Iran-Israel War: अमेरिका-इजरायल-ईरान संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 15 दिनों में 40 से अधिक बढ़कर $73 से $103 प्रति बैरल हो गई हैं।
नई दिल्ली| अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को केवल 15 दिनों में 40 प्रतिशत से अधिक बढ़ा दिया है। इस संघर्ष ने होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से ऊर्जा आपूर्ति मार्ग को बाधित कर दिया है, जिसका वैश्विक ऊर्जा बाजारों- विशेषकर एशिया पर गहरा प्रभाव पड़ा है। युद्ध की शुरुआत से पहले 27 फरवरी को कच्चे तेल की कीमत लगभग 73 डॉलर प्रति बैरल थी। शनिवार तक यह कीमत तेजी से बढ़कर लगभग 103 डॉलर प्रति बैरल हो गई। यानी 27 फरवरी से अब तक कच्चे तेल की कीमत 30 डॉलर प्रति बैरल या 41 प्रतिशत बढ़ चुकी है। अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष 28 फरवरी को शुरू हुआ था, जब अमेरिकी और इजरायली बलों ने ईरानी सैन्य संपत्तियों पर हमले किए। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई भी इन हमलों में मारे गए थे। एक्सपर्ट बोले- वैश्विक बाजार होंगे प्रभावित कीमतों में यह तेज वृद्धि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में बाधाओं की बढ़ती चिंताओं को दर्शाती है। इसका कारण यह है कि पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ता जा रहा है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि संघर्ष से संबंधित घटनाक्रम आने वाले दिनों में वैश्विक बाजारों को प्रभावित करते रहेंगे। एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर का कहना है कि आने वाला सप्ताह अत्यधिक अस्थिर रहने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि निवेशक भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर करीबी नजर रखेंगे, जिससे कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक बांड यील्ड और मुद्रा बाजार की अस्थिरता प्रभावित होगी। यह भी पढ़ें- LPG के बाद पानी भी होगा महंगा! पैकेज्ड वाटर इंडस्ट्री पर दबाव, गर्मियों से पहले बढ़ सकती है बोतलबंद पानी की कीमत? .
.. तो 150 डॉलर तक जाएगा कच्चा तेल? कोटक सिक्योरिटीज की असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट कायनात चैनवाला का कहना है कि, निकट अवधि में वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक बढ़ सकती हैं और अगर ईरान युद्ध एक महीने से अधिक समय तक चला तो कीमतें संभावित रूप से 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। चैनवाला ने कहा कि होर्मुज जलडमरुमध्य पर चल रही उथल-पुथल से तेल की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी की ओर से जारी किया गया 40 करोड़ बैरल का रणनीतिक भंडार केवल 20 दिनों की कम हुई आपूर्ति की भरपाई कर सकता है। अगर रुकावट लंबे समय तक बनी रहती है तो यह अपर्याप्त होगा। यह भी पढ़ें- 'पहले भारत को रोका, अब दुनिया से खरीदने की अपील कर रहा', रूस से तेल खरीद पर US का यू-टर्न, क्या बोला ईरान?
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