गोवर्धन असरानी का 84 साल की उम्र में निधन: मौत की खबर राज रखने की थी आखिरी इच्छा, अंतिम संस्कार में महज 20 ...

Govardhan Asrani Passes Away At The Age Of 84 Popu News

गोवर्धन असरानी का 84 साल की उम्र में निधन: मौत की खबर राज रखने की थी आखिरी इच्छा, अंतिम संस्कार में महज 20 ...
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ब्लॉकबस्टर फिल्म शोले में अंग्रेजों के जमाने के जेलर का रोल निभाने वाले गोवर्धन असरानी का सोमवार दोपहर 1 बजे निधन हो गया है। 84 साल की उम्र में उन्होंने आखिरी सांस ली है। एक्टर को 4 दिन पहले अस्पताल में भर्ती करवाया गया था,Govardhan Asrani passes away at the age of 84 popular for sholay, know about last...

मौत की खबर राज रखने की थी आखिरी इच्छा, अंतिम संस्कार में महज 20 लोग हुए शामिलब्लॉकबस्टर फिल्म शोले में अंग्रेजों के जमाने के जेलर का रोल निभाने वाले गोवर्धन असरानी का सोमवार दोपहर 1 बजे निधन हो गया है। 84 साल की उम्र में उन्होंने आखिरी सांस ली है। एक्टर को 4 दिन पहले अस्पताल में भर्ती करवाया गया था, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया। उनकी छाती में पानी भर गया था। एक्टर के निधन की खबर की पुष्टि उनके मैनेजर बाबूभाई थिबा ने दैनिक भास्कर से बातचीत में की है।बाबूभाई थिबा ने दैनिक भास्कर से बातचीत में बताया है कि निधन से पहले असरानी ने अपनी पत्नी के सामने इच्छा जाहिर की थी कि उनके निधन की खबर किसी को न दी जाए। वो हंगामा नहीं चाहते थे। उन्होंने कहा था कि जब अंतिम संस्कार हो जाए, तब ही सभी को इत्तेला दी जाए। यही वजह रही कि निधन के तुरंत बाद उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया, जिसके बाद उनके निधन की खबर सार्वजनिक की गई। बाबूभाई थिबा ने बताया है कि असरानी के अंतिम संस्कार में परिवार के महज 15-20 लोग शामिल हुए थे। उनका अंतिम संस्कार सांताक्रूज के शांतिनगर स्थित श्मशान में किया। असरानी ने एक्ट्रेस मंजू बंसल से शादी की, जिनसे उन्हें फिल्मों ‘आज की ताजा खबर’ और ‘नमक हराम’ की शूटिंग के दौरान प्यार हुआ था।सोमवार को दोपहर में गोवर्धन असरानी के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से एक पोस्ट जारी की गई थी, जिसमें उन्होंने सभी को दिवाली की शुभकामनाएं दी थीं।असरानी ने अपने एक्टिंग करियर में करीब 350 फिल्मों में काम किया है। इनमें शोले, अभिमान, चुपके-चुपके, छोटी सी बात, भूल भुलैया शामिल हैं। फिल्म शोले में असरानी का बोला गया डायलॉग 'हम अंग्रेजों के जमाने के जेलर हैं' काफी हिट रहा।निधन से ठीक पहले असरानी ने दैनिक भास्कर को आखिरी इंटरव्यू दिया था। उन्होंने अगस्त में शोले के 50 साल पूरे होने के खास मौके पर हमसे बात की थी। उन्होंने फिल्म शोले में जेलर का किरदार निभाने पर कहा था- 'मुझे फिल्म के बारे में कुछ भी पता नहीं था। मुझे लगा कि प्रोड्यूसर-डायरेक्टर एक रोल के लिए बुला रहा है। मैं मिलने गया तो रमेश सिप्पी के साथ सलीम-जावेद भी मिले। जावेद साहब ने स्क्रिप्ट सुनाई कि अटेंशन हम अंग्रेजों के जमाने के जेलर हैं। यह किरदार बेवकूफ है, लेकिन ऐसा लगता है कि दुनिया का सबसे समझदार आदमी यही है। मैंने सोचा कि ऐसा किरदार तो कभी नहीं निभाया। उन्होंने मुझे द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान की एक किताब पढ़ने के लिए दी। उसमें हिटलर के 10-12 पोज थे।' 'उन्होंने बताया कि हिटलर पब्लिक के बीच आने से पहले अपने कमरे में फोटोग्राफर के साथ आर्मी की ड्रेस पहनकर रिहर्सल करता था। उसमें से 3-4 पोज मैंने पकड़े और किरदार में वैसा ही एटीट्यूड लाया। फिल्म लंबी हो गई थी तो मेरा सीन काट दिया गया था। नागपुर में एक जर्नलिस्ट ने वह सीन देखा और कहा कि वह सीन तो फिल्म की जान है। फिर बाद में मेरे सीन को जोड़ा गया। आज भी लोग मुझे इस किरदार की वजह से पहचानते हैं।''मुझे लग गया था कि जावेद साहब ने जो पढ़कर सुनाया था अगर उसमें गलती की तो डायरेक्टर तो मारेंगे ही, राइटर भी मारेंगे। शूटिंग शुरू होने से 10 दिन पहले तक मैंने डायलॉग की प्रैक्टिस की। मुझे अशोक कुमार की एक बात याद थी कि डायलॉग याद कर लेना, बाकी डायरेक्टर पर छोड़ देना। वो अपने हिसाब से काम निकलवा लेंगे। उसी हिसाब से मैंने शूटिंग पर जाने से पहले पूरी तैयारी कर ली थी। मुझे नहीं लगता कि जेलर के अलावा कोई और किरदार निभा सकता था।'मैं अभी जनवरी में कोटा के पास एक गांव में शूटिंग कर रहा था। सभी गांव वाले इकट्ठा हो गए। उसमें एक चार साल की छोटी सी बच्ची थी। प्रोड्यूसर ने बताया कि बच्ची और उसकी मां मिलना चाहती है। मुझे लगा कि चार साल की छोटी सी बच्ची क्या किसी एक्टर को पहचानेगी, लेकिन वह बच्ची मुझे देखती ही बोली वो असरानी जेलर। मुझे लगता है कि यह एक किरदार की जीत है।'दैनिक भास्कर ने असरानी के निधन पर जब रजा मुराद से बात की, तो उन्होंने खबर पर यकीन करने से इनकार कर दिया। कुछ देर अफसोस जताने के बाद उन्होंने कहा, 'ये बहुत दुखद समाचार है। मेरे तो उस्ताद रहे हैं। उन्होंने 2 साल पढ़ाया है। नमक हराम में मेरे साथ भी थे। ये बहुत बड़ी क्षति है। मैं कल जाऊंगा उनके घर।' 'वो हमारी इमेजिनेशन की क्लास लेते थे, वो हमारी सीन की क्लास लेते थे, वो इमोशनल मेमोरी की 4-4, 5-5 क्लास लेते थे। उनका पूरा नाम गोवर्धन असरानी है। 1 जनवरी को उनका जन्मदिन होता था। उनकी पहली फिल्म हरे कांच की चूड़ियां थीं। वो हमारे उस्ताद भी थे, वो हमारे साथी भी थे। पहली बार मैंने उनके साथ नमक हराम में काम किया।' 'उनके डायरेक्शन में भी मैंने काम किया, दिल ही तो है। हंसते-हंसाते रहना उनका जीवन था। मैंने कभी उन्हें दुखी नहीं देखा। हमेशा हंसते मुस्कुराते रहते थे। जाना तो हर किसी को है, लेकिन उन्होंने बहुत काम किया, बहुत शोहरत कमाई। ऐसे टैलेंटेड और वर्सेटाइल एक्टर बहुत कम हुए हैं। विलेन का रोल उन्होंने किया था हेरा-फेरी में और कोशिश में। कॉमेडी तो खैर उन्होंने बहुत फिल्मों में की है। बहुत अच्छा उन्होंने कैरेक्टर रोल किया था, चंद्रू का अभिमान में। ये पूरी फिल्म इंडस्ट्री का नुकसान है। उम्र का उन पर कोई असर नहीं हुआ था। हंसते-खेलते रहते थे। शोले का रोल कौन भूलेगा, अंग्रेजों के जेलर का। वो जहां भी जाते थे पब्लिक उनसे अंग्रेजों के जमाने का जेलर के डायलॉग उनसे सुनना चाहते थे। जब वो हमारे टीचर थे, तो बहुत गंभीर रहते थे, कभी सोचा ही नहीं था कि वो इतने बड़े कॉमेडियन बनेंगे।'असरानी के निधन पर दैनिक भास्कर से बातचीत में शोले के डायरेक्टर रमेश सिप्पी ने कहा, बहुत तकलीफ हुई सुनकर। बहुत प्यारे आदमी थे। पहले तो उन्होंने सीता और गीता में उन्होंने छोटा सा रोल निभाया था। उसके बाद जब शोले के जेलर का किरदार बना, तब हमने उन्हें बुलाया और उन्होंने कमाल कर दिया। उन्होंने रोल इतना अपना लिया था, जैसे वो खुद ही वही कैरेक्टर हैं। मेरे लिए तो बहुत आसान कर दिया उन्होंने। इतना अच्छा कैरेक्टर, इतना अच्छा एक्टर, दोनों का मेल अच्छा हो गया। बहुत दुख हो रहा है इस वक्त ये सुनकर वो अब इस दुनिया में नहीं रहे।1 जनवरी 1941 को जयपुर में जन्में असरानी के पिता की कार्पेट की दुकान थी। पिता चाहते थे कि बच्चे बड़े होकर उनका बिजनेस संभाले, लेकिन असरानी की दिलचस्पी फिल्मों में थी। असरानी ने जयपुर के राजस्थान कॉलेज से ग्रेजुएशन किया था। वो अपनी पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए ऑल इंडिया रेडियो में बतौर वॉइस आर्टिस्ट काम किया करते थे। साल 1960 में उन्होंने साहित्य कलभाई ठक्कर में दाखिला लिया और एक्टिंग सीखी। 1962 में कोर्स पूरा होते ही वो काम ढूंढने मुंबई पहुंचे, लेकिन कोई मौका नहीं मिला। 1963 में किशोर साहू और ऋषिकेश मुखर्जी ने उनका हुनर पहचाना जरूरी, लेकिन प्रोफेशनल एक्टिंग सीखने की सलाह दी। 1964 में असरानी ने पुणे के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट में दाखिला लिया। 2 साल बाद कोर्स पूरा होने के बाद उन्हें फिल्म हरे कांच की चूड़ियां में काम मिला, जो 1967 में रिलीज हुई। इस दौरान पॉपुलर फिल्ममेकर ऋषिकेष मुखर्जी ने उन्हें 1969 की फिल्म सत्यकाम में एक रोल दिया, जिससे उन्हें पहचान मिल गई। इसके बाद 1971 में रिलीज हुई फिल्म गुड्डी ने उन्हें कामयाब बना दिया। इसके बाद से ही उन्हें लगातार फिल्मों में काम मिलने लगा।फिल्म बावर्ची में असरानी ने राजेश खन्ना के साथ काम किया था। दोनों की दोस्ती सेट पर काफी गहरी हो गई। राजेश खन्ना को असरानी का काम इस कदर पसंद आया कि वो प्रोड्यूसर्स से कहकर अपनी हर फिल्म में कॉमेडियन के तौर पर असरानी को कास्ट करवाने लगे। इसी तरह असरानी ने राजेश खन्ना की करीब 25 फिल्मों में काम किया था। अमिताभ की कई फिल्मों में उन्होंने हीरो की बराबरी वाले रोल निभाए, जैसे अभिमान में 'चंदर' और 'चुपके चुपके' में प्रशांत कुमार श्रीवास्तव का। 'छोटी सी बात' में उनके द्वारा निभाया गया नागेश शास्त्री का किरदार भी किसी हीरो से कम नहीं है। 'शोले' में एक डायलॉग बोलकर असरानी ने दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींचने में सफलता पाई। 'अंग्रेजों के जमाने के जेलर' वाला उनका डायलॉग अब असरानी की पहचान है। असरानी को आखिरी बार साल 2023 में रिलीज हुई फिल्म नॉनस्टॉप धमाल और ड्रीम गर्ल 2 में देखा गया था। इसके अलावा वो सलमान खान के साथ बॉडीगार्ड, क्यों की, अक्षय कुमार के साथ दे दना दन, खट्टा-मीठा, वेलकम, भूल भुलैया, भागम भाग जैसी कई फिल्मों में नजर आ चुके हैं। आने वाले दिनों में वो एक्ट्रेस एकता जैन के साथ फिल्म खली-बली में नजर आने वाले थे।पंकज धीर के अंतिम संस्कार में इमोशनल हुए सलमान खान:बेटे निकितिन ने मुखाग्नि दी, सुबह अंतिम सांस ली थी; कैंसर से जूझ रहे थे एक्टर पंकज धीर को उनके बेटे निकितिन ने 15 अक्टूबर को पवन हंस क्रीमैटोरियम में मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार के वक्त सलमान खान इमोशनल नजर आए।शाहरुख बोले- राज को इतना प्यार देने वालों का आभारी हूं, काजोल ने कहा- ये सपने जैसा हैअक्षय कुमार से लेकर अल्लू अर्जुन तक ने दिवाली के खास मौके पर शेयर कीं पोस्टकहा- मुझे लगातार ट्रोल किया गया, कहा गया कि मैं नहीं कर पाऊंगा, मैने बहुत बुरा महसूस कियानर्मदापुरम में रात में गुलाबी ठंड का अहसासजैसलमेर में दिन में गर्मी, रात में हल्की सर्दीदिवाली पर NCR में जहरीली हवा से धुएं जैसा मौसमठंड से मौतों में अमृतसर देश में पहले स्थान परपंजाब में बाढ़ से मिट्टी का स्वरूप बदला.

मौत की खबर राज रखने की थी आखिरी इच्छा, अंतिम संस्कार में महज 20 लोग हुए शामिलब्लॉकबस्टर फिल्म शोले में अंग्रेजों के जमाने के जेलर का रोल निभाने वाले गोवर्धन असरानी का सोमवार दोपहर 1 बजे निधन हो गया है। 84 साल की उम्र में उन्होंने आखिरी सांस ली है। एक्टर को 4 दिन पहले अस्पताल में भर्ती करवाया गया था, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया। उनकी छाती में पानी भर गया था। एक्टर के निधन की खबर की पुष्टि उनके मैनेजर बाबूभाई थिबा ने दैनिक भास्कर से बातचीत में की है।बाबूभाई थिबा ने दैनिक भास्कर से बातचीत में बताया है कि निधन से पहले असरानी ने अपनी पत्नी के सामने इच्छा जाहिर की थी कि उनके निधन की खबर किसी को न दी जाए। वो हंगामा नहीं चाहते थे। उन्होंने कहा था कि जब अंतिम संस्कार हो जाए, तब ही सभी को इत्तेला दी जाए। यही वजह रही कि निधन के तुरंत बाद उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया, जिसके बाद उनके निधन की खबर सार्वजनिक की गई। बाबूभाई थिबा ने बताया है कि असरानी के अंतिम संस्कार में परिवार के महज 15-20 लोग शामिल हुए थे। उनका अंतिम संस्कार सांताक्रूज के शांतिनगर स्थित श्मशान में किया। असरानी ने एक्ट्रेस मंजू बंसल 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तो कभी नहीं निभाया। उन्होंने मुझे द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान की एक किताब पढ़ने के लिए दी। उसमें हिटलर के 10-12 पोज थे।' 'उन्होंने बताया कि हिटलर पब्लिक के बीच आने से पहले अपने कमरे में फोटोग्राफर के साथ आर्मी की ड्रेस पहनकर रिहर्सल करता था। उसमें से 3-4 पोज मैंने पकड़े और किरदार में वैसा ही एटीट्यूड लाया। फिल्म लंबी हो गई थी तो मेरा सीन काट दिया गया था। नागपुर में एक जर्नलिस्ट ने वह सीन देखा और कहा कि वह सीन तो फिल्म की जान है। फिर बाद में मेरे सीन को जोड़ा गया। आज भी लोग मुझे इस किरदार की वजह से पहचानते हैं।''मुझे लग गया था कि जावेद साहब ने जो पढ़कर सुनाया था अगर उसमें गलती की तो डायरेक्टर तो मारेंगे ही, राइटर भी मारेंगे। शूटिंग शुरू होने से 10 दिन पहले तक मैंने डायलॉग की प्रैक्टिस की। मुझे अशोक कुमार की एक बात याद थी कि डायलॉग याद कर लेना, बाकी डायरेक्टर पर छोड़ देना। वो अपने हिसाब से काम निकलवा लेंगे। उसी हिसाब से मैंने शूटिंग पर जाने से पहले पूरी तैयारी कर ली थी। मुझे नहीं लगता कि जेलर के अलावा कोई और किरदार निभा सकता था।'मैं अभी जनवरी में कोटा के पास एक गांव में शूटिंग कर रहा था। सभी गांव वाले इकट्ठा हो गए। उसमें एक चार साल की छोटी सी बच्ची थी। प्रोड्यूसर ने बताया कि बच्ची और उसकी मां मिलना चाहती है। मुझे लगा कि चार साल की छोटी सी बच्ची क्या किसी एक्टर को पहचानेगी, लेकिन वह बच्ची मुझे देखती ही बोली वो असरानी जेलर। मुझे लगता है कि यह एक किरदार की जीत है।'दैनिक भास्कर ने असरानी के निधन पर जब रजा मुराद से बात की, तो उन्होंने खबर पर यकीन करने से इनकार कर दिया। कुछ देर अफसोस जताने के बाद उन्होंने कहा, 'ये बहुत दुखद समाचार है। मेरे तो उस्ताद रहे हैं। उन्होंने 2 साल पढ़ाया है। नमक हराम में मेरे साथ भी थे। ये बहुत बड़ी क्षति है। मैं कल जाऊंगा उनके घर।' 'वो हमारी इमेजिनेशन की क्लास लेते थे, वो हमारी सीन की क्लास लेते थे, वो इमोशनल मेमोरी की 4-4, 5-5 क्लास लेते थे। उनका पूरा नाम गोवर्धन असरानी है। 1 जनवरी को उनका जन्मदिन होता था। उनकी पहली फिल्म हरे कांच की चूड़ियां थीं। वो हमारे उस्ताद भी थे, वो हमारे साथी भी थे। पहली बार मैंने उनके साथ नमक हराम में काम किया।' 'उनके डायरेक्शन में भी मैंने काम किया, दिल ही तो है। हंसते-हंसाते रहना उनका जीवन था। मैंने कभी उन्हें दुखी 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क्यों की, अक्षय कुमार के साथ दे दना दन, खट्टा-मीठा, वेलकम, भूल भुलैया, भागम भाग जैसी कई फिल्मों में नजर आ चुके हैं। आने वाले दिनों में वो एक्ट्रेस एकता जैन के साथ फिल्म खली-बली में नजर आने वाले थे।पंकज धीर के अंतिम संस्कार में इमोशनल हुए सलमान खान:बेटे निकितिन ने मुखाग्नि दी, सुबह अंतिम सांस ली थी; कैंसर से जूझ रहे थे एक्टर पंकज धीर को उनके बेटे निकितिन ने 15 अक्टूबर को पवन हंस क्रीमैटोरियम में मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार के वक्त सलमान खान इमोशनल नजर आए।शाहरुख बोले- राज को इतना प्यार देने वालों का आभारी हूं, काजोल ने कहा- ये सपने जैसा हैअक्षय कुमार से लेकर अल्लू अर्जुन तक ने दिवाली के खास मौके पर शेयर कीं पोस्टकहा- मुझे लगातार ट्रोल किया गया, कहा गया कि मैं नहीं कर पाऊंगा, मैने बहुत बुरा महसूस कियानर्मदापुरम में रात में गुलाबी ठंड का अहसासजैसलमेर में दिन में गर्मी, रात में हल्की सर्दीदिवाली पर NCR में जहरीली हवा से धुएं जैसा मौसमठंड से मौतों में अमृतसर देश में पहले स्थान परपंजाब में बाढ़ से मिट्टी का स्वरूप बदला

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