जानिए, पानी के 7 प्रकारों में से कौन सा पानी सेहत के लिए है फायदेमंद
आप भी उबला हुआ पानी पीते हैं तो संभल जाएं. पानी से हानिकारक बैक्टीरिया खत्म करने के फेर में सेहत देने वाले मिनरल्स भी नष्ट हो जाते हैं.इंसानी शरीर का लगभग 70 प्रतिशत पानी से बना हुआ है. इसमें से काफी कुछ पसीने और यूरिन के रूप में निकल जाता है.
यही वजह है कि शरीर का हाइड्रेटेड रहना बेहद जरूरी माना जाता है. शरीर में पानी पर्याप्त मात्रा में रहने पर सेहत सही रहती है. हालांकि हर तरह का पानी सेहत के लिए फायदेमंद नहीं, बल्कि खतरनाक हो सकता है. शोध के अनुसार पानी 7 तरह का होता है. इसके हर प्रकार के अपने फायदे और नुकसान हैं.टैप वॉटर - ये वो पानी है जो पाइपों के जरिए नलों से आता है. ये पीने लायक हो भी सकता है और नहीं भी हो सकता. भारत में ये ड्रिंकिंग वॉटर की श्रेणी में नहीं आता है. ये टॉयलेट, किचन सिंक की सफाई, नहाने-धोने और पौधों को पानी देने के काम आता है. प्रतिष्ठित अंग्रेजी अखबार द गार्डियन में हाल ही में आए शोध से पता चला है कि टैप वॉटर एल्युमिनियम और पेस्टीसाइड्स से भरा होता है इसलिए इसे उबालकर या फिल्टर करके ही पीना चाहिए.मिनरल वॉटर - ये पानी मिनरल्स से भरपूर होता है यानी इसमें सल्फर, मैग्नीशियम और कैल्शियम पाया जाता है. जो सभी चीजें स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होती हैं. अलग-अलग ब्रांड के मिनरल वॉटर में खनिज की मात्रा भी अलग-अलग होती है. इसी मात्रा के अनुसार पानी का स्वाद हल्का खारापन लिए होता है. मिनरल्स युक्त पानी सेहत के लिए काफी फायदेमंद है लेकिन ये पानी हर कोई अफोर्ड नहीं कर सकता.स्प्रिंग वॉटर - ये एक ऐसा पानी है जो बोतलबंद होता है और क्लेम करता है कि ये ग्लेशियर वॉटर है. प्राकृतिक स्प्रिंग वॉटर सीधे ग्राउंड से गुजरकर आता है और अशुद्धियों से भरा होता है, जब तक कि इसे ट्रीट न किया जाए. हालांकि वॉटर ट्रीटमेंट के बाद ये पानी सबसे ज्यादा फायदेमंद माना जाता है.स्पार्कलिंग वॉटर - ये सोडा पानी या कार्बोनेटेड वॉटर के नाम से जाना जाता है. अपने पसंदीदा रेस्त्रां में आप कई बार इस सवाल से गुजरे होंगे कि रेगुलर पानी, मिनरल या स्पार्कलिंग पानी! ये कार्बोनेशन की प्रक्रिया से गुजरता है और इसी वजह से सोडा वॉटर की तरह दिखता है. किसी भी तरह का पानी इस श्रेणी में आ सकता है अगर उसमें कार्बन डाइऑक्साइड मिला दी जाए. हालांकि, स्पार्कलिंग वॉटर में मिनरल्स होते हैं लेकिन ये स्वास्थ्य के लिए किसी भी तरह से सेहतमंद नहीं होता और महंगा भी होता है.प्योरिफाइड वॉटर - ये पानी अपने स्त्रोत से आने के बाद प्लांट में शुद्धिकरण की प्रक्रिया से गुजरता है. इससे पानी में मौजूद बैक्टीरिया, अशुद्धियां खत्म हो जाती हैं. इसे बाजार से भी लिया जा सकता है या फिर अपने घर पर ही वॉटर प्यूरिफायर लगाकर ये पानी पी सकते हैं.वेल वॉटर - ये सबसे गंदा पानी माना जाता है. ये न तो साफ होता है और न ही सेहत के लिए फायदेमंद. बारिश के दौरान पानी मिट्टी से होते हुए भूमिगत हो जाता है. ग्रामीण इलाकों में कुआं खुदवाकर यही पानी पीने के काम आता है. ये ग्राउंडवॉटर होने की वजह से तमाम अशुद्धियों से भरा होता है. इसे पीने से पहले प्यूरिफिकेशन की प्रक्रिया से जरूर गुजारा जाना चाहिए.डिस्टिल्ड वॉटर - डिस्टिल्ड पानी रिवर्स ऑस्मॉसिस और डिस्टिलेशन की प्रक्रिया से गुजारा जाता है ताकि इसकी अशुद्धियां खत्म हो जाएं. हालांकि इस कोशिश में पानी में मौजूद नेचुरल खनिज भी नष्ट हो जाते हैं. इसे पीने से शरीर में खनिज की कमी हो जाती है. पानी साफ करने का कोई दूसरा विकल्प न होने पर घर पर उबालकर पिया जा रहा पानी इसी श्रेणी में आता है.पानी की इन 7 श्रेणियों के अलावा कई दूसरे प्रकार भी हैं. इनमें फ्लेवर या इंफ्यूज किया पानी और एल्केलाइन वॉटर मुख्य हैं. फ्लेवर वाले पानी में मिठास मिलाई जाती है जो कि सेहत के लिए खराब है. दूसरे प्रकार में पीएच लेवल ज्यादा होता है, जो कि एजिंग की प्रक्रिया को धीमा करता है और कई बीमारियों से बचाव भी करता है.
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