UP SIR case:भारतीय चुनाव आयोग ने बिहार में एसआइआर यानी मतदाता विशेष गहन पुनरीक्षण लागू करने के बाद अब इसे अन्य राज्यों में SIR 2.
डिजिटल डेस्क, बगहा । UP SIR case:बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से ठीक पहले भारतीय चुनाव आयोग ने मतदाता विशेष गहन पुनरीक्षण कराया। इसको लेकर विपक्षी दलों ने कई तरह की आशंकाएं प्रकट कीं। टारगेट करके नाम काटने और वोट चोरी जैसे आरोप भी लगाए। बावजूद आयेाग ने इसे संपन्न कराया और उसके बाद विधानसभा चुनाव भी पूर्ण हो गया। इसको लेकर कोई बड़ी शिकायत नहीं आने के बाद अब इसे देश के 12 अन्य राज्यों में भी शुरू कर दिया गया है। इन राज्यों में बिहार का एक सीमावर्ती राज्य यूपी यानी उत्तर प्रदेश भी है। वोटर लिस्ट अरेंज करने का चक्कर यूपी में शुरू हुए एसआइआर का प्रभाव बिहार में भी देखने को मिल रहा है। इसके प्रभाव की वजह से कुछ सीमावर्ती जिलों में रहने वाले बिहारी परिवार को फिर से एसआइआर की परेशानी से दो-चार होना पड़ रहा है। तात्पर्य यह कि वे फिर से वोटर लिस्ट, वोटर आइकार्ड आदि अरेंज करने के चक्कर में पड़ गए है। यहां बात पश्चिम चंपारण की हो रही है। यह बिहार का सीमावर्ती जिला है। इसकी वजह से यूपी के कई जिलों में यहां की बेटियों की शादी हुई है। अब जब एसआइआर में उनके बारे में जानकारी मांगी जा रही है तो उन्हें अपने मायके यानी बिहार में अपने लिए जरूरी कागजात तलाशने पड़ रहे हैं। कुशीनगर के मामले आ रहे सामने ऐसे में वे अपने मां-पिता को फोन करके इन कागजात की व्यवस्था करने के लिए कह रही हैं। जिले के मधुबनी प्रखंड के देवीपुर निवासी अमावस चौधरी की बेटी सरिता देवी की शादी कुशीनगर जिले में हुई है। वह पडरौना विधानसभा के सिघुआ गांव में रहती हैं। विगत तीन विधानसभा चुनाव में वहां मतदान भी किया, लेकिन अब जब एसआइआर आरंभ हुआ तो अपने पिता के नाम वाला वोटरलिस्ट और वोटर कार्ड देने के लिए कहा गया। इसके लिए फिर से अमावस को यह कवायद करनी पड़ी। उसी तरह से देवीपुर गांव निवासी विनोद सहनी की बेटी शिल्पा देवी की शादी आठ वर्ष पहले कुशीनगर के होरलापुर गांव में हुआ था। उन्होंने इससे पहले कई लोकसभा और विधानसभा चुनाव में हिस्सा लिया। जब एसआइआर शुरू किया गया तो उनको अपने माता-पिता के आधार कार्ड और वोटर लिस्ट में नाम से जुड़े दस्तावेज की मांग की गई है। अब यहां मां-पिता उन कागजात को अरेंज करने के लिए भागदौड़ कर रहे हैं। सात जिलों के हजारों परिवार प्रभावित ऐसा नहीं है कि यह केवल यूपी से सटे पश्चिम चंपारण के कुछ परिवार की परेशानी है। गोपालगंज, सिवान, सारण, भोजपुर, बक्सर, रोहतास और कैमूर जिले में इसी तरह की परेशानी की सूचना आ रही है। ये वो जिले हैं जहां राज्य की सीमा के दोनों ओर रोटी-बेटी का संबंध है। यानी ये लोग अपनी बेटी की शादी करने के साथ ही साथ वहां से बहुएं भी लाते हैं। बिहार एसआइआर के समय भी इस तरह की परेशानी सामने आई थी। खासकर नेपाल से यहां बहू बनकर आई महिलाओं को अपनी पहचान साबित करने के लिए काफी मशक्त करना पड़ा था। क्या है यूपी एसआइआर? आधार वर्ष के रूप में 2003 निर्धारित किया गया है। उस मतदाता सूची में माता, पिता, दादा, दादी व नाना, नानी का नाम होने पर उसी अनुसार यूपी के मतदाता की मैपिंग करने की चुनाव आयोग की योजना है। यदि कोई ऐसे हैं जिनका नाम 2003 और 2025 दोनों मतदाता सूची में है तो उनको गणना प्रपत्र पर केवल हस्ताक्षर करके दे देना है। यह पूरी प्रक्रिया 4 दिसंबर तक पूर्ण कर लेनी है। इसके बाद इसका प्रकाशन 9 दिसंबर को किया जाएगा। जिनका नाम इस सूची में नहीं है उनको नोटिस दिया जाएगा। उसके बाद आयोग की ओर से मान्य 13 दस्तावेजों में से किसी एक को जमा करके अपना नाम मतदाता सूची में जुड़वा सकते हैं। जो किसी कारणवश वहां से बाहर हैं वे आनलाइन भी इस प्रक्रिया को पूरी कर सकते हैं।.
डिजिटल डेस्क, बगहा । UP SIR case:बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से ठीक पहले भारतीय चुनाव आयोग ने मतदाता विशेष गहन पुनरीक्षण कराया। इसको लेकर विपक्षी दलों ने कई तरह की आशंकाएं प्रकट कीं। टारगेट करके नाम काटने और वोट चोरी जैसे आरोप भी लगाए। बावजूद आयेाग ने इसे संपन्न कराया और उसके बाद विधानसभा चुनाव भी पूर्ण हो गया। इसको लेकर कोई बड़ी शिकायत नहीं आने के बाद अब इसे देश के 12 अन्य राज्यों में भी शुरू कर दिया गया है। इन राज्यों में बिहार का एक सीमावर्ती राज्य यूपी यानी उत्तर प्रदेश भी है। वोटर लिस्ट अरेंज करने का चक्कर यूपी में शुरू हुए एसआइआर का प्रभाव बिहार में भी देखने को मिल रहा है। इसके प्रभाव की वजह से कुछ सीमावर्ती जिलों में रहने वाले बिहारी परिवार को फिर से एसआइआर की परेशानी से दो-चार होना पड़ रहा है। तात्पर्य यह कि वे फिर से वोटर लिस्ट, वोटर आइकार्ड आदि अरेंज करने के चक्कर में पड़ गए है। यहां बात पश्चिम चंपारण की हो रही है। यह बिहार का सीमावर्ती जिला है। इसकी वजह से यूपी के कई जिलों में यहां की बेटियों की शादी हुई है। अब जब एसआइआर में उनके बारे में जानकारी मांगी जा रही है तो उन्हें अपने मायके यानी बिहार में अपने लिए जरूरी कागजात तलाशने पड़ रहे हैं। कुशीनगर के मामले आ रहे सामने ऐसे में वे अपने मां-पिता को फोन करके इन कागजात की व्यवस्था करने के लिए कह रही हैं। जिले के मधुबनी प्रखंड के देवीपुर निवासी अमावस चौधरी की बेटी सरिता देवी की शादी कुशीनगर जिले में हुई है। वह पडरौना विधानसभा के सिघुआ गांव में रहती हैं। विगत तीन विधानसभा चुनाव में वहां मतदान भी किया, लेकिन अब जब एसआइआर आरंभ हुआ तो अपने पिता के नाम वाला वोटरलिस्ट और वोटर कार्ड देने के लिए कहा गया। इसके लिए फिर से अमावस को यह कवायद करनी पड़ी। उसी तरह से देवीपुर गांव निवासी विनोद सहनी की बेटी शिल्पा देवी की शादी आठ वर्ष पहले कुशीनगर के होरलापुर गांव में हुआ था। उन्होंने इससे पहले कई लोकसभा और विधानसभा चुनाव में हिस्सा लिया। जब एसआइआर शुरू किया गया तो उनको अपने माता-पिता के आधार कार्ड और वोटर लिस्ट में नाम से जुड़े दस्तावेज की मांग की गई है। अब यहां मां-पिता उन कागजात को अरेंज करने के लिए भागदौड़ कर रहे हैं। सात जिलों के हजारों परिवार प्रभावित ऐसा नहीं है कि यह केवल यूपी से सटे पश्चिम चंपारण के कुछ परिवार की परेशानी है। गोपालगंज, सिवान, सारण, भोजपुर, बक्सर, रोहतास और कैमूर जिले में इसी तरह की परेशानी की सूचना आ रही है। ये वो जिले हैं जहां राज्य की सीमा के दोनों ओर रोटी-बेटी का संबंध है। यानी ये लोग अपनी बेटी की शादी करने के साथ ही साथ वहां से बहुएं भी लाते हैं। बिहार एसआइआर के समय भी इस तरह की परेशानी सामने आई थी। खासकर नेपाल से यहां बहू बनकर आई महिलाओं को अपनी पहचान साबित करने के लिए काफी मशक्त करना पड़ा था। क्या है यूपी एसआइआर? आधार वर्ष के रूप में 2003 निर्धारित किया गया है। उस मतदाता सूची में माता, पिता, दादा, दादी व नाना, नानी का नाम होने पर उसी अनुसार यूपी के मतदाता की मैपिंग करने की चुनाव आयोग की योजना है। यदि कोई ऐसे हैं जिनका नाम 2003 और 2025 दोनों मतदाता सूची में है तो उनको गणना प्रपत्र पर केवल हस्ताक्षर करके दे देना है। यह पूरी प्रक्रिया 4 दिसंबर तक पूर्ण कर लेनी है। इसके बाद इसका प्रकाशन 9 दिसंबर को किया जाएगा। जिनका नाम इस सूची में नहीं है उनको नोटिस दिया जाएगा। उसके बाद आयोग की ओर से मान्य 13 दस्तावेजों में से किसी एक को जमा करके अपना नाम मतदाता सूची में जुड़वा सकते हैं। जो किसी कारणवश वहां से बाहर हैं वे आनलाइन भी इस प्रक्रिया को पूरी कर सकते हैं।
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