कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए हिंदी फिल्म ‘मिस्टर इंडिया’ के संवाद का इस्तेमाल किया और सवाल किया कि प्रधानमंत्री मोदी उनके सामने क्यों झुक रहे हैं। जयराम रमेश ने भी इस पर टिप्पणी की।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक हालिया बयान पर सोमवार को हिंदी फिल्म के एक प्रसिद्ध संवाद का जिक्र करते हुए कटाक्ष किया कि ट्रंप ने यह कहने की कोशिश की है कि रूस से तेल की खरीद कम करने पर ‘मोगैम्बो खुश हुआ’, लेकिन सवाल यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके सामने क्यों झुक रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत झुकने वाला देश नहीं है। खड़गे ने ट्रंप के उस बयान पर प्रतिक्रिया दी जिसमें ट्रंप ने रूस से भारत द्वारा कच्चे तेल की खरीद में कथित तौर पर कमी
किए जाने से जुड़े एक सवाल पर कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जानते हैं कि वह (ट्रंप) रूस से तेल की खरीद से खुश नहीं हैं और ऐसे में उन्हें खुश करना जरूरी है।\खड़गे ने 1987 की प्रसिद्ध हिंदी फिल्म ‘मिस्टर इंडिया’ के चर्चित संवाद ‘मोगैम्बो खुश हुआ’ का उल्लेख करते हुए तंज कसा। इस फिल्म में अमरीश पुरी ने मोगैम्बो का किरदार निभाया था और अनिल कपूर और श्रीदेवी भी मुख्य भूमिकाओं में थे। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ‘‘मिस्टर इंडिया फिल्म का एक संवाद है कि ‘मोगैम्बो खुश हुआ’। इसी तरह ट्रंप ने कहने की कोशिश की है कि मोगैम्बो खुश हुआ। इस तरह की सोच रखने वाले डराने की कोशिश करते हैं, तो भारत झुकने वाला नहीं है।’’ उन्होंने सवाल किया, ‘‘लेकिन मोदी जी उनके सामने नाक क्यों रगड़ रहे हैं, मुझे मालूम नहीं है।’’ कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘व्हाइट हाउस में बैठे प्रधानमंत्री के अच्छे दोस्त भारत के प्रति ‘कभी गरम, कभी नरम’ वाला रवैया जारी रखे हुए हैं। उन्होंने एक बार फिर धमकी दी है कि अगर भारत रूस से तेल खरीदना बंद नहीं करता, तो अमेरिका भारत से होने वाले आयात पर अधिक शुल्क लगाएगा।’’ रमेश ने कटाक्ष करते हुए कहा, ‘‘नमस्ते ट्रंप, हाउडी मोदी जैसे सभी आयोजन, (जबरन) गले लगना और अमेरिकी राष्ट्रपति की तारीफ में किए गए सभी सोशल मीडिया पोस्ट का कोई खास असर नहीं पड़ा।’’ रविवार को फ्लोरिडा से वॉशिंगटन डीसी जाते समय एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा, ‘‘वे (भारत) मूल रूप से मुझे खुश करना चाहते थे। मोदी बहुत अच्छे इंसान हैं, वह अच्छे व्यक्ति हैं। उन्हें पता था कि मैं खुश नहीं था और मुझे खुश करना जरूरी था। वे व्यापार करते हैं और हम उन पर बहुत जल्दी टैरिफ बढ़ा सकते हैं। यह उनके लिए बहुत बुरा होगा।’’ ट्रंप की यह टिप्पणी अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम के बयान के बाद आई, जो एयर फोर्स वन में उनके साथ मौजूद थे। ग्राहम ने कहा कि ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ के कारण ही भारत अब रूस से काफी कम तेल खरीद रहा है। ग्राहम ने अपने टैरिफ संबंधी विधेयक का जिक्र किया, जिसमें रूसी तेल खरीदने वाले देशों से होने वाले आयात पर 500 प्रतिशत शुल्क लगाने का प्रावधान है।\इस घटनाक्रम ने भारत-अमेरिका संबंधों के जटिल पहलुओं को उजागर किया है, विशेष रूप से ऊर्जा सुरक्षा और भू-राजनीतिक दबाव के संदर्भ में। ट्रंप का यह बयान, जो भारत को रूस से तेल की खरीद कम करने के लिए दबाव डालने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है, दोनों देशों के बीच संबंधों में तनाव का संकेत देता है। खड़गे की प्रतिक्रिया, जिसने लोकप्रिय संस्कृति के माध्यम से राजनीतिक विडंबना का इस्तेमाल किया, भारतीय राजनीतिक परिदृश्य में अमेरिकी नीतियों के प्रति आलोचनात्मक दृष्टिकोण को दर्शाती है। जयराम रमेश का बयान, जो 'कभी गरम, कभी नरम' रवैये की बात करता है, इस तथ्य को उजागर करता है कि अमेरिकी प्रशासन भारत के प्रति एक मिश्रित दृष्टिकोण अपना रहा है, जो व्यापार और भू-राजनीतिक हितों को संतुलित करने की कोशिश करता है। ट्रंप की धमकी, संभावित टैरिफ लगाने की, भारत के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती है, क्योंकि यह देश की आर्थिक नीतियों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार विकल्पों पर प्रभाव डाल सकती है। इन सभी घटनाक्रमों को मिलाकर, यह स्पष्ट होता है कि भारत और अमेरिका के बीच संबंध एक गतिशील प्रक्रिया है, जिसमें जटिल भू-राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक कारक शामिल हैं। भारत को अपनी राष्ट्रीय हितों की रक्षा करते हुए इन जटिलताओं से निपटने की आवश्यकता है। यह स्थिति भारत की विदेश नीति के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा है, जो उसे विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय दबावों के बीच एक संतुलन साधने के लिए मजबूर करती है
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