दिल्ली एक्साइज पॉलिसी से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने BRS की नेता के.
दिल्ली एक्साइज पॉलिसी से जुड़े मामले में भारत राष्ट्र समिति की नेता और MLC के. कविता को जमानत देने का सुप्रीम कोर्ट का फैसला जांच एजेंसियों के लिए एक जोरदार झटका है। इस हाईप्रोफाइल मामले में कई विपक्षी नेता गिरफ्तार हुए हैं। हालांकि कोर्ट से जमानत मिलना आरोपी के बेकसूर होने का सबूत नहीं माना जाता, लेकिन इस मामले में कई ऐसी बातें हैं जो जांच एजेंसी के रुख पर सवाल खड़े करती हैं।हिरासत की जरूरत नहीं : पहली नजर में के.
कविता को जमानत देने का यह फैसला दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की जमानत जैसा इसलिए भी लगता है क्योंकि दोनों मामलों में आधार एक ही है। ताजा मामले में कोर्ट ने पाया कि सीबीआई और ईडी की जांच पूरी हो चुकी है। 493 गवाह और 50 हजार दस्तावेज से जाहिर है कि इस मामले में ट्रायल जल्द नहीं पूरा होने वाला। ऐसे में अंडर ट्रायल कस्टडी को सजा में बदलने देना सुप्रीम कोर्ट ने सही नहीं माना।हाईकोर्ट को नसीहत : सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा जमानत की अर्जी ठुकराए जाने के फैसले को न सिर्फ पलटा, बल्कि उसके नजरिए की आलोचना भी की। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि जब प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्डरिंग एक्ट के तहत महिला, नाबालिग और बीमार के लिए जमानत की विशेष व्यवस्था की गई है तो फिर हाईकोर्ट का इस आधार पर जमानत देने से इनकार करना गलत है कि के. कविता शिक्षित महिला हैं। इस तरह से इस कानून में महिलाओं की एक उपश्रेणी बनाने की जानी अनजानी कोशिश उपयुक्त नहीं मानी गई।निष्पक्षता पर जोर : सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का सबसे अहम पहलू है जांच एजेंसियों के रुख की पड़ताल करते हुए उनकी निष्पक्षता की जरूरत को रेखांकित करना। कोर्ट ने हालांकि अपने फैसले में केस के मेरिट पर कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन जांच एजेंसियों से यह पूछा कि वे मनमाने ढंग से किसी को आरोपी बनाने और किसी को गवाह बना देने का फैसला कैसे कर सकती हैं। कोर्ट ने साफ कहा कि अभियोजन पक्ष को निष्पक्ष होना चाहिए।सही सबक लेने की जरूरत : PMLA देश के कुछ बेहद सख्त कानूनों में है। इसके उपयोग में खास सावधानी की जरूरत है। इस कानून के तहत दर्ज मामलों में अगर जांच एजेंसियों का रवैया सवालों के घेरे में आता है तो यह गंभीर बात है। इससे न केवल इन एजेंसियों की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है बल्कि एजेंसियों के दुरुपयोग के आरोपों को भी बल मिलता है। उम्मीद की जाए कि सुप्रीम कोर्ट की इन कड़ी टिप्पणियों से सबक लेते हुए सरकार आवश्यक कदम उठाने में विलंब नहीं करेगी।
Kavita Brs Leader Brs Leader K Kavita के कविता को जमानत
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