जहां सड़कें गुम, नेटवर्क शून्य... वहां पहुंचे BLO! खाई-जंगल पार कर 3000 आदिवासियों के लिए हाथ से भर रहे फॉर...

पातालकोट BLO की कहानी News

जहां सड़कें गुम, नेटवर्क शून्य... वहां पहुंचे BLO! खाई-जंगल पार कर 3000 आदिवासियों के लिए हाथ से भर रहे फॉर...
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BLO Filing Forms by Hand: छिंदवाड़ा की सतपुड़ा रेंज में 12 किमी गहरी पातालकोट घाटी में BLOs जान जोखिम में डालकर 3000 भारिया आदिवासी मतदाताओं तक पहुंच रहे हैं. दिनेश भारती और गणेश ध्रुवे जैसे BLOs बिना नेटवर्क और सड़क के, पुरानी लिस्ट से नाम देखकर हाथ से फॉर्म भर रहे हैं.

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में सतपुड़ा रेंज के भीतर एक ऐसी रहस्यमयी और मनोहारी जगह है, जिसे पातालकोट कहा जाता है. यह करीब 12 किलोमीटर गहरी, घोड़े की नाल के आकार की घाटी है, जहां सूरज की किरणें भी बमुश्किल पहुंच पाती हैं.

अपनी आदिवासी संस्कृति और घने जंगलों के लिए मशहूर यह जगह औषधीय पौधों का खजाना भी है. इसी पातालकोट के गांवों में करीब 3000 भारिया आदिवासी मतदाता रहते हैं. ये गांव चार पोलिंग बूथ पालनगैलाडुबवा, घाटालिंगा, जड़मदल हर्राकछार, और करैयम रतेड़ में फैले हुए हैं. यहाँ मोबाइल सिग्नल अक्सर गायब रहता है और कई जगह तो सड़कें पूरी तरह से खत्म हो चुकी हैं. प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत एक पतली सड़क बनी भी है, लेकिन वह इतनी खड़ी ढलान वाली है कि फिसलने का खतरा हमेशा बना रहता है. BLOs का ‘एक्स्ट्रामाइल’ संघर्ष मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत, राज्य में 4 नवंबर से 4 दिसंबर तक घर-घर जाकर मतदाताओं का सर्वे और फॉर्म वितरण का काम चल रहा है. और यही काम पातालकोट की विषम परिस्थितियों में BLOs कर रहे हैं, जो किसी मिशन से कम नहीं है. ये BLOs बाइक का सहारा लेते हैं, ट्रेकिंग करते हैं, और कई जगह तो गांव तक पहुंचने के लिए पानी की धाराओं को भी पार करते हैं. हाथ से फॉर्म भरना सबसे बड़ी चुनौती यह है कि यहां के अधिकांश ग्रामीण फॉर्म भरने के तरीके से अपरिचित हैं. इसलिए BLOs को नेटवर्क वाली जगहों से पुरानी वोटर्स लिस्ट डाउनलोड करके, नाम मिलाना होता है और हाथ से फॉर्म भरना होता है. करैयम रतेड़ बूथ के BLO दिनेश भारती ने बताया कि मैं खुद पातालकोट से हूं, लेकिन घाटी के ऊपर रहता हूं. नीचे गांवों तक पहुंचने के लिए खड़ी सड़क से उतरना पड़ता है. कुछ जगहों पर तो कई मील तक चलना पड़ता है. इन मुश्किलों के बावजूद, मैंने 80% से ज्यादा Form बांट दिए हैं. उन्होंने आगे कहा कि ज्यादातर आदिवासी लोगों को फॉर्म भरना नहीं आता, इसलिए मैं वापस जाकर खुद उनकी मदद करूंगा. नेटवर्क की खोज में जंगल की भाग-दौड़ नेटवर्क की समस्या इस काम को और भी कठिन बना देती है. दिनेश भारती बताते हैं कि नेटवर्क सिर्फ कुछ ही जगहों पर आता है. मैं वहीं बैठकर 2003 की वोटर्स लिस्ट डाउनलोड करता हूं. फिर उसे नोटबुक में नोट करके सुदूर गांवों तक पैदल जाता हूं. मेरे बूथ में एक गाँव घुघरी गुज्जा डोंगरी तक कोई सड़क नहीं है. वहाँ पहुँचने के लिए 3 किमी पैदल चलना पड़ता है और एक नदी पार करनी पड़ती है. वहीं, जड़मदल हर्राकछार बूथ के BLO गणेश प्रसाद धुर्वे ने एक स्मार्ट तरीका अपनाया. उन्होंने कहा कि नेटवर्क ढूंढने की जद्दोजहद से बचने के लिए मैंने पूरी 2003 की वोटर्स लिस्ट प्रिंट करवा ली है. इससे मेरा काम बहुत आसान हो गया है. उनके बूथ में 894 मतदाता हैं, और उन्होंने 50% से अधिक फॉर्म बांट दिए हैं. इस घाटी के चार बूथों में 2966 मतदाता हैं, जो छिंदवाड़ा जिले के अमरवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं. 9 दिसंबर को मतदाता सूची का मसौदा प्रकाशित होने से पहले, इन BLOs का यह समर्पण लोकतंत्र की नींव को मजबूत करने का सबसे बड़ा उदाहरण है.

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