गाजियाबाद में एक व्यक्ति को धोखाधड़ी से बचाया गया। उसकी बेटी चंडीगढ़ में पढ़ाई कर रही है और उसे होटल में कुछ लड़कों के साथ पकड़ लिया गया है।
गाजियाबाद: साहिबाबाद के शालीमार गार्डन में रहने वाले शख्स की समझदारी से वे एक बहुत बड़ी ठगी से बच गए। उनकी बेटी चंडीगढ़ में रहकर पढ़ाई कर रही है। साइबर ठगों ने एआई की मदद से बेटी की आवाज़ में पिता से बात कराई। साथ ही कहा कि वह चंडीगढ़ के थाने से बोल रहे हैं। उनकी बेटी एक होटल में कुछ लड़कों के साथ पकड़ी गई है। एक लाख रुपये तुरंत ट्रांसफर कर दें। यह सुनते ही पिता के पैरों तले की ज़मीन खिसक गई, लेकिन उन्होंने खुद को संभाला और तुरंत दूसरे फोन से बेटी को कॉल कर दिया। वह ठीक मिली तो उन्होंने तुरंत फोन काट दिया। दरअसल, पिता एनबीटी के साइबर ग्रुप से जुड़े हुए हैं, जिसके चलते वह साइबर ठगों के नए-नए तरीके से वाकिफ हैं। हालांकि जो उनके साथ हुआ, इससे वह काफी डर गए, लेकिन जब ठंडे दिमाग से सोचा और क्रॉसचेक किया तो उनकी जान में जान आई। जिस नंबर से फोन आया था वह भी बाहर का निकला। इसके बाद उन्होंने एनबीटी रिपोर्टर को फोन कर घटनाक्रम बताया।वॉट्सऐप से आई थी कॉलशालीमार गार्डन के रहने वाले मुकेश ने बताया कि गुरुवार सुबह वह ऑफिस में थे। तभी उनके पास एक व्यक्ति ने वॉट्सऐप कॉल किया। उस पर एसएचओ लिखा आ रहा था। यह देखकर कुछ सेंकंड के लिए उनका माथा ठनका। कॉलर ने खुद को चंडीगढ़ पुलिस का एसएचओ बताते हुए कहा कि उनके बेटी को कुछ लड़कों के साथ गिरफ्तार किया गया है। ठग ने उनके बेटी को सेक्स रैकेट केस से बचाने का रास्ता भी सुझाया। उसने कहा कि अगर बेटी को बचाना चाहते हो तो एक लाख रुपये तुरंत ट्रांसफर कर दो। फोन अगर काटा तो फिर बात नहीं हो सकेगी।फोन पर बेटी के रोते हुए की आवाज सुनवाईबाकायदा साइबर ठगों ने एआई की मदद से उनकी बेटी की आवाज़ भी सुनाई। वह रोते हुए कह रही थी कि पापा मुझे बचा लीजिए, मैं केस में फंस गई हूं। इस पर वह कुछ देर के लिए सहम गए, लेकिन मामला गड़बड़ लगा। फौरन अपने दूसरे फोन से बेटी को कॉल किया। बेटी ने कहा कि वह कॉलेज में है। उसके बाद कॉलर का फोन काट दिया। एनबीटी रिपोर्टर से संपर्क कर पूरी कहानी विस्तारपूर्वक बताई। उसके बाद मुकेश घर पहुंचे और बेटी से कहा कि अनजान नंबर न उठाए।'सुरक्षा कवच अभियान का फायदा मुझे मिला, शुक्रिया NBT'मुकेश ने बताया कि वह एनबीटी साइबर ग्रुप में जुड़े हैं। अक्सर इस तरीके से हो रही घटनाओं को पढ़ते हैं। चूंकि मामला एक पिता का था, इसलिए वह कुछ देर के लिए डर गए थे, लेकिन कुछ बिंदुओं पर शक हुआ। एनबीटी में इस तरह घटनाओं को पढ़ता रहता हूं तो समझदारी से काम लिया। उन्होंने बताया कि बाद में कॉलर का नंबर चेक किया तो वह विदेश का मालूम हुआ। एनबीटी सुरक्षा कवच अभियान का फायदा मुझे मिल गया। शुक्रिया एनबीटी।ऐसे बनाया जाता है दबावआम तौर पर किसी करीबी रिश्तेदार के नाम पर ही पीड़ित को निशाना बनाया जाता है। पुलिसकर्मी के फोटो वाले नंबर से वॉट्सऐप कॉल आती है। आवाज पीड़ित के करीबी की होती है, जिसमें वह डरा हुआ मदद की गुहार लगाता है। मिलती जुलती आवाज की वजह से लोग अक्सर हड़बड़ा जाते हैं। इसके बाद पुलिस कर्मी की डीपी लगे वॉट्सऐप नंबर से कॉल कर किसी अपराध में फंसने का हवाला देकर छोड़ने के एवज में हजारों लाखों रुपये की डिमांड करते हैं।यूं बच सकते हैं आपअगर आपके पास इस तरह का फोन आए, तो सबसे पहले उस कॉल को काट देंअपने उसी रिश्तेदार या करीबी को तत्काल सामान्य कॉल कर घटना के बारे में जानकारी करेंऐसा हो सकता है कि आपके फोन से सामान्य कॉल न जाए। अगर ऐसा होता है तो भी परेशान न हों, क्योंकि साइबर ठग सर्वर जाम कर देते हैंऐसे में संबंधित व्यक्ति के वॉट्सऐप नंबर पर वॉइस या विडियो कॉल कर सकते हैं1930 टोल फ्री नंबर या साइबर क्राइम के थाने में सूचना दें।अपने परिवार के सभी सदस्यों को इस तरह की ठगी की जानकारी दें।किसी सदस्य की कॉल आने पर सांसत में न पड़े, कॉल कर पुष्टि करें।.
गाजियाबाद: साहिबाबाद के शालीमार गार्डन में रहने वाले शख्स की समझदारी से वे एक बहुत बड़ी ठगी से बच गए। उनकी बेटी चंडीगढ़ में रहकर पढ़ाई कर रही है। साइबर ठगों ने एआई की मदद से बेटी की आवाज़ में पिता से बात कराई। साथ ही कहा कि वह चंडीगढ़ के थाने से बोल रहे हैं। उनकी बेटी एक होटल में कुछ लड़कों के साथ पकड़ी गई है। एक लाख रुपये तुरंत ट्रांसफर कर दें। यह सुनते ही पिता के पैरों तले की ज़मीन खिसक गई, लेकिन उन्होंने खुद को संभाला और तुरंत दूसरे फोन से बेटी को कॉल कर दिया। वह ठीक मिली तो उन्होंने तुरंत फोन काट दिया। दरअसल, पिता एनबीटी के साइबर ग्रुप से जुड़े हुए हैं, जिसके चलते वह साइबर ठगों के नए-नए तरीके से वाकिफ हैं। हालांकि जो उनके साथ हुआ, इससे वह काफी डर गए, लेकिन जब ठंडे दिमाग से सोचा और क्रॉसचेक किया तो उनकी जान में जान आई। जिस नंबर से फोन आया था वह भी बाहर का निकला। इसके बाद उन्होंने एनबीटी रिपोर्टर को फोन कर घटनाक्रम बताया।वॉट्सऐप से आई थी कॉलशालीमार गार्डन के रहने वाले मुकेश ने बताया कि गुरुवार सुबह वह ऑफिस में थे। तभी उनके पास एक व्यक्ति ने वॉट्सऐप कॉल किया। उस पर एसएचओ लिखा आ रहा था। यह देखकर कुछ सेंकंड के लिए उनका माथा ठनका। कॉलर ने खुद को चंडीगढ़ पुलिस का एसएचओ बताते हुए कहा कि उनके बेटी को कुछ लड़कों के साथ गिरफ्तार किया गया है। ठग ने उनके बेटी को सेक्स रैकेट केस से बचाने का रास्ता भी सुझाया। उसने कहा कि अगर बेटी को बचाना चाहते हो तो एक लाख रुपये तुरंत ट्रांसफर कर दो। फोन अगर काटा तो फिर बात नहीं हो सकेगी।फोन पर बेटी के रोते हुए की आवाज सुनवाईबाकायदा साइबर ठगों ने एआई की मदद से उनकी बेटी की आवाज़ भी सुनाई। वह रोते हुए कह रही थी कि पापा मुझे बचा लीजिए, मैं केस में फंस गई हूं। इस पर वह कुछ देर के लिए सहम गए, लेकिन मामला गड़बड़ लगा। फौरन अपने दूसरे फोन से बेटी को कॉल किया। बेटी ने कहा कि वह कॉलेज में है। उसके बाद कॉलर का फोन काट दिया। एनबीटी रिपोर्टर से संपर्क कर पूरी कहानी विस्तारपूर्वक बताई। उसके बाद मुकेश घर पहुंचे और बेटी से कहा कि अनजान नंबर न उठाए।'सुरक्षा कवच अभियान का फायदा मुझे मिला, शुक्रिया NBT'मुकेश ने बताया कि वह एनबीटी साइबर ग्रुप में जुड़े हैं। अक्सर इस तरीके से हो रही घटनाओं को पढ़ते हैं। चूंकि मामला एक पिता का था, इसलिए वह कुछ देर के लिए डर गए थे, लेकिन कुछ बिंदुओं पर शक हुआ। एनबीटी में इस तरह घटनाओं को पढ़ता रहता हूं तो समझदारी से काम लिया। उन्होंने बताया कि बाद में कॉलर का नंबर चेक किया तो वह विदेश का मालूम हुआ। एनबीटी सुरक्षा कवच अभियान का फायदा मुझे मिल गया। शुक्रिया एनबीटी।ऐसे बनाया जाता है दबावआम तौर पर किसी करीबी रिश्तेदार के नाम पर ही पीड़ित को निशाना बनाया जाता है। पुलिसकर्मी के फोटो वाले नंबर से वॉट्सऐप कॉल आती है। आवाज पीड़ित के करीबी की होती है, जिसमें वह डरा हुआ मदद की गुहार लगाता है। मिलती जुलती आवाज की वजह से लोग अक्सर हड़बड़ा जाते हैं। इसके बाद पुलिस कर्मी की डीपी लगे वॉट्सऐप नंबर से कॉल कर किसी अपराध में फंसने का हवाला देकर छोड़ने के एवज में हजारों लाखों रुपये की डिमांड करते हैं।यूं बच सकते हैं आपअगर आपके पास इस तरह का फोन आए, तो सबसे पहले उस कॉल को काट देंअपने उसी रिश्तेदार या करीबी को तत्काल सामान्य कॉल कर घटना के बारे में जानकारी करेंऐसा हो सकता है कि आपके फोन से सामान्य कॉल न जाए। अगर ऐसा होता है तो भी परेशान न हों, क्योंकि साइबर ठग सर्वर जाम कर देते हैंऐसे में संबंधित व्यक्ति के वॉट्सऐप नंबर पर वॉइस या विडियो कॉल कर सकते हैं1930 टोल फ्री नंबर या साइबर क्राइम के थाने में सूचना दें।अपने परिवार के सभी सदस्यों को इस तरह की ठगी की जानकारी दें।किसी सदस्य की कॉल आने पर सांसत में न पड़े, कॉल कर पुष्टि करें।
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