कोरोना वायरस: 12 राज्य बोले- दूसरी लहर में ऑक्सीजन की कमी से नहीं हुई किसी की मौत Coronavirus OxygenShortage CoronaDeaths MoHFW_INDIA mansukhmandviya PMOIndia icmr
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को अब तक 13 राज्य सरकारों से जवाब मिला है, जिनमें से 12 राज्यों ने ऐसा एक भी मामला उनके यहां दर्ज नहीं होने की जानकारी दी है। जबकि, पंजाब ने चार संदिग्ध मामलों की जानकारी दी है जिनकी मौत दूसरी लहर के दौरान हुई थी लेकिन ऑक्सीजन की कमी से इनकी मौत हुई है, इस बारे में पंजाब सरकार ने भी स्पष्ट जानकारी नहीं दी है। स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बीते 26 जुलाई को सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों को पत्र भेजकर पूछा गया था कि ऑक्सीजन की कमी से अब तक कितने लोगों की मौत हुई है? इस मामले में 12 राज्यों ने एक भी मौत दर्ज नहीं होने की जानकारी दी है, जबकि पंजाब ने चार मौतों को संदिग्ध करार किया है। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र सरकार ने सिरे से ही खारिज कर दिया है। ओडिशा सरकार का कहना है कि उनके यहां ऑक्सीजन की कमी नहीं हुई थी। मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने भी कहा कि अभी किसी भी राज्य ने ऑक्सीजन की कमी से मौत की जानकारी नहीं दी है। राज्यों को 13 अगस्त तक जानकारी मुहैया करानी है।दूसरी लहर में अप्रैल से लेकर मई के बीच ऑक्सीजन की कमी, अस्पतालों में दवाओं का अभाव और समय पर इलाज न मिलने की वजह से काफी लोगों की मौतें हुईं। श्मशान घाट पर जलती चिंताएं इसकी गवाह बनीं, पर सरकारी कागजों में इन मौतों पर कोई जानकारी नहीं है। दिल्ली के बत्रा अस्पताल व जयपुर गोल्डन अस्पताल में 50 से अधिक लोगों की मौत ऑक्सीजन की कमी से हुई, जिसे लेकर अस्पताल प्रबंधन भी लिखित में जानकारी दे चुका है लेकिन मामले सरकारी कागजों में दर्ज नहीं किए गए हैं।स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव कुमार अग्रवाल ने कहा कि कोविड से हुईं मौतों को लेकर राज्यों को लगातार निर्देश दिए जा रहे हैं। राज्यों के साथ यह भी चर्चा की गई थी कि डेथ ऑडिट को लेकर मौत के कारण पर भी समीक्षा होनी चाहिए। राज्यों ने ऑक्सीजन की कमी से अब तक किसी भी मौत की जानकारी नहीं दी है। एक राज्य ने संदिग्ध मौतें बताई है, लेकिन उनमें ऑक्सीजन की कमी अब तक साबित नहीं हुई है। वहीं, ज्यादातर राज्यों ने होम आइसोलेशन में हुई मौतों की जानकारी अब तक सार्वजनिक नहीं की हैं। न ही केंद्र सरकार ने अलग से इसे लेकर जानकारी पिछले डेढ़ वर्ष में कभी साझा की है।कोची। केरल में शराब की दुकानों को कोविड महामारी को लेकर बनाए नियमों से परे रखे जाने को केरल हाईकोर्ट ने चौंकाने वाला बताते हुए सरकार से जवाब मांगा है। जस्टिस देवन रामचंद्रन ने कहा, शराब दुकानों व बेवरेज कॉरपोरेशन के बाहर लाइन में लगकर शराब खरीदने वालों का भी कोविड-19 टीकाकरण किया होना चाहिए या उनके पास 72 घंटे के भीतर की नैगेटिव आरटीपीसीआर रिपोर्ट होनी चाहिए। उन्हें क्यों छूट दी जा रही है? सरकार ने यह आदेश चार अगस्त को जारी किया था, जिसमें यह छूट दी गई है। इस पर दायर याचिका की सुनवाई में हाईकोर्ट ने पूछा, जब सभी कुछ खरीदने के लिए यह नियम लागू है तो शराब खरीदने वालों को छूट क्यों? यह बेतुकी बात है, सरकार इसका जवाब दे। हाईकोर्ट ने यह भी सुझाव दिया कि अगर सरकार शराब खरीदने के लिए टीकाकरण अनिवार्य करती है तो इससे टीकाकरण को बढ़ावा मिलेगा। ज्यादा से ज्यादा लोग टीका लगवाएंगे, ताकि शराब खरीद सकें। मामले पर अगली सुनवाई 11 अगस्त को रखी गई है। एजेंसीस्वास्थ्य मंत्रालय ने ऑक्सीजन की कमी से हुईं मौतों की जानकारी के लिए राज्यों को पत्र लिखा था लेकिन दिल्ली सरकार ने दावा किया है कि उन्हें मंत्रालय से ऐसा कोई भी पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। हालांकि इससे पहले स्वास्थ्य विभाग के ही एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा था कि मंत्रालय को चंद दिनों में यह आंकड़ा नहीं दिया जा सकता है। इसके लिए घर घर जाकर सर्वे करने की जरूरत है जिसमें समय लगेगा लेकिन एलजी ने डेथ ऑडिट समिति को भंग कर दिया है।आरटीआई में केंद्र के अधीन अस्पतालों ने ऑक्सीजन की कमी से किसी भी मरीज की मौत होने का रिकॉर्ड नहीं होने की जानकारी दी है। दिल्ली एम्स, आरएमएल, सफदरजंग अस्पताल और लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज ने न सिर्फ मौतें, बल्कि यहां तक कहा है कि उनके यहां कभी ऑक्सीजन की कमी हुई भी नहीं। जबकि अप्रैल माह में दिल्ली एम्स ने ही ऑक्सीजन की कमी से नए मरीजों को भर्ती करना बंद कर दिया था।केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को अब तक 13 राज्य सरकारों से जवाब मिला है, जिनमें से 12 राज्यों ने ऐसा एक भी मामला उनके यहां दर्ज नहीं होने की जानकारी दी है। जबकि, पंजाब ने चार संदिग्ध मामलों की जानकारी दी है जिनकी मौत दूसरी लहर के दौरान हुई थी लेकिन ऑक्सीजन की कमी से इनकी मौत हुई है, इस बारे में पंजाब सरकार ने भी स्पष्ट जानकारी नहीं दी है। स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बीते 26 जुलाई को सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों को पत्र भेजकर पूछा गया था कि ऑक्सीजन की कमी से अब तक कितने लोगों की मौत हुई है? इस मामले में 12 राज्यों ने एक भी मौत दर्ज नहीं होने की जानकारी दी है, जबकि पंजाब ने चार मौतों को संदिग्ध करार किया है। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र सरकार ने सिरे से ही खारिज कर दिया है। ओडिशा सरकार का कहना है कि उनके यहां ऑक्सीजन की कमी नहीं हुई थी। मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने भी कहा कि अभी किसी भी राज्य ने ऑक्सीजन की कमी से मौत की जानकारी नहीं दी है। राज्यों को 13 अगस्त तक जानकारी मुहैया करानी है।दूसरी लहर में अप्रैल से लेकर मई के बीच ऑक्सीजन की कमी, अस्पतालों में दवाओं का अभाव और समय पर इलाज न मिलने की वजह से काफी लोगों की मौतें हुईं। श्मशान घाट पर जलती चिंताएं इसकी गवाह बनीं, पर सरकारी कागजों में इन मौतों पर कोई जानकारी नहीं है। दिल्ली के बत्रा अस्पताल व जयपुर गोल्डन अस्पताल में 50 से अधिक लोगों की मौत ऑक्सीजन की कमी से हुई, जिसे लेकर अस्पताल प्रबंधन भी लिखित में जानकारी दे चुका है लेकिन मामले सरकारी कागजों में दर्ज नहीं किए गए हैं।स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव कुमार अग्रवाल ने कहा कि कोविड से हुईं मौतों को लेकर राज्यों को लगातार निर्देश दिए जा रहे हैं। राज्यों के साथ यह भी चर्चा की गई थी कि डेथ ऑडिट को लेकर मौत के कारण पर भी समीक्षा होनी चाहिए। राज्यों ने ऑक्सीजन की कमी से अब तक किसी भी मौत की जानकारी नहीं दी है। एक राज्य ने संदिग्ध मौतें बताई है, लेकिन उनमें ऑक्सीजन की कमी अब तक साबित नहीं हुई है। वहीं, ज्यादातर राज्यों ने होम आइसोलेशन में हुई मौतों की जानकारी अब तक सार्वजनिक नहीं की हैं। न ही केंद्र सरकार ने अलग से इसे लेकर जानकारी पिछले डेढ़ वर्ष में कभी साझा की है।कोची। केरल में शराब की दुकानों को कोविड महामारी को लेकर बनाए नियमों से परे रखे जाने को केरल हाईकोर्ट ने चौंकाने वाला बताते हुए सरकार से जवाब मांगा है। जस्टिस देवन रामचंद्रन ने कहा, शराब दुकानों व बेवरेज कॉरपोरेशन के बाहर लाइन में लगकर शराब खरीदने वालों का भी कोविड-19 टीकाकरण किया होना चाहिए या उनके पास 72 घंटे के भीतर की नैगेटिव आरटीपीसीआर रिपोर्ट होनी चाहिए। उन्हें क्यों छूट दी जा रही है? सरकार ने यह आदेश चार अगस्त को जारी किया था, जिसमें यह छूट दी गई है। इस पर दायर याचिका की सुनवाई में हाईकोर्ट ने पूछा, जब सभी कुछ खरीदने के लिए यह नियम लागू है तो शराब खरीदने वालों को छूट क्यों? यह बेतुकी बात है, सरकार इसका जवाब दे। हाईकोर्ट ने यह भी सुझाव दिया कि अगर सरकार शराब खरीदने के लिए टीकाकरण अनिवार्य करती है तो इससे टीकाकरण को बढ़ावा मिलेगा। ज्यादा से ज्यादा लोग टीका लगवाएंगे, ताकि शराब खरीद सकें। मामले पर अगली सुनवाई 11 अगस्त को रखी गई है। एजेंसीस्वास्थ्य मंत्रालय ने ऑक्सीजन की कमी से हुईं मौतों की जानकारी के लिए राज्यों को पत्र लिखा था लेकिन दिल्ली सरकार ने दावा किया है कि उन्हें मंत्रालय से ऐसा कोई भी पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। हालांकि इससे पहले स्वास्थ्य विभाग के ही एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा था कि मंत्रालय को चंद दिनों में यह आंकड़ा नहीं दिया जा सकता है। इसके लिए घर घर जाकर सर्वे करने की जरूरत है जिसमें समय लगेगा लेकिन एलजी ने डेथ ऑडिट समिति को भंग कर दिया है।आरटीआई में केंद्र के अधीन अस्पतालों ने ऑक्सीजन की कमी से किसी भी मरीज की मौत होने का रिकॉर्ड नहीं होने की जानकारी दी है। दिल्ली एम्स, आरएमएल, सफदरजंग अस्पताल और लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज ने न सिर्फ मौतें, बल्कि यहां तक कहा है कि उनके यहां कभी ऑक्सीजन की कमी हुई भी नहीं। जबकि अप्रैल माह में दिल्ली एम्स ने ही ऑक्सीजन की कमी से नए मरीजों को भर्ती करना बंद कर दिया था।खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?खबर में और अधिक सुधार की आवश्यकता है?.
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को अब तक 13 राज्य सरकारों से जवाब मिला है, जिनमें से 12 राज्यों ने ऐसा एक भी मामला उनके यहां दर्ज नहीं होने की जानकारी दी है। जबकि, पंजाब ने चार संदिग्ध मामलों की जानकारी दी है जिनकी मौत दूसरी लहर के दौरान हुई थी लेकिन ऑक्सीजन की कमी से इनकी मौत हुई है, इस बारे में पंजाब सरकार ने भी स्पष्ट जानकारी नहीं दी है। स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बीते 26 जुलाई को सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों को पत्र भेजकर पूछा गया था कि ऑक्सीजन की कमी से अब तक कितने लोगों की मौत हुई है? इस मामले में 12 राज्यों ने एक भी मौत दर्ज नहीं होने की जानकारी दी है, जबकि पंजाब ने चार मौतों को संदिग्ध करार किया है। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र सरकार ने सिरे से ही खारिज कर दिया है। ओडिशा सरकार का कहना है कि उनके यहां ऑक्सीजन की कमी नहीं हुई थी। मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने भी कहा कि अभी किसी भी राज्य ने ऑक्सीजन की कमी से मौत की जानकारी नहीं दी है। राज्यों को 13 अगस्त तक जानकारी मुहैया करानी है।दूसरी लहर में अप्रैल से लेकर मई के बीच ऑक्सीजन की कमी, अस्पतालों में दवाओं का अभाव और समय पर इलाज न मिलने की वजह से काफी लोगों की मौतें हुईं। श्मशान घाट पर जलती चिंताएं इसकी गवाह बनीं, पर सरकारी कागजों में इन मौतों पर कोई जानकारी नहीं है। दिल्ली के बत्रा अस्पताल व जयपुर गोल्डन अस्पताल में 50 से अधिक लोगों की मौत ऑक्सीजन की कमी से हुई, जिसे लेकर अस्पताल प्रबंधन भी लिखित में जानकारी दे चुका है लेकिन मामले सरकारी कागजों में दर्ज नहीं किए गए हैं।स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव कुमार अग्रवाल ने कहा कि कोविड से हुईं मौतों को लेकर राज्यों को लगातार निर्देश दिए जा रहे हैं। राज्यों के साथ यह भी चर्चा की गई थी कि डेथ ऑडिट को लेकर मौत के कारण पर भी समीक्षा होनी चाहिए। राज्यों ने ऑक्सीजन की कमी से अब तक किसी भी मौत की जानकारी नहीं दी है। एक राज्य ने संदिग्ध मौतें बताई है, लेकिन उनमें ऑक्सीजन की कमी अब तक साबित नहीं हुई है। वहीं, ज्यादातर राज्यों ने होम आइसोलेशन में हुई मौतों की जानकारी अब तक सार्वजनिक नहीं की हैं। न ही केंद्र सरकार ने अलग से इसे लेकर जानकारी पिछले डेढ़ वर्ष में कभी साझा की है।कोची। केरल में शराब की दुकानों को कोविड महामारी को लेकर बनाए नियमों से परे रखे जाने को केरल हाईकोर्ट ने चौंकाने वाला बताते हुए सरकार से जवाब मांगा है। जस्टिस देवन रामचंद्रन ने कहा, शराब दुकानों व बेवरेज कॉरपोरेशन के बाहर लाइन में लगकर शराब खरीदने वालों का भी कोविड-19 टीकाकरण किया होना चाहिए या उनके पास 72 घंटे के भीतर की नैगेटिव आरटीपीसीआर रिपोर्ट होनी चाहिए। उन्हें क्यों छूट दी जा रही है? सरकार ने यह आदेश चार अगस्त को जारी किया था, जिसमें यह छूट दी गई है। इस पर दायर याचिका की सुनवाई में हाईकोर्ट ने पूछा, जब सभी कुछ खरीदने के लिए यह नियम लागू है तो शराब खरीदने वालों को छूट क्यों? यह बेतुकी बात है, सरकार इसका जवाब दे। हाईकोर्ट ने यह भी सुझाव दिया कि अगर सरकार शराब खरीदने के लिए टीकाकरण अनिवार्य करती है तो इससे टीकाकरण को बढ़ावा मिलेगा। ज्यादा से ज्यादा लोग टीका लगवाएंगे, ताकि शराब खरीद सकें। मामले पर अगली सुनवाई 11 अगस्त को रखी गई है। एजेंसीस्वास्थ्य मंत्रालय ने ऑक्सीजन की कमी से हुईं मौतों की जानकारी के लिए राज्यों को पत्र लिखा था लेकिन दिल्ली सरकार ने दावा किया है कि उन्हें मंत्रालय से ऐसा कोई भी पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। हालांकि इससे पहले स्वास्थ्य विभाग के ही एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा था कि मंत्रालय को चंद दिनों में यह आंकड़ा नहीं दिया जा सकता है। इसके लिए घर घर जाकर सर्वे करने की जरूरत है जिसमें समय लगेगा लेकिन एलजी ने डेथ ऑडिट समिति को भंग कर दिया है।आरटीआई में केंद्र के अधीन अस्पतालों ने ऑक्सीजन की कमी से किसी भी मरीज की मौत होने का रिकॉर्ड नहीं होने की जानकारी दी है। दिल्ली एम्स, आरएमएल, सफदरजंग अस्पताल और लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज ने न सिर्फ मौतें, बल्कि यहां तक कहा है कि उनके यहां कभी ऑक्सीजन की कमी हुई भी नहीं। जबकि अप्रैल माह में दिल्ली एम्स ने ही ऑक्सीजन की कमी से नए मरीजों को भर्ती करना बंद कर दिया था।केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को अब तक 13 राज्य सरकारों से जवाब मिला है, जिनमें से 12 राज्यों ने ऐसा एक भी मामला उनके यहां दर्ज नहीं होने की जानकारी दी है। जबकि, पंजाब ने चार संदिग्ध मामलों की जानकारी दी है जिनकी मौत दूसरी लहर के दौरान हुई थी लेकिन ऑक्सीजन की कमी से इनकी मौत हुई है, इस बारे में पंजाब सरकार ने भी स्पष्ट जानकारी नहीं दी है। स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बीते 26 जुलाई को सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों को पत्र भेजकर पूछा गया था कि ऑक्सीजन की कमी से अब तक कितने लोगों की मौत हुई है? इस मामले में 12 राज्यों ने एक भी मौत दर्ज नहीं होने की जानकारी दी है, जबकि पंजाब ने चार मौतों को संदिग्ध करार किया है। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र सरकार ने सिरे से ही खारिज कर दिया है। ओडिशा सरकार का कहना है कि उनके यहां ऑक्सीजन की कमी नहीं हुई थी। मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने भी कहा कि अभी किसी भी राज्य ने ऑक्सीजन की कमी से मौत की जानकारी नहीं दी है। राज्यों को 13 अगस्त तक जानकारी मुहैया करानी है।दूसरी लहर में अप्रैल से लेकर मई के बीच ऑक्सीजन की कमी, अस्पतालों में दवाओं का अभाव और समय पर इलाज न मिलने की वजह से काफी लोगों की मौतें हुईं। श्मशान घाट पर जलती चिंताएं इसकी गवाह बनीं, पर सरकारी कागजों में इन मौतों पर कोई जानकारी नहीं है। दिल्ली के बत्रा अस्पताल व जयपुर गोल्डन अस्पताल में 50 से अधिक लोगों की मौत ऑक्सीजन की कमी से हुई, जिसे लेकर अस्पताल प्रबंधन भी लिखित में जानकारी दे चुका है लेकिन मामले सरकारी कागजों में दर्ज नहीं किए गए हैं।स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव कुमार अग्रवाल ने कहा कि कोविड से हुईं मौतों को लेकर राज्यों को लगातार निर्देश दिए जा रहे हैं। राज्यों के साथ यह भी चर्चा की गई थी कि डेथ ऑडिट को लेकर मौत के कारण पर भी समीक्षा होनी चाहिए। राज्यों ने ऑक्सीजन की कमी से अब तक किसी भी मौत की जानकारी नहीं दी है। एक राज्य ने संदिग्ध मौतें बताई है, लेकिन उनमें ऑक्सीजन की कमी अब तक साबित नहीं हुई है। वहीं, ज्यादातर राज्यों ने होम आइसोलेशन में हुई मौतों की जानकारी अब तक सार्वजनिक नहीं की हैं। न ही केंद्र सरकार ने अलग से इसे लेकर जानकारी पिछले डेढ़ वर्ष में कभी साझा की है।कोची। केरल में शराब की दुकानों को कोविड महामारी को लेकर बनाए नियमों से परे रखे जाने को केरल हाईकोर्ट ने चौंकाने वाला बताते हुए सरकार से जवाब मांगा है। जस्टिस देवन रामचंद्रन ने कहा, शराब दुकानों व बेवरेज कॉरपोरेशन के बाहर लाइन में लगकर शराब खरीदने वालों का भी कोविड-19 टीकाकरण किया होना चाहिए या उनके पास 72 घंटे के भीतर की नैगेटिव आरटीपीसीआर रिपोर्ट होनी चाहिए। उन्हें क्यों छूट दी जा रही है? सरकार ने यह आदेश चार अगस्त को जारी किया था, जिसमें यह छूट दी गई है। इस पर दायर याचिका की सुनवाई में हाईकोर्ट ने पूछा, जब सभी कुछ खरीदने के लिए यह नियम लागू है तो शराब खरीदने वालों को छूट क्यों? यह बेतुकी बात है, सरकार इसका जवाब दे। हाईकोर्ट ने यह भी सुझाव दिया कि अगर सरकार शराब खरीदने के लिए टीकाकरण अनिवार्य करती है तो इससे टीकाकरण को बढ़ावा मिलेगा। ज्यादा से ज्यादा लोग टीका लगवाएंगे, ताकि शराब खरीद सकें। मामले पर अगली सुनवाई 11 अगस्त को रखी गई है। एजेंसीस्वास्थ्य मंत्रालय ने ऑक्सीजन की कमी से हुईं मौतों की जानकारी के लिए राज्यों को पत्र लिखा था लेकिन दिल्ली सरकार ने दावा किया है कि उन्हें मंत्रालय से ऐसा कोई भी पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। हालांकि इससे पहले स्वास्थ्य विभाग के ही एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा था कि मंत्रालय को चंद दिनों में यह आंकड़ा नहीं दिया जा सकता है। इसके लिए घर घर जाकर सर्वे करने की जरूरत है जिसमें समय लगेगा लेकिन एलजी ने डेथ ऑडिट समिति को भंग कर दिया है।आरटीआई में केंद्र के अधीन अस्पतालों ने ऑक्सीजन की कमी से किसी भी मरीज की मौत होने का रिकॉर्ड नहीं होने की जानकारी दी है। दिल्ली एम्स, आरएमएल, सफदरजंग अस्पताल और लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज ने न सिर्फ मौतें, बल्कि यहां तक कहा है कि उनके यहां कभी ऑक्सीजन की कमी हुई भी नहीं। जबकि अप्रैल माह में दिल्ली एम्स ने ही ऑक्सीजन की कमी से नए मरीजों को भर्ती करना बंद कर दिया था।खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?खबर में और अधिक सुधार की आवश्यकता है?
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