चुनावी किस्सा: सरकार से कौन सा मैसेज नहीं आने के चलते आख‍िरी द‍िन दफ्तर नहीं गए थे मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त टीएन शेषन?

T N Seshan Through The Broken Glass News

चुनावी किस्सा: सरकार से कौन सा मैसेज नहीं आने के चलते आख‍िरी द‍िन दफ्तर नहीं गए थे मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त टीएन शेषन?
T N Seshan AutobiographyJansatta Chunavi KissaThrough The Broken Glass
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T N Seshan through the Broken Glass नाम से आई टीएन शेषन की बायोग्राफी से एक रोचक किस्सा सामने आया है। यह किस्सा उनके रिटायरमेंट से पहले का है।

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन ने अपनी जीवनी T N Seshan through the Broken Glass में अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ से जुड़े कई किस्सों का जिक्र किया है। उनमें से एक किस्सा उनके रिटायरमेंट से पहले का है। यह तब की बात है जब उन्हें कृष्णमूर्ति और गिल में से किसी एक को अपने रिटायरमेंट के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर चुनना था। अपनी जीवनी में टीएन शेषन लिखते हैं, "मुख्य चुनाव आयुक्त पद के लिए दो दावेदार थे, कृष्णमूर्ति और एमएस गिल। कृष्णमूर्ति उम्र में मुझसे एक साल बड़े थे लेकिन गिल के पास लंबी सर्विस और ज्यादा प्रशासनिक अनुभव था। कुछ अख़बारों ने अनुमान लगाया कि चूंकि जुलाई 1995 में सुप्रीम कोर्ट ने गिल को आयोग का प्रभारी नियुक्त किया था इसलिए वह इस पद के लिए अधिक संभावित उम्मीदवार होंगे।" जब लगाई जा रहीं थीं शेषन के उत्तराधिकारी के नाम की अटकलें पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त लिखते हैं, '10 दिसंबर को, अधिकांश अखबारों ने बताया कि गिल के मेरे उत्तराधिकारी बनने की संभावना है। उनमें से एक ने कहा कि मेरे कार्यकाल की समाप्ति से पहले उत्तराधिकार की घोषणा नहीं होने वजह यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले फैसला सुनाया था कि गिल मेरी अनुपस्थिति में चुनाव आयोग के मामलों को देखेंगे। 11 दिसंबर को अखबारों ने घोषणा की कि यह गिल होंगे लेकिन आखिरी समय तक मेरे पास सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं था कि कार्यभार कौन संभालेगा?" रूपा प्रकाशन से प्रकाश‍ित टीएन शेषन की आत्मकथा 'थ्रू द ब्रोकन ग्‍लास' का कवर। आखिरी दिन ऑफिस नहीं गए थे टीएन शेषन शेषन आगे लिखते हैं, 'आप 11 दिसंबर को रिटायरमेंट के दिन ऑफिस क्यों नहीं गए?' 'क्या यह सच है कि आप आखिरी दिन ऑफिस नहीं गये?' ये वो सवाल हैं जो मुझसे करीब से जुड़े कुछ लोग अब भी पूछते हैं।" वह आगे बताते हैं, "हां, उस दिन मैं ऑफिस नहीं गया था। सबको पता था कि मैं 11 दिसंबर को रिटायर होने वाला हूं। दरअसल, मैंने छह महीने पहले ही अलग-अलग जगहों पर यह जिक्र करना शुरू कर दिया था कि 11 दिसंबर ऑफिस में मेरी आखिरी तारीख है, ताकि वे तारीख न भूलें।" किताब में लिखा है, "सरकारी नियमों के मुताबिक मुझे 11 दिसंबर को दोपहर से पहले जिम्मेदारी सौंपनी थी। मैं साढ़े तीन बजे तक घर पर इंतजार कर रहा था, उम्मीद कर रहा था कि सरकार मेरे उत्तराधिकारी के नाम की घोषणा करेगी लेकिन ऐसी कोई घोषणा नहीं हुई। एक समय ऐसा भी था जब मैं समझ नहीं पा रहा था कि किसे जिम्मेदारी सौंपूं। ऐसे में केवल कागज के एक टुकड़े पर हस्ताक्षर करने और उसे अवर सचिव को सौंपने के लिए, मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से निर्वाचन सदन जाना जरूरी नहीं था। मुझे अपनी सभी फ़ाइलें व्यवस्थित किए हुए छह महीने हो गए थे।" Also Readचुनावी किस्सा: टीएन शेषन ने ओवरटेक करने को कहा तो कमांडो ने ड्राइवर की गर्दन पर रख दी थी बंदूक जब सदन के बाहर पत्रकार करते रह गए इंतजार किताब में आगे लिखा है, "3.

30 बजे तक प्रतीक्षा करने के बाद और इससे पहले कि कोई मुझ पर उंगली उठाए कि मैंने काम नहीं सौंपा है, मैंने अपना जिम्मेदारी सौंपने का पत्र लिखा और इसे अवर सचिव को भेज दिया। निर्वचन सदन में कुछ पत्रकार जाहिर तौर पर मेरा इंतजार कर रहे थे और उम्मीद कर रहे थे कि मैं ऑफिस आऊंगा। उन्हें निराश जाना पड़ा।" टीएन शेषन लिखते हैं, "नए मुख्य चुनाव आयुक्त एम.एस. गिल मेरे जितने ही सालों तक आईएएस अधिकारी रहे थे। आयोग में आने से पहले वह कृषि विभाग में सचिव के पद पर कार्यरत थे। उसके पास अनुभव था और वह परिपक्व भी था। इस पद के लिए आवश्यक सभी गुण होने के कारण मुझे लगा कि वह अच्छा काम करेंगे। मेरे मन में न तो गिल और न ही कृष्णमूर्ति के प्रति कोई व्यक्तिगत दुर्भावना है।" Also Readचुनावी क‍िस्‍सा: जब लोकसभा चुनाव के वक्‍त Election Commission के ख‍िलाफ सड़कों पर उतरी थी BJP, लगाए थे ‘शेषण से बचाओ’ के नारे नए चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के खिलाफ कोर्ट चले गए थे शेषन पूर्व सीईसी बताते हैं, "एकमात्र चीज जो मुझे पसंद नहीं आई वह थी उनकी नियुक्ति का तरीका। कृष्णमूर्ति अक्सर गैर जिम्मेदाराना बातें करते थे। 11 अक्टूबर की मीटिंग के अलावा वो क्या कहते थे, ये मैंने कभी किसी को नहीं बताया। मैंने अदालत में यह मामला दायर किया था कि उन्हें नियुक्त करने में सरकार की मंशा सही नहीं थी। इसी घटना का जिक्र मैंने द रीजेनरेशन ऑफ इंडिया में भी किया था। जो भी हो, हमारे बीच औपचारिक भाषणों या आंसुओं के साथ अलविदा के लिए कोई खास प्यार नहीं था।" टीएन शेषन कहते हैं कि मैं जीवन के एक नए चरण में कदम रख रहा था और मैं शांति से बाहर जा सकता था, मैं खुश था कि मैंने अपना काम कर लिया।

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