जर्मनी दुनिया के उन देशों में शामिल है, जहां जन्म दर बीते कई वर्षों में काफी ज्यादा नीचे है। इससे देश की युवा आबादी तेजी से घटी है। इसका सीधा असर देश के उद्योगों पर हो रहा है।
बर्लिन: जर्मनी के सामने कामगारों की कमी का संकट गहराता जा रहा है। युवा आबादी के घटने के चलते जर्मनी दूसरे देशों से कुशल कामगारों को बुलाने का फैसला लिया है। इस कमी को पूरा करने के लिए जर्मनी की सरकार भारत की ओर देख रही है। जर्मनी युवा कामगारों की समस्या से पार पाने के लिए भारत से लोगों को बुला रहा है। हाल के वर्षों में लगातार जर्मनी की ओर से इसके लिए कदम उठाए गए हैं।बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, जर्मनी के अलग-अलग क्षेत्रों में भारतीय कर्मचारियों की संख्या बढ़ रही है। जर्मनी को इससे अपने कामकाज के लिए लोग मिल रहे हैं तो दूसरी ओर भारतीयों के लिए रोजगार के अवसर खुल रहे हैं। ऐसे में बूढ़े होते जर्मनी और युवा भारत, दोनों के लिए ये संबंध एक बड़ी राहत बना है।जर्मनी में बूढ़े हो रहे लोगजर्मनी इस समय गंभीर किस्म के जनसांख्यिकीय संकट से जूझ रहा है। जर्मनी में युवा आबादी लगातार कम हो रही है और बूढ़ों की संख्या बढ़ रही है। वर्ष 2024 के एक अध्ययन के अनुसार, जर्मनी की अर्थव्यवस्था को हर साल 2,88,000 विदेशी कामगारों की जरूरत है क्योंकि देश में काम करने के लिए युवा नहीं हैं। जन्म दर कम होने के कारण ऐसा हो रहा है।बर्टेल्समैन फाउंडेशन थिंक टैंक की रिपोर्ट में कहती है कि जर्मनी अगर विदेश से काम करने वालों को नहीं बुलाता है तो वर्ष 2040 तक देश के वर्कफोर्स में 10 फीसदी की कमी हो सकता है। जर्मनी में हालिया वर्षों में जो लोग रिटायर हुए हैं। उनकी जगह लेने के लिए जर्मनी में पर्याप्त संख्या में युवा नहीं हैं। ऐसे में भारतीय उनकी कमी को पूरा कर सकते हैं।सैकड़ों भारतीय युवा जाएंगे जर्मनीभारत इस समय दुनिया के सबसे युवा देशों में शुमार है। भारत में 25 वर्ष से कम उम्र के करीब 60 करोड़ लोग हैं। इनमें से हर साल केवल 1.
2 करोड़ कार्यबल में शामिल हो पाते हैं। ऐसे में भारत में कामगारों की बड़ी तादाद बिना काम के बैठी है। ये लोग मौका मिलने पर जर्मनी की अर्थव्यवस्था को रफ्तार दे सकते हैं।इंडिया वर्क्स इस साल 775 युवा भारतीयों को जर्मनी लाने की तैयारी कर रहा है, ताकि वे अपनी अप्रेंटिसशिप शुरू कर सकें। ये युवा जिन अलग-अलग पेशों में शामिल होंगे, उनकी सूची काफी लंबी है। लिस्ट में सड़क बनाने वाले, मैकेनिक, पत्थर तराशने वाले और बेकर जैसे काम शामिल हैं।भारत-जर्मनी का समझौतासाल 2022 में भारत और जर्मनी के बीच 'प्रवासन और गतिशीलता साझेदारी समझौता' होने के बाद से कुशल भारतीय कामगारों के लिए जर्मनी में काम करने के लिए जाना आसान हो गया है। साल 2024 में जर्मनी ने भारतीयों के लिए स्किल्ड वीजा वर्कर का कोटा हर साल 20,000 से बढ़ाकर 90,000 करने का ऐलान किया था।जर्मनी के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में वहां 1,36,670 भारतीय कामगार काम कर रहे थे। इससे 9 साल पहले यानी वर्ष 2015 में यह संख्या केवल 23,320 थी। ये दिखाता है कि जर्मनी में भारतीय कामगारों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। ये रफ्तार आने वाले वर्षों में और बढ़ सकती है।
Germany Workers Shortage Indian Workers In Germany Germany Workers Crisis India Indians In Germany Indian Labour In World जर्मनी में श्रमिकों की कमी जर्मनी में भारतीय श्रमिक जर्मनी-भारत श्रमिक संकट जर्मनी में भारतीय
