जितिया व्रत, जिसे जीवित्पुत्रिका व्रत भी कहा जाता है, इस साल 25 सितंबर को मनाया जाएगा। यह व्रत सुहागिन महिलाओं द्वारा अपने बच्चों की समृद्धि और सुरक्षा के लिए रखा जाता है।
Jitiya Vrat 2024: करवाचौथ और तीज व्रत की तरह जितिया व्रत का भी विशेष महत्व है. जितिया व्रत को जीवित्पुत्रिका व्रत भी कहा जाता है. ये तीनों ही व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए ही होता है. इसमें करवाचौथ और तीज का व्रत पति की लंबी उम्र के लिए और जितिया व्रत बच्चों की समृद्धि के लिए रखा जाता है.
जितिया व्रत अश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है और नवमी को पारण होता है. इस साल जितिया व्रत पर्व 25 सितंबर मनाया जाएगा, जिसका पारण 26 सितंबर को होगा. अब सवाल है कि आखिर जितिया व्रत क्यों रखा जाता है? किस देवता की होती है पूजा? जितिया व्रत का शुभ समय क्या है? इस बारे में News18 को बता रहे हैं प्रताप विहार गाजियाबाद के ज्योतिर्विद और वास्तु विशेषज्ञ राकेश चतुर्वेदी- जितिया पर बन रहा ये योग इस बार जितिया व्रत 2024 के दिन वरीयान योग और आर्द्रा नक्षत्र बन रहा है. व्रत के दिन यह योग प्रात:काल से लेकर देर रात 12:18 बजे तक रहेगा. इसके बाद परिघ योग होगा. वहीं आर्द्रा नक्षत्र प्रात:काल से लेकर रात 10:23 बजे तक है, उसके बाद पुनर्वसु नक्षत्र है. वरीयान योग में आप कोई भी मांगलिक कार्य कर सकते हैं. ज्योतिष शास्त्र में इसे बेहद शुभ फलदायी माना गया है. ऐसे में इस दिन पूजा करने से महिलाओं को व्रत का दोगुना लाभ मिलेगा. 2024 में जितिया कब है? इस साल 24 सितंबर मंगलवार को दोपहर 12: 38 बजे से अश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि प्रारंभ हो रही है. यह तिथि अगले दिन 25 सितंबर बुधवार को दोपहर 12:10 बजे खत्म हो जाएगी. ऐसे में उदयातिथि की मान्यता के अनुसार, इस बार जितिया व्रत 25 सितंबर दिन बुधवार को होगा. इसका पूजन का समय 4:10 बजे से 5:45 बजे तक का है. यही जीवित्पुत्रिका व्रत की सही तारीख है. क्यों रखा जाता है जितिया व्रत राकेश चतुर्वेदी बताते हैं कि, भविष्य पुराण में जितिया व्रत का विशेष महत्व है. इस व्रत के दिन माताएं अपने संतान के सुखी और सुरक्षित जीवन के लिए निर्जला व्रत रखती हैं. मान्यता है कि, जीवित्पुत्रिका व्रत रखने से संतान के जीवन में कभी संकट नहीं आते हैं. साथ ही संतान का वियोग का कष्ट भी नहीं मिलता. जितिया पर किस देवता की होती पूजा जितिया व्रत पूरे दिन और पूरी रात निर्जला उपवास रखने का विधान है. इस दिन गंधर्व राजा जीमूतवाहन की पूजा करने की परंपरा है. पौराणिक कथा के अनुसार, राजा जीमूतवाहन ने अपने साहस और सूझबूझ से एक मां के बेटे को जीवनदान दिलाया था. तभी से उन्हें भगवान के रूप में पूजा जाने लगा. ये भी पढ़ें: घर में पुरुष सदस्य नहीं तो कौन करें श्राद्ध? 90% लोगों में होती है कंफ्यूजन, पंडित जी से जानें पितृ शांति के उपाय ये भी पढ़ें: पितरों का तर्पण जल और तिल से ही क्यों? कितनी पीढ़ियों तक का होता है श्राद्ध, पंडित जी से जानें कौन कर सकता तर्पण
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