खुलकर आलोचना की। अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा लगाए गए टैरिफ (import tax) की धमकियों पर प्रतिक्रिया देते हुए, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने स्पष्ट रूप से कहा कि यूरोप झुकने को तैयार नहीं है। मैक्रों ने दावोस में अपनी बात रखते हुए कहा कि यदि अमेरिका ने टैरिफ के माध्यम से यूरोप को डराने की कोशिश की, तो वे अपने
‘एंटी-कोएर्शन इंस्ट्रूमेंट’ का उपयोग करने में संकोच नहीं करेंगे, जिसे ‘ट्रेड बजूका’ के नाम से भी जाना जाता है। मैक्रों ने ट्रंप की नीतियों को आईना दिखाते हुए कहा कि ‘हमें गुंडों से ज्यादा सम्मान पसंद है’। मैक्रों ने बिना किसी नाम लिए ट्रंप की उन नीतियों की आलोचना की जो दुनिया को अराजकता की ओर धकेल रही हैं।\मैक्रों ने अमेरिका द्वारा यूरोप पर लगाए जाने वाले टैरिफ और ‘ग्रीनलैंड विवाद’ को ‘बेवकूफाना’ और ‘अनावश्यक आक्रामकता’ बताया। उन्होंने ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ को संयुक्त राष्ट्र (UN) का विकल्प मानने से भी इनकार कर दिया। मैक्रों ने आरोप लगाया कि अमेरिका जानबूझकर यूरोप को कमजोर और अपना ‘गुलाम’ बनाना चाहता है। उन्होंने चीन की ‘एक्सेस कैपेसिटी’ यानी जरूरत से ज्यादा उत्पादन पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि चीन अपनी औद्योगिक नीतियों के जरिए यूरोप के बाजारों को ध्वस्त करना चाहता है। इस मंच पर कई अन्य नेताओं ने भी ट्रंप की नीतियों पर सवाल उठाए। मार्क कार्नी ने ट्रंप की ‘ट्रांजेक्शनलिज्म’ यानी स्वार्थ पर आधारित नीतियों पर हमला बोला। कार्नी ने कहा कि ‘अगर महाशक्तियां अपने स्वार्थ के लिए नियमों और मूल्यों का दिखावा करना भी छोड़ देंगी, तो लेनदेन से होने वाले मुनाफे को फिर से हासिल करना नामुमकिन हो जाएगा’। कार्नी ने चेतावनी दी कि ट्रंप जिस तरह ‘नियम-कायदों’ को कमजोर कर रहे हैं, उससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को खतरा हो सकता है। यूरोपीय नेताओं ने एक स्वर में ट्रंप की नीतियों को वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए हानिकारक बताया, जिससे पता चलता है कि दावोस में ट्रंप की नीतियों के खिलाफ एक मजबूत एकजुटता बन गई है।\दावोस में हुई इस बैठक में व्यापार, भू-राजनीति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। कई विशेषज्ञों का मानना है कि यूरोपीय संघ और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। टैरिफ और व्यापार युद्ध जैसी नीतियां वैश्विक बाजारों को अस्थिर कर सकती हैं और विकास की गति को धीमा कर सकती हैं। बैठक में यह भी स्पष्ट हुआ कि यूरोपीय संघ जलवायु परिवर्तन, डिजिटल अर्थव्यवस्था और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अमेरिका के साथ सहयोग जारी रखने के लिए तैयार है, लेकिन यह सहयोग समान शर्तों पर और आपसी सम्मान के आधार पर होगा। यूरोपीय नेताओं ने यह भी रेखांकित किया कि वे बहुपक्षीयता और अंतर्राष्ट्रीय नियमों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखेंगे। दावोस में हुए इस घटनाक्रम से यह स्पष्ट हो गया है कि दुनिया अब अमेरिका की एकतरफा नीतियों को चुनौती देने के लिए तैयार है, और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और कूटनीति के माध्यम से वैश्विक चुनौतियों का समाधान खोजने के लिए प्रतिबद्ध है। दावोस शिखर सम्मेलन में हुई यह बहस वैश्विक राजनीतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है, जो भविष्य में अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को नया आकार देगी
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