यह लेख ज्योतिष शास्त्र से जुड़े विभिन्न सवालों के जवाब सद्गुरु स्वामी आनंदजी द्वारा दिए गए हैं। इसमें विवाह में आने वाली अड़चन, सोशल मीडिया के फ़ॉलोअर्स और लाइक्स का बोध और गृह कलह से मन खिन्न रहने जैसे विषयों पर चर्चा की गई है।
ज्योतिष शास्त्र से जुड़े सवालों को लेकर लोगों के मन में कई सवाल रहते हैं कि किसी ग्रह का प्रभाव उनके आम जीवन पर कैसे पड़ता है। आइए, जानते हैं लोगों के द्वारा भेजे गए ऐसे ही सवालों के जवाब सद्गुरु स्वामी आनंदजी द्वारा। सवाल : विवाह में अड़चन कब आती है?जन्म कुंडली में यदि शुक्र ग्रह कमजोर हो या पापी ग्रह से दृष्ट हो तो ऐसे लोगों के विवाह में अनेक अड़चन और विघ्न आते रहते हैं और विवाह विलम्ब से होता है। ये अपने जीवन साथी का सम्मान नहीं कर पाते। इनके अनेक संबंध टूटते हैं। विपरीत लिंगियों के प्रति इनमे सामान्य से ज़्यादा आकर्षण होता है। इनकी नवीन से नवीन वस्तु अतिशीघ्र पुरानी दिखने लगती है। अपने वस्त्रों और चरण पादुकाओं को ये बेतरतीबी से रखते हैं या उनमें अंदर सदैव धूल बैठ जाती है। इनकी जिह्वा पर श्वेत परत जमी रहती है। इनमें कामुकता सामान्य से ज़्यादा होती है। इनकी स्वमैथुन में रुचि अधिक होती है। पुरुषों में शुक्राणुओं की कमी पाई जाती है। ऐसे लोग केमिस्ट्री विषय में कमज़ोर होते हैं। इनका जीवन अनुशासित नहीं रहता। गृह कलह से मन खिन्न रहता है। कमाई के बावजूद आर्थिक चिन्ता में घिरे रहते हैं। लग्नेश यदि सप्तम भाव में हो और सप्तमेश लग्न में आसीन हो तो जीवन बहुत सारे यौन सम्बंध बनते हैं। यदि सप्तम भाव में शनि, मंगल और चंद्रमा एक साथ हों तो सामूहिक या असामान्य सेक्स का योग निर्मित करता है। चन्द्रमा और शुक्र की युति का संबंध सप्तम, अष्टम या व्यय भाव से हो तो अनेक लोगों से यौन संबंध बनने की संभावना बनती है।मंगल, शुक्र, शनि यदि एक साथ हैं या एक दूसरे से दृष्ट हैं तो एक से अधिक यौन साथी होते हैं। यह योग कार्य क्षेत्र में अपने से नीचे पद के व्यक्ति से संबंध बनाता है। अगर शनि की शुक्र और मंगल पर दृष्टि हैं, चंद्रमा वृष या तुला राशि में हो तो अनेक संबंधों बनने की प्रबल संभावना रहती है। प्रश्न- सोशल मीडिया के फ़ॉलोअर्स और लाइक्स का बोध कुंडली के किस भाव से होता है?उत्तर - फ़ॉलोअर्स और जन समर्थन का आकलन कुंडली के तृतीय भाव से किया जाता है, इसी भाव को पराक्रम भाव कहते है। इस भाव से व्यक्ति का असर, रसूख़, योग्यता, शक्ति, रुतबा, और धीरज का बोध होता है। और इसी भाव से छोटे भाई बहनों का विचार होता है। हाथ, कंधे, फेफड़े, सुनने की क्षमता, और गले की स्थिति का विश्लेषण इसी भाव से होता है। प्रश्न- गृहक्लेश का वास्तु से कोई सम्बंध है क्या?उत्तर- सदगुरुश्री कहते हैं हां गृहक्लेश का वास्तु से सीधा सम्बंध है। वास्तु के नियमानुसार दक्षिण पूर्व यानि आग्नेय कोण पर जल या जलीय रंगों की मौजूदगी और इस कोण का नीचे होना या यहाँ गड्ढा होना घरेलू झगड़ों का कारण हो सकता है। उत्तर-पूर्व यानी ईशान्य कोण में अग्नि, आग्नेय पदार्थ अथवा अग्नि के रंगों की मौजूदगी घरेलू किट-किट को जन्म देती है। इसके साथ द्वार वेध, पश्चिम दिशा का हल्का और प्रकाशवान होना, घर के मुख्य द्वार पर सूखे हुए तोरण या सफाई की कमी, उत्तर-पूर्व में भारी वस्तु का होने, उत्तर-पूर्व में गंदगी का होना भी घरेलू झमेलों के सूत्र छिपे हो सकते हैं। प्रश्न- 'य' नाम के लोग कैसे होते हैं। क्या ये विज्ञान में रिसर्च के क्षेत्र में जा सकते सकते हैं?उत्तर- हाँ, यह नाम के लोग वैज्ञानिक शोध का हिस्सा बन सकते हैं। विज्ञान, अनुसंधान और रीसर्च के क्षेत्र में इन्हें कामयाबी मिलती है। नेटवर्किंग में ये लोग निपुण नहीं होते हैं। ये साफ़ बोलने वाले होते हैं। इनका दृष्टिकोण वैज्ञानिक , विचारकों और दर्शनिकों की मानिंद होता है। हर बात के ये कई पहलुओं पर चिंतन व आकलन करते हैं। ये किसी और के काम में कभी दख़ल नही देते। संबंधों के प्रति ये ईमानदार और सावधान रहते हैं। इनका स्वभाव अंतर्मुखी होता है। एकांतप्रिय होते है। चिन्ता व चिन्तन-मनन में ये डूबे रहते हैं। ये दृढ़प्रतिज्ञ होते हैं और फ़ायदे के लिए समझौते से बचते हैं। इनका शुरुआती जीवन संघर्ष से परिपूर्ण होता है। पर बाद में ये अपनी अथक मेहनत से बड़ी कामयाबी का चुम्बन करते हैं। ये अपनी अर्जित वस्तुओं को लेकर बेहद सम्वेदनशील होते हैं। ये सामान्य रूप से ख़ुशमिज़ाज होते हैं पर जब ये नाराज़ होते हैं तो बेहद आक्रामक हो जाते हैं। प्रश्न-मेरी राशि मेष कीं 29 मार्च से शनि की साढ़ेसाती शुरू होने वाली है। क्या उस काल में गर्भधारण किया जा सकता है?उत्तर- जी अवश्य। शनि की साढ़ेसाती में गर्भ धारण निश्चित रूप से किया जा सकता है। आपकी शनि की साढ़े साती भी पौने तीन महीने के बाद आरम्भ होने वाली है। सदगुरुश्री कहते हैं कि साढ़ेसाती के दरमियान आपका जीवन यथावत चलता रहता है। और आप अपने समस्त क्रियाकलाप पूर्ववत करते रहते हैं। साढ़ेसाती दरअसल स्वयं को संवारने निखारने और भविष्य में अपने विस्तार के लिए स्वयं को तैयार करने का काल है। यदि शनि तृतीय, षष्ठ और एकादश भाव में हो अथवा स्वग्रही हो तो साढ़ेसाती विलक्षण फल देती है। प्रश्न- कौन सा ग्रह या देवता गाड़ी देता है?उत्तर- सदगुरुश्री कहते हैं कि जन्म कुंडली में चतुर्थ भाव को वाहन का कारक माना जाता है। इस भाव में जो भी राशि हो, उसका स्वामी ग्रह वाहन का कारक होता हैं। उदाहरण के लिए यदि चौथे भाव में 1 लिखा हो तो मंगल, 2 लिखा हो तो शुक्र, 3 हो तो बुध, 4 हो तो चंद्रमा, 5 सूर्य, 6 बुध, 7 शुक्र, 8 मंगल, 9 बृहस्पति, 10 शनि, 11 शनि और यदि वहां 12 लिखा हो तो बृहस्पति वाहन के प्रदाता कहलायेंगे। मेहनत करने के बाद भी नहीं मिलती सफलता, तो आजमाएं यह उपाययदि जीवन में संघर्ष अधिक हो, श्रम का फल न मिलता हो, आर्थिक तनाव सदैव तनाव प्रदान करते हो, काम बनते बनते बिगड़ जाता हो, स्वास्थ्य ख़राब तहत हो या कुंडली में अनंत नामक कालसर्प योग हो, तो 43 दिन तक रांगा धातु के एक टुकड़े का जल प्रवाह करना चाहिए। मान्यतायें कहती हैं कि लाभ होगा। इस सप्ताह का ज्ञानअष्टम भाव पर मंगल या शनि, अथवा दोनों की पूर्ण दृष्टि हो तो यह स्थिति किसी गंभीर दुर्घटना से हानि का संकेत देते हैं। अगर इस भाव में कोई ग्रह न हो और इसपर किसी भी ग्रह की दृष्टि न हो तो जीवन में सदगुरु की अनुकंपा प्राप्त करके सत्कर्मों की ओर उन्मुख होकर मोक्ष का वरण करता है, ऐसा प्राचीन ग्रंथ कहते हैं।अगर, आप भी सद्गुरु स्वामी आनंदजी से अपने सवालों के जवाब जानना चाहते हैं या किसी समस्या का समाधान चाहते हैं, तो अपनी जन्मतिथि, जन्म समय और जन्म स्थान के साथ अपना सवाल saddgurushri@gmail.
com पर मेल कर सकते हैं। -सद्गुरुश्री
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