जस्टिस यशवंत वर्मा के महाभियोग पर फंसेगा पेच! कपिल सिब्बल के सुर में सुर मिला रही कांग्रेस

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जस्टिस यशवंत वर्मा के महाभियोग पर फंसेगा पेच! कपिल सिब्बल के सुर में सुर मिला रही कांग्रेस
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केंद्र जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की जांच रिपोर्ट को महाभियोग का आधार बना सकती है, जिसका कांग्रेस विरोध कर रही है। कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा ने राज्यसभा के सभापति को पत्र लिखकर कहा है कि इस आधार पर महाभियोग नहीं चलाया जा सकता।

सुबोध घिल्डियाल नई दिल्ली: ऐसी अटकलें हैं कि केंद्र सरकार जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की ओर से बनी जांच समिति की रिपोर्ट को महाभियोग की कार्यवाही का आधार बना सकती है। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल के बाद कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा ने भी इसका विरोध कर दिया है। कांग्रेस नेता ने राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ को एक पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट की आंतरिक रिपोर्ट के आधार पर महाभियोग नहीं चलाया जा सकता। इसके लिए जज जांच अधिनियम के तहत उचित प्रक्रिया का पालन करना होगा।जस्टिस वर्मा पर महाभियोग के लिए कांग्रेस अभी तैयार नहीं कांग्रेस के कानूनी जानकारों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट की जांच के आधार पर आगे बढ़ना कानूनी रूप से सही नहीं होगा। कांग्रेस सरकार को भी यही बात बताएगी। वरिष्ठ वकील और कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की जांच रिपोर्ट सिर्फ पेशेवर कदाचार के मामलों में संस्थान की एक प्रक्रिया है। यह कानूनी प्रक्रियाओं का विकल्प नहीं हो सकती। सिंघवी ने कहा कि जज जांच अधिनियम के तहत तीन सदस्यों की एक जांच समिति बनाना जरूरी है। इस समिति में सुप्रीम कोर्ट का एक सदस्य, एक हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस और एक प्रतिष्ठित न्यायविद शामिल होने चाहिए। उन्होंने TOI को बताया, 'कानून के अनुसार तीन सदस्यों की समिति जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट की आंतरिक जांच कानूनी रूप से जरूरी नहीं है, लेकिन यह सुप्रीम कोर्ट की प्रक्रिया का हिस्सा है। यह पूरी तरह से सुप्रीम कोर्ट का तरीका है।'संवैधानिक प्रक्रियाओं की पवित्रता को लेकर कांग्रेस चिंतितवहीं तन्खा ने धनखड़ को लिखा, 'महाभियोग एक बहुत ही गंभीर मामला है। इसमें हमें आरोपों को स्पष्ट रूप से बताना होता है। इसलिए, यह टीवी पर होने वाली बहस, सोशल मीडिया पर चल रही बातों या बिना जांचे हुए क्लिपिंग के आधार पर नहीं हो सकता। आप खुद एक जाने-माने कानूनी विशेषज्ञ हैं, हमें विश्वास है कि आप संवैधानिक प्रक्रियाओं की पवित्रता को लेकर हमारी चिंता को समझेंगे।' असंबद्ध राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने भी कुछ नियमों का हवाला देकर जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ अभी महाभियोग लाने का विरोध किया है।जस्टिस शेखर यादव के मामले से टकरा रहा है केस?सरकार ने मानसून सत्र में वर्मा को महाभियोग के जरिए हटाने का इरादा जताया है और राजनीतिक दलों से सलाह कर रही है। लेकिन विपक्ष या सांसदों ने अभी तक इस मुद्दे पर कोई प्रस्ताव पेश नहीं किया है। ऐसा इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस शेखर यादव के मामले में नहीं था। उन्होंने समान नागरिक संहिता पर कथित'हेट स्पीच' देकर विवाद खड़ा कर दिया था। राज्यसभा के 55 विपक्षी सांसदों ने 13 दिसंबर, 2024 को उनके महाभियोग के लिए नोटिस दिया था, लेकिन राज्यसभा को अभी इस पर फैसला लेना बाकी है। कपिल सिब्बल तो ऐसा कह भी चुके हैं कि पहले जस्टिस यादव के खिलाफ क्यों न चलाया जाए, महाभियोग।नियमों की आड़ में बच जाएंगे आरोपी जज? कांग्रेस नेता तन्खा ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि सरकार जस्टिस वर्मा की मदद करना चाहती है या सुप्रीम कोर्ट की आंतरिक जांच रिपोर्ट के आधार पर महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करके उन्हें हटाना चाहती है। उन्होंने तर्क दिया, ' सुप्रीम कोर्ट की जांच भारत के मुख्य न्यायाधीश और अदालत के न्यायाधीशों के लिए थी। लेकिन यह सांसदों के लिए महाभियोग का प्रस्ताव पेश करने के लिए कानूनी सामग्री नहीं है।'.

सुबोध घिल्डियाल नई दिल्ली: ऐसी अटकलें हैं कि केंद्र सरकार जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की ओर से बनी जांच समिति की रिपोर्ट को महाभियोग की कार्यवाही का आधार बना सकती है। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल के बाद कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा ने भी इसका विरोध कर दिया है। कांग्रेस नेता ने राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ को एक पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट की आंतरिक रिपोर्ट के आधार पर महाभियोग नहीं चलाया जा सकता। इसके लिए जज जांच अधिनियम के तहत उचित प्रक्रिया का पालन करना होगा।जस्टिस वर्मा पर महाभियोग के लिए कांग्रेस अभी तैयार नहींकांग्रेस के कानूनी जानकारों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट की जांच के आधार पर आगे बढ़ना कानूनी रूप से सही नहीं होगा। कांग्रेस सरकार को भी यही बात बताएगी। वरिष्ठ वकील और कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की जांच रिपोर्ट सिर्फ पेशेवर कदाचार के मामलों में संस्थान की एक प्रक्रिया है। यह कानूनी प्रक्रियाओं का विकल्प नहीं हो सकती। सिंघवी ने कहा कि जज जांच अधिनियम के तहत तीन सदस्यों की एक जांच समिति बनाना जरूरी है। इस समिति में सुप्रीम कोर्ट का एक सदस्य, एक हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस और एक प्रतिष्ठित न्यायविद शामिल होने चाहिए। उन्होंने TOI को बताया, 'कानून के अनुसार तीन सदस्यों की समिति जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट की आंतरिक जांच कानूनी रूप से जरूरी नहीं है, लेकिन यह सुप्रीम कोर्ट की प्रक्रिया का हिस्सा है। यह पूरी तरह से सुप्रीम कोर्ट का तरीका है।'संवैधानिक प्रक्रियाओं की पवित्रता को लेकर कांग्रेस चिंतितवहीं तन्खा ने धनखड़ को लिखा, 'महाभियोग एक बहुत ही गंभीर मामला है। इसमें हमें आरोपों को स्पष्ट रूप से बताना होता है। इसलिए, यह टीवी पर होने वाली बहस, सोशल मीडिया पर चल रही बातों या बिना जांचे हुए क्लिपिंग के आधार पर नहीं हो सकता। आप खुद एक जाने-माने कानूनी विशेषज्ञ हैं, हमें विश्वास है कि आप संवैधानिक प्रक्रियाओं की पवित्रता को लेकर हमारी चिंता को समझेंगे।' असंबद्ध राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने भी कुछ नियमों का हवाला देकर जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ अभी महाभियोग लाने का विरोध किया है।जस्टिस शेखर यादव के मामले से टकरा रहा है केस?सरकार ने मानसून सत्र में वर्मा को महाभियोग के जरिए हटाने का इरादा जताया है और राजनीतिक दलों से सलाह कर रही है। लेकिन विपक्ष या सांसदों ने अभी तक इस मुद्दे पर कोई प्रस्ताव पेश नहीं किया है। ऐसा इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस शेखर यादव के मामले में नहीं था। उन्होंने समान नागरिक संहिता पर कथित'हेट स्पीच' देकर विवाद खड़ा कर दिया था। राज्यसभा के 55 विपक्षी सांसदों ने 13 दिसंबर, 2024 को उनके महाभियोग के लिए नोटिस दिया था, लेकिन राज्यसभा को अभी इस पर फैसला लेना बाकी है। कपिल सिब्बल तो ऐसा कह भी चुके हैं कि पहले जस्टिस यादव के खिलाफ क्यों न चलाया जाए, महाभियोग।नियमों की आड़ में बच जाएंगे आरोपी जज?कांग्रेस नेता तन्खा ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि सरकार जस्टिस वर्मा की मदद करना चाहती है या सुप्रीम कोर्ट की आंतरिक जांच रिपोर्ट के आधार पर महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करके उन्हें हटाना चाहती है। उन्होंने तर्क दिया, 'सुप्रीम कोर्ट की जांच भारत के मुख्य न्यायाधीश और अदालत के न्यायाधीशों के लिए थी। लेकिन यह सांसदों के लिए महाभियोग का प्रस्ताव पेश करने के लिए कानूनी सामग्री नहीं है।'

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