सनातन धर्म में महाकुंभ के शाही स्नानों का बहुत महत्व बताया गया है. कहा जाता है कि महाकुंभ के त्रिवेणी संगम में शाही स्नान के दिन डुबकी लगाने से सभी पाप कट जाते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है.
जानें कब है मौनी अमावस्या, इसी दिन है महाकुंभ का तीसरा शाही स्नान, स्नान दान से मिलेगा पितरों का आशीर्वादजानें कब है मौनी अमावस्या, इसी दिन है महाकुंभ का तीसरा शाही स्नान, स्नान दान से मिलेगा पितरों का आशीर्वाद एक साल में 12 अमावस्या आती हैं और महाकुंभ भी 12 साल बाद ही लगता है.
इसलिए महाकुंभ के दौरान पड़ने वाली मौनी अमावस्या का हिंदू शास्त्रों में विशेष महत्व बताया गया है. इस मौनी अमावस्या पर महाकुंभ का तीसरा शाही स्नान भी है.सनातन धर्म में महाकुंभ के शाही स्नानों का बहुत महत्व बताया गया है. कहा जाता है कि महाकुंभ के त्रिवेणी संगम में शाही स्नान के दिन डुबकी लगाने से सभी पाप कट जाते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है. महाकुंभ 2025 का पहला शाही स्नान 13 जनवरी को पौष पूर्णिमा, दूसरा शाही स्नान मकर संक्रांति पर 14 फरवरी के दिन है. तीसरा शाही स्नान मौनी अमावस्या पर 29 जनवरी के दिन होगा. आखिरी और छठा शाही स्नान महाशिवरात्रि के दिन होगा. पवित्र स्नान के अलावा मौनी अमावस्या पर भूले बिसरे पितरों के श्राद्ध और दान-पुण्य का भी विशेष महत्व होता है. सालभर में 12 अमावस्या होती हैं, लेकिन माघ मास की अमावस्या को विशेष महत्व दिया गया है. इसे मौनी अमावस्या कहा जाता है. मान्यता है कि इस दिन मौन रहकर स्नान और दान करने से कई जन्मों के पापों से मुक्ति मिलती है. यह दिन पितरों को प्रसन्न करने और उनके आशीर्वाद पाने का उत्तम समय माना गया है. साल 2025 में मौनी अमावस्या 29 जनवरी को मनाई जाएगी. इस खास दिन प्रयागराज में महाकुंभ का तीसरा शाही स्नान भी होगा. महाकुंभ और मौनी अमावस्या का यह संयोग न केवल आध्यात्मिक रूप से बल्कि धार्मिक दृष्टि से भी अत्यधिक फलदायी माना जाता है.माघ महीने में पवित्र नदियों में स्नान का महत्व अधिक है, लेकिन मौनी अमावस्या पर इसका पुण्य कई गुना बढ़ जाता है. इस दिन गंगा या अन्य पवित्र नदियों में डुबकी लगाकर मौन साधना करने से व्यक्ति मानसिक शांति और ज्ञान प्राप्त करता है. यह दिन खासतौर पर उन लोगों के लिए लाभकारी है जो मानसिक तनाव, भय, या भ्रम जैसी समस्याओं से पीड़ित हैं.मौनी अमावस्या पर गरीबों को भोजन कराना और जरूरतमंदों की सहायता करना अत्यंत पुण्यकारी माना गया है. ऐसा करने से व्यक्ति अपने जीवन के पापों का प्रायश्चित कर सकता है. पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए इस दिन पितृ तर्पण, पूजा और दान का विशेष महत्व है. मौनी अमावस्या पर पूरे दिन मौन रहने की परंपरा है. यह आत्मसंयम और आंतरिक शांति का प्रतीक है. मौन रहकर इस दिन ध्यान करने से न केवल मानसिक शांति मिलती है बल्कि स्वास्थ्य में भी सुधार होता है। यह साधना ज्ञान और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने का श्रेष्ठ उपाय है.धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मौनी अमावस्या पर नियमपूर्वक व्रत और पूजा करने से कुंडली में मौजूद ग्रह दोष दूर हो जाते हैं. यह दिन नए सिरे से जीवन की शुरुआत करने का अवसर प्रदान करता है और सुख-समृद्धि के द्वार खोलता है. जो लोग डर, वहम, या मानसिक अस्थिरता का सामना कर रहे हैं, उनके लिए मौनी अमावस्या का दिन अत्यंत लाभकारी है. इस दिन स्नान और मौन रहकर ध्यान करने से मनोवैज्ञानिक समस्याओं से छुटकारा मिलता है. साथ ही, व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास और साहस का संचार होता है. दी गई जानकारी पंचांग और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है. इसकी विषय सामग्री और एआई द्वारा काल्पनिक चित्रण का जी यूपीयूके हूबहू समान होने का दावा या पुष्टि नहीं करता.
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