तीसरा मोर्चा कांग्रेस के साथ सरकार बनाने को तैयार, 'ड्राइविंग सीट' को लेकर रार

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तीसरा मोर्चा कांग्रेस के साथ सरकार बनाने को तैयार, 'ड्राइविंग सीट' को लेकर रार
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तीसरा मोर्चा कांग्रेस के साथ सरकार बनाने को तैयार, 'ड्राइविंग सीट' को लेकर रार INCIndia RahulGandhi yadavtejashwi ncbn MamataOfficial UpendraRLSP LokSabhaElections Loksabhaelections2019

अगर 23 मई को आने वाले लोकसभा चुनाव के नतीजें में एनडीए और कांग्रेस में से कोई भी पार्टी सरकार नहीं बना पाती है तो क्षेत्रीय दल 'ड्राइविंग सीट' पर बैठने की तैयारी कर चुके हैं। तीसरा मोर्चा कांग्रेस से समर्थन लेने के लिए तैयार है। लेकिन शर्त यह है कि सरकार का संचालन क्षेत्रीय दलों के पास ही होगा। तेलंगाना राष्ट्र समिति ने मंगलवार को इस बात की घोषणा की है। दरअसल, तीसरे मोर्चे की कवायद तेलंगाना के मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव ने ही की है। अब उनकी पार्टी के प्रवक्ता की तरफ से यह बयान आया है जो कि काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। टीआरएस का कहना है कि चंद्रशेखर राव द्वारा प्रस्तावित क्षेत्रीय दलों का संघीय मोर्चा केंद्र में सरकार बनाने के लिए तब तक कांग्रेस का समर्थन लेने को तैयार है जब तक कि वह ‘ड्राइवर सीट’ नहीं मांगती। यानी की सरकार का संचालन क्षेत्रीय दलों के पास ही हो। बता दें कि राव पिछले साल से ही गैर भाजपा और गैर कांग्रेस संघीय मोर्चे के विचार को आगे बढ़ा रहे हैं।टीआरएस प्रवक्ता आबिद रसूल खान का कहना है कि उनकी पार्टी राहुल गांधी के नेतृत्व वाले संगठन के साथ काम करने को तैयार है। चंद्रशेखर राव इस बात पर दृढ़ हैं कि ड्राइवर सीट पर संघीय मोर्चा होना चाहिए और उसी को सरकार चलानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार बनाने के लिए संख्या कम होने की स्थिति में कांग्रेस से बाहर से समर्थन लेने का विकल्प तलाशा जाएगा। लेकिन सरकार संघीय मोर्चे की होगी और कांग्रेस को अपना समर्थन बाहर से देना होगा। हम इस बात पर दृढ़ हैं कि ड्राइवर सीट पर क्षेत्रीय दल होने चाहिए। प्रधानमंत्री का पद संघीय मोर्चे के घटकों में से किसी एक को जाना चाहिए। प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घटक दलों से एक सर्वसम्मत उम्मीदवार होगा।आबिद रसूल का कहना है कि हम कांग्रेस से बात करने और यह देखने को तैयार हैं कि वे हमें सरकार बनाने के लिए समर्थन देते हैं या नहीं। यदि वे ऐसा करते हैं तो क्षेत्रीय दल तब तक इसके खिलाफ नहीं हैं जब तक कि कांग्रेस ड्राइवर सीट नहीं मांगते। आबिद का कहना है कि संघीय मोर्चा किसी भी तरह भाजपा से नहीं जुड़ेगा। हम भाजपा के खिलाफ हैं। हम भाजपा के साथ कुछ नहीं चाहते, न उसका समर्थन करना चाहते, न उससे समर्थन लेना चाहते। केसीआर से बात करने वाले ज्यादातार घटकों का भी यही मत है कि वे वे भाजपा के साथ कोई संबंध नहीं रखेंगे। अगर 23 मई को आने वाले लोकसभा चुनाव के नतीजें में एनडीए और कांग्रेस में से कोई भी पार्टी सरकार नहीं बना पाती है तो क्षेत्रीय दल 'ड्राइविंग सीट' पर बैठने की तैयारी कर चुके हैं। तीसरा मोर्चा कांग्रेस से समर्थन लेने के लिए तैयार है। लेकिन शर्त यह है कि सरकार का संचालन क्षेत्रीय दलों के पास ही होगा। तेलंगाना राष्ट्र समिति ने मंगलवार को इस बात की घोषणा की है। दरअसल, तीसरे मोर्चे की कवायद तेलंगाना के मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव ने ही की है। अब उनकी पार्टी के प्रवक्ता की तरफ से यह बयान आया है जो कि काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।टीआरएस का कहना है कि चंद्रशेखर राव द्वारा प्रस्तावित क्षेत्रीय दलों का संघीय मोर्चा केंद्र में सरकार बनाने के लिए तब तक कांग्रेस का समर्थन लेने को तैयार है जब तक कि वह ‘ड्राइवर सीट’ नहीं मांगती। यानी की सरकार का संचालन क्षेत्रीय दलों के पास ही हो। बता दें कि राव पिछले साल से ही गैर भाजपा और गैर कांग्रेस संघीय मोर्चे के विचार को आगे बढ़ा रहे हैं।टीआरएस प्रवक्ता आबिद रसूल खान का कहना है कि उनकी पार्टी राहुल गांधी के नेतृत्व वाले संगठन के साथ काम करने को तैयार है। चंद्रशेखर राव इस बात पर दृढ़ हैं कि ड्राइवर सीट पर संघीय मोर्चा होना चाहिए और उसी को सरकार चलानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार बनाने के लिए संख्या कम होने की स्थिति में कांग्रेस से बाहर से समर्थन लेने का विकल्प तलाशा जाएगा। लेकिन सरकार संघीय मोर्चे की होगी और कांग्रेस को अपना समर्थन बाहर से देना होगा। हम इस बात पर दृढ़ हैं कि ड्राइवर सीट पर क्षेत्रीय दल होने चाहिए। प्रधानमंत्री का पद संघीय मोर्चे के घटकों में से किसी एक को जाना चाहिए। प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घटक दलों से एक सर्वसम्मत उम्मीदवार होगा।आबिद रसूल का कहना है कि हम कांग्रेस से बात करने और यह देखने को तैयार हैं कि वे हमें सरकार बनाने के लिए समर्थन देते हैं या नहीं। यदि वे ऐसा करते हैं तो क्षेत्रीय दल तब तक इसके खिलाफ नहीं हैं जब तक कि कांग्रेस ड्राइवर सीट नहीं मांगते। आबिद का कहना है कि संघीय मोर्चा किसी भी तरह भाजपा से नहीं जुड़ेगा। हम भाजपा के खिलाफ हैं। हम भाजपा के साथ कुछ नहीं चाहते, न उसका समर्थन करना चाहते, न उससे समर्थन लेना चाहते। केसीआर से बात करने वाले ज्यादातार घटकों का भी यही मत है कि वे वे भाजपा के साथ कोई संबंध नहीं रखेंगे।.

अगर 23 मई को आने वाले लोकसभा चुनाव के नतीजें में एनडीए और कांग्रेस में से कोई भी पार्टी सरकार नहीं बना पाती है तो क्षेत्रीय दल 'ड्राइविंग सीट' पर बैठने की तैयारी कर चुके हैं। तीसरा मोर्चा कांग्रेस से समर्थन लेने के लिए तैयार है। लेकिन शर्त यह है कि सरकार का संचालन क्षेत्रीय दलों के पास ही होगा। तेलंगाना राष्ट्र समिति ने मंगलवार को इस बात की घोषणा की है। दरअसल, तीसरे मोर्चे की कवायद तेलंगाना के मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव ने ही की है। अब उनकी पार्टी के प्रवक्ता की तरफ से यह बयान आया है जो कि काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। टीआरएस का कहना है कि चंद्रशेखर राव द्वारा प्रस्तावित क्षेत्रीय दलों का संघीय मोर्चा केंद्र में सरकार बनाने के लिए तब तक कांग्रेस का समर्थन लेने को तैयार है जब तक कि वह ‘ड्राइवर सीट’ नहीं मांगती। यानी की सरकार का संचालन क्षेत्रीय दलों के पास ही हो। बता दें कि राव पिछले साल से ही गैर भाजपा और गैर कांग्रेस संघीय मोर्चे के विचार को आगे बढ़ा रहे हैं।टीआरएस प्रवक्ता आबिद रसूल खान का कहना है कि उनकी पार्टी राहुल गांधी के नेतृत्व वाले संगठन के साथ काम करने को तैयार है। चंद्रशेखर राव इस बात पर दृढ़ हैं कि ड्राइवर सीट पर संघीय मोर्चा होना चाहिए और उसी को सरकार चलानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार बनाने के लिए संख्या कम होने की स्थिति में कांग्रेस से बाहर से समर्थन लेने का विकल्प तलाशा जाएगा। लेकिन सरकार संघीय मोर्चे की होगी और कांग्रेस को अपना समर्थन बाहर से देना होगा। हम इस बात पर दृढ़ हैं कि ड्राइवर सीट पर क्षेत्रीय दल होने चाहिए। प्रधानमंत्री का पद संघीय मोर्चे के घटकों में से किसी एक को जाना चाहिए। प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घटक दलों से एक सर्वसम्मत उम्मीदवार होगा।आबिद रसूल का कहना है कि हम कांग्रेस से बात करने और यह देखने को तैयार हैं कि वे हमें सरकार बनाने के लिए समर्थन देते हैं या नहीं। यदि वे ऐसा करते हैं तो क्षेत्रीय दल तब तक इसके खिलाफ नहीं हैं जब तक कि कांग्रेस ड्राइवर सीट नहीं मांगते। आबिद का कहना है कि संघीय मोर्चा किसी भी तरह भाजपा से नहीं जुड़ेगा। हम भाजपा के खिलाफ हैं। हम भाजपा के साथ कुछ नहीं चाहते, न उसका समर्थन करना चाहते, न उससे समर्थन लेना चाहते। केसीआर से बात करने वाले ज्यादातार घटकों का भी यही मत है कि वे वे भाजपा के साथ कोई संबंध नहीं रखेंगे। अगर 23 मई को आने वाले लोकसभा चुनाव के नतीजें में एनडीए और कांग्रेस में से कोई भी पार्टी सरकार नहीं बना पाती है तो क्षेत्रीय दल 'ड्राइविंग सीट' पर बैठने की तैयारी कर चुके हैं। तीसरा मोर्चा कांग्रेस से समर्थन लेने के लिए तैयार है। लेकिन शर्त यह है कि सरकार का संचालन क्षेत्रीय दलों के पास ही होगा। तेलंगाना राष्ट्र समिति ने मंगलवार को इस बात की घोषणा की है। दरअसल, तीसरे मोर्चे की कवायद तेलंगाना के मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव ने ही की है। अब उनकी पार्टी के प्रवक्ता की तरफ से यह बयान आया है जो कि काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।टीआरएस का कहना है कि चंद्रशेखर राव द्वारा प्रस्तावित क्षेत्रीय दलों का संघीय मोर्चा केंद्र में सरकार बनाने के लिए तब तक कांग्रेस का समर्थन लेने को तैयार है जब तक कि वह ‘ड्राइवर सीट’ नहीं मांगती। यानी की सरकार का संचालन क्षेत्रीय दलों के पास ही हो। बता दें कि राव पिछले साल से ही गैर भाजपा और गैर कांग्रेस संघीय मोर्चे के विचार को आगे बढ़ा रहे हैं।टीआरएस प्रवक्ता आबिद रसूल खान का कहना है कि उनकी पार्टी राहुल गांधी के नेतृत्व वाले संगठन के साथ काम करने को तैयार है। चंद्रशेखर राव इस बात पर दृढ़ हैं कि ड्राइवर सीट पर संघीय मोर्चा होना चाहिए और उसी को सरकार चलानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार बनाने के लिए संख्या कम होने की स्थिति में कांग्रेस से बाहर से समर्थन लेने का विकल्प तलाशा जाएगा। लेकिन सरकार संघीय मोर्चे की होगी और कांग्रेस को अपना समर्थन बाहर से देना होगा। हम इस बात पर दृढ़ हैं कि ड्राइवर सीट पर क्षेत्रीय दल होने चाहिए। प्रधानमंत्री का पद संघीय मोर्चे के घटकों में से किसी एक को जाना चाहिए। प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घटक दलों से एक सर्वसम्मत उम्मीदवार होगा।आबिद रसूल का कहना है कि हम कांग्रेस से बात करने और यह देखने को तैयार हैं कि वे हमें सरकार बनाने के लिए समर्थन देते हैं या नहीं। यदि वे ऐसा करते हैं तो क्षेत्रीय दल तब तक इसके खिलाफ नहीं हैं जब तक कि कांग्रेस ड्राइवर सीट नहीं मांगते। आबिद का कहना है कि संघीय मोर्चा किसी भी तरह भाजपा से नहीं जुड़ेगा। हम भाजपा के खिलाफ हैं। हम भाजपा के साथ कुछ नहीं चाहते, न उसका समर्थन करना चाहते, न उससे समर्थन लेना चाहते। केसीआर से बात करने वाले ज्यादातार घटकों का भी यही मत है कि वे वे भाजपा के साथ कोई संबंध नहीं रखेंगे।

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