Shani Sadesati Story: हिंदू धर्म में शनि को न्यायप्रिय देवता माना गया है. शास्त्रों में शनि की साढ़ेसाती से जुड़े कई प्रसंग और किस्सों का वर्णन किया गया है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि राजा विक्रमादित्य को शनि की साढ़ेसाती का कष्ट क्यों भोगना पड़ा था.
Shani Sadesati on Vikramaditya Story: हिंदू धर्म में शनिदेव को न्याय का देवता कहा गया है. मान्यता है कि जब शनिदेव क्रोधित होते हैं, तो व्यक्ति के जीवन में कठिनाइयां और कष्ट बढ़ जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि उनकी साढ़ेसाती के समय बड़े से बड़ा राजा भी परीक्षा से नहीं बच पाता.
राजा हरिश्चंद्र और राजा विक्रमादित्य जैसे न्यायप्रिय शासकों को भी इस कठिन समय का सामना करना पड़ा. लेकिन यह भी सत्य है कि शनिदेव बिना कारण दंड नहीं देते; वे हमेशा व्यक्ति के कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं. आइए जानते हैं कि राजा विक्रमादित्य को शनि की साढ़ेसाती का कष्ट क्यों भोगना पड़ा था और इसके जुड़ी पौराणिक कथा क्या है. राजा विक्रमादित्य पर शनिदेव की साढ़ेसाती पौराणिक कथाओं के अनुसार, उज्जैन के प्रसिद्ध और न्यायप्रिय राजा विक्रमादित्य के दरबार में एक दिन नौ ग्रहों की विशेष सभा आयोजित की गई. इस अवसर पर उन्होंने प्रत्येक ग्रह के लिए एक-एक आसन बनवाया, लेकिन शनिदेव को सबसे अंतिम स्थान दिया. शनिदेव को यह अपमानजनक लगा और उन्होंने राजा को सबक सिखाने का निश्चय किया. कुछ समय बाद राजा पर साढ़ेसाती का प्रभाव शुरू हुआ. एक शिकार यात्रा के दौरान वे रास्ता भटक गए और एक व्यापारी ने उन्हें सेवक के रूप में काम पर रख लिया. राजा ने सेवक का कार्य ईमानदारी से किया और समय के साथ चित्रकला में उनकी ख्याति फैल गई. राजकुमारी उनकी कला से प्रभावित होकर उनसे विवाह कर लेती है, लेकिन शनिदेव की परीक्षा अभी समाप्त नहीं हुई थी. कठिन परीक्षाएं और भक्ति का बल एक रात राजा विक्रमादित्य पर चोरी का झूठा आरोप लगाकर उनके हाथ-पैर काट दिए गए. इस विपत्ति के बावजूद उनकी पत्नी ने उनका साथ नहीं छोड़ा और सेवा करती रही. दुख के इन दिनों में राजा ने शनिदेव की आराधना शुरू की. वे प्रतिदिन भक्ति भाव से शनिदेव का स्मरण और प्रार्थना करते रहे. उनकी सच्ची श्रद्धा और धैर्य से प्रसन्न होकर शनिदेव प्रकट हुए. उन्होंने राजा की परीक्षा का कारण बताया और उन्हें पुनः स्वस्थ शरीर और अपना राज्य लौटा दिया. शनिदेव को प्रसन्न रखने का उपाय शनिदेव को न्याय का देवता कहा जाता है क्योंकि वे हर किसी को उसके कर्म के अनुसार फल देते हैं. यदि व्यक्ति अपने कर्म शुद्ध रखे और सच्चाई से जीवन जीए तो शनिदेव का आशीर्वाद मिलता है. उन्हें प्रसन्न करने के लिए उनके मंत्रों का जाप करना श्रेष्ठ माना जाता है, जैसे- ॐ शं शनैश्चराय नमः, नीलांजन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्. इन मंत्रों का नियमित जाप करने से शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन की कठिनाइयां दूर होती हैं.
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