जयपुर डंपर हादसे की गूंज सीकर तक, एकसाथ गली से गुजरी तीन अर्थियां तो सहम गया पूरा गांव

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जयपुर डंपर हादसे की गूंज सीकर तक, एकसाथ गली से गुजरी तीन अर्थियां तो सहम गया पूरा गांव
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जयपुर के हरमाड़ा में हुए हादसे ने सीपुर गांव को शोकसागर में डुबोया। एक परिवार के दशरथ बुनकर, भाई महेंद्र व 5 साल की भानु की मौतहो गई। मंगलवार को तीन अर्थियां गलियों से गुजरीं। त्रिवेणी मोक्षधाम में दो भाइयों की एकसाथ चिता और भानु की अलग चिता पर अंतिम संस्कार किया...

सीकर: राजस्थान की राजधानी जयपुर के हरमाड़ा में हुए दर्दनाक सड़क हादसे ने सीकर जिले के श्रीमाधोपुर क्षेत्र के सीपुर गांव को शोक में डुबो दिया। एक ही परिवार से दो सगे भाई और 5 साल की मासूम बालिका की मौत ने गांव की खुशियां लूट लीं। बताते चलें कि जयपुर में एक बेकाबू डंपर ने देखते देखते कुछ समय के अंतराल में 14 जिंगनिया सड़क पर रौंद दी और कई लोगों को घायल कर दिया जो अभी तक जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं। एकसाथ तीन अर्थियां गांव की गलियों से गुजरी इधर, सीकर जिले के सीपुर गांव में मंगलवार को जब एक साथ तीन अर्थियां गांव की गलियों से गुज़रीं, तो पूरे सीपुर में चीख-पुकार और रुदन की आवाज़ें गूंज उठीं। ऐसा मंजर जिसे देखकर पत्थर दिल भी पिघल जाए। हादसे में दशरथ बुनकर, उनके भाई महेंद्र बुनकर और दशरथ की मासूम बेटी भानु ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। जबकि दशरथ की 19 वर्षीया बेटी वर्षा अभी जयपुर में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही है। डॉक्टरों की टीम उसे बचाने की हर संभव कोशिश में जुटी है। एक ही चिता पर दो भाई, बालिका की अलग चिताअंतिम संस्कार त्रिवेणी मोक्षधाम में किया गया, जहां दिल दहला देने वाला दृश्य देखने को मिला। दोनों भाइयों का एक ही चिता पर अंतिम संस्कार किया गया। वहीं 5 वर्षीय भानु की अलग से चिता लगी। जैसे ही चिताओं में आग लगी, परिजनों की कलेजा चीर देने वाली चीखें सुनाई दीं। गांव की हर आंख नम हो उठी। कमाने वाले दोनों बेटे चले गए, परिवार बेसहाराहादसे का शिकार हुए दशरथ और महेंद्र जयपुर में बिजली फिटिंग और चिनाई का काम कर परिवार चलाते थे। दोनों के जाने के बाद घर की जिम्मेदारियों का बोझ बुज़ुर्ग मां-बाप का सहारा, पत्नी और बच्चों की परवरिश, सब एक पल में ढह गया। अब घर में कमाने वाला कोई नहीं बचा। गांव में आज किसी के घर चूल्हा तक नहीं जला। पूरा सीपुर गांव मौन और शोक में डूबा रहा। गांव हुआ गमगीन, परिजन बेहालअंतिम यात्रा के दौरान गांव की गलियां सिसकियों से कांप उठीं। लोगों के कंधे जब अर्थियां लेकर बढ़े, तब महिलाएं अपने आंचल दांतों में दबाकर चीखतीं नजर आईं। इधर अब किसके सहारे जीएंगे हम? यह सवाल हवा में गूंजता रहा।.

सीकर: राजस्थान की राजधानी जयपुर के हरमाड़ा में हुए दर्दनाक सड़क हादसे ने सीकर जिले के श्रीमाधोपुर क्षेत्र के सीपुर गांव को शोक में डुबो दिया। एक ही परिवार से दो सगे भाई और 5 साल की मासूम बालिका की मौत ने गांव की खुशियां लूट लीं। बताते चलें कि जयपुर में एक बेकाबू डंपर ने देखते देखते कुछ समय के अंतराल में 14 जिंगनिया सड़क पर रौंद दी और कई लोगों को घायल कर दिया जो अभी तक जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं। एकसाथ तीन अर्थियां गांव की गलियों से गुजरी इधर, सीकर जिले के सीपुर गांव में मंगलवार को जब एक साथ तीन अर्थियां गांव की गलियों से गुज़रीं, तो पूरे सीपुर में चीख-पुकार और रुदन की आवाज़ें गूंज उठीं। ऐसा मंजर जिसे देखकर पत्थर दिल भी पिघल जाए। हादसे में दशरथ बुनकर, उनके भाई महेंद्र बुनकर और दशरथ की मासूम बेटी भानु ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। जबकि दशरथ की 19 वर्षीया बेटी वर्षा अभी जयपुर में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही है। डॉक्टरों की टीम उसे बचाने की हर संभव कोशिश में जुटी है। एक ही चिता पर दो भाई, बालिका की अलग चिताअंतिम संस्कार त्रिवेणी मोक्षधाम में किया गया, जहां दिल दहला देने वाला दृश्य देखने को मिला। दोनों भाइयों का एक ही चिता पर अंतिम संस्कार किया गया। वहीं 5 वर्षीय भानु की अलग से चिता लगी। जैसे ही चिताओं में आग लगी, परिजनों की कलेजा चीर देने वाली चीखें सुनाई दीं। गांव की हर आंख नम हो उठी। कमाने वाले दोनों बेटे चले गए, परिवार बेसहाराहादसे का शिकार हुए दशरथ और महेंद्र जयपुर में बिजली फिटिंग और चिनाई का काम कर परिवार चलाते थे। दोनों के जाने के बाद घर की जिम्मेदारियों का बोझ बुज़ुर्ग मां-बाप का सहारा, पत्नी और बच्चों की परवरिश, सब एक पल में ढह गया। अब घर में कमाने वाला कोई नहीं बचा। गांव में आज किसी के घर चूल्हा तक नहीं जला। पूरा सीपुर गांव मौन और शोक में डूबा रहा। गांव हुआ गमगीन, परिजन बेहालअंतिम यात्रा के दौरान गांव की गलियां सिसकियों से कांप उठीं। लोगों के कंधे जब अर्थियां लेकर बढ़े, तब महिलाएं अपने आंचल दांतों में दबाकर चीखतीं नजर आईं। इधर अब किसके सहारे जीएंगे हम? यह सवाल हवा में गूंजता रहा।

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