ज्ञानेश कुमार को भारत के नए मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में नियुक्ति दी गई है। वे अपने 37 साल के प्रभावशाली प्रशासनिक करियर में कई अहम भूमिकाएं निभा चुके हैं, जिसमें गृह मंत्रालय में सचिव और सहकारिता मंत्रालय में भी सेवाएं शामिल हैं। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को खत्म करने वाले विधेयक का मसौदा तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और अयोध्या राम मंदिर मामले में भी अहम जिम्मेदारियां संभाली।
भारत सरकार में तीन दशक से अधिक का प्रशासनिक अनुभव रखने वाले ज्ञानेश कुमार कई शीर्ष पदों पर सेवाएं दे चुके हैं। देश के निर्वाचन आयोग में नियुक्ति से पहले वरिष्ठ नौकरशाह ज्ञानेश कुमार गृह मंत्रालय में भी सचिव के रूप में सेवाएं दे चुके हैं। बतौर आईएएस अधिकारी ज्ञानेश कुमार अपने 37 साल से अधिक के प्रभावशाली और उल्लेखनीय करियर में कई अहम कार्यों को निष्पादित कर चुके हैं। ज्ञानेश कुमार 2019 में भारत सरकार के ऐतिहासिक फैसले के समय गृह मंत्रालय में पदस्थापित थे। मुख्य निर्वाचन आयुक्त के रूप में
ज्ञानेश कुमार का कार्यकाल 26 जनवरी, 2029 तक होगा। आइये जानते हैं इन्होंने कौनसी अहम भूमिकाएं निभाई हैं। कांग्रेस सरकार के दौरान रक्षा मंत्रालय में दी सेवाएं खास बात यह है कि ज्ञानेश कुमार गृह मंत्रालय के अलावा सहकारिता मंत्रालय में भी सेवाएं दे चुके हैं। दोनों मंत्रालय अमित शाह के पास हैं जो केंद्रीय मंत्रिमंडल में पीएम मोदी के बाद निर्विवाद रूप से नंबर दो माने जाते हैं। ऐसे में ज्ञानेश कुमार को शाह की निकटता हासिल थी। ज्ञानेश कुमार ने संसदीय कार्य मंत्रालय में सचिव के रूप में भी काम किया है। खास बात यह है कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के दौरान वह रक्षा मंत्रालय में तैनात थे। अनुच्छेद 370 खत्म करने वाली टीम में भी थे बता दें कि पीएम मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने करीब 6 साल पहले जम्मू-कश्मीर से जुड़ा ऐतिहासिक फैसला लिया था। संसद में विधेयक पारित कर जम्मू-कश्मीर को दो हिस्सों में बांटा गया और जम्मू-कश्मीर के साथ-साथ लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया। इसी के साथ जम्मू-कश्मीर में लागू संविधान के अनुच्छेद 370 और आर्टिकल 35ए के प्रावधान खत्म हो गए। अगस्त, 2019 का यह अहम घटनाक्रम इसलिए भी चर्चित है, क्योंकि संसद में विधेयक पेश करने से पहले इसकी खबर नहीं थी। गोपनीय तरीके से इस संवेदनशील फैसले को निष्पादित करने में ज्ञानेश कुमार ने अहम भूमिका निभाई। जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को खत्म करने और पूर्व राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने वाले विधेयक का मसौदा तैयार करते समय ज्ञानेश कुमार गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव (कश्मीर संभाग) थे। अयोध्या के राम मंदिर से ज्ञानेश कुमार का कनेक्शन बता दें कि दशकों पुराने अयोध्या विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर 2019 को ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। अदालत ने 1045 पन्नों के अपने फैसले में रामलला को राम जन्मभूमि सौंपी और मंदिर बनाने का रास्ता साफ कर दिया। इसके बाद, 2020 में, ज्ञानेश कुमार को गृह मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव बनाया गया। उन्हें अयोध्या मामले से जुड़े सभी मामलों की जिम्मेदारी दी गई थी। इसमें श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन भी शामिल था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद के सभी कार्य ज्ञानेश कुमार की देखरेख में हुए। अयोध्या मामले की देखरेख से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को ज्ञानेश कुमार ने सफलतापूर्वक निभाकर अपनी प्रशासनिक क्षमता का प्रमाण दिया। इस साल बिहार विधानसभा के चुनाव कराएंगे कुमार बता दें कि सीईसी नियुक्ति समिति की बैठक सोमवार की शाम हुई और नए सीईसी के नाम पर मुहर लगा दी गई। ज्ञानेश कुमार को वरिष्ठता के स्थापित परंपरा के अनुसार ही सीईसी बनाया गया है। नए सीईसी के रूप में ज्ञानेश कुमार इस साल नवंबर-दिसंबर में बिहार और 2026 में पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल विधानसभा के चुनाव कराएंगे। राहुल ने दिया असहमति नोट नए मुख्य चुनाव आयुक्त के चयन को लेकर बुलाई गई बैठक में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने असहमति का नोट दिया और कहा कि नियुक्ति से संबंधित कानून को सुप्रीम कोर्ट में दी गई चुनौती के संदर्भ में याचिकाओं पर फैसला आने तक नियुक्ति को स्थगित रखा जाए। उन्होंने चुनाव आयुक्त के चयन के लिए बनाए गए पांच नामों के पैनल पर भी असहमति जताई। हालांकि, समिति के दो अन्य सदस्यों पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने असहमति को खारिज कर दिया गया। राहुल चाहते थे कि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश की जगह केंद्रीय मंत्री को चयन समिति का सदस्य बनाने वाले कानून को चुनौती देने पर जब तक फैसला नहीं आ जाता, तब तक इस बैठक को टाल दिया जाए
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