डिबेट में बोले मनोचिकित्सक- ये टेंशन का माहौल, मरीज को चाहिए नेगेटिव न्यूज कंज्यूम ना करे

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डिबेट में बोले मनोचिकित्सक- ये टेंशन का माहौल, मरीज को चाहिए नेगेटिव न्यूज कंज्यूम ना करे
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डिबेट में बोले मनोचिकित्सक- ये टेंशन का माहौल, मरीज को चाहिए नेगेटिव न्यूज कंज्यूम ना करे, इंटरनेट से रहें दूर

भारत के कोरोना के बढ़ते मामलों का गंभीर असर लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ा है। बीते कुछ दिनों से कराहते लोग, श्मशान घाट में अनगिनत संख्या में जलते लाशों, अस्पतालों के बाहर लगी लंबी लाइनों की फोटो और वीडियो देख लोग परेशान हो गए हैं। इसका सीधा असर आम लोगों और कोरोना संक्रमित मरीजों के मानसिक स्वास्थ्य पर देखने को मिल रहा है। इसी मुद्दे से जुड़े एक टीवी डिबेट के दौरान मनोचिकित्सक ने मरीजों को नेगेटिव न्यूज ना देखने और इंटरनेट से दूर रहने की सलाह दी। आजतक न्यूज चैनल पर आयोजित डिबेट शो के दौरान एंकर चित्रा त्रिपाठी ने पैनल में मौजूद मनोचिकित्सक डॉ समीर मल्होत्रा से अकेलेपन को लेकर सवाल पूछा। इसपर समीर मल्होत्रा ने जवाब देते हुए कहा कि कोरोना महामारी की वजह से तो टेंशन का माहौल है ही, कई परिवार इस महामारी की वजह से उलझे हुए हैं। इसलिए हमें बहुत अधिक नेगेटिव न्यूज को कंज्यूम नहीं करना चाहिए। जब हम ज्यादा नेगेटिव न्यूज देखते हैं और सुनते हैं तो अकेलापन महसूस करते हैं और इससे हम डिप्रेशन की तरफ बढ़ते हैं। आगे डॉ समीर मल्होत्रा ने कहा कि आजकल के युवा हमेशा इंटरनेट पर लगे रहते हैं। कोरोना के लक्षण ना होते हुए भी हमेशा इंटरनेट पर देखते रहते हैं कि कहीं हमें इनमें से कुछ तो नहीं है। इससे व्याकुलता और घबराहट बढ़ती है। इसलिए हमें कोशिश करनी चाहिए कि हम परिवार के लोगों और दोस्तों के संपर्क में रहें और जितना संभव हो सके हम लोगों की मदद जरूर करें। डिबेट के दौरान पैनल में ही मौजूद रहीं मनोचिकित्सक डॉ मलीहा सेबल ने महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर भी कुछ बातें कहीं। डॉ सेबल ने कहा कि अगर संभव हो तो महिलाएं घर पर बैठे बैठे ही मनोचिकित्सक से सलाह लें। इसके अलावा सेबल ने कहा कि घरेलू प्रताड़ना की वजह से भी महिलाएं के मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में समाज के लोगों को आगे आकर जरूर मदद करनी चाहिए। भारत में एक दिन में कोरोना वायरस संक्रमण के 4,03,738 नए मामले सामने आने के बाद देश में अब तक संक्रमित हुए लोगों की कुल संख्या बढ़कर 2,22,96,414 हो गई। वहीं देश में 4,092 और मरीजों की मौत होने के बाद कुल मृतक संख्या बढ़कर 2,42,362 हो गई। देश में उपचाराधीन मरीजों की संख्या लगातार बढ़कर 37,36,648 हो गई।.

भारत के कोरोना के बढ़ते मामलों का गंभीर असर लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ा है। बीते कुछ दिनों से कराहते लोग, श्मशान घाट में अनगिनत संख्या में जलते लाशों, अस्पतालों के बाहर लगी लंबी लाइनों की फोटो और वीडियो देख लोग परेशान हो गए हैं। इसका सीधा असर आम लोगों और कोरोना संक्रमित मरीजों के मानसिक स्वास्थ्य पर देखने को मिल रहा है। इसी मुद्दे से जुड़े एक टीवी डिबेट के दौरान मनोचिकित्सक ने मरीजों को नेगेटिव न्यूज ना देखने और इंटरनेट से दूर रहने की सलाह दी। आजतक न्यूज चैनल पर आयोजित डिबेट शो के दौरान एंकर चित्रा त्रिपाठी ने पैनल में मौजूद मनोचिकित्सक डॉ समीर मल्होत्रा से अकेलेपन को लेकर सवाल पूछा। इसपर समीर मल्होत्रा ने जवाब देते हुए कहा कि कोरोना महामारी की वजह से तो टेंशन का माहौल है ही, कई परिवार इस महामारी की वजह से उलझे हुए हैं। इसलिए हमें बहुत अधिक नेगेटिव न्यूज को कंज्यूम नहीं करना चाहिए। जब हम ज्यादा नेगेटिव न्यूज देखते हैं और सुनते हैं तो अकेलापन महसूस करते हैं और इससे हम डिप्रेशन की तरफ बढ़ते हैं। आगे डॉ समीर मल्होत्रा ने कहा कि आजकल के युवा हमेशा इंटरनेट पर लगे रहते हैं। कोरोना के लक्षण ना होते हुए भी हमेशा इंटरनेट पर देखते रहते हैं कि कहीं हमें इनमें से कुछ तो नहीं है। इससे व्याकुलता और घबराहट बढ़ती है। इसलिए हमें कोशिश करनी चाहिए कि हम परिवार के लोगों और दोस्तों के संपर्क में रहें और जितना संभव हो सके हम लोगों की मदद जरूर करें। डिबेट के दौरान पैनल में ही मौजूद रहीं मनोचिकित्सक डॉ मलीहा सेबल ने महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर भी कुछ बातें कहीं। डॉ सेबल ने कहा कि अगर संभव हो तो महिलाएं घर पर बैठे बैठे ही मनोचिकित्सक से सलाह लें। इसके अलावा सेबल ने कहा कि घरेलू प्रताड़ना की वजह से भी महिलाएं के मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में समाज के लोगों को आगे आकर जरूर मदद करनी चाहिए। भारत में एक दिन में कोरोना वायरस संक्रमण के 4,03,738 नए मामले सामने आने के बाद देश में अब तक संक्रमित हुए लोगों की कुल संख्या बढ़कर 2,22,96,414 हो गई। वहीं देश में 4,092 और मरीजों की मौत होने के बाद कुल मृतक संख्या बढ़कर 2,42,362 हो गई। देश में उपचाराधीन मरीजों की संख्या लगातार बढ़कर 37,36,648 हो गई।

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