जब दिलीप कुमार ने नेहरू के रक्षा मंत्री को हारता हुआ चुनाव जिताया

United States News News

जब दिलीप कुमार ने नेहरू के रक्षा मंत्री को हारता हुआ चुनाव जिताया
United States Latest News,United States Headlines
  • 📰 द वायर हिंदी
  • ⏱ Reading Time:
  • 89 sec. here
  • 3 min. at publisher
  • 📊 Quality Score:
  • News: 39%
  • Publisher: 63%

जब दिलीप कुमार ने नेहरू के रक्षा मंत्री को हारता हुआ चुनाव जिताया ChunaviBaaten LoksabhaElections2019 चुनावीबातें लोकसभाचुनाव2019

1980 के चुनाव में वामपंथियों के नारे- ‘चलेगा मजदूर उड़ेगी धूल, न बचेगा हाथ, न रहेगा फूल’ के जवाब में कांग्रेस ने ‘न जात पर, न पात पर, इंदिरा जी की बात पर, मुहर लगेगी हाथ पर’ का नारा दिया था.1962 के आम चुनाव में पहली बार किसी सुपरस्टार ने चुनाव का प्रचार किया था.

तब उत्तरी मुंबई सीट पर कांग्रेस नेता कृष्ण मेनन का सामना उनके कट्‌टर विरोधी सोशलिस्ट पार्टी के आचार्य जेबी कृपलानी से था. मेनन रक्षामंत्री थे और भारत चीन से युद्ध हार गया था. ऐसे में विपक्ष मेनन को हटाने की मांग कर रहा था लेकिन नेहरू तैयार नहीं थे. ऐसे में जेबी कृपलानी सीतामढ़ी की अपनी सेफ सीट छोड़ मुंबई में मेनन के खिलाफ उतर आए. इसी दौरान मेेनन पर एक अखबार ने कविता छापी- ‘चीनी हमला होते हैं, मेनन साहब सोते हैं, सोना है तो सोने दो, कृपलानीजी को आने दो.’ मेनन की चुनौती को नेहरू ने खुद को चुनौती माना. दिलीप कुमार की आत्मकथा ‘वजूद और परछाई’ के अनुसार नेहरू ने उन्हें मेनन के प्रचार में आने को कहा. प्रचार ऐसा हुआ कि कृपलानी चुनाव हार गए.1978 में चिकमंगलूर उपचुनाव जीतकर इंदिरा संसद पहुंचीं. लेकिन जनता सरकार ने विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव पारित करवा लिया. इंदिरा को एक महीने की जेल हुई तो उनका चुनाव रद्द हो गया. जेल से रिहा होने पर फिर चिकमंगलूर से जीतकर वे संसद में आ गईं. इंदिरा के अपमान का जनता सरकार का फैसला गलत साबित हुआ. तब पीएम मोरारजी देसाई का बेटा कांति उनके प्रोग्राम तय करता था. कांति की तुलना संजय गांधी से होने लगी. 1979 में सोशलिस्टों ने संसद में अलग बैठने का फैसला किया. जिससे सरकार अल्पमत में आ गई. इंदिरा से गठजोड़ कर चरण सिंह पीएम बने. एक माह बाद ही कांग्रेस ने समर्थन ले लिया. 1980 के चुनाव में भाजपा आ गई. भाजपा का चिन्ह कमल तो कांग्रेस का चिन्ह हाथ बना.इंदिरा के कैंपेन मैनेजर व साहित्यकार श्रीकांत वर्मा ने नारा दिया- ‘न जात पर, न पात पर, इंदिरा जी की बात पर, मुहर लगेगी हाथ पर’. जनता सरकार के लिए न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा था- इंदिरा 5 साल बाद बहुमत से वापस आएंगी. लेकिन इंदिरा को सत्ता में आने में सिर्फ 3 साल लगे. 1980 के चुनाव में कांग्रेस को 353 सीटों पर मिली यह जीत गरीबी हटाओ वाली सरकार से एक सीट ज्यादा थी. क्या आपको ये रिपोर्ट पसंद आई? हम एक गैर-लाभकारी संगठन हैं. हमारी पत्रकारिता को सरकार और कॉरपोरेट दबाव से मुक्त रखने के लिए

We have summarized this news so that you can read it quickly. If you are interested in the news, you can read the full text here. Read more:

द वायर हिंदी /  🏆 3. in İN

 

United States Latest News, United States Headlines

Similar News:You can also read news stories similar to this one that we have collected from other news sources.

लालकृष्ण आडवाणी की सीट गांधीनगर से अमित शाह लड़ सकते हैं चुनाव: सूत्रलालकृष्ण आडवाणी की सीट गांधीनगर से अमित शाह लड़ सकते हैं चुनाव: सूत्र91 साल के लालकृष्ण आडवाणी अभी भाजपा के मार्गदर्शक मंडल के सदस्य हैं. आडवाणी और अन्य वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी को टिकट देने के फैसले के बारे में भाजपा ने कहा था कि दोनों के चुनाव लड़ने का फैसला उन्हीं पर छोड़ा गया. सूत्रों ने बताया कि अभी तक आडवाणी से पार्टी ने संपर्क नहीं किया, वहीं मुरली मनोहर जोशी के चुनाव लड़ने पर भी संशय बना हुआ है.
Read more »

चुनाव पर मनाने पहुंचे वीके सिंह, रूठे नेता ने FB पर निकाली भड़ासचुनाव पर मनाने पहुंचे वीके सिंह, रूठे नेता ने FB पर निकाली भड़ासबीजेपी के वरिष्ठ नेता बालेश्वर त्यागी ने फेसबुक पोस्ट में लिखा है कि जरनल वीके सिंह को अति उत्साही और अति सक्रिय लोगों से बचने की आवश्यकता है, क्योंकि इस प्रवृत्ति से लाभ के बजाय हानि की संभावना ज्यादा होती है.
Read more »

'न्याय' पर बोले नीति आयोग के उपाध्यक्ष, कांग्रेस चुनाव जीतने के लिए ऐसा करती है'न्याय' पर बोले नीति आयोग के उपाध्यक्ष, कांग्रेस चुनाव जीतने के लिए ऐसा करती हैनीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा कि अगर न्याय योजना लागू की जाती है तो ऐसा हो सकता है कि वित्तीय घाटा बढ़कर 3.5 फीसदी से बढ़कर 6 फीसदी तक हो जाए. क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां हमारी रेटिंग घटा दें. हमें बाहर से लोन न मिले. इसका नतीजा यह होगा कि लोग हमारे यहां निवेश करना रोक देंगे.
Read more »

मोदी सरकार के इलेक्टोरल बॉन्ड्स पर भड़ा चुनाव आयोग, पारदर्शिता पर बताया खतरामोदी सरकार के इलेक्टोरल बॉन्ड्स पर भड़ा चुनाव आयोग, पारदर्शिता पर बताया खतराएनडीए सरकार के इलेक्टोरल बॉन्ड का चुनाव आयोग ने कड़े लहजे में विरोध किया है। बुधवार को आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में इसे पारदर्शिता के लिए गंभीर ख़तरा बताया।
Read more »



Render Time: 2026-04-02 06:13:58