जानिए किस तरह जम्मू-कश्मीर में पाक की साजिश को नाकाम करने की है पूरी तैयारी

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जानिए किस तरह जम्मू-कश्मीर में पाक की साजिश को नाकाम करने की है पूरी तैयारी JammuAndKashmir Pakistan Terrorists

अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को तेज करने के पाकिस्तान के मंसूबों को नाकाम करने के लिए सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह तैयार हैं। जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए इलेक्ट्रानिक सर्विलांस के साथ-साथ ह्यूमन इंटेलीजेंस जुटाने का पुख्ता इंतजाम कर लिया गया है। साथ ही स्थानीय स्तर पर आतंकी समर्थकों, फंड मुहैया कराने वालों और ओवरग्राउंड वर्कर्स पर कड़ी नजर रखी जा रही है। उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी सुनिश्चित की जा रही है। ध्यान देने की बात है कि पिछले दिनों गृह मंत्री ने जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा के हालात की समीक्षा की थी और सुरक्षा व्यवस्था की खामियों को दूर करने का निर्देश दिया था। सुरक्षा एजेंसी से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सीमा पार से ड्रोन के मार्फत हथियारों और फंड की सप्लाई बड़ी चुनौती बनी हुई थी और इस साल ड्रोन की गतिविधियां काफी बढ़ गई थीं। लेकिन जम्मू एयरबेस पर ड्रोन हमले के बाद न सिर्फ जम्मू-कश्मीर के सभी संवेदनशील ठिकानों को ड्रोन तकनीक से लैस कर दिया गया है, बल्कि पाकिस्तान से सटी अंतरराष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा के प्रमुख स्थानों पर ड्रोन की गतिविधियों की निगरानी की जा रही है। इसके अलावा आतंकी हरकतों पर नजर रखने के लिए इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म और इंटरनेट की निगरानी बढ़ा दी गई है। ह्यूमन इंटेलीजेंस से मिली सटीक सूचनाओं की बदौलत ही जुलाई व अगस्त में बड़ी संख्या में आतंकियों को मार गिराने में सफलता मिली है। इसी तरह पाकिस्तान से लगती सीमा और नियंत्रण रेखा पर जवानों की तैनाती के साथ-साथ इलेक्ट्रानिक सर्विलांस का पूरा प्रबंध कर दिया गया है। यही कारण है कि बड़ी संख्या में अफगान प्रशिक्षित आतंकियों के गुलाम कश्मीर के लांच पैड पर पहुंचने की खुफिया जानकारी के बावजूद उनके घाटी में घुसने की पुष्टि नहीं हो सकी है।सुरक्षा एजेंसी से जुड़े श्रीनगर स्थित एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अगस्त, 2019 में अनुच्छेद-370 खत्म होने के बाद सबसे बड़ी सफलता आतंकी ईको सिस्टम को ध्वस्त करने में मिली। आतंकियों के लिए ओवरग्राउंड वर्कर्स और फंडिंग मुहैया कराने वाले जमात-ए-इस्लामी जम्मू-कश्मीर को प्रतिबंधित कर दिया। लेकिन इस साल फरवरी के बाद प्रतिबंधित होने के बावजूद जमात-ए-इस्लामी से जुड़े लोगों की गतिविधियां देखी गईं। वे स्थानीय स्तर पर आतंकियों के लिए फंड जुटाने से लेकर उन्हें सुरक्षित ठिकाना मुहैया कराने में मदद कर रहे थे। इसे देखते हुए अगस्त में जम्मू के चार और श्रीनगर के 10 जिलों में 56 स्थानों पर एनआइए ने छापा मारा और आतंकी फंडिंग व गतिविधियों से जुड़े अहम दस्तावेज बरामद किए। जांच से जुड़े एनआइए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि घाटी में आतंकी समर्थकों, ओवरग्राउंड वर्कर्स और फंडिग मुहैया कराने वालों के बारे में सबको जानकारी थी, लेकिन पहले कभी उनके खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित नहीं की गई। कुछ मामले में एफआइआर दर्ज तो गई, लेकिन दोषियों को सजा दिलाने में सफलता नहीं मिली। इस बार एनआइए आरोपितों के खिलाफ पुख्ता सुबुत जुटाने में लगी है और उन्हें सजा दिलवाने के लिए प्रतिबद्ध है।वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अफगानिस्तान में मिली सफलता के बाद पाकिस्तान और आइएसआइ कश्मीर में नया दुस्साहस करने की कोशिश जरूर करेगा। लेकिन बदली हुई परिस्थितियों और सरकार के स्पष्ट रवैये को देखते हुए पाकिस्तान के मंसूबे परवान चढ़ने की उम्मीद काफी कम है।.

अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को तेज करने के पाकिस्तान के मंसूबों को नाकाम करने के लिए सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह तैयार हैं। जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए इलेक्ट्रानिक सर्विलांस के साथ-साथ ह्यूमन इंटेलीजेंस जुटाने का पुख्ता इंतजाम कर लिया गया है। साथ ही स्थानीय स्तर पर आतंकी समर्थकों, फंड मुहैया कराने वालों और ओवरग्राउंड वर्कर्स पर कड़ी नजर रखी जा रही है। उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी सुनिश्चित की जा रही है। ध्यान देने की बात है कि पिछले दिनों गृह मंत्री ने जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा के हालात की समीक्षा की थी और सुरक्षा व्यवस्था की खामियों को दूर करने का निर्देश दिया था। सुरक्षा एजेंसी से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सीमा पार से ड्रोन के मार्फत हथियारों और फंड की सप्लाई बड़ी चुनौती बनी हुई थी और इस साल ड्रोन की गतिविधियां काफी बढ़ गई थीं। लेकिन जम्मू एयरबेस पर ड्रोन हमले के बाद न सिर्फ जम्मू-कश्मीर के सभी संवेदनशील ठिकानों को ड्रोन तकनीक से लैस कर दिया गया है, बल्कि पाकिस्तान से सटी अंतरराष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा के प्रमुख स्थानों पर ड्रोन की गतिविधियों की निगरानी की जा रही है। इसके अलावा आतंकी हरकतों पर नजर रखने के लिए इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म और इंटरनेट की निगरानी बढ़ा दी गई है। ह्यूमन इंटेलीजेंस से मिली सटीक सूचनाओं की बदौलत ही जुलाई व अगस्त में बड़ी संख्या में आतंकियों को मार गिराने में सफलता मिली है। इसी तरह पाकिस्तान से लगती सीमा और नियंत्रण रेखा पर जवानों की तैनाती के साथ-साथ इलेक्ट्रानिक सर्विलांस का पूरा प्रबंध कर दिया गया है। यही कारण है कि बड़ी संख्या में अफगान प्रशिक्षित आतंकियों के गुलाम कश्मीर के लांच पैड पर पहुंचने की खुफिया जानकारी के बावजूद उनके घाटी में घुसने की पुष्टि नहीं हो सकी है।सुरक्षा एजेंसी से जुड़े श्रीनगर स्थित एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अगस्त, 2019 में अनुच्छेद-370 खत्म होने के बाद सबसे बड़ी सफलता आतंकी ईको सिस्टम को ध्वस्त करने में मिली। आतंकियों के लिए ओवरग्राउंड वर्कर्स और फंडिंग मुहैया कराने वाले जमात-ए-इस्लामी जम्मू-कश्मीर को प्रतिबंधित कर दिया। लेकिन इस साल फरवरी के बाद प्रतिबंधित होने के बावजूद जमात-ए-इस्लामी से जुड़े लोगों की गतिविधियां देखी गईं। वे स्थानीय स्तर पर आतंकियों के लिए फंड जुटाने से लेकर उन्हें सुरक्षित ठिकाना मुहैया कराने में मदद कर रहे थे। इसे देखते हुए अगस्त में जम्मू के चार और श्रीनगर के 10 जिलों में 56 स्थानों पर एनआइए ने छापा मारा और आतंकी फंडिंग व गतिविधियों से जुड़े अहम दस्तावेज बरामद किए। जांच से जुड़े एनआइए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि घाटी में आतंकी समर्थकों, ओवरग्राउंड वर्कर्स और फंडिग मुहैया कराने वालों के बारे में सबको जानकारी थी, लेकिन पहले कभी उनके खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित नहीं की गई। कुछ मामले में एफआइआर दर्ज तो गई, लेकिन दोषियों को सजा दिलाने में सफलता नहीं मिली। इस बार एनआइए आरोपितों के खिलाफ पुख्ता सुबुत जुटाने में लगी है और उन्हें सजा दिलवाने के लिए प्रतिबद्ध है।वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अफगानिस्तान में मिली सफलता के बाद पाकिस्तान और आइएसआइ कश्मीर में नया दुस्साहस करने की कोशिश जरूर करेगा। लेकिन बदली हुई परिस्थितियों और सरकार के स्पष्ट रवैये को देखते हुए पाकिस्तान के मंसूबे परवान चढ़ने की उम्मीद काफी कम है।

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