ज्योतिबा फुले को क्यों कहा जाता है अंबेडकर के विचार बदलने वाला महात्मा? तीन गुरुओं में थे शामिल

Jyotiba Phule News

ज्योतिबा फुले को क्यों कहा जाता है अंबेडकर के विचार बदलने वाला महात्मा? तीन गुरुओं में थे शामिल
Jyotiba Phule JayantiJyotiba Phule Jayanti 2025Jyotiba Phule Birth Anniversry
  • 📰 AajTak
  • ⏱ Reading Time:
  • 160 sec. here
  • 21 min. at publisher
  • 📊 Quality Score:
  • News: 126%
  • Publisher: 63%

Jyotiba Phule Jayanti 2025: अंबेडकर ने ज्योतिबा फुले को अपने तीन गुरुओं में से एक माना, बाकी दो गौतम बुद्ध और कबीर थे. यह बात उन्होंने अपने भाषणों में कई बार कही, जैसे कि अपनी डायमंड जुबली समारोह (1954) में. अंबेडकर ने कहा था, "मैं गौतम बुद्ध, कबीर और महात्मा फुले का भक्त हूं और ज्ञान, आत्म-सम्मान और चरित्र का पूजक हूं.

Jyotiba Phule Jayanti 2025: भारत के अग्रणी समाज सुधारक, शिक्षक और विचारक महात्मा ज्योतिराव गोविंदराव फुले का जन्म 11 अप्रैल 1827 को हुआ था. ज्योतिबा फुले को "डॉ. भीमराव अंबेडकर अंबेडकर के विचार बदलने वाला महात्मा" कहा जाता है क्योंकि उनकी विचारधारा, सामाजिक सुधार के प्रयास और शोषित वर्गों के उत्थान के लिए किए गए कार्यों ने डॉ.

भीमराव अंबेडकर के जीवन और चिंतन को गहराई से प्रभावित किया. फुले ने 19वीं सदी में जाति व्यवस्था, महिलाओं के अधिकारों और शिक्षा के क्षेत्र में जो क्रांतिकारी कदम उठाए, वे अंबेडकर के लिए प्रेरणा स्रोत बने.Advertisementतीन गुरुओं में शामिलअंबेडकर ने ज्योतिबा फुले को अपने तीन गुरुओं में से एक माना, बाकी दो गौतम बुद्ध और कबीर थे. यह बात उन्होंने अपने भाषणों में कई बार कही, जैसे कि अपनी डायमंड जुबली समारोह में. अंबेडकर ने कहा था, "मैं गौतम बुद्ध, कबीर और महात्मा फुले का भक्त हूं और ज्ञान, आत्म-सम्मान और चरित्र का पूजक हूं."'शूद्र कौन थे' का समर्पणअंबेडकर ने अपनी किताब "Who Were the Shudras?" को फुले को समर्पित किया. इसमें उन्होंने फुले को "आधुनिक भारत का सबसे महान शूद्र" कहा और लिखा कि फुले ने निचली जातियों को यह अहसास दिलाया कि वे ऊँची जातियों के गुलाम नहीं हैं. यह समर्पण दर्शाता है कि फुले के विचारों ने अंबेडकर की जाति व्यवस्था की समझ को आकार दिया.फुले की आलोचनाज्योतिबा फुले ने अपनी किताब "गुलामगिरी" में वर्ण व्यवस्था और ब्राह्मणवाद की कड़ी आलोचना की. उनका मानना था कि आर्य आक्रमणकारी थे, जिन्होंने भारत के मूल निवासियों को दबाया और जाति व्यवस्था बनाई. उन्होंने वेदों को "झूठी चेतना" का साधन माना और ब्राह्मणों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया.Advertisementफुले और अंबेडकर के विचारअंबेडकर ने भी "Who Were the Shudras?" और "Annihilation of Caste" में इसी तरह के तर्क दिए. हालांकि वे फुले की "आर्य आक्रमण" थ्योरी से पूरी तरह सहमत नहीं थे, लेकिन उन्होंने भी माना कि जाति व्यवस्था एक कृत्रिम ढांचा है, जो शोषण के लिए बनाया गया. फुले की यह सोच अंबेडकर के लिए आधार बनी, जिसे उन्होंने ऐतिहासिक और कानूनी तर्कों के साथ आगे बढ़ाया.फुले का योगदानफुले ने 1848 में पुणे में पहली लड़कियों की स्कूल खोली और अपनी पत्नी सावित्रीबाई को पढ़ाकर उन्हें शिक्षिका बनाया. उनका मानना था कि शिक्षा ही शोषित वर्गों और महिलाओं को आजादी दिला सकती है. उन्होंने सत्यशोधक समाज बनाकर सभी जातियों और धर्मों के लोगों को समानता का अधिकार देने की वकालत की.अंबेडकर पर प्रभावअंबेडकर ने भी शिक्षा को सामाजिक क्रांति का सबसे बड़ा हथियार माना. उन्होंने 1927 में उदास वर्गों की महिलाओं से कहा, "मैं किसी समुदाय की प्रगति को उसकी महिलाओं की प्रगति से मापता हूं." यह विचार फुले से प्रेरित था. अंबेडकर ने अपने संगठनों जैसे बहिष्कृत हितकारिणी सभा के जरिए महिलाओं और दलितों की शिक्षा पर जोर दिया.फुले की शुरुआत और अंबेडकर का विस्तारज्योतिबा फुले ने शूद्रों, अतिशूद्रों और महिलाओं के लिए सामाजिक जागरूकता का पहला संगठित आंदोलन शुरू किया. सत्यशोधक समाज ने ब्राह्मणवादी प्रथाओं का विरोध किया और "दलित" शब्द को नए अर्थ में प्रयोग किया. भीम राव अंबेडकर ने फुले के इस आंदोलन को आगे बढ़ाया. जहां फुले ने सामाजिक सुधार की नींव रखी, वहीं अंबेडकर ने इसे संवैधानिक और राजनीतिक स्तर पर ले गए. संविधान में समता और न्याय के प्रावधान, जैसे अनुच्छेद 15 और 17, फुले की सोच का ही परिणाम थे, जिसे अंबेडकर ने लागू किया.Advertisementव्यक्तिगत अनुभव और प्रेरणाऐसा माना जाता है कि अंबेडकर के पिता रामजी सकपाल फुले के प्रशंसक थे. अंबेडकर के बचपन में माली समुदाय के दोस्तों के जरिए भी उन्हें फुले के बारे में जानकारी मिली होगी. फुले की मृत्यु के बाद सत्यशोधक समाज कमजोर पड़ गया था, लेकिन अंबेडकर ने इसे पुनर्जनन देने की कोशिश की. उन्होंने कहा, "मैं ही वह इंसान हूं, जिसने फुले के साथ सबसे ईमानदारी से जुड़ाव रखा." ये भी देखें

We have summarized this news so that you can read it quickly. If you are interested in the news, you can read the full text here. Read more:

AajTak /  🏆 5. in İN

Jyotiba Phule Jayanti Jyotiba Phule Jayanti 2025 Jyotiba Phule Birth Anniversry Jyotiba Phule Facts Jyotiba Phule News Why Jyotiba Phule Is Called Mahatma Jyotiba Phule Influence On Ambedkar Three Gurus Of Ambedkar Jyotiba Phule Social Reformer Jyotiba Phule Thoughts Legacy Of Jyotiba Phule Mahatma Phule Contribution To Society Jyotiba Phule Ambedkar Guru ज्योतिबा फुले ज्योतिबा फुले जयंती ज्योतिबा फुले की जयंती ज्योतिबा फुले का जन्म कब हुआ था

 

United States Latest News, United States Headlines

Similar News:You can also read news stories similar to this one that we have collected from other news sources.

कोई मारता है जूते तो कोई निकालता है परेड, होली पर 'लाट साहब' की ये परंपरा आप भी जान लीजिएकोई मारता है जूते तो कोई निकालता है परेड, होली पर 'लाट साहब' की ये परंपरा आप भी जान लीजिएलाट साहब के जुलूस में एक व्यक्ति को लाट साहब बनाकर भैंसा गाड़ी पर बिठाया जाता है और लाट साहब को जूते मारते हुए पूरे शहर में घुमाया जाता है.
Read more »

आचार्य कृपलानी जो गांधी के अनुयायी लेकिन नेहरू के विरोधी थेआचार्य कृपलानी जो गांधी के अनुयायी लेकिन नेहरू के विरोधी थेकृपलानी ने महात्मा गांधी के भारतीय राजनीति में उदय को नज़दीक से देखा था. वे गांधी के पहले आंदोलन का गवाह बने थे.
Read more »

बंधक रिहा नहीं क‍िए तो छीन लेंगे पूरा गाजा, इजरायल के रक्षामंत्री की चेतावनी, गाजा छोड़कर भागने को बेताब लो...बंधक रिहा नहीं क‍िए तो छीन लेंगे पूरा गाजा, इजरायल के रक्षामंत्री की चेतावनी, गाजा छोड़कर भागने को बेताब लो...इजरायल के रक्षामंत्री ने कहा, अगर हमास बंधकों को रिहा करने से मना करता है, तो वह जितनी अधिक जमीन खोएगा, जो इजराइल में शामिल कर ली जाएगी.
Read more »

ये कैसी सनक: फॉर्म हाउस में घुसकर मार दी 500 मुर्गियां, सुनकर हर कोई रह गया हैरानये कैसी सनक: फॉर्म हाउस में घुसकर मार दी 500 मुर्गियां, सुनकर हर कोई रह गया हैरानChhattisgarh News: छत्तीसगढ़ के दुर्ग से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, यहां 500 मुर्गियों को मार दिया गया, मामला सुनकर हर कोई हैरान रह जाता है.
Read more »

विश्व टीबी दिवस 2025: कब और क्यों मनाया जाता हैविश्व टीबी दिवस 2025: कब और क्यों मनाया जाता हैहर साल 24 मार्च को विश्व टीबी दिवस मनाया जाता है। इस खबर में जानें विश्व टीबी दिवस क्यों और कैसे मनाया जाता है, साथ ही इस साल की थीम क्या है।
Read more »

कीड़े जैसी दिखने वाली जड़ी बूटी मिल जाए, तो हो जाएंगे लखपति, कई बीमारियों का है कालकीड़े जैसी दिखने वाली जड़ी बूटी मिल जाए, तो हो जाएंगे लखपति, कई बीमारियों का है कालकीड़ा जड़ी को कैटरपिलर फंगस कहा जाता है, इसकी कीमत इतनी है कि आम इंसान इसे खरीद भी नहीं सकता, हालांकि औषधीय गुणों के मामले में ये लाजवाब है.
Read more »



Render Time: 2026-04-02 13:01:33